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Tuesday, 14 January 2014

Ian Chappell said India have by far the best young batsmen

 
 
नई दिल्ली। पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान इयान चैपल भारत के युवा बल्लेबाजों से काफी प्रभावित हैं। उन्होंने उनकी जोरदार तारीफ करते हुए कहा कि भारत के पास इस समय बेहतरीन युवा प्रतिभाशाली क्रिकेटरों की अच्छी पौध है। चैपल ने सोमवार को कहा, 'भारत इस समय बेहतरीन युवा बल्लेबाज तैयार कर रहा है। शिखर धवन, विराट कोहली, चेतेश्वर पुजारा, रोहित शर्मा और उन्मुक्तचंद उसका भविष्य हैं।'

महान ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर ने कहा कि वह भारतीय सलामी बल्लेबाज धवन के आक्रामक रवैये से प्रभावित हैं और वह किसी टीम के लिए उपयोगी खिलाड़ी साबित हो सकते हैं। उन्होंने कहा, 'मुझे वास्तव में धवन को बल्लेबाजी करते हुए देखने में मजा आता है। वह प्रतिभाशाली और आक्रामक सलामी बल्लेबाज हैं और यदि वह सफल रहते हैं तो किसी भी टीम के लिए उपयोगी साबित होंगे।'

आइसीसी क्रिकेट विश्व कप अब केवल 13 महीने बाद होना है और चैपल ने कहा कि प्रत्येक टीम की निगाह ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में 2015 में होने वाले टूर्नामेंट पर टिकी हैं। उन्होंने कहा कि हर टीम अगले विश्व कप को ध्यान में रखकर अपने वनडे मैच खेल रही हैं। ऑस्ट्रेलिया अपनी सरजमीं पर खेलेगा इसलिए वह मजबूत दावेदार है।

अपनी बेबाक टिप्पणियों के लिए मशहूर चैपल ने कहा कि आइसीसी को विवादास्पद यूडीआरएस (अंपायर निर्णय समीक्षा प्रणाली) की जगह कार्यवाहक समीक्षा प्रणाली यानि ओआरएस (आफिशिएटिंग रीप्ले सिस्टम) को आजमाना चाहिए। उन्होंने कहा, 'कई खिलाड़ियों की तरह मुझे भी दोनों में से किसी भी प्रणाली के कई पहलुओं पर भरोसा नहीं है। मैं प्रणाली में कई बदलाव करना चाहूंगा, लेकिन मेरा पहला बदलाव यह होगा कि इसे खिलाड़ियों के हाथों से वापस ले लिया जाए। मैं इस प्रणाली का बड़ा प्रशंसक नहीं हूं।' चैपल ने अपने 16 साल लंबे सुनंहरे करियर में 75 टेस्ट और 15 वनडे अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं।

Source: Top Hindi News 

Wednesday, 4 September 2013

From streets of Delhi to pitches of Australia, Birthday boy Ishant comes a long way


