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Wednesday, 9 April 2014

Pilgrims descended on shaktipeeths

चैत्र माह के नौवें नवरात्र पर कांगड़ा के तीनों प्रसिद्ध शक्तिपीठों पर हजारों श्रद्धालुओं ने माथा टेका व मां का आशीर्वाद लिया।

श्री चामुंडा नंदिकेश्वर धाम में करीब दस हजार श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की। यहां नवरात्र मेले का समापन पूर्णाहुति के साथ हुआ।

उधर, श्री ज्वालामुखी मंदिर में हवन पूजा व कन्या पूजन के साथ सहायक मंदिर आयुक्त विनय कुमार ने नवरात्र मेले का समापन किया। यहां बीस हजार भक्तों ने मां के दर्शन किए। वहीं, श्री बज्रेश्वरी मंदिर कांगड़ा में करीब 15 हजार श्रद्धालुओं ने माथा टेका, लेकिन उन्हें प्रशासन की अव्यवस्था के चलते परेशानी झेलनी पड़ी। यहां सफाई कर्मचारियों ने श्रद्धालुओं के जूते व चप्पल को उठा कर कांगड़ा के कूड़े स्थल पर फेंक दिया, जिससे उन्हें भारी परेशानी हुई।

Tuesday, 8 April 2014

Gross Bhaye friendly yoga diligently on Grhwar

योग लगन ग्रहवार तिथि सकल भये अनुकूल चर अरु अचर हर्ष युत राम जनम सुख मूल। राम जन्म का प्रसंग निरूपित करती रामचरितमानस की यह पंक्ति राम जन्मोत्सव की पूर्व संध्या पर साकार प्रतीत हो रही है। नगरी की परिधि में लाखों-लाख श्रद्धालु दाखिल हो चुके हैं और सबके चेहरे पर राम जन्मोत्सव की शुभ घड़ी की प्रतीक्षा का उल्लास झलक रहा है।

भिंड के रामबरन दंडौतिया को यद्यपि अपनी पूर्ण विकलांगता की वजह से चलने-फिरने में काफी दिक्कत होती है पर लकड़ी के हत्थे पर अपना भार उठाकर आगे बढ़ते दंडौतिया पूरे जोश में होते हैं और कनकबिहारी सरकार के दर्शन का संतोष उनके चेहरे से साफ पढ़ा जा सकता है। हालांकि दंडौतिया जैसा जोश तो बिरलों में होता है पर उन वृद्धों, बच्चों, युवाओं, महिलाओं आदि के उत्साह को अनदेखा नहीं किया जा सकता जो भीड़ के दबाव और पदयात्र की थकान को बौना कर मंदिर-मंदिर आराध्य के दर्शन की ललक बयां करते हैं। बजरंगबली की प्रधानतम पीठ हनुमान गढ़ी के अर्चक रमेशदास के अनुसार यह अध्यात्म की गंगा है और यहां मानसिक एवं आत्मिक सुख के आगे सारे सुख फींके हैं। हनुमानगढ़ी एवं कनकभवन से लेकर नगरी के पूर्वी मुहाने पर भी श्रद्धालुओं का सैलाब प्रवाहित नजर आता है। इसी क्षेत्र में स्थित निष्काम सेवा ट्रस्ट के व्यवस्थापक महंत रामचंद्र दास यद्यपि ज्योतिष के आचार्य हैं पर आस्था के महाकुंभ में वे भक्ति की भाषा बोलते हैं और कहते हैं कि सच्ची भक्ति घटित होने पर राहुकाल भी शुभ मुहूर्त सिद्ध हो जाता है और यहां तो राम जन्म की पूर्व बेला के साथ अभीप्सित भक्ति की धार बह रही है।

रामनवमी मेले में श्रद्धालुओं के सैलाब ने प्रशासन के अनुमान को तोड़ दिया। सुरक्षा व प्रशासनिक तंत्र चुनाव व खेती को देखते हुए इसबार श्रद्धालुओं के कम आने की संभावना व्यक्त कर रहा था, लेकिन रविवार की रात से लगातार बढ़ रहे श्रद्धालुओं की आमद प्रशासन और पुलिस दोनों के सांस फुलाने वाली साबित हो रही है।

आज ही पांच लाख श्रद्धालुओं ने सरयू में डुबकी लगाई। मंदिरों में भी ढाई लाख लोगों के रुके होने की संभावना सुरक्षा तंत्र व्यक्त कर रहा है। श्रीरामजन्मोत्सव के उल्लास में डूबी अयोध्या में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने लगी है। रविवार की रात से ही श्रद्धालुओं की भीड़ जुटना शुरू होने से पूरी रात प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों को गश्त करनी पड़ी। रामनगरी में भीड़ बढ़ने से सुरक्षा व्यवस्था को सतर्क कर दिया गया है। सोमवार की सुबह सरयू स्नान के लिए घाट ऐतिहासिक भीड़ देखने को मिली। सुरक्षा तंत्र का मानना है कि करीब पांच लाख श्रद्धालुओं ने सरयू स्नान किया। सुरक्षा के दृष्टिगत मंदिरों एवं घाटों के पास अतिरिक्त फोर्स तैनात करनी पड़ी। जिलाधिकारी इंद्रवीर सिंह, एसएसपी केबी सिंह, एसपी सिटी आरएस गौतम व एडीएम सिटी ने पैरामिलिट्री फोर्स के साथ पूरे मेला क्षेत्र में रूटमार्च किया। एसपी सिटी ने बताया 8 अप्रैल को मुख्य पर्व होगा। इस दिन करीब 15 से 16 लाख श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हैं।

