स्कॉटलैंड 307 साल बाद फिर से एक आजाद देश होगा या यह यूनाइटेड किंग्डम का हिस्सा बना रहेगा, इसका फैसला लेने की निर्णायक घड़ी आ गई है। स्कॉटिश जनता गुरुवार को तय करेगी कि उन्हें इंग्लैंड के साथ रहना है या नहीं।
ऐतिहासिक जनमत संग्रह से पहले ब्रिटेन से आजादी चाहने वालों की संख्या में कमी आई है। जनमत संग्रह के ऐन पहले बुधवार को आए सर्वेक्षणों के नतीजों के अनुसार ज्यादातर लोग ब्रिटेन के साथ रहने में ही अपनी भलाई समझ रहे हैं। हालांकि, इन आंकड़ों से कोई अनुमान लगाना इसलिए मुश्किल है, क्योंकि हजारों की संख्या में लोग अभी भी अपने फैसले को लेकर पशोपेश में हैं।
तीन संस्थाओं आइसीएम, ओपीनियम और सर्वेशन के अलग-अलग सर्वेक्षणों में ब्रिटेन के साथ बने रहने के लिए समर्थन जताने वालों की संख्या 52 फीसद जबकि अलगाव चाहने की संख्या 48 फीसद है।
प्रचार अभियान में झोंकी ताकत:
दोनों पक्षों के नेताओं और समर्थकों ने बुधवार को प्रचार के अंतिम दिन अपनी पूरी ताकत झोंक दी। वे गली-गली घूमकर लोगों को अपने समर्थन में वोट करने के लिए मनाते रहे। ब्रिटिश नेताओं ने साथ बने रहने की स्थिति में स्कॉटलैंड को ज्यादा स्वायत्तता देने का वादा किया है। दूसरी तरफ, आजादी के समर्थकों का कहना है कि लंदन के आधिपत्य से अलग होने का यह सही समय है।
बेहतर भविष्य के लिए होंगे आजाद:
स्वतंत्रता अभियान का नेतृत्व करने वाले स्कॉटलैंड के प्रथम मंत्री एलेक्स सालमंड ने देश की जनता से कहा है कि शुक्रवार की सुबह हम एक बेहतर देश के पहले दिन में जागेंगे। जनता के नाम एक खुले पत्र में उन्होंने कहा कि स्कॉटलैंड का भविष्य हमारे अपने हाथ में है। प्रख्यात अर्थशास्त्री एडम स्मिथ और राष्ट्रवादी कवि राबर्ट बर्न्स की याद दिलाते हुए उन्होंने कहा कि इस मौके को हाथ से ना जाने दीजिए। अब हमें आजादी पर मुहर लगा देनी है।
जनादेश का सम्मान करेगा इंग्लैंड:
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने कहा कि उन्हें हमेशा से अंदाजा रहा है कि यह एक नजदीकी मुकाबला है। हालांकि फैसला चाहे जो हो, हम एक लोकतांत्रिक व्यवस्था के अंग हैं। मतपेटी से जो भी जनादेश आएगा, हमें उसका सम्मान करना होगा। कैमरन ने पिछले सप्ताह दो बार स्कॉटलैंड का दौरा कर लोगों से यूनाइटेड किंग्डम की एकता बरकरार रखने की अपील की।
गॉर्डन ब्राउन ने छेड़ी एकता की मुहिम:
2007 से 2010 तक यूनाइटेड किंग्डम के प्रधानमंत्री रहे स्कॉटिश मूल के नेता गॉर्डन ब्राउन ने एकता की मुहिम छेड़ दी है। 'एकसाथ बेहतर' के नारे के साथ ब्राउन बिना थके लगातार अभियान चला रहे हैं। ग्लासगो में आयोजित एक रैली में बुधवार को उन्होंने आजादी के समर्थकों पर जनता को झांसे में डालने का आरोप लगाया। उन्होंने जनता से कहा कि आत्मविश्वास बनाए रखिए और एक साथ इस आजादी की मांग का विरोध कीजिए।
इस तरह होगा भविष्य पर फैसला:
मतदाताओं को गुरुवार को अपने समाज के भाग्य का फैसला खुद करना है। उनसे सवाल पूछा जाएगा कि क्या स्कॉटलैंड को एक आजाद राष्ट्र होना चाहिए? इसका जवाब उन्हें 'हां' या 'ना' में देना होगा। अगर ज्यादा लोगों का जवाब 'हां' होता है तो स्कॉटलैंड का इंग्लैंड के साथ 307 वर्ष पुराना रिश्ता टूट जाएगा और यह विश्व पटल पर एक अलग देश के रूप में उभरेगा।
