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Friday, 10 January 2014

Loveguru Matuk nath have to give 15 thousand monthly for his first wife

पटना। अपने से आधी से भी कम उम्र की जूली के साथ 'लिव इन रिलेशनशिप' में जीवन गुजार रहे पटना विश्वविद्यालय के शिक्षक प्रो. मटुकनाथ चौधरी [लवगुरु] को निचली अदालत ने झटका दिया है। पटना जिला न्यायालय के मजिस्ट्रेट अनिल कुमार राम ने 'लवगुरु' को उनके 'पहले प्यार' [धर्मपत्नी आभा चौधरी] को भरण-पोषण के लिए प्रत्येक महीने पंद्रह हजार रुपये देने का निर्देश दिया है। 

अभी तक प्रोफेसर साहब अपनी पत्नी [आभा] के उत्तरदायित्व से बच रहे थे। मजिस्ट्रेट ने फिलहाल अंतरिम फैसला सुनाया है। जीवनयापन भत्ते की राशि में बढ़ोतरी की भी संभावना है। पत्नी को मुकदमे में आए खर्च की राशि मिल सकती है।
गुरु जी की धर्मपत्नी आभा निर्वासित जिंदगी जी रही हैं। वे 2007 से पति से कानूनी लड़ाई लड़ रही हैं। छह महीने से उनका मामला आर्डर पर चल रहा था। अब फैसला सुना दिया गया है। यह घरेलू हिंसा कानून में नए तरह का फैसला है। 

आभा को इस बात का मलाल था कि जूली के आगे गुरु जी सबकुछ भूल गये। उन्हें अलग-थलग जिदंगी जीने के लिए बाध्य कर दिया गया। आभा चौधरी की वकील श्रुति सिंह बताती हैं, जब पटना विश्वविद्यालय के प्रो मटुकनाथ पर मुकदमा दायर किया गया था, उस समय उनका वेतन 44 हजार रुपये प्रतिमाह था। इसमें बढ़ोतरी होती गयी। अभी वे प्रतिमाह करीब सवा लाख रुपये पाते हैं। 

ध्यान रहे कि पहले गुरुजी को निलंबित किया गया। उनका मकान भी खाली कराया गया। फिर उन्हें तीन वषरें तक नौकरी से भी हाथ धोना पड़ा। हालांकि आभा को अब भी भरोसा है कि देर-सबेर गुरुजी घर लौट आएंगे। 

Tuesday, 7 January 2014

Musharraf gets relief from the court for two days

इस्लामाबाद। पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ को विशेष अदालत ने देशद्रोह मामले में पेशी से दो दिनों की छूट दी है। अदालत ने उनकी मेडिकल रिपोर्ट की जांच के बाद मंगलवार को यह फैसला सुनाया और सुनवाई को आठ जनवरी तक के लिए स्थगित कर दिया।

डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट की अध्यक्षता कर रहे जस्टिस फैजल अरब ने कहा है कि अदालत गुरुवार को मेडिकल रिपोर्ट के संबंध में फैसला सुनाएगी। इस बीच मुशर्रफ के वकीलों ने कहा कि उनके पास अपने मुवक्किल का मेडिकल सर्टिफिकेट नहीं है। हालांकि इस दौरान आ‌र्म्ड फोर्सेज इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी [एएफआइसी] की ओर से अदालत में कोई पेश नहीं हुआ। मुशर्रफ तीन जनवरी से दिल का दौरा पड़ने के बाद से अस्पताल में भर्ती हैं। 70 वर्षीय पूर्व सैन्य शासक ने विशेष अदालत में पेशी के लिए ले जाते समय रास्ते में सीने में दर्द की शिकायत की थी। इसके बाद उन्हें रावलपिंडी स्थित सैन्य अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है।

Source: Hindi News

Friday, 1 November 2013

Court crossing 'lakshman rekha' by taking upon exe functions: Ramesh

Union Minister
कन्नूर। सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले से तिलमिलाए केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने अदालतों के लक्ष्मण रेखा लांघने को खतरनाक चलन बताया है। गुरुवार को शीर्ष अदालत ने एक फैसले में कहा था कि नौकरशाहों को राजनीतिक आकाओं के मौखिक आदेशों पर कार्रवाई नहीं करनी चाहिए। शुक्रवार को जयराम ने कहा कि अदालतों का अपनी सीमाएं पार करते हुए अफसरों और सरकार के काम को अपने हाथ में ले लेना ठीक नहीं है।
केरल के कन्नूर में आयोजित 'मीट द प्रेस' कार्यक्रम में जयराम ने कहा कि यह फैसला नहीं है। यह सुप्रीम कोर्ट का मौखिक आदेश है। इस सब के लिए केंद्र सरकार का सिविल सेवा स्थापना बोर्ड पहले से ही मौजूद है। अफसरों के समूहों को सेवानिवृत्ति के बाद अचानक मिलने वाले ज्ञान के कारण देश को इस तरह के और भी फैसले सुनने को मिलेंगे। उन्होंने कहा, 'यह देश में सेवानिवृत्त अधिकारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा प्रचारित किया जा रहा खतरनाक चलन है।' 

उन्होंने शीर्ष अदालत पर तीखा हमला करते हुए कहा, 'सुप्रीम कोर्ट देश में लोकतंत्र और खुला माहौल चाहता है, लेकिन जब जजों की नियुक्ति की बारी आती है, तो सब कुछ ताक पर रख दिया जाता है।' राजनीतिक आकाओं द्वारा नौकरशाही के अपमान पर सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप की मांग करने के लिए याचिका दायर करने वाले अफसरों पर सख्त रुख अपनाते हुए उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्त अधिकारियों द्वारा बड़ी संख्या में जनहित याचिकाएं दाखिल की जा रही हैं, जबकि इन्हीं अफसरों ने अपने कार्यकाल में अपने राजनीतिक आकाओं की बहुत अच्छे से सेवा की थी। अब रिटायरमेंट के बाद अचानक उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ कि सभी नेता पागल हैं।
कन्नूर में अब कोई भूमिहीन नहीं

नई दिल्ली। कन्नूर देश का ऐसा पहला जिला बन गया है, जिसमें अब कोई परिवार भूमिहीन नहीं है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने दावा किया कि हर गरीब परिवार के पास घर बनाने के लिए कम से कम तीन सेंट (करीब 120 वर्गमीटर) जमीन जरूर होगी। यह ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने सभी राज्यों से केरल में भूमि वितरण के उदाहरण से सीख लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि ऐसे फैसलों के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति और कड़े निर्णय की जरूरत पड़ती है।

'सात साल पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस सुधार को लेकर एक आदेश दिया था। वह आदेश भी कुछ ऐसा ही था। अपने आप से पूछिए कि क्या उन आदेशों का राज्यों में पालन हुआ?'
-जयराम रमेश, ग्रामीण विकास मंत्री

Source- News in Hindi