Ishant Sharma, Indian Cricketers, Indian Cricket Team, Fast Bowler

नई दिल्ली। हुनर किसी का मोहताज नहीं होता, वो तो बस बहता पानी है जो अपना रास्ता खुद बना लेता है..दिल्ली में आज ही के दिन 1988 में जन्मेंइशांत शर्मा इसका एक बेहतरीन उद्हारण हैं। शायद ही किसी ने सोचा था कि शहर की गलियों से क्रिकेट खेलते-खेलते वह एक दिन ऑस्ट्रेलिया के मशहूर एडिलेड मैदान पर भारतीय क्रिकेट इतिहास की दूसरी सबसे तेज गेंद (152.6 किलोमीटर प्रति घंटा) फेंकने का गौरव हासिल करेगा।
दिल्ली के एक मध्यमवर्गी परिवार से ताल्लुक रखने वाले इशांत के पिता बचपन में ही समझ गए थे कि इशांत बड़ा होकर एक क्रिकेटर बनेगा और भारतीय टीम के लिए भी खेलेगा। इसे एक पिता की दूरदर्शी सोच का इत्तेफाक से हकीकत में बदलना कहें, या अपने बेटे पर उनका अटूट भरोसा.दोनों ही सही साबित हुए जब पहली बार 2007 में इशांत भारतीय जर्सी पहनकर मैदान पर खेलने उतरे। इशांत के पिता ने कई बार इस बात का जिक्र किया है कि इशांत क्रिकेट का दीवाना था और वह इस बात को अच्छी तरह समझ चुके थे, और उसकी प्रतिभा को भी..उसके बाद से संघर्षपूर्ण जीवन के बावजूद अपने परिवार के पालन के साथ-साथ इशांत के पिता ने अपने बेटे की हर उस मांग को पूरा किया जो उसे उसके सपने के करीब ले जा सके और वह सपना आखिर सच भी हुआ।
अंडर-19 विश्व कप में धमाल मचाने के बाद सुर्खियों में आए इशांत को यूं तो 18 साल की उम्र में ही 2006-07 के भारत के दक्षिणी अफ्रीकी दौरे के लिए बुलावा आ गया था, लेकिन कुछ कागजी पचड़ों व आयोजन खामियों की वजह से वह उस दौरे पर नहीं जा सके, हालांकि उन्हें ज्यादा दिन इंतजार नहीं करना पड़ा और मई 2007 में उन्हें बांग्लादेश के खिलाफ अपना टेस्ट डेब्यू करने का मौका मिला, जबकि ठीक उसके अगले महीने ही उन्हें दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अपना वनडे डेब्यू करने का मौका भी मिल गया। उसके बाद इशांत ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा, 6 फुट 5 इंच के अभी तक के इस सबसे लंबे गेंदबाज को शुरुआत से ही प्यार से लंबू के नाम से पुकारा जाता रहा। बेशक उनके जीवन में भी बाकी दिग्गज क्रिकेटरों की तरफ उतार-चढ़ाव आए लेकिन हर बार उनकी वापसी करने की क्षमता ने उन्हें भारतीय टीम में बरकरार रखा। वह 2011 में 100 टेस्ट विकेट लेने वाले पांचवें सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बने। आज 51 टेस्ट मैचों में 144 विकेट और 57 वनडे मैचों में 79 विकेट, उनके हुनर व कामयाबी को बयां करता है। खासतौर पर ऑस्ट्रेलियाई पिचों पर उनके कहर से कंगारू टीम हमेशा त्रस्त रही, इनमें कप्तान रिकी पोंटिंग का नाम सबसे ऊपर आता है जो कई बार इशांत की गेंद पर चूके और पवेलियन लौट गए। महानतम क्रिकेटर पोंटिंग ने भी इशांत को एक बेहतरीन गेंदबाज बताया था।

Original.. http://www.jagran.com/cricket/headlines-from-streets-of-delhi-to-pitches-of-australia-birthday-boy-ishant-comes-a-long-way-10692476.html

Gambhir Returns to India Due to Family Reasons


Gautam Gambhir

लंदन। काउंटी क्रिकेट में एसेक्स की तरफ से खेल रहे भारतीय सलामी बल्लेबाज गौतम गंभीर काउंटी सीजन को बीच में छोड़कर अचानक भारत वापस लौट आए हैं। उनके लौटने का कारण पारिवारिक बताया जा रहा है।
एसेक्स ने अपने जारी बयान में कहा, 'गौतम गंभीर रविवार को पारिवारिक कारणों से भारत लौट गए हैं। फिलहाल एसेक्स क्रिकेट और गौतम इससे ज्यादा बताने की स्थिति में नहीं है। एसेक्स क्रिकेट पूरी तरह गौतम के समर्थन करता है और उम्मीद करता है कि 2013 इंग्लिश घरेलू क्रिकेट सत्र के अंत से पहले वह (गंभीर) वापस लौट आएंगे।' गंभीर का एसेक्स के साथ सफर पिछले ही महीने शुरू हुआ था और शुरुआत में काफी पारियों में वह फ्लॉप साबित हुए, जिनमें 31, 21, 2 और शून्य रन की पारियां मौजूद रहीं हालांकि महीने के अंत में 30 तारीख को वह ब्रिस्टल में ग्लूस्टरशर के खिलाफ ड्रॉ हुए मैच में शतक ठोंकने में सफल रहे। गंभीर काफी लंबे समय से टीम इंडिया से बाहर चल रहे हैं और आखिरी बार वह जनवरी में इंग्लैंड के खिलाफ वनडे मैच में भारत की तरफ से खेले थे।

