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Monday, 11 November 2013

Clouds over the Himalayas Threat

Himalaya
पिथौरागढ़, भक्त दर्शन पांडेय। भूगर्भीय हलचल से पूरे हिमालयी क्षेत्र में 25 हजार से अधिक गहरी दरारें पड़ चुकी हैं। हिमालय की संवेदनशीलता को देखते हुए इस रेंज में बड़े निर्माण कार्य नहीं होने चाहिए। यदि हिमालयी रेंज में छेड़छाड़ नहीं रुकी तो आने वाले समय में गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। यह कहना है प्रख्यात भू- वैज्ञानिक पद्मश्री प्रोफसर केएस वल्दिया का।
भू-विज्ञान पर आयोजित संगोष्ठी में प्रो.वल्दिया ने बताया कि वर्तमान में पर्यावरण की किसी को भी परवाह नहीं है। हिमालयी रेंज में भी धड़ल्ले से निर्माण कार्य हो रहे हैं। विद्युत परियोजनाओं और सड़कों के निर्माण में विस्फोटकों का उपयोग हो रहा है। हिमालय पांच सेमी प्रतिवर्ष खिसक रहा है। धरती के अंदर होने वाली हर हलचल को महसूस नहीं किया जा सकता है, लेकिन यह हलचल भूकंप मापी यंत्रों में रिकार्ड होती रहती हैं। धरती के भीतर होने वाली उथल-पुथल के कारण विशाल चट्टानें टूटती हैं। इससे दरारें बन जाती हैं। एक बड़ी दरार के साथ कई अन्य दरारें भी होती हैं। इस संवेदनशीलता को देखते हुए यदि नितांत आवश्यक हो तभी हिमालयी रेंज में निर्माण कार्य किया जाना चाहिए।
प्रोफेसर वल्दिया ने बताया कि हिमालय की निचली घाटियों में वनों का सफाया कर दिया गया है। इसका असर मौसम पर भी पड़ा है। उन्होंने ग्लोबल वार्मिग के लिए वनों को काटे जाने को प्रमुख कारण बताया। उन्होंने कहा कि प्रकृति में पिछले एक दशक के भीतर बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अब समान रूप से वर्षा नहीं हो रही है। जहां कुछ समय पहले तक बरसात में समान रूप से होती थी, अब एक ही स्थान पर अतिवृष्टि हो रही है। जबकि बड़ा भू-भाग सूखा रह जा रहा है। उनका कहना था कि हिमालयी क्षेत्र भीतर से ही नहीं, बल्कि कुछ स्थानों पर बाहर से भी कमजोर है। इस वर्ष उत्तराखंड के हिमालयी रीजन में आई भीषण आपदा प्राकृतिक के साथ ही मानव जनित भी है। हिमालय की संवेदनशीलता को देखते हुए इसके साथ छेड़छाड़ बंद कर देनी चाहिए। अन्यथा आने वाले समय में केदारनाथ से भी बड़ी त्रासदी का सामना करना पड़ेगा

Source- News in Hindi

Tuesday, 20 August 2013

India Sends Super Hercules Aircraft to Ladakh


India-China Border

नई दिल्ली [जागरण संवाददाता]। चीन सीमा पर अपनी ताकत का सुबूत देते हुए भारत ने अपने विशाल मालवाहक विमान सी-130जे सुपर हरक्युलिस को वास्तविक नियंत्रण रेखा स्थित अग्रिम हवाई पंट्टी पर उतारा है। यह पहला मौका है जब दौलत बेग ओल्डी के एडवांस्ड लैंडिंग ग्राउंड पर वायुसेना ने सी-130जे जैसे विशाल विमान को उतारा है।

दौलत बेग ओल्डी को दुनिया की सबसे ऊंची हवाई पंट्टी माना जाता है। इस कामयाबी के बाद किसी भी आपात स्थिति में बेहद कम समय में भारत सैन्य साजो-सामान और रसद अग्रिम मोर्चे पर पहुंचा सकता है।

महत्वपूर्ण है कि लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा के करीब स्थिति दौलत बेग ओल्डी का निर्माण भारत ने चीन के साथ 1962 में हुए युद्ध के दौरान किया था। सरहदी इलाके में भारत के अग्रिम ठिकानों में एक इस हवाई पंट्टी से कुछ दूर दिपसांग का इलाका है जहां बीते अप्रैल में चीनी सैनिकों ने तंबू गाड़ लिए थे।

वायुसेना मुख्यालय के मुताबिक मंगलवार तड़के गाजियाबाद के निकट हिंडन वायुसेना बेस से रवाना हुआ सी-130जे विमान 16614 फीट की ऊंचाई पर स्थित हवाई पंट्टी पर 6:54 मिनट पर उतरा। अक्साई चिन इलाके की इस हवाई पंट्टी पर करीब डेढ़ घंटे की उड़ान के बाद सी-130जे स्क्वाड्रन के कमांडिंग अधिकारी ग्रुप कैप्टन तेजबीर सिंह एवं वायुसेना मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ पहुंचे विमान ने सफलतापूर्वक जमीन को छुआ।

सी-130 जे की यह लैंडिंग दुनिया में अपनी किस्म का एक रिकॉर्ड भी है क्योंकि इसे पहली बार पांच हजार मीटर से अधिक ऊंचाई पर उतारा गया। इस तरह का प्रयोग सी-130जे विमान को बनाने वाले और सबसे पहले इस्तेमाल करने वाले अमेरिका ने भी कभी नहीं किया। 

बताते चलें कि भारतीय सेना 1962 से 65 तक इस लैंडिंग ग्राउंड का इस्तेमाल करती रहीं। हालांकि, बाद में यह हवाई पंट्टी काफी समय तक बेकार रही। सीमा पार चीन की ओर से तेज रफ्तार सैन्य ढांचागत निर्माण के मद्देनजर कुछ साल पहले भारत ने एक बार फिर डीबीओ लैंडिंग ग्राउंड को सक्रिय किया। साथ ही बड़े विमानों के इस्तेमाल के लिए इसे तैयार करने के बाद मई 2008 में वायुसेना ने मालवाहक एएन-32 विमान को उतारा। 

वायुसेना के अनुसार हेलीकॉप्टरों और एएन-32 विमान की सीमित क्षमताओं के चलते वायुसेना मुख्यालय में फैसला लिया गया कि डीबीओ को सी-130जे विशाल विमानों के लिए भी तैयार किया जाए जो 20 टन तक भार ढो सकते हैं।

वायुसेना प्रवक्ता विंग कमांडर जिरार्ड गल्वे के मुताबिक सी-130जे की कामयाब लैंडिंग के बाद उस इलाके में मोर्चे पर तैनात सैन्य बलों की जरूरतों को कम समय और अधिक क्षमता के साथ पूरा किया जा सकेगा। ध्यान रहे कि बेहद दुर्गम और ऊंचाई पर स्थिति सीमांत इलाकों में सैन्य बल रसद के लिए हवाई मदद पर ही निर्भर होते हैं।

Original Found Here.. http://www.jagran.com/news/national-india-sends-super-hercules-aircraft-to-ladakh-10658927.html

Tag: Super Hercules Aircraft to Ladakh, Hindi News, News in Hindi, News