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Friday, 6 June 2014

Harimandir Sahib Sikh organizations engaged in

ऑपरेशन ब्लूस्टार की 30वीं वर्षगांठ पर शुक्रवार को सुबह श्री हरिमंदिर साहिब के परिसर में अलगाववादी नेता सिमरनजीत सिंह मान व विभिन्न सिख संगठनों के कार्यकर्ताओं और एसजीपीसी टास्क फोर्स के बीच तलवारें चलीं और एक-दूसरे पर लाठियां भांजी गई। टकराव में एक दर्जन लोग घायल हो गए, जिसमें आठ सदस्य टास्क फोर्स के थे। गंभीर हालत में एक व्यक्ति को श्री गुरु रामदास अस्पताल में दाखिल करवाया गया है।

श्री अकाल तख्त साहिब के पवित्र मुख्य भवन में सुशोभित श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की हजूरी (के समक्ष) में अलगाववादी संगठनों के कार्यकर्ताओं ने खालिस्तान समर्थक नारे भी लगाए। टास्क फोर्स द्वारा रोकने पर दोनों के बीच तलवारें चली। टास्क फोर्स व अलगाववादी संगठनों के कार्यकर्ता लगभग दो घंटे तक अकाल तख्त साहिब परिसर के सामने एक-दूसरे के सामने नंगी तलवारें लिए खडे़ रहे। श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह के समझाने पर वह हटे। हिंसक झड़प के दौरान एसजीपीसी ने मीडिया को भी बाहर निकाल दिया। बता दें, ऑपरेशन ब्लूस्टार की वर्षगांठ पर यहां हर साल इस तरह की झड़पें होती रही हैं।

उधर, शुक्रवार को सिख संगठनों ने अमृतसर बंद का ऐलान भी किया। इसके मद्देनजर शहर में चप्पे-चप्पे पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। राज्य के अन्य जिलों से भी पुलिस फोर्स मंगाई गई है। बंद का मिलाजुला असर देखने को मिल रहा है।

Tuesday, 13 May 2014

Changed geography and history became Ó Rambadha

गौरीकुंड से केदारनाथ पैदल मार्ग पर इसी जगह कभी आबाद बस्ती रामबाड़ा हुआ करती थी। आपदा के बाद इसका नामो-निशान नहीं बचा। जिसने रामबाड़ा देखा था उसे विश्वास नहीं हो रहा और जिसने नहीं देखा, वह मानने को तैयार ही नहीं कि जिन चट्टानों के बीच मंदाकिनी शांत रूप में बह रही है, वहां कभी खुशहाल बस्ती हुआ करती थी। देखने वाले तो बस यही कह रहे हैं कि कुदरत ने यहां का भूगोल क्या बदला, इतिहास बनकर रह गया रामबाड़ा।

पिछले साल 16-17 जून को आई आपदा ने पूरी मंदाकिनी घाटी को हिला कर रख दिया था। घर, बाजार, खेत-खलिहान सब तबाह हो गए। इन्हीं में रामबाड़ा नामक केदारनाथ पैदल मार्ग का वह महत्वपूर्ण पड़ाव भी था, जिसका आज कहीं नामो-निशान तक नहीं है। यहां गढ़वाल मंडल विकास निगम का होटल, बाबा काली कमली वाले की धर्मशाला समेत दर्जनों होटल और धर्मशालाएं थीं। यहां ढाई सौ से अधिक दुकानें भी हुआ करती थी। यात्रा के दौरान यहां पांच हजार से अधिक यात्री रोजाना रात्रि विश्राम के लिए रुकते थे।

उस दिन मंदाकिनी ने ऐसा विकराल रूप धारण किया कि सबकुछ नेस्तनाबूद हो गया। रामबाड़ा इतिहास के पन्नों में दफन होकर रह गया।

यहां से गुजरने वाले स्थानीय लोग और रामबाड़ा को पहले देख चुके यात्री अब बस अंदाजा लगाकर ही बता पाते है कि इधर होटल था उधर दुकानें। यहां का भूगोल इस कदर बदल गया है कि ठीक से बता पाना भी मुश्किल है कि कहां क्या था। कभी बस्ती से 50 मीटर नीचे बहने वाली मंदाकिनी में अचानक ऐसा उफान आया कि वह सबकुछ बहा ले गई। कुछ ही पल में बड़े-बड़े भवन ताश के पत्तों की तरह ढह गए। और.पलक झपकते ही इतिहास बन गया 'रामबाड़ा'।

Saturday, 3 May 2014

Yamunotri still in the shadow of controversy!