Original.. http://www.jagran.com/cricket/headlines-gambhir-returns-to-india-due-to-family-reasons-10692484.html

Wednesday, 21 August 2013

Didnt Play Cricket in School But Now Ishwar Pandey Playing for Fndia


Ishwar Pandey

नई दिल्ली। कुछ लोगों के लिए जिंदगी की ट्रेन उस पटरी पर चलती है जहां कई स्टेशन होते हैं जबकि कुछ जब उसी ट्रेन पर सवार होते हैं तो वह एक्सप्रेस का रुख अख्तियार कर सीधे मंजिल पर जाकर ही रुकती है.. मध्यप्रदेश के युवा क्रिकेट इश्वर पांडे भी उन्हीं में से एक हैं। जहां एक तरफ बाकी युवा खिलाड़ी बचपन से ही मैदान में जुट जाते हैं ताकि एक दिन देश के लिए खेल सकें, वहीं दूसरी तरफ इश्वर जैसे खिलाड़ी भी होते हैं जिन्हें 12वीं की परीक्षा तक क्रिकेट से कोई लेना-देना तक नहीं था और आज वह दक्षिण अफ्रीका की कठिन पिचों पर भारत का नाम रोशन कर रहे हैं।

नाम- इश्वर पांडे, उम्र-24, जन्म स्थान- रीवा (मध्यप्रदेश)..भारत के सबसे बड़े राज्य के एक छोटे से शहर से आने वाले इश्वर पांडे दक्षिण अफ्रीका में दक्षिण अफ्रीका 'ए' के खिलाफ भारत 'ए' से खेलते हुए अपने डेब्यू पर हीरो बनकर उभरे हैं। इश्वर ने इस मैच की पहली पारी में 19 ओवरो में महज 46 रन देकर चार अहम विकेट लिए जबकि दूसरी पारी में 9.5 ओवर में उन्होंने 25 रन देकर तीन और विकेट हासिल किए। इश्वर पर छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक आज से पांच साल पहले इस क्रिकेटर का इस खेल से कोई लेना-देना भी नहीं था। स्कूल के आखिरी दिनों में गर्मियों की छुंिट्टयों में उन्होंने अपने दोस्तों के साथ सिर्फ मस्ती के लिहाज से एक क्रिकेट ट्राइल में मौका आजमाने का मन बनाया और फॉर्म भर डाला। दरअसल, वह क्रिकेट ट्राइल मध्यप्रदेश डीविजनल क्रिकेट की रीवा टीम के लिए था। यहां पर उनकी लंबी चौड़ी कद काठी और गेंद फेंकने की अद्भुत क्षमता से सब इतना प्रभावित हुए कि वह जल्द ही रीवा से खेलने भी लगे और कुछ ही दिनों में रणजी सीजन के एक खिलाड़ी ने इश्वर की गेंदों को देखा तो वह हैरत में रह गए और उन्होंने लोकल क्लब में इस खिलाड़ी की चर्चा शुरू की।

इश्वर के पिता (एक पूर्व सैनिक) चाहते थे कि इश्वर अपनी पढ़ाई पर ध्यान दें और उनका खेल से जुड़ना काफी मुश्किल नजर आ रहा था, हालांकि उनके यूनिवर्सिटी कोच ने इश्वर के पिता को मनाया और जल्द ही इश्वर मध्यप्रदेश की अंडर-19 टीम के लिए भी खेलने लगे। शुरुआती दौर खराब रहा लेकिन इश्वर को अब आगे बढ़ने का चस्का लग चुका था। पिताजी का दबाव जारी थी लेकिन अपने क्रिकेट के जोश की खातिर इश्वर ने पढ़ाई की स्ट्रीम ही बदल डाली और कॉलेज में विज्ञान से आ‌र्ट्स स्ट्रीम में नाम दर्ज करा दिया ताकि क्रिकेट को ज्यादा समय दे सकें।