ऐतिहासिक जनमत संग्रह से पहले ब्रिटेन से आजादी चाहने वालों की संख्या में कमी आई है। जनमत संग्रह के ऐन पहले बुधवार को आए सर्वेक्षणों के नतीजों के अनुसार ज्यादातर लोग ब्रिटेन के साथ रहने में ही अपनी भलाई समझ रहे हैं। हालांकि, इन आंकड़ों से कोई अनुमान लगाना इसलिए मुश्किल है, क्योंकि हजारों की संख्या में लोग अभी भी अपने फैसले को लेकर पशोपेश में हैं।
तीन संस्थाओं आइसीएम, ओपीनियम और सर्वेशन के अलग-अलग सर्वेक्षणों में ब्रिटेन के साथ बने रहने के लिए समर्थन जताने वालों की संख्या 52 फीसद जबकि अलगाव चाहने की संख्या 48 फीसद है।
प्रचार अभियान में झोंकी ताकत:
दोनों पक्षों के नेताओं और समर्थकों ने बुधवार को प्रचार के अंतिम दिन अपनी पूरी ताकत झोंक दी। वे गली-गली घूमकर लोगों को अपने समर्थन में वोट करने के लिए मनाते रहे। ब्रिटिश नेताओं ने साथ बने रहने की स्थिति में स्कॉटलैंड को ज्यादा स्वायत्तता देने का वादा किया है। दूसरी तरफ, आजादी के समर्थकों का कहना है कि लंदन के आधिपत्य से अलग होने का यह सही समय है।
बेहतर भविष्य के लिए होंगे आजाद:
स्वतंत्रता अभियान का नेतृत्व करने वाले स्कॉटलैंड के प्रथम मंत्री एलेक्स सालमंड ने देश की जनता से कहा है कि शुक्रवार की सुबह हम एक बेहतर देश के पहले दिन में जागेंगे। जनता के नाम एक खुले पत्र में उन्होंने कहा कि स्कॉटलैंड का भविष्य हमारे अपने हाथ में है। प्रख्यात अर्थशास्त्री एडम स्मिथ और राष्ट्रवादी कवि राबर्ट बर्न्स की याद दिलाते हुए उन्होंने कहा कि इस मौके को हाथ से ना जाने दीजिए। अब हमें आजादी पर मुहर लगा देनी है।
जनादेश का सम्मान करेगा इंग्लैंड:
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने कहा कि उन्हें हमेशा से अंदाजा रहा है कि यह एक नजदीकी मुकाबला है। हालांकि फैसला चाहे जो हो, हम एक लोकतांत्रिक व्यवस्था के अंग हैं। मतपेटी से जो भी जनादेश आएगा, हमें उसका सम्मान करना होगा। कैमरन ने पिछले सप्ताह दो बार स्कॉटलैंड का दौरा कर लोगों से यूनाइटेड किंग्डम की एकता बरकरार रखने की अपील की।
गॉर्डन ब्राउन ने छेड़ी एकता की मुहिम:
2007 से 2010 तक यूनाइटेड किंग्डम के प्रधानमंत्री रहे स्कॉटिश मूल के नेता गॉर्डन ब्राउन ने एकता की मुहिम छेड़ दी है। 'एकसाथ बेहतर' के नारे के साथ ब्राउन बिना थके लगातार अभियान चला रहे हैं। ग्लासगो में आयोजित एक रैली में बुधवार को उन्होंने आजादी के समर्थकों पर जनता को झांसे में डालने का आरोप लगाया। उन्होंने जनता से कहा कि आत्मविश्वास बनाए रखिए और एक साथ इस आजादी की मांग का विरोध कीजिए।
इस तरह होगा भविष्य पर फैसला:
मतदाताओं को गुरुवार को अपने समाज के भाग्य का फैसला खुद करना है। उनसे सवाल पूछा जाएगा कि क्या स्कॉटलैंड को एक आजाद राष्ट्र होना चाहिए? इसका जवाब उन्हें 'हां' या 'ना' में देना होगा। अगर ज्यादा लोगों का जवाब 'हां' होता है तो स्कॉटलैंड का इंग्लैंड के साथ 307 वर्ष पुराना रिश्ता टूट जाएगा और यह विश्व पटल पर एक अलग देश के रूप में उभरेगा।
Source: News in Hindi and Newspaper
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