गंगोत्री व यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ ही दोनों धामों में मानव हलचल भी शुरू हो गई है। हालांकि दोनों धामों में कपाट खुलने पर इस बार पहले जैसी रौनक नजर नहीं आई। जो यात्री पहले दिन यहां पहुंचे वे भी खामियों से निराश नजर आए।

शुक्रवार की सुबह जब गंगोत्री धाम के कपाट खुले तो मंदिर परिसर में एक हजार से अधिक लोग मौजूद रहे। इनमें करीब सौ यात्री बाहर के व अन्य स्थानीय श्रद्धालु, व्यवसायी, कर्मचारी व साधू संत शामिल थे। कम तादाद के बावजूद श्रद्धालुओं को गंगोत्री में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। देहरादून से पहुंचे रमेश कुमार व कनाडा से पहुंची एड्रोईया ने बताया कि यात्रा को जैसा सरकार ने प्रोजेक्ट किया है, वैसा कुछ भी नहीं है। यहां का कुदरती सौंदर्य अनोखा है, लेकिन सुविधाएं निराश करती हैं।

अन्नपूर्णा मंदिर के कपाट खुले-

अक्षय तृतीया पर्व पर डोडीताल स्थित मां अन्नपूर्णा मंदिर के कपाट भी श्रद्धालुओं के लिए खोले। बीते गुरुवार को ही केलसू क्षेत्र के लोग देवडोलियों के साथ डोडीताल पहुंच गए थे। अगोड़ा, गजोली, आदि से भी लोग आराध्यों की डोलियों को साथ ले गए।

यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के मौके पर एक बार फिर विवाद की छाया दिखाई पड़ी। पहले से नियत समय को बदलकर अंतिम समय पर कपाट खोले जाने का मुहूर्त बदल दिया गया। हालांकि तीर्थ पुरोहित इसके पीछे अभिजीत मुहुर्त बता रहे हैं, लेकिन दबी जुबान में मंदिर समिति में चल रहे विवाद को कारण बताया जा रहा है।

शुक्रवार की सुबह तक यमुनोत्री के तीर्थ पुरोहितों के गांव खरसाली में डोली यात्रा की तैयारियां पूरी कर ली गई थी। सुबह आठ बजे जैसे ही यमुना व शनिदेव की डोलियां उठाई जाने लगी तो कुछ तीर्थ पुरोहितों में आपस में सुगबुगाहट होने लगी। कुछ ही देर में पुरोहित परिवार से जुड़े एक सदस्य ने धाम के कपाट खुलने का समय दोपहर 11.55 के स्थान पर 12.25 किए जाने की ऐलान कर डाला। इसके बाद डोली यात्रा यमुनोत्री की ओर रवाना हो गई। इससे पहले यमुनोत्री धाम में भी कपाट खुलने के समय को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा बनी रही। हालांकि पुरोहितों ने पंचांग के अनुसार ही समय बदले जाने की बात कही। बता दें कि इसी विवाद के चलते बीते साल तक धाम में दो समानांतर मंदिर समितियां खड़ी हो गई थी। 

Tuesday, 1 April 2014

Vaishno devi devotees were buzzing court

प्रथम नवरात्र पर आधार शिविर कटड़ा में श्रद्धालुओं की खूब चहल पहल देखने को मिली। श्रद्धालु श्रद्धाभाव के साथ मां के दर्शनों के लिए प्रस्थान कर रहे थे। मां वैष्णो देवी का भवन भी श्रद्धालुओं से गुलजार रहा।

श्रद्धालुओं ने नवरात्र पर मां वैष्णो देवी की दिव्य पींडियों के आगे नतमस्तक होकर अपने परिवार की सुख शांति की कामना की। वहीं, पवित्र चैत्र नवरात्र पर जनता कटड़ा दुर्गा समिति द्वारा विशेष पूजा अर्चना के लिए बनाए गए पंडाल में मां की अखंड ज्योति विधिपूर्वक पूर्व प्रधानाचार्य ब्रह्मस्वरूप द्वारा स्थापित कर दी गई। इससे पहले अखंड ज्योति को भवन से प्रज्जवलित कर रघुनाथ मंदिर में लाया गया।

यहां से स्थानीय लोगों ने विशाल शोभायात्रा निकाल कर अखंड ज्योति को मुख्य बस अड्डे पर स्थित पंडाल तक लाया। शोभा यात्रा अपर बाजार, मुख्य बाजार से होती हुई पंडाल में संपन्न हुई। शोभा यात्रा में बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों सहित मां वैष्णो देवी को आने वाले श्रद्धालु शामिल थे। वहीं, बोर्ड प्रशासन के अधिकारियों का कहना था कि नवरात्र के दौरान मां वैष्णो देवी की भीड़ में दिन प्रतिदिन बढ़ोतरी होने की संभावना है। इसलिए बोर्ड प्रशासन पूरी तरह से सतर्क है। समाचार लिखे जाने तक प्रथम नवरात्र पर करीब पच्चीस हजार श्रद्धालु अपना पंजीकरण करवा कर भवन की ओर रवाना हो चुके थे।

