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Monday, 6 January 2014

Muzaffarnagar riot: no evidence in sting against azam khan

रामपुर, जागरण संवाददाता। यूपी के कैबिनेट मंत्री आजम खां ने कहा है कि उन्हे फांसी या उम्रकैद की सजा हो सकती है। मुजफ्फरनगर दंगे को लेकर उन्हें सुप्रीम कोर्ट से सात नोटिस मिले हैं। उन्हें फांसी मंजूर है, लेकिन गलत को सही नहीं कह सकते। 

जौहर यूनिवर्सिटी में लैपटॉप वितरण समारोह में आजम ने कहा कि जुल्म करवाने वाली ताकतों ने अदालतों का सहारा लिया है, हम मुजफ्फरनगर गए नहीं, किसी को छुड़ाने की सिफारिश नहीं की। फिर भी हम पर तमाम आरोप लगाए गए। हमें सुप्रीम कोर्ट से नोटिस मिले हैं। वह इससे घबराने वाले नहीं हैं। इसका मुकाबला करेंगे, उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। 

भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी पर इशारा करते हुए कहा कि इंसानियत के सौदागर और हत्यारे को देश नहीं दिया जा सकता। चाय बेचने की बात कह कर लोगों की हमदर्दी लेने की कोशिश की जा रही है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर प्रहार करते हुए कहा कि अब दिल्ली वाले भी झाड़ू ले आए हैं। बसपा प्रमुख मायावती पर निशाना साधते हुए बोले, हमने पत्थरों के हाथी नहीं बनवाए हैं। 

जांच समिति ने आजम को आरोपित करने वाले स्टिंग के रॉ फुटेज को देखा

लखनऊ, जागरण ब्यूरो। विधानसभा की जांच समिति ने सोमवार को मुजफ्फरनगर दंगे में नगर विकास मंत्री आजम खां को आरोपित करने वाले स्टिंग आपरेशन के रॉ फुटेज को देखा। हालांकि चार से पांच घंटे अवधि के इस रॉ फुटेज के अवलोकन की कार्यवाही सोमवार को पूरी नहीं हो सकी। अगली बैठक के लिए समिति ने वैसे तो कोई तारीख तय नहीं की है, लेकिन माह के आखिरी सप्ताह में यह बैठक होने की संभावना है। रॉ फुटेज के अवलोकन में जुटी समिति को प्रथम दृष्टया आजम खां पर लगे आरोपों की पुष्टि नहीं हुई।

बताया जाता है कि रॉ फुटेज का जितना भी अंश सोमवार को देखा गया, उसके आधार पर प्रथम दृष्टया यही प्रतीत हुआ कि इसमें दिखाए गए किसी भी शख्स ने साफ तौर पर आजम खां का नाम नहीं लिया। मिली जानकारी के अनुसार समिति की बैठक में यह तय हुआ है कि एक बार रॉ फुटेज बारीकी से देखने के बाद स्टिंग आपरेशन में शामिल सभी लोगों को तलब किया जाएगा। जिन पुलिस अधिकारियों से हुई बातचीत को दिखाया गया है, उन्हें व आपरेशन को अंजाम देने वाले सभी को कमेटी के समक्ष आकर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा। 

बैठक में शामिल एक सदस्य के अनुसार समिति इस बात को लेकर पूरी सावधानी बरत रही है कि इसकी कार्यवाही ऐसी हो कि नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत का पूरी तरह अनुपालन हो। वैसे समिति ने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि स्टिंग आपरेशन करने वाला न्यूज चैनल अब जांच में सहयोग कर रहा है। 

Thursday, 26 December 2013

Jayaprada to fight election on congress ticket from Rampur


मुरादाबाद [ज्ञानेंद्र त्रिपाठी]। फिल्मी दुनिया से आकर आजम खां के शहर रामपुर की सियासी फिल्म बदलने का माद्दा रखने वाली सांसद जयाप्रदा की तीसरी सियासी फिल्म का ट्रेलर अब दिखने लगा है। कल तक आजम द्वारा नवाबी दौर की तोड़ी गई इमारतों का जो मुद्दा आजम और नवेद के बीच था उसे अब जयाप्रदा ने हथिया लिया है। उनकी नजर नवेद की मां की कांग्रेसी सीट पर भी है, जिनको साइकिल पर सवार होकर दो बार जयाप्रदा मात दे चुकी हैं। अब साइकिल नहीं है। सो, कांग्रेस के हाथ का साथ पा कर नई पारी खेलना चाहती हैं और कांग्रेसी सुर में सुर मिलाने लगी हैं।