इसी बीच पूर्व भारतीय क्रिकेटर व मध्यप्रदेश के खिलाड़ी अमय खुरसिया ने इश्वर की प्रतिभा देखी और उन्हें चेन्नई की एमआरएफ पेस अकादमी भेजने का फैसला लिया। इसके बाद जो बदलाव इश्वर में आए उसने सभी की आंखें खोल दीं। स्कूल के बाद पांच साल के अंदर आज इश्वर घरेलू क्रिकेट से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक हर जगह चर्चा में हैं। पिछले रणजी सीजन में वह टूर्नामेंट के सर्वाधिक विकेट लेने वाले खिलाड़ी भी रहे। उन्होंने मध्यप्रदेश की तरफ से खेलते हुए 48 विकेट चटकाए और इस दौरान उन्होंने कुछ मैचों में बल्ले से भी अपना जलवा दिखाया। आइपीएल-6 में वह पुणे वॉरियर्स से खेले लेकिन ज्यादा कुछ कर नहीं पाए लेकिन कभी हार ना मानने वाले इस क्रिकेटर को दक्षिण अफ्रीका के भारत 'ए' दौरे पर चयनकर्ताओं ने मौका दिया और अपने इस डेब्यू में ही उन्होंने 7 अहम विकेट लेकर भविष्य का उभरता हुआ गेंदबाज बनने की दस्तक दे डाली। छह फुट दो इंच लंबे चौड़े इस गेंदबाज की रफ्तार और स्विंग इसका सबसे बड़ा हथियार है और जिस रफ्तार में पिछले पांच साल उनकी जिंदगी में अलग मोड़ लेकर आए हैं, ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि जल्द ही हमें शायद टीम इंडिया के लिए एक और शानदार फर्राटा गेंदबाज मिल जाए।

Tag: Ishwar Pandey, Cricket Player, Hindi News, News in Hindi, News

Monday, 19 August 2013

Is Sehwag Career on the Verge of End


Virender Sehwag

(शिवम् अवस्थी), नई दिल्ली। वीरेंद्र सहवाग..एक ऐसा खिलाड़ी जो फैंस के लिए कई बार टीम की स्थिति और हार-जीत से बढ़कर था। जब वह बल्लेबाजी करने उतरते थे तो कुछ फैंस बस उनकी बल्लेबाजी का लुत्फ उठाने के लिए ही मैच देखा करते थे। एक ऐसा धुरंधर जो कभी अपनी मुस्कान के जरिए विरोधी टीम के दिल जीत लेता था तो कभी उस मुस्कान के बीच लगाए गए धुआंधार शॉट्स से विरोधी गेंदबाजों के होश उड़ाता था। भारत के लिए दोनों प्रमुख फॉर्मेट (वनडे व टेस्ट) में सर्वाधिक स्कोर जड़ने वाला यह दिग्गज आज गुम सा गया है। अब सहवाग के करीबी दोस्तों के रूप में देखे जाने वाले पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने भी कुछ ऐसी बातें की जिनमें कहीं ना कहीं वीरू के संन्यास की बात छुपी नजर आती है, सवाल यही है कि कहां है सहवाग? क्या वाकई उनका करियर खत्म है?

हाल ही में सहवाग के अच्छे दोस्तों में से माने जाने वाले पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली ने उन कुछ खिलाड़ियों का नाम लिया जिनकी टीम में वापसी जल्द हो सकती है, लेकिन कभी जिस खिलाड़ी के दम पर मैच जीतने वाले और आए दिन उनकी तारीफों के पुल बांधने वाले दादा ने इस फेहरिस्त में सहवाग का नाम तक नहीं लिया। जाहिर है कि दादा और सहवाग का रिश्ता काफी मजबूत माना जाता था, ऐसे में कहीं गांगुली का यह इशारा वाकई इस तरफ तो नहीं कि वीरू का करियर अब समाप्त है? दादा ने अपने बयान में जल्द वापसी करने वालों में गौतम गंभीर, युवराज सिंह और जहीर खान का नाम लिया लेकिन वह सहवाग को इस सूची में शामिल नहीं कर पाए।