दरबार में शतचंडी महायज्ञ का शुभारंभ-

चैत्र नवरात्र को लेकर वैष्णो देवी भवन पर हर साल की तरह इस वर्ष भी श्री माता वैष्णो देवी श्रइन बोर्ड की ओर से शत चंडी महायज्ञ का शुभारंभ किया गया। प्रधान पंडित डॉ. विश्वमूर्ति शास्त्री की देखरेख में 51 प्रकांड पंडित पवित्र नवरात्र में हवन यज्ञ व पूजा अर्चना करेंगे। इस मौके पर बोर्ड प्रशासन के सीईओ एमके भंडारी ने बतौर मुख्य अतिथि यज्ञ का श्रीगणोश किया। भवन पर आए श्रद्धालुओं ने भी यज्ञशाला में हुई पूजा अर्चना में भाग लिया।

चैत्र नवरात्र का शुभारंभ होते ही आधार शिविर रनसू शिवखोड़ी में श्रद्धालुओं की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है। गुफा परिसर में पहले नवरात्र से अखंड च्योति जल रही है, जिसमें श्रद्धालु पूजा-अर्चना करने के बाद गुफा के अंदर भोले शंकर के दर्शन के लिए आगे बढ़ रहे हैं। श्रद्धालु बाबा की एक झलक पाने के लिए लंबी कतारों में खड़े होकर बम-बम भोले के जयघोष लगा रहे हैं।

परिवार सहित जम्मू के विभिन्न धार्मिक स्थलों के दर्शन के करने के लिए आए श्रद्धालु अशोक गुप्ता, राम गुप्ता, सोहन शर्मा, संदीप शर्मा का कहना था कि उनके घर से निकले पंद्रह दिन हो गए हैं। इस दौरान उन्होंने माता वैष्णो देवी के दर्शन करने के बाद शिवखोड़ी भोले बाबा के दर्शन किए हैं। श्रद्धालुओं के चेहरों पर काफी खुशी देखने को मिल रही है। श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की कोई परेशानी न हो, इसके लिए प्रशासन व शिवखोड़ी श्रइन बोर्ड की तरफ से व्यापक प्रबंध किए गए हैं। श्रद्धालुओं की हर सुविधा का पूरा ख्याल रखा जा रहा है। शिवखोड़ी श्रइन बोर्ड रनसू के मैनेजर अजीत कुमार का कहना था कि श्रद्धालुओं के खाने-पीने, रहने व सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। उन्होंने कहा कि श्रद्धालु बाबा के दर्शन करने के लिए कतारों में खड़े होकर गुफा की ओर बढ़ रहे हैं।

Wednesday, 26 March 2014

Baba Amarnath Yatra helicopter for booking 27

बाबा अमरनाथ यात्रा के लिए हेलीकॉप्टर की आनलाइन टिकट बुकिंग 27 मार्च सुबह दस बजे शुरू होगी। श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड ने नीलग्रथ बालटाल-पंजतरणी के बीच पवन हंस लिमिटेड व ग्लोबल विकट्रा हेलीकॉर्प लिमिटेड की हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध करवाने का प्रबंध किया है, जबकि पहलगाम-पंजतरणी के बीच हिमालयन हेली सर्विस प्राइवेट लिमिटेड की हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध रहेगी।

यह जानकारी बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी नवीन कुमार चौधरी ने दी। उन्होंने बताया कि हेलीकॉप्टर की आनलाइन बुकिंग 27 मार्च से संबंधित कंपनियों की वेबसाइट से उपलब्ध होगी। बालटाल से पंजतरणी का किराया 1950 रुपये और पहलगाम से पंजतरणी का किराया 4190 रुपये निर्धारित किया गया है। हेलीकॉप्टर सेवा हासिल करने वाले श्रद्धालुओं को एडवांस पंजीकरण नहीं करवाना पड़ेगा, लेकिन यात्रियों को स्वास्थ्य प्रमाणपत्र उपलब्ध करवाना होगा। स्वास्थ्य प्रमाणपत्र उपलब्ध न करवाने पर हेलीकॉप्टर सेवा का बोर्डिग पास नहीं मिलेगा। इसके साथ ही एक डेबिट व क्रेडिट कार्ड पर अधिकतर पांच श्रद्धालुओं की टिकट की बुकिंग हो सकेगी।