शुरू हुआ यातायात डायवर्जन- मेले के मद्देनजर यातायात पाबंदिया रविवार की देर शाम से लागू कर दी गईं। अयोध्यानगर की सीमा में वाहनों का प्रवेश पूरी तरह वर्जित कर दिया गया है। पाबंदियों के चलते अयोध्या में निवास करने वाले नागरिकों को आवागमन में काफी समस्या उठानी पड़ रही है। मंगलवार को पाबंदियां और बढ़ने की उम्मीद है।

काम आया सीसी कैमरा- घाट व मंदिरों पर लगाए गए सीसी कैमरे पुलिस के लिए काफी मददगार साबित हुए। सोमवार को स्नान व मंदिर में दर्जन के दौरान मेला क्षेत्र से दर्जन भर जेबकतरों को गिरफ्तार किया गया। सीसी कैमरे में इनके फुटेज को देख पुलिस टीम ने सफलता हासिल की। एसपी सिटी ने कहा कि पकड़े गए सभी जेबकतरों को जेल भेजा जाएगा।

Monday, 10 March 2014

The range of wound healing sticks fighter

राधा और कान्हा की लीला की पावन भूमि की रज भी चमत्कारिक है। बरसाने की धूल में भी मरहम है। ऐसा महरम जो सखियों की प्रेम पगी लाठियों की मार को भी पल भर में छू मंतर कर दे।

लठामार होली के घाव को भरने वाली ये रज राधा जी के चरणों की है। जिसे दुनिया भर के लोग मस्तक पर लगाकर अपने धन्य कर रहे हैं। यहां तक कि गलियों से रज समेटकर श्रद्धालु अपने घरों को ले जा रहे हैं।

ब्रह्मांचल पर्वत के शिखर पर विराजमान राधाजी सुबह से ही होली के रंगों की बौछार देख खुश हो रही थीं। राधाजी के आंगन में उठ रही राधे जू की जयघोष की गूंज से बरसाना गुंजायमान था।

सूरज ढल रहा था। मंदिर में समाज गायन के सुर थम गए और श्रद्धालुओं का रेला रंगीली गली में आ गया। हुरियारिन भी सज संवरकर आ गईं। लाठ लेकर रंगीली गली में ठाड़ी हुरियारिनों को देख नंदगांव के हुरियारों के टोल के टोल भांग की लहरों में झूमते गाते चले आ रहे थे। हुरियारिनों को देखकर वे हास परिहास करने लगे। हुरियारिन भी कम नहीं पड़ रही थी। वे भी रसिया का जवाब रसिया से दे रही थीं। तड़ातड़ चारों दिशाओं में गूंज रही थी। अगले ही पल लाठियों की चोट से हुरियारों के कसक हो गई। वे दर्द से कराहे, मगर सिर्फ कुछ देर। राधा जी के चरणों की धूल कसक पर लगाई और हो गया दर्द दूर।

ब्रजाचार्य पीठ पीठाधीश्वर गोस्वामी दीपक राज भट्ट ने बताया कि लठामार होली के साथ ही राधा जी ने यहां की धूल को लाठियों की चोट को दूर करने की दवा बना दिया था। इस धूल में चमत्कार भी है और इसका वैज्ञानिक कारण भी। सखियां अपने पांव में महावर लगती हैं। महावर में मरकरी और पोटेशियम परमैग्नेट मिला होता है। कैल्शियम के अलावा एंटी बायोटिक तत्व भी धूल में होते हैं। सखियों की महावर के कदम पड़ने से धूल हुरियारों के लिए मरहम बन रही है।

लठ्ठ मार मांगा प्रेम का नेग-

बरसाना-

नंदगांव के हुरियाराें पर लाठियां बरसाने के बाद हुरियारिनों को जैसे ही मौका मिलता, किसी न किसी की ओर उछाल देतीं लठ्ठ। दर्शक भी यहां की परंपरा और मान्यता से परिचित हैं, लिहाजा तत्काल ही जेब से निकालकर देते रुपये। बाहर के दर्शक भी देखादेखी रुपये दे देता। इस परंपरा से अनजान लोग जब पूछते, तो बता दिया जाता कि नेग है।

दरअसल, मान्यता है कि हुरियारनें जिसके सिर पर लाठी का स्पर्श करा दें, वह अत्यंत सौभाग्यशाली माना जाता है। इसलिए श्रद्धालु हुरियारिनों से सिर पर लाठी का स्पर्श कराते हैं। वे नेग में रुपए अथवा उपहार भी देते हैं। हुरियारिनों को जैसे ही कोई बुजुर्ग दिखाई देता, उनके चरण भी स्पर्श करती रहीं।