Original Found Here.. http://www.jagran.com/cricket/headlines-is-sehwag-career-on-the-verge-of-end-10658543.html

Tag: Virender Sehwag, Verge of end, Hindi News, News in Hindi, News

Wednesday, 14 August 2013

14 August: Today Is Special Day For Cricket, Sachin And Don Careers


Sir Donald Bradman

(शिवम् अवस्थी), नई दिल्ली। समय का पहिया कभी-कभी ऐसे इत्तेफाक पैदा करता है जो ना सिर्फ दिलचस्प होते हैं बल्कि हैरान भी कर देते हैं। क्रिकेट फैंस के लिए आज की तारीख यानी 14 अगस्त उसी समय के पहिये की कहानी बयां करता है जिसने सालों के फासलों के बीच दो महानतम क्रिकेटरों के करियर का अंत और आगाज लिखा। हम बात कर रहे हैं विश्व क्रिकेट के अब तक के सबसे महान खिलाड़ी ऑस्ट्रेलिया के सर डॉन ब्रैडमैन और आज क्रिकेट के भगवान के तौर पर जाने वाले महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर की। आइए आपको बताते हैं कि आखिर कैसे हुआ एक क्रिकेटर के करियर का दुखद: अंत और ठीक उसकी तरह इतिहास रचने वाले दूसरे खिलाड़ी का धमाकेदार आगाज। 

1. डॉन ब्रैडमैन (14 अगस्त, 1948):
भारत की आजादी के ठीक एक साल बाद ऑस्ट्रेलिया में एक महान क्रिकेटर के करियर का अंत हो गया। यह दिन बहुत खास था क्योंकि यह सर डॉन ब्रैडमैन के करियर का मैदान पर आखिरी दिन था और उनका करियर औसत (99.94) 100 पर पहुंचने के लिए बेताब था। सर डॉन ब्रैडमैन को इंग्लैंड के खिलाफ ओवल स्टेडियम पर खेले गए उस मैच में महज 4 रनों की जरूरत थी जो ना सिर्फ उनके करियर औसत को सौ प्रतिशत करते बल्कि टेस्ट में उनके 7000 रन भी पूरे हो जाते। इससे बढि़या अंत और कुछ नहीं हो सकता था लेकिन..कभी किसी भी गेंदबाज के सामने नहीं झुकने वाले सर डॉन इस बार अपनी दूसरी ही गेंद पर एरिक होलीस का शिकार हुए और बोल्ड होकर मैदान से चलते बने। पूरे मैदान में सन्नाटा था, या यह कहें कि विश्व क्रिकेट में हर फैन सन्न रह गया था। उम्मीद थी कि अगली पारी में डॉन आकर इस आंकड़े को पूरा करेंगे लेकिन शायद यह उनकी किस्मत में ही नहीं था क्योंकि इंग्लैंड वह मैच पहले ही हार गया और ऑस्ट्रेलिया की दूसरी पारी की नौबत ही नहीं आई। यही था एक परफेक्ट खिलाड़ी के करियर का अजीबोगरीब अंत। 