गौरतलब है कि बाबा अमरनाथ यात्रा के लिए पंजीकरण शुरू है। यह यात्रा 28 जून से शुरू होगी। यात्रा 44 दिनों तक चलेगी और दस अगस्त को संपन्न होगी। जम्मू-कश्मीर सहित देश के कई पंजीकरण केंद्रों पर लोग उत्साह से बाबा अमरनाथ यात्रा पर जाने के लिए पंजकीरण करवा रहे हैं। यात्रा के लिए दो मार्ग हैं बालटाल और पहलगाम। दोनों रास्तों से लोग पंजीकरण करवा रहे हैं।

Wednesday, 12 March 2014

Splashes of colors beaten in Vrindavan Kunjaglion

रंगभरनी एकादशी पर वृंदावन में रंगों से खेली जाने वाली होली की शुरूआत हुई। होली की रंगीली फुहार सुबह पांच हजार से अधिक मंदिरों में शुरु हुई तो भक्त कान्हा संग होली खेल निहाल हो गये।

बांके बिहारी मंदिर में सुबह आरती के बाद जैसे ही जय कन्हैया लाल की जयकार लगी भक्तों और सेवायतों ने चटकीले रंग, अबीर और गुलाल की वर्षा शुरू कर दी। लोगों ने प्रेम भाव में एक दूसरे को गुलाल लगाया तो घंटों रंग मंदिर प्रांगण में उडता रहा। जिस पर रंग गिरा वह भी निहाल और जिस पर नहीं गिरा वह भी खुशहाल। भक्तिभाव में डूबे श्रद्वालु प्रिय कान्हा संग होली खेलने को मंदिर में खडे रहना चाहते थे लेकिन व्यवस्था ऐसी कि निजी गार्ड सबको विधिवत दर्शन के बाद ज्यादा देर खडे़ न रहने की ताकीद देते विनम्रता से करते देखे गये।

सड़कों पर उड़ा रंग और गुलाल

परंपरा के अनुसार एकादशी से वृंदावन में होली पर्व और रंग खेलने की शुरुआत हो जाती है। परंपरा भले ही सैकडों साल पुरानी है लेकिन इसमें कोई कोताही नहीं होती। आज के दिन कोई भी ब्रजवासी और बाहरी शहरों से आने वाले भक्त रंग में सराबोर होने को लालायित रहे। शहर की कुंज गलिया हों या पिफर सड़कें या पिफर परिक्रमा मार्ग सभी जगह रंग ही रग बिखराता रहा।

पिचकारी से खेली बांके बिहारी ने होली

बांके बिहारी मंदिर में बिहारीजी अबीर गुलाल के बाद रंगों से सैकड़ों साल पुरानी और विशाल पिचकारी से होली खेली। मंदिर के सेवायतों ने बताया कि सुबह रंग गुलाल, अबीर और दोपहर को रंग से बिहारीजी के साथ भक्तों ने होली खेली। ऐसे में देसी श्रद्वालुओं के साथ विदेशी भी निहाल हो जय श्रीकृष्णा के जयकार लगाते देखे गये।

पांच लाख की भीड़ से सड़कें जाम

वृंदावन में बुधवार को भक्तों की भीड़ का प्रभाव बडे पैमाने पर देखा गया। करीब पांच लाख लोगों की भीड के आने का अनुमान लगाया जा रहा है। भीड़ के कारण सड़को और गलियों तक में जगह जगह जाम के हालात बनते रहे। जब कि सप्त देवालयों के आसपास और ठा. बांके बिहारी मंदिर जाने वाले मार्गो दुसायत, वीआइपी पार्किंग, विध्यापीठ, हरिनिकुज, रतन छतरी, रमणरेती, गांधी मार्ग, किशोरपुरा में भारी भीड़ देखी गई।

Tuesday, 11 March 2014

Amalaki ekadashi 2014

आमल की एकादशी फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। आंवले के वृक्ष में भगवान का निवास होता हैं इसलिए इस दिन आंवले के वृक्ष के नीचे बैठकर भगवान का पूजन किया जाता हैं। आंवला विष्णु भगवान का प्रिय फल है।

आमल की एकादशी एक पवित्र हिन्दू पर्व है। इस दिन अमला को भगवान विष्णु लक्ष्मी के रूप में पूजा जाता है। आमल की एकादशी व्रत फाल्गुन शुक्ल पक्ष को एकादशी के दिन किया जाता। ऐसा माना जाता है कि एकादशी समस्त पाप नाश करने में समर्थ है। सौ गाय दान करने का जो फल होता है वही फल आमल की एकादशी करने से प्राप्त होता है।

अमला एकादशी पूजा

अमला एकादशी भी आमल की एकादशी के रूप में जाना जाता है। इसे फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन पर रखा जाता है। इस साल, आंवला एकादशी 12 मार्च 2014 को मनाया जाएगा। यह अमला एकादशी पापों के सभी प्रकार से व्यक्ति को मुक्त कर देते है।

माना जाता है कि आंवला पेड़ भगवान विष्णु के चेहरे से उत्पन्न माना जाता है। इस दिन आंवला के पेड़ में जल चढ़ाना चाहिए। इसके बाद धूप, चंदन, रोली, फूल, आदि से पूजन करना चाहिए। आंवला के पेड़ के नीचे ब्राहमणों को भोजन कराना चाहिए। भगवान विष्णु के भक्त एकादशी व्रत करते हैं। इसमें आंवले के पेड़ की पूजा होती है। ऐसा माना जाता है कि जो एकादशी की रात में भगवान विष्णु के आगे वैष्णव भक्तों के समीप गीता और विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ करता है, वह उस परम धाम में जाता है, जहां साक्षात् भगवान नारायण विराजमान हैं।

अमला की एकादशी पर चौघड़िया मुहूर्त।

इस बार संवत 2070 चैत्र शुक्ल पक्ष 12 मार्च 2014 [बुधवार] को अमला एकादशी मनाई जाएगी।

अगले दिन पाराना समय- 06: 52

17: 32 पाराना दिन द्वादशी समाप्ति पल पर

एकादशी तिथि 11 मार्च 2014 पर- 00: 40 पर शुरू होता है।

एकादशी तिथि 12 मार्च 2014 के 15: 11 पर समाप्त होता है।

फाल्गुन शुक्ल पक्ष एकादशी अमला एकादशी के रूप में जाना जाता है। अमला एकादशी महा शिवरात्रि व होली के बीच पड़ता है। वर्तमान में यह अंग्रेजी में फरवरी या मार्च के महीने में मनाया जाता है।

एकादशी व्रत विधि-

दशमी की रात्रि को पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करें तथा भोग विलास से भी दूर रहें। प्रात: एकादशी को लकड़ी का दातुन तथा पेस्ट का उपयोग न करें; नींबू, जामुन या आम के पत्ते लेकर चबा लें और उंगली से कंठ शुद्ध कर लें। वृक्ष से पत्ता तोड़ना भी वर्जित है, अत: स्वयं गिरे हुए पत्ते का सेवन करे। यदि यह सम्भव न हो तो पानी से बारह कुल्ले कर लें। फिर स्नानादि कर आंवले के पेड़ के नीचे जाकर पूजा करें गीता पाठ करें या पुरोहितादि से श्रवण करें।

विष्णु के द्वादश अक्षर मंत्र अथवा गुरुमंत्र का जाप करें।

महात्म-

जिन्होंने श्रीहरि के व्रत किया है, उन्होंने चारों वेदों का स्वाध्याय, देवताओं का पूजन, यज्ञों का अनुष्ठान तथा सब तीर्थो में स्नान कर लिया। श्रीकृष्ण से बढ़कर कोई देवता नहीं है और एकादशी व्रत के समान दूसरा कोई व्रत नहीं है। जहां भागवत शास्त्र है, भगवान विष्णु के लिए जहां जागरण किया जाता है और जहां शालीग्राम शिला स्थित होती है, वहां साक्षात् भगवान विष्णु उपस्थित होते हैं ।

व्रत खोलने की विधि-

द्वादशी को सेवापूजा की जगह पर बैठकर भुने हुए सात चनों के चौदह टुकड़े करके अपने सिर के पीछे फेंकना चाहिए। मेरे सात जन्मों के शारीरिक, वाचिक और मानसिक पाप नष्ट हुए - यह भावना करके सात अंजलि जल पीना और चने के सात दाने खाकर व्रत खोलना चाहिए ।

अमला एकादशी के बारे में एक कथा प्रचलित है।

कथा- प्राचीन काल में भारत में चित्रसेन नामक राजा राज्य करता था । उनके राज्य में एकादशी व्रत का प्रचलन था। प्रजा एवं राजा एकादशी का व्रत रखते थें। एक दिन राजा चित्रसेन शिकार खेलते खेलते दूर निकल गए। वहां पर जंगली जातियों ने उन पर आक्रमण कर दिया। उनके शस्त्रों-अस्त्रों का उनपर कोई प्रभाव नही पड़ा। देखते- देखते जंगली जाति के आदमियों की संख्या बढ़ गई। तो उनके आक्रमण से राजा चित्रसेन संज्ञाहीन होकर पृथ्वी पर गिर पडे़। पृथ्वी पर गिरते ही राजा के शरीर से एक दिव्य शक्ति प्रकट हुई जो समस्त राक्षसों को मारकर अदृष्य हो गई। जब राजा की मुर्छा टुटी तो उन्हे सब राक्षस मृत पडे़ दिखाई दिये। वे बडे़ आश्चर्य में पड़कर सोचने लगे कि इन्हें किसने मारा है तभी आकाशवाणी हुई, ये समस्त राक्षस तुम्हारे आमला एकादशी व्रत के प्रभाव के कारण मारे गए हैं। यह सुनकर राजा बहुत प्रसन्न हुआ तथा अपने राज्य में उसने आमला एकादशी के व्रत का प्रचार करवाया।

[प्रीति झा]

Monday, 10 March 2014

All fought street surrounded belle, beauty Chhay's pants

वसंत का अहसास कराता मौसम। रविवार को सूरज चढ़ा तो बरसाने की चमक ही निराली थी। बरसाना की होली में गुलाल बरसने लगा। आसमां ने गुलाबी आभा ले ली। होरी के रसियाओं का रस बरसना शुरू हुआ तो, तो छठा बदलने लगी। फाग खेलन बरसाने आयो है, नटवर नंद किशोर.घेर लई सब गली रंगीली, छाय रही है छटा छबीली की टेर के बीच छबीली गली में हुरियारिनों की प्रेम पगी लाठियां नंदगांव के हुरियारों पर बरसने लगीं।

इसमें सुबह नंदगांव के हुरियारों के, तो शाम बरसाना की हुरियारिनों के नाम रही। ब्रज की इस लठामार होली के साक्षी बने देश-विदेश से आए हजारों श्रद्धालु इस होरी को देखकर भाव-विभोर हो गए। रविवार सुबह जयपुरी फेंटा और हाथों में ढाल, पिचकारी लेकर हुरियारों के टोल नंदबाबा मंदिर पहुंचे। वहां से टोलियां बरसाने निकल पड़ीं। बुजुर्ग हुरियारे भी फाग की मस्ती में मस्त थे। मस्ती में पता ही नहीं चला कि नंदगांव से बरसाना की आठ किमी दूरी कब खत्म हो गई। शाम को श्री राधा के धाम में सूर्य देव छिपने की तैयारी में थे। लेकिन रंग-बिरंगे वेश में सजे नंदगांव के ग्वालों (हुरियारों) के चेहरे पर मुस्कान तैर रही थी। एक ओर ये हुरियारे, दूसरी तरफ लहंगा-ओढ़नी से सजी श्री राधारानी की सखी गोपियां। ग्वालों के हाथ में ढाल, तो हुरियारिनों (गोपियों) के हाथों में लंबी सजीली लाठियां। हुरियारों को छेड़ते देख लंबी घूंघट काढ़े गोपियां कभी सकुचातीं, कभी मुस्कातीं, कभी नैनन के बाण चलातीं। गोपियां लाठी की तरफ इशारा करतीं, तो हुरियारे ढाल दिखाते। एक हुरियारे ने शरारती अंदाज में हुरियारिनों को होली खेलने का इशारा किया। तुरंत आवाज आई ़आ लाला तो कूं खिलाऊं मैं होली।़

इसके साथ ही गोपियों ने ग्वालों पर प्रेम से सराबोर लाठियों की बरसात शुरू कर दी। इससे कान्हा के सखा घुटनों के बल बैठने को विवश हो गए। सिर पर ढाल रखे हुरियारों पर लाठियां पड़ रही थीं। होली की खुमारी में मस्त हुरियारे बड़े आनंद से लाठियां खा रहे थे। कुछ बचने की कोशिश करते, तो हुरियारिनें उन्हें घेर लेतीं। कुछ हुरियारे ़.मत मारे दृगन की चोट, रसिया होरी में, मेरे लग जाएगी।़ गाकर मनुहार भी करते। बरसाना के हुरियारे सोमवार को नंदगांव में बदले की होली खेलने जाएंगे।

The range of wound healing sticks fighter

राधा और कान्हा की लीला की पावन भूमि की रज भी चमत्कारिक है। बरसाने की धूल में भी मरहम है। ऐसा महरम जो सखियों की प्रेम पगी लाठियों की मार को भी पल भर में छू मंतर कर दे।

लठामार होली के घाव को भरने वाली ये रज राधा जी के चरणों की है। जिसे दुनिया भर के लोग मस्तक पर लगाकर अपने धन्य कर रहे हैं। यहां तक कि गलियों से रज समेटकर श्रद्धालु अपने घरों को ले जा रहे हैं।

ब्रह्मांचल पर्वत के शिखर पर विराजमान राधाजी सुबह से ही होली के रंगों की बौछार देख खुश हो रही थीं। राधाजी के आंगन में उठ रही राधे जू की जयघोष की गूंज से बरसाना गुंजायमान था।

सूरज ढल रहा था। मंदिर में समाज गायन के सुर थम गए और श्रद्धालुओं का रेला रंगीली गली में आ गया। हुरियारिन भी सज संवरकर आ गईं। लाठ लेकर रंगीली गली में ठाड़ी हुरियारिनों को देख नंदगांव के हुरियारों के टोल के टोल भांग की लहरों में झूमते गाते चले आ रहे थे। हुरियारिनों को देखकर वे हास परिहास करने लगे। हुरियारिन भी कम नहीं पड़ रही थी। वे भी रसिया का जवाब रसिया से दे रही थीं। तड़ातड़ चारों दिशाओं में गूंज रही थी। अगले ही पल लाठियों की चोट से हुरियारों के कसक हो गई। वे दर्द से कराहे, मगर सिर्फ कुछ देर। राधा जी के चरणों की धूल कसक पर लगाई और हो गया दर्द दूर।

ब्रजाचार्य पीठ पीठाधीश्वर गोस्वामी दीपक राज भट्ट ने बताया कि लठामार होली के साथ ही राधा जी ने यहां की धूल को लाठियों की चोट को दूर करने की दवा बना दिया था। इस धूल में चमत्कार भी है और इसका वैज्ञानिक कारण भी। सखियां अपने पांव में महावर लगती हैं। महावर में मरकरी और पोटेशियम परमैग्नेट मिला होता है। कैल्शियम के अलावा एंटी बायोटिक तत्व भी धूल में होते हैं। सखियों की महावर के कदम पड़ने से धूल हुरियारों के लिए मरहम बन रही है।

लठ्ठ मार मांगा प्रेम का नेग-

बरसाना-

नंदगांव के हुरियाराें पर लाठियां बरसाने के बाद हुरियारिनों को जैसे ही मौका मिलता, किसी न किसी की ओर उछाल देतीं लठ्ठ। दर्शक भी यहां की परंपरा और मान्यता से परिचित हैं, लिहाजा तत्काल ही जेब से निकालकर देते रुपये। बाहर के दर्शक भी देखादेखी रुपये दे देता। इस परंपरा से अनजान लोग जब पूछते, तो बता दिया जाता कि नेग है।

दरअसल, मान्यता है कि हुरियारनें जिसके सिर पर लाठी का स्पर्श करा दें, वह अत्यंत सौभाग्यशाली माना जाता है। इसलिए श्रद्धालु हुरियारिनों से सिर पर लाठी का स्पर्श कराते हैं। वे नेग में रुपए अथवा उपहार भी देते हैं। हुरियारिनों को जैसे ही कोई बुजुर्ग दिखाई देता, उनके चरण भी स्पर्श करती रहीं।

Friday, 7 March 2014

Sage reminder of an era of

सरयू तट पर स्थित लक्ष्मण किला में इन दिनों पूर्व आचार्य एवं रामकथा की शास्त्रीय धारा के दिग्गज विद्वान स्वामी सीतारामशरण की 17वीं पुण्यतिथि मनाई जा रही है। स्मृति दिवस की शुरुआत सोमवार को रहस्योपासना के प्रतिनिधि ग्रंथों नामकांति, रूपकांति, लीलाकांति, धामकांति आदि के पारायण से हुई।

वर्तमान लक्ष्मण किलाधीश एवं दिवंगत आचार्य के शिष्य महंत मैथिलीरमण शरण ने बताया कि 10 मार्च को श्रद्धांजलि सभा एवं वृहद भंडारा के साथ पुण्यतिथि के कार्यक्रम का समापन होगा।

लक्ष्मण किलाधीश स्वामी सीतारामशरण को याद करना संतत्व के एक युग का स्मरण है। यद्यपि उनकी प्रतिभा दुनियादारी के किसी भी आयाम में लगकर अपना लोहा मनवा सकती थी किंतु उन्होंने तरुणाई में ही संतत्व की जो राह अख्तियार की, उससे कभी विचलित नहीं हुए। बिहार प्रांत के पटना जिलांतर्गत अपनी समृद्ध पैतृकता को तिलांजलि देकर अयोध्या आए स्वामी जी यहीं के होकर रह गए।

राम भक्ति के साथ उनका मन रामकथा के प्रसंगों में बखूबी रमा और शीघ्र ही उन्होंने अपनी पहचान तेजस्वी साधक व रामकथा के मार्मिक व्याख्याकार की बनाई। 1957 में प्रतिष्ठित पीठ लक्ष्मण किला की महंती संभालने के साथ उन्होंने धर्म, संस्कृति एवं अध्यात्म को संस्थाबद्ध भी किया। इस बीच उनका प्रभामंडल रामनगरी से आगे बढ़ता हुआ संपूर्ण सनातन जगत में स्थापित हुआ। वे स्वामी अखंडानंद एवं करपात्री जी के साथ संतों की शीर्ष त्रिमूर्ति में से एक माने जाते रहे। बीएचयू में बाल्मीकि रामायण पर उनका व्याख्यान मील का पत्थर माना जाता है। कहां तो वह गए थे एक सत्र को संबोधित करने पर साहित्य-संस्कृति के युवा अध्येताओं एवं अध्यापकों पर उनकी ऐसी छाप पड़ी कि दशकों तक उन्हें व्याख्यान के लिए विश्वविद्यालय आमंत्रित किया जाता रहा। 1973 में उन्होंने अयोध्या से सीतामढ़ी तक ऐसी रामबारात निकाली, जिसकी मिसाल आज भी दी जाती है। बिहार के तत्कालीन राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री आदि ने बारात का राजकीय सम्मान किया और बारात की शोभा-सजावट कुछ वैसी झलक पेश करने वाली थी, जैसी त्रेता में भगवान राम की बारात रही होगी।

1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के समय जब मंदिरों के अधिग्रहण की आशंका छिड़ी तो वे किलाधीश ही थे, जिनकी मध्यस्थता में अधिग्रहण का बादल छटा। उनके इस प्रभाव के पीछे प्रवचन के फलक पर उनकी राष्ट्रीय ख्याति और बड़ी संख्या में शिष्यों प्रशंसकों की फौज रही। 1997 में इहलीला का संवरण करते हुए सांस्कृतिक-आध्यात्मिक जगत में ऐसी शून्यता छोड़ी, जिसे 17 वर्षो बाद भी महसूस किया जा रहा है।

Seven-day international is Shivaratri Festival

अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि मेले में शिवरात्रि महोत्सव की तीसरी व आखिरी शाही जलेब देव छांजणू व छमाहूं के नेतृत्व में वीरवार को निकली। आखिरी जलेब के साथ ही शिवरात्रि महोत्सव भी संपन्न हो गया।

शाही जलेब में बतौर मुख्य अतिथि राज्यपाल उर्मिला सिंह ने भाग लिया। शाही जलेब निकलने से पहले राज्यपाल उर्मिला सिंह ने अराध्य देव राज माधवराय के मंदिर में पूजा-अर्चना की। इसके बाद बाबा भूतनाथ मंदिर जाकर पूजा की। दोनों जगह पूजा करने के बाद उन्होंने शाही जलेब में भाग लिया। शाही जलेब अराध्य देव राज माधव राय के मंदिर से निकली जो चौहाटा होकर समखेतर बाजार से घूमती हुई दोबारा चौहाटा पहुंची। जहां से राज्यपाल उर्मिला सिंह ने जलेब में शिरकत की। जलेब में अराध्य देव राज माधो राय की पालकी संग अन्य देवी-देवता पड्डल पहुंचे।

राज माधव राय ने देवी-देवताओं के साथ की मिलनी-

शिवरात्रि महोत्सव के आगाज पर सभी देवी-देवताओं ने अराध्य देव राज माधव राय के दरबार में जाकर हाजिरी भरी थी। मगर शिवरात्रि महोत्सव के समापन पर राज माधव राय ने चौहाटा जातर के दौरान देवी-देवताओं से मिलनी की और उन्हें विदाई दी। इसके लिए राज माधव राय अपनी पालकी पर विराजमान होकर चौहटा पहुंचे और देवी-देवताओं को विदाई दी।

चौहाटा जातर के दौरान सभी देवी-देवता मंडी शहर के मुख्य बाजार चौहाटा पर विराजमान होते हैं और यहीं पर राज माधव राय पहुंचे और उन्होंने देवी-देवताओं के बीच जाकर उन्हें विदा किया।

देव कमरूनाग ने पुलिस पहरे में दिए दर्शन-चौहाटा जातर के समय चानणी परिसर में विराजमान देव कमरूनाग के दर्शन पुलिस पहरे में हुए। देव कमरूनाग के दर्शनों के लिए भीड़ उमड़ी रही। शिवरात्रि महोत्सव के दौरान देव कमरूनाग टारना मंदिर में ही विराजमान रहते हैं। मगर चौहाटा जातर के दौरान देव कमरूनाग शहर में पहुंचते हैं। मगर यहां भी देवता अन्य देवी-देवताओं के साथ नहीं बैठता है। देव कमरूनाग सेरी चानणी परिसर में ही विराजमान होते हैं। जहां वीरवार को देवता दर्शनों के लिए कुछ समय बैठे।..

Friday, 28 February 2014

Mahadev been Indradev Jalabhishek

देवों के देव महादