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Thursday, 14 November 2013

INS Vikramaditya soon will Join the Indian Navy Fleet

INS Vikramaditya
नई दिल्ली। रूसी विमानवाहक पोत गोर्शकोव आखिरकार शनिवार को भारत को हासिल हो जाएगा। भारत ने इस विमानवाहक पोत का नाम आईएनएस विक्रमादित्य रखा है। इस युद्धक पोत को लाने के लिए रक्षा मंत्री एके एंटनी शुक्रवार को रूस पहुंचेगे। रूस के सेवेरोदविस्क शहर में नौसेना को मिल रहा 

आईएनएस विक्रमादित्य करीब डेढ़ माह बाद भारत पहुंचेगा।

2004 में राजग सरकार के कार्यकाल में दौरान हुए खरीद सौदे में गत नौ सालों के भीतर न केवल कई फेरबदल हुए, बल्कि इसकी कीमत भी खासी वृद्धि हुई । नौसेना प्रवक्ता के अनुसार भारत की सैन्य ताकत में खासा इजाफा करने वाले इस विशाल पोत में लगभग 80 फीसद उपकरण नए हैं। साथ ही भारतीय सामरिक जरूरतों के मुताबिक इसमें आधुनिक उपकरण लगाए गए हैं। लिहाजा यह लगभग नया ही युद्धपोत है।
भारत में सरकार के सूत्रों ने कहा कि सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने (सीसीएस) अंत में एडमिरल की खरीद के पक्ष में फैसला किया था। विक्रमादित्य के संचालन के कलाकार अवधारणा में लगे आठ बॉयलर को निकाल कर इसके जगह पर भट्ठी ईंधन तेल और आधुनिक तेल जल विभाजक के साथ ही एक मलजल उपचार संयंत्र अंतराष्ट्रीय मानकों को पूरा करने के लिए शामिल किया गया है। विक्रमादित्य में 1.5 मेगावाट डीजल जनरेटर, एक वैश्रि्वक समुद्री संचार प्रणाली, स्पेरी नेविगेशन रडार, एक नए टेलीफोन एक्सचेंज, नया डेटा लिंक और एक आईएफएफ एमके इलेवन प्रणाली, होटल की सेवाएं, नई जल उत्पादन संयंत्रों के साथ ही न्यूयॉर्क इंटरनेशनल प्रशीतन और एयर कंडीशनिंग के साथ सुधार किया जा रहा है। एक नए गैली सुधार घरेलू सेवाएं और 10 महिला अधिकारियों के लिए आवास के साथ स्थापित किया जा रहा है।
इस विमानवाहक पोत का जीवन काल 20 साल है, विशेषज्ञों का कहना है कि यह वास्तव में 30 साल की एक न्यूनतम हो सकता है। आधुनिकीकरण के पूरा होने पर, जहाज और उसके उपकरणों के 70 प्रतिशत से अधिक नया हो जाएगा। विक्रमादित्य का सफलता पूर्वक समुद्री परीक्षण पूरा कर लिया गया है और 32 समुद्री मील की अधिकतम गति तक पहुँचने में सक्षम है। सफेद सागर में सितंबर 2013 में विमान का परीक्षण कर लिय गया।
नाम : आईएनएस विक्रमादित्य
बिल्डर : काला सागर शिपयार्ड , यूक्रेन
लागत: 2350000000
स्थिति: समुद्री परीक्षण पूरा
जनरल विशेषता
कक्षा एवं प्रकार : संशोधित कीव श्रेणी
प्रकार: विमान:: वाहक पोत
विस्थापन: 45,400 टन का लोड
लंबाई: 283.5 मीटर [930 फीट]
किरण : 59.8 मीटर [196 फीट]
औषध: 10.2 मीटर (33 फुट)
प्रोपल्सन : 4 शाफ्ट गियर भाप टर्बाइन, 140,000 अश्वशक्ति
गति : 29.3 समुद्री मील [(54.3 किमी / घंटा]
सीमा: 4,000 नॉटिकल मील (7400 किमी) [5]
धीरज: 18 समुद्री मील में 13,500 समुद्री मील (25,000 किमी) (33 किमी / घंटा) [6]

Source- Hindi News

Wait over: INS Vikramaditya set to join Indian Navy on Nov.

aircraft carrier INS Vikramaditya
नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। लंबे इंतजार के बाद रूसी विमानवाहक पोत गोर्शकोव आखिरकार शनिवार को भारत को हासिल हो जाएगा। इस युद्धक पोत को लाने के लिए रक्षा मंत्री एके एंटनी शुक्रवार को रूस पहुंच रहे हैं। रूस के सेवेरोदविस्क शहर में नौसेना को मिल रहा पोत करीब डेढ़ माह बाद भारत पहुंचेगा। हालांकि सौदे में काफी उतार-चढ़ावों और देरी के साथ मिल रहे इस पोत में हवाई हमले के खिलाफ मिसाइल रक्षा प्रणाली जैसी हिफाजत का अहम इंतजाम फिलहाल नदारद है।

नौसेना में इस युद्धपोत के विधिवत शुमार पर मौजूदगी दर्ज कराने के साथ ही रक्षा मंत्री रूस के साथ सैन्य सहयोग पर बने अंतर-सरकारी आयोग की भी सह-अध्यक्षता करेंगे। 2004 में राजग सरकार के कार्यकाल में दौरान हुए खरीद सौदे में गत नौ सालों के भीतर न केवल कई फेरबदल हुए बल्कि इसकी कीमत भी खासी बढ़ गई। हालांकि नौसेना प्रवक्ता के अनुसार भारत की सैन्य ताकत में खासा इजाफा करने वाले इस विशाल पोत में लगभग 80 फीसद उपकरण नए हैं। साथ ही भारतीय सामरिक जरूरतों के मुताबिक इसमें आधुनिक उपकरण लगाए गए हैं। लिहाजा यह लगभग नया ही युद्धपोत है।

वैसे सुधार और आधुनिकीकरण के दावों के बीच यह भी सच है कि आधे दशक की देरी के बाद भी जब यह पोत भारत पहुंचेगा तो इसमें अहम प्रक्षेपास्त्र आत्मरक्षा प्रणाली नहीं होगी। हवाई हमले के खिलाफ बचाव के लिए नौसेना ने बराक प्रक्षेपास्त्र प्रणाली लगाने का फैसला किया था। लेकिन, 2006 से सीबीआइ जांच से घिरे इस खरीद सौदे को लेकर बीते सप्ताह हुई रक्षा खरीद परिषद की बैठक में कोई फैसला नहीं हो पाया। रक्षा मंत्रालय ने मामले पर फैसले के लिए एक निष्पक्ष समिति बनाई है।

आत्मरक्षा की चिंता
रूस से भारत के बीच हजारों मील के सफर में सुरक्षा चिंताओं के मद्देनजर नौसेना ने अपने युद्धपोत व पनडुब्बी का एक बेड़ा विक्रमादित्य को लाने के लिए भेजा है। साथ ही पोत को लाने के लिए करीब हजार लोगों का एक दल भी रूस में है। हालांकि नौसेना अधिकारी मानते हैं कि अभी विमानवाहक पोत को तैनाती के लिए तैयार करने में देरी है। पोत पर तैनात किए जाने वाले मिग-29के लड़ाकू विमानों के उड़ान व लैंडिंग पर भारतीय नौसेना पायलटों का प्रशिक्षण अभी होना है। नौसैनिक पायलटों के एक दल को रूस में आरंभिक प्रशिक्षण तो दिया गया है, लेकिन शेष काम के लिए रूसी पायलटों की टीम भारत आएगी।

Source- News in Hindi