2. सचिन तेंदुलकर (14 अगस्त, 1990):
डॉन ब्रैडमैन के करियर के उस अंत के बाद सालों तक कोई ऐसा खिलाड़ी नहीं मिला जो उनके स्तर की बराबरी कर सके। कई आए और कई गए, लेकिन उनके जैसा कोई आता नहीं दिखा। फिर आइ वह तारीख लेकिन तकरीबन 42 साल बाद.. 14 अगस्त 1990 को भारत और इंग्लैंड के बीच जारी टेस्ट सीरीज के दूसरे टेस्ट का आखिरी दिन था और मैनचेस्टर के मैदान पर भारत को 408 रनों की जरूरत थी। टॉप ऑर्डर लड़खड़ा चुका था और टीम इंडिया 183 रन पर छह विकेट खो चुकी थी। फिर आए सचिन रमेश तेंदुलकर जो पहली पारी में 68 रन जड़ चुके थे लेकिन दूसरी पारी में दबाव भी ज्यादा था और तकरीबन दो घंटों का समय बाकी था, फिर हुआ वह जिसने तमाम क्रिकेट प्रेमियों की आंखें ऐसे खोलीं कि वह आज तक खुली ही हुई हैं। 17 वर्षीय सचिन ने 189 गेंदों का सामना करते हुए 17 चौकों की मदद से अपने टेस्ट व अंतरराष्ट्रीय करियर का पहला शतक जड़ा और नाबाद 119 रनों की पारी खेली, वह मनोज प्रभाकर (नाबाद 67) के साथ मिलकर भारत को दिन के अंत तक ले गए और हार के मुंह से भारत को निकालते हुए एक ड्रॉ नसीब कराया। वह इतनी कम उम्र में शतक जड़ने वाले दुनिया के तीसरे खिलाड़ी बने और दुनिया में संकेत भेज दिया कि 42 साल के इंतजार के बाद क्रिकेट को नया डॉन मिल गया है।

Original Found Here... http://www.jagran.com/cricket/headlines-14-august-today-is-special-day-for-cricket-sachin-and-don-careers-10646344.html

Tuesday, 13 August 2013

Is Dhawan Shining A End Career For Sehwag And Gambhir


Shikhar Dhawan

(शिवम् अवस्थी), नई दिल्ली। कहते हैं कि हर सफर की एक मंजिल होती है और हर रास्ते का एक अंत..खेल भी उसी सफर की ही तरह है जहां बादशाहत, जलवा, फिटनेस, और फॉर्म जैसी चीजें आती तो हैं लेकिन हमेशा केलिए नहीं ठहरती। भारतीय क्रिकेट में हमनें कई दिग्गजों को विश्व स्तर पर अपनी छाप छोड़ते हुए देखा और उसी सफर में दिल्ली के वीरेंद्र सहवाग और गौतम गंभीर भी एक थे..जी हां, 'थे'..इस शब्द का प्रयोग पता नहीं कितने क्रिकेट फैंस को सही लगेगा लेकिन मौजूदा समय में शिखर धवन ने जिस अंदाज में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट पर धूम मचाई है उससे एक बड़ा सवाल अब सामने है कि, क्या यही है सहवाग और गंभीर के करियर का अंत? अभ्यास मैचों व कुछ घरेलू मैचों में गंभीर के फॉर्म और उनकी उम्र को देखते हुए शायद उन्हें दोबारा मौका मिल भी जाए लेकिन सहवाग की वापसी अब मुश्किल ही नजर आ रही है। इनमें से एक को धवन बाएं हाथ के बल्लेबाज (गंभीर) के रूप में चुनौती दे रहे हैं जबकि दूसरे (वीरू) को आक्रामकता के लिहाज से।

यह सही है कि 34 वर्षीय वीरेंद्र सहवाग और 31 वर्षीय गौतम गंभीर उम्र के इस पड़ाव में भी अपने अनुभव और हुनर के दम पर वापसी करके अपने करियर के अंतिम कुछ सालों को एक बेहतरीन रूप दे सकते हैं लेकिन यह सच है कि भारतीय क्रिकेट में हर क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर नहीं हो पाता और हर क्रिकेटर को सचिन की तरह मौके भी नहीं मिलते रहते। महेंद्र सिंह धौनी की कप्तानी में टीम इंडिया ने जो युवा रूप अख्तियार किया है उसकी आदत अब फैंस को भी हो चुकी है और धौनी भी इसको लेकर कोई समझौता नहीं करना चाहते, टीम से आज सचिन, लक्ष्मण, द्रविड़, गांगुली, सहवाग, युवराज, गंभीर, हरभजन और जहीर जैसे दिग्गज नदारद हैं लेकिन फिर भी हमनें विदेश में तीन बड़े खिताब जीतकर इतिहास रचा है..फैंस के लिए अपने स्टार्स को लेकर भावनाएं माएने जरूर रखती हैं लेकिन यह हकीकत है कि जब देश जीत के अभियान पर हो तो इन बातों को नजरअंदाज करने में फैंस जरा भी देर नहीं लगाते।

