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Thursday, 21 November 2013

PSUs need more autonomy, freedom from bureaucratic control: Prime Minister

PSUs
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि सार्वजनिक कंपनियों (पीएसयू) को ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए इन्हें नौकरशाही के नियंत्रण से मुक्त करने की जरूरत है। साथ ही, इन्हें कामकाज में ज्यादा स्वायत्तता देने की भी आवश्यकता है। प्रधानमंत्री गुरुवार को यहां ब्रिक्स प्रतिस्पर्धा सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सरकार निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा नीति को बढ़ावा देगी।

इसके तहत निजी कंपनियों से मुकाबला करने के लिए पीएसयू को वैधानिक और राजकोषीय शक्तियों के जरिये बेजा फायदा नहीं पहुंचाएगा जाएगा। इन कंपनियों के कारोबार विस्तार के लिए जरूरी है कि इन्हें बाजार से प्रतिस्पर्धा करने दिया जाए न कि इन्हें प्रतिस्पर्धा से बचाया जाए। इसके लिए इन्हें फैसला लेने और नौकरशाही के नियंत्रण से आजादी चाहिए।

उन्होंने कहा कि सार्वजनिक कंपनियों में सरकार की हिस्सेदारी होने का मतलब यह नहीं है कि ये बाजार के मुकाबले से बच जाएंगी। लंबे समय तक इन कंपनियों को सीमित बाजार मिला है। अब इन्हें ग्लोबल स्तर पर मुकाबला करना है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकारी कंपनियां होने के नाते नौकरशाही स्टाइल में ये फैसले लेती हैं। इसका नतीजा यह है कि अपने बराबर वाली कंपनियों से बाजार में ये प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकती हैं। ब्रिक्स देशों के प्रतिस्पर्धा नियामक के अधिकारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कि सरकारी खरीद बाजार को प्रतिस्पर्धी बनाने से राजकोषीय संसाधन बचाने में भी मदद मिलेगी।

पांच देशों के इस समूह में भारत के अलावा ब्राजील, चीन, रूस और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन देशों की कुल आबादी तीन अरब है और इनका कुल जीडीपी 14 हजार अरब डॉलर का है। इनके पास 4,000 अरब डॉलर का  विदेशी मुद्रा भंडार है। ये देश ग्लोबल अर्थव्यवस्था के पावरहाउस के रूप में उभर रहे हैं।


Thursday, 14 November 2013

3 of Indian-origin Among Africa's 50 Richest

50 richest people in Africa
न्यूयॉर्क। अफ्रीकी महाद्वीप के 50 सबसे बड़े धनकुबेरों में भारतीय मूल के तीन उद्योगपति भी शामिल हैं। जानी-मानी पत्रिका फो‌र्ब्स ने अफ्रीका के अमीरों की यह सूची जारी की है। फो‌र्ब्स का कहना है कि शेयर बाजारों में तेजी और नए कारोबारी सौदों से महाद्वीप में अरबपतियों की संख्या तेजी से बढ़ी है।

फो‌र्ब्स की इस सूची में भारतीय मूल के विमल शाह, सुधीर रुपरेलिया और नौशाद मेराली शामिल हैं। इस सूची में सीमेंट उत्पाद समूह के प्रमुख एलिको डैंगोटो को 20.8 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ शीर्ष अफ्रीकी दौलतमंद करार दिया गया है। सूची में पहली बार शामिल हुए विमल शाह 1.6 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ 18वें स्थान पर रहे। भारतीय मूल के केन्याई नागरिक 53 वर्षीय शाह विडको ऑयल रिफाइनरी के सीईओ हैं। यह कंपनी पूर्वी और मध्य अफ्रीका की सबसे बड़ी खाद्य तेल उत्पादक है। साथ ही समूह साबुन और बेकिंग पाउडर का भी निर्माण करती है। शाह ने वर्ष 1985 में अपने पिता और बड़े भाई के साथ साबुन का उत्पादन शुरू किया था। वर्ष 2002 में उन्होंने यूनिलीवर के अफ्रीकी खाद्य तेल कारोबार का अधिग्रहण किया।

वहीं, सुधीर रुपरेलिया 1.1 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ 24वें सबसे रईस अफ्रीकी हैं। वह यूगांडा में संपत्ति एवं बैंकिंग कारोबार से जुड़े रुपरेलिया समूह के प्रमुख हैं। समूह का क्रेन बैंक युगांडा का तीसरा सबसे बड़ा बैंक है। सूची में 48वां स्थान हासिल करने वाले 62 वर्षीय नौशाद मेराली 43 करोड़ डॉलर की संपत्ति के मालिक हैं। नौशाद द्वारा स्थापित समीर समूह निर्माण, कृषि, सूचना प्रौद्योगिकी, दूरसंचार और वित्तीय सेवा कारोबार से जुड़ा है। फो‌र्ब्स ने तीसरे साल अफ्रीका के अमीरों की सूची जारी की है। अफ्रीका के 50 धनकुबेरों की कुल संपत्ति 103.8 अरब डॉलर है।