नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। लंबे इंतजार के बाद रूसी विमानवाहक पोत गोर्शकोव आखिरकार शनिवार को भारत को हासिल हो जाएगा। इस युद्धक पोत को लाने के लिए रक्षा मंत्री एके एंटनी शुक्रवार को रूस पहुंच रहे हैं। रूस के सेवेरोदविस्क शहर में नौसेना को मिल रहा पोत करीब डेढ़ माह बाद भारत पहुंचेगा। हालांकि सौदे में काफी उतार-चढ़ावों और देरी के साथ मिल रहे इस पोत में हवाई हमले के खिलाफ मिसाइल रक्षा प्रणाली जैसी हिफाजत का अहम इंतजाम फिलहाल नदारद है।
नौसेना में इस युद्धपोत के विधिवत शुमार पर मौजूदगी दर्ज कराने के साथ ही रक्षा मंत्री रूस के साथ सैन्य सहयोग पर बने अंतर-सरकारी आयोग की भी सह-अध्यक्षता करेंगे। 2004 में राजग सरकार के कार्यकाल में दौरान हुए खरीद सौदे में गत नौ सालों के भीतर न केवल कई फेरबदल हुए बल्कि इसकी कीमत भी खासी बढ़ गई। हालांकि नौसेना प्रवक्ता के अनुसार भारत की सैन्य ताकत में खासा इजाफा करने वाले इस विशाल पोत में लगभग 80 फीसद उपकरण नए हैं। साथ ही भारतीय सामरिक जरूरतों के मुताबिक इसमें आधुनिक उपकरण लगाए गए हैं। लिहाजा यह लगभग नया ही युद्धपोत है।
वैसे सुधार और आधुनिकीकरण के दावों के बीच यह भी सच है कि आधे दशक की देरी के बाद भी जब यह पोत भारत पहुंचेगा तो इसमें अहम प्रक्षेपास्त्र आत्मरक्षा प्रणाली नहीं होगी। हवाई हमले के खिलाफ बचाव के लिए नौसेना ने बराक प्रक्षेपास्त्र प्रणाली लगाने का फैसला किया था। लेकिन, 2006 से सीबीआइ जांच से घिरे इस खरीद सौदे को लेकर बीते सप्ताह हुई रक्षा खरीद परिषद की बैठक में कोई फैसला नहीं हो पाया। रक्षा मंत्रालय ने मामले पर फैसले के लिए एक निष्पक्ष समिति बनाई है।
आत्मरक्षा की चिंता
रूस से भारत के बीच हजारों मील के सफर में सुरक्षा चिंताओं के मद्देनजर नौसेना ने अपने युद्धपोत व पनडुब्बी का एक बेड़ा विक्रमादित्य को लाने के लिए भेजा है। साथ ही पोत को लाने के लिए करीब हजार लोगों का एक दल भी रूस में है। हालांकि नौसेना अधिकारी मानते हैं कि अभी विमानवाहक पोत को तैनाती के लिए तैयार करने में देरी है। पोत पर तैनात किए जाने वाले मिग-29के लड़ाकू विमानों के उड़ान व लैंडिंग पर भारतीय नौसेना पायलटों का प्रशिक्षण अभी होना है। नौसैनिक पायलटों के एक दल को रूस में आरंभिक प्रशिक्षण तो दिया गया है, लेकिन शेष काम के लिए रूसी पायलटों की टीम भारत आएगी।
Source- News in Hindi
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