Original Found Here... http://www.jagran.com/cricket/headlines-is-dhawan-shining-a-end-career-for-sehwag-and-gambhir-10643453.html

Monday, 12 August 2013

Dhawan Made Several Records But Will Regret Missing Those 20 Runs


Shikhar Dhawan

नई दिल्ली। शिखर धवन भारतीय क्रिकेट के नए 'शिखर पुरुष' बनने की ओर अग्रसर हैं। भारतीय क्रिकेट की नई सनसनी धवन ने सोमवार को प्रिटोरिया में 248 रनों की तूफानी पारी खेलकर लिस्ट ए' (सीमित ओवर के मैच) मैचों में भारत की तरफ से सर्वाधिक व्य1ितगत पारी खेलने का नया रिकॉर्ड बनाया, लेकिन वह विश्व रिकॉर्ड से 20 रन पीछे रह गए। वीरेंद्र सहवाग के नाम वनडे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में एक पारी में सबसे अधिक रन का रिकॉर्ड बरकरार है, लेकिन 'लिस्ट ए' में अब भारत की तरफ से सबसे बड़ी व्यक्तिगत पारी का रिंकॉर्ड धवन के नाम दर्ज हो गया है। बायें हाथ के इस बल्लेबाज ने अपनी पारी में 150 गेंदों का सामना किया तथा 30 चौके और 7 छक्के लगाए।

सलामी बल्लेबाज धवन ने भारत 'ए' की तरफ से दक्षिण अफ्रीका 'ए' के खिलाफ त्रिकोणीय सीरीज के मैच में यह धुआंधार पारी खेलकर सहवाग के वेस्टइंडीज के खिलाफ 8 दिसंबर, 2011 को इंदौर में बनाए गए 219 रन के रिकॉर्ड को तोड़ा। धवन के पास इंग्लैंड के एलिस्टेयर ब्राउन के 268 रन के रिकॉर्ड को तोडऩे का सुनहरा मौका था, लेकिन वह 45वें ओवर में आउट हो गए। धवन 'लिस्ट ए' मैचों में दोहरा शतक जडऩे वाले 12वें बल्लेबाज हैं। ब्राउन ने दो दोहरे शतक लगाए हैं। इस तरह से 'लिस्ट ए' में 13वीं बार किसी बल्लेबाज ने दोहरा शतक जमाया। धवन, सचिन तेंदुलकर और सहवाग के बाद 'लिस्ट ए' मैचों में दोहरा शतक जडने वाले तीसरे भारतीय बल्लेबाज हैं। धवन ने इसी साल ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 187 रन की धमाकेदार पारी खेलकर टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया था। उसके बाद से उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। वह पिछले दिनों आइसीसी चैंपियंस ट्रॉफी में सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज बने थे।

Original Found Here... http://www.jagran.com/cricket/headlines-dhawan-made-several-records-but-will-regret-missing-those-20-runs-10643364.html

Dhawan Scores 248 With 30 Fours 7 Sixes


Shikhar Dhawan

नई दिल्ली। दक्षिण अफ्रीका के प्रिटोरिया में डीविलियर्स ओवल मैदान पर सोमवार को जो कुछ हुआ वह शायद धवन की उस एक पारी को देखने वाला कभी नहीं भूलेगा। गब्बर के नाम से मशहूर धवन ने इंडिया 'ए' की तरफ से खेलते हुए मेजबान दक्षिण अफ्रीका 'ए' के खिलाफ 248 रन की वह पारी खेल डाली जिसका अंदाजा शायद ही किसी को रहा होगा। उनकी इस पारी में वह हर चीज देखने को मिली जिसकी एक धुआंधार दिग्गज से उम्मीद की जा सकती है।