रामपुर की संसदीय सीट पर अर्से तक नवाबी खानदान के साथ कांग्रेसी कब्जा रहा है तो विधानसभा की सीट पर आजम का दबदबा। पर, वर्ष 2004 के संसदीय चुनाव में यहां की हवा ही बदल गई। अमर सिंह के साथ फिल्मी दुनिया से जयाप्रदा आईं और आजम के नेतृत्व में चुनाव लड़ नवाबी सीट पर काबिज हो गई।
राजनीति की इस दोतरफा की जमीन पर पहली दफा तीसरे चेहरे का उदय हुआ। यहां पर तीसरी पार्टी भाजपा थी, लेकिन उसमें उतनी धार नहीं। पर, 2009 के संसदीय चुनाव में आजम खां ने जयाप्रदा का विरोध किया, लेकिन सपा ने आजम को ही बाहर कर दिया और जयाप्रदा ने आजम खां के विरोध के बावजूद नूरबानो को लगातार दूसरी बार पराजित कर सीट पर कब्जा जमा लिया। 

इस तरह जयाप्रदा ने एक बार आजम के साथ तो दूसरी दफा उनके विरोध के बावजूद अपना राजनीतिक रसूख बनाए रखा, लेकिन दोनों बार सपा साथ थी। अब उनके विरोधी आजम हैं, लेकिन उनके साथ कोई पार्टी नहीं है, क्योंकि सपा ने उन्हें निकाल दिया है। ऐसे में जयाप्रदा ने अपनी नई सियासी फिल्म के लिए बैनर खोजना शुरू कर दिया, जिसका संकेत पिछले दिनों तब मिला जब वह रामपुर आईं और राहुल गांधी का गुणगान कर गईं।
नतीजा यह रहा कि राहुल रैली में आए तो कांग्रेस नेत्री के रूप में जयाप्रदा का बैनर भी लगा। इस पर किसी ने कोई विरोध दर्ज नहीं कराया। हां, यह बात फैलने लगी कि इस बार नूरबानो की जगह जयाप्रदा कांग्रेस से चुनाव लड़ेंगी। इसे बल तब मिला जब लोकसभा चुनाव के लिए मुरादाबाद से कांग्रेस प्रत्याशियों के नाम के पैनल में नूरबानो का नाम भेजा गया, जो रामपुर से लड़ती रही हैं। 

बुधवार को रामपुर पहुंची जयाप्रदा ने एक बार फिर खुद इस कयास को पूरा बल दे दिया। उन्होंने घोषणा की कि आजम द्वारा तुड़वाए गए नवाबी दौर के गेट को वह सांसद निधि से बनवाएंगी। अब तक गेट की विधिक व उच्चस्तरीय लड़ाई नूरबानो के बेटे नवेद लड़ते रहे हैं, जो आजम के साथ साथ जयाप्रदा के भी विरोधी रहे हैं। पर, अब इस पूरे मामले को जयाप्रदा भी राष्ट्रपति तक ले जाने व दोषियों को दण्डित कराने की कसम खा रही हैं, जो वैचारिक रूप में सही आजम के विरोधी और आपस में भी सियासी विरोधी नवाब खानदान और जयाप्रदा को एक मंच पर ला दिया है। फिर, जयाप्रदा का यह कहना कि वह रामपुर से ही चुनाव लड़ेंगी और किसी पार्टी से लड़ेंगी, इस बात का साफ संकेत हैं कि सबकुछ ठीक रहा तो जयाप्रदा की तीसरी सियासी फिल्म कांग्रेस के पर्दे पर ही प्रदर्शित होगी, क्योंकि सपा में उनकी राह में आजम रोड़ा हैं तो भाजपा से कोई नजदीकी अभी नहीं दिख रही है। 

साथ ही आजम से पार पाने को उनसे अधिक कहीं नवाब खानदान बेचैन है। दोनों ही इस समय एक सुर से आजम पर निशाना साधे हुए हैं, जो दोनों के बीच सियासी समझौते के संकेत दे रहा है, जिसपर जयाप्रदा हां तो नहीं कहती हैं, लेकिन ना भी नहीं बोलती हैं, जिसे आजम खां के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है।

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Wednesday, 13 November 2013

Azam says, 'Yes, I was behind riots'

Muzaffarnagar riots
लखनऊ, जागरण ब्यूरो। अपनी हरकतों से लगातार सरकार और पार्टी को मुश्किलों में डालने वाले कद्दावर मंत्री आजम खां ने बुधवार को खुद को 'बैड मैन' दर्शाते हुए कहा कि वह दुनिया के सबसे बुरे आदमी हैं। उन्होंने अपने विरोधियों पर तीर चलाने के साथ ही मीडिया व नौकरशाही पर भी जमकर हमले किए।
स्थानीय निकाय अध्यक्षों के सम्मेलन में बोलते हुए आजम ने अपने ऊपर लगने वाले आरोपों के लिए मीडिया को जिम्मेदार ठहराया और खूब तंज कसे। फिर बारी आई अफसरों की, जिन्हें सरकार योजनाओं को अमली जामा न पहनाने के लिए उन्होंने जिम्मेदार ठहराया। दिलचस्प यह रहा कि लगे हाथ आजम ने मंच पर बैठे राज्य नगरीय विकास अभिकरण (सूडा) के निदेशक जेपी सिंह पर बैट्री चालित रिक्शा खरीद योजना पर कुंडली मार कर बैठने का आरोप भी जड़ दिया। कहा, 'यह तो माशाअल्लाह हैं, गरीबों के रिक्शा खरीद के लिए 350 करोड़ रुपये दबाए बैठे हैं लेकिन इन पर तो मैं कार्रवाई भी नहीं कर सकता।' अफसरों द्वारा बजट जारी करने के लिए रिश्वत मांगे जाने और नहीं देने पर योजनाएं अटकाने के आरोप पर आजम ने निकायों के अध्यक्षों से एकजुट होकर रिश्वत का विरोध करने का भी आह्वान किया। निकाय अध्यक्षों ने जिलों में डीएम, एडीएम, एसडीएम से लेकर तहसीलदार के खिलाफ गंभीर आरोप भी लगाए। आजम ने अध्यक्षों को भी अदब में लेते हुए कहा कि 'आप हमारी लाज रखो, हम आपकी लाज रखेंगे'।

आजम के बोल
'मीडिया की नजर में दुनिया की सारी बुराई हममें है। हम कामचोर हैं, देशद्रोही हैं, हम दंगाई हैं। दंगा कराते हैं, हम मंत्री होते हुए प्रदेश और देश की जनता पर बोझ हैं, ईमानदारी से कुतुबमीनार और ताजमहल भी बनवा दे तब भी लोग उसमें कमियां निकाल कर बेईमान ठहरा देंगे।.. सोशल मीडिया की आड़ में अफसर भी मुझे बेईमान ठहराने में जुटे हैं।' आजम ने अपनी सफाई में अभिनेता दिलीप कुमार, लता मंगेशकर से लेकर सचिन तेंदुलकर जैसे कई हस्तियों को जोड़कर तमाम बातें कहीं।

अध्यक्षों ने कहा
निकायों का विकास कैसे करें। एडीएम, एसडीएम से लेकर तहसीलदार तक योजना स्वीकृत करने के लिए रिश्वत मांगते हैं। नहीं देने पर कोई न कोई पेंच फंसाकर योजना को अटका देते हैं। -जगदीश सिंह इंदौलिया, नगर पंचायत, किरावली, आगरा

निकायों में अफसरों की तैनाती में सरकार भेदभाव कर रही है। सपा समर्थक निकायों में ईओ की तैनाती की जाती है जबकि अन्य दलों से जुड़े निकायों में एसडीएम, एडीएम और तहसीलदारों को तैनात कर अवैध वसूली को बढ़ावा दिया जा रहा है। सभी निकायों में ईओ की तैनाती की जाए। -छट्ठे लाल निगम, नगर पंचायत रुद्रपुर, देवरिया

Source- News in Hindi