ओपनिंग करने उतरे धवन ने विरोधी गेंदबाज विलिजोन के मैच के पहले ही ओवर की पहली गेंद पर चौका जड़कर यह साफ कर दिया था कि उनके इरादे कुछ ठीक नहीं हैं। लांग ऑफ की दिशा में लगाया वह चौका बस एक विशाल पारी का ट्रेलर भर था क्योंकि उसके बाद जो हुआ वह कोई भी दक्षिण अफ्रीकी क्रिकेटर या फैन दोबारा याद भी नहीं करना चाहेगा। धवन मैच में 45वें ओवर की चौथी गेंद पर आउट हो गए जिससे पहले वह 194 मिनट तक पिच पर टिके और अपनी पारी के दौरान 150 गेंदों का सामना करते हुए 30 चौके और 7 छक्कों के दम पर 165.33 की स्ट्राइक रेट से 248 रन ठोंक डाले। वह लिस्ट-ए क्रिकेट में विश्व रिकॉर्ड तोड़ने से महज 20 रन दूर रह गए। सरे के पूर्व बल्लेबाज एलेस्टर ब्राउन ने ग्लामॉर्गन के खिलाफ 268 रनों की पारी खेली थी जो रिकॉर्ड आज भी कायम है।

Original Found Here.. http://www.jagran.com/cricket/headlines-dhawan-scores-248-with-30-fours-7-sixes-10643351.html

Shikhar Dhawan Made Double Century, South Africa Lost The Match By 39 Runs


Shikhar dhawan

प्रिटोरिया। एकदिवसीय मैचों की त्रिकोणीय सीरीज में दक्षिण अफ्रीका 'ए' के खिलाफ शिखर धवन ने धमाल मचाते हुए शानदार दोहरा शतक जड़ा। धवन (248) के दोहरे शतक और चेतेश्वर पुजारा (नाबाद 109) के शानदार शतक की बदौलत भारत 'ए' ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए निर्धारित 50 ओवरों में 3 विकेट के नुकसान पर 433 रन बनाए। वहीं लक्ष्य का पीछा करने उतरी दक्षिण अफ्रीका की टीम 48.4 ओवर में 394 रन बनाकर आल आउट हो गई। इस तरह भारत ए ने दक्षिण अफ्रीका को 39 रनों से हरा दिया। 

433 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी दक्षिण अफीका ए के सलामी बल्लेबाज रीज हेनड्रिक्स और रीली रोसोव ने अपनी टीम को शानदार शुरुआत दी। दोनों के बीच 12.4 ओवर में 121 रनों की साझेदारी हुई। रोसोव (43) को 13वें ओवर की चौथी गेंद पर शाहबाज नदीम ने बोल्ड कर भारत को पहली सफलता दिलाई। इसके बाद हेनड्रिक्स का साथ देने डीन एल्गर (15) मैदान पर आए लेकिन 16वें ओवर की चौथी गेंद पर सुरेश रैना ने उन्हें पुजारा के हाथों आउट कराकर भारत को दूसरी सफलता दिला। 

इसके बाद हेनड्रिक्स का साथ देने बॉघन वान जारसविल्ड आए। दोनों बल्लेबाजों ने मैदान के चारो ओर आकर्षक शॉट लगाकर भारतीय कप्तान चेतेश्वर पुजारा के माथे पर चिंता की लकीर खिंच दी। तभी भारतीय कप्तान ने 25वां ओवर स्टुअर्ट बिन्नी को थमाया। इसी ओवर की पांचवी गेंद पर बिन्नी ने हेनड्रिक्स को बोल्ड कर भारत को तीसरी सफलता दिलाई। हेनड्रिक्स के आउट होने के समय दक्षिण अफ्रीका का स्कोर 203 रन था। हेनड्रिक्स के आउट होने के बाद जस्टिन ऑनटॉग बल्लेबाज के लिए मैदान पर आए। दोनों बल्लेबाजों ने शानदार खेल दिखाया। 

Original Found Here... http://www.jagran.com/cricket/headlines-shikhar-dhawan-made-double-century-south-africa-lost-the-match-by-39-runs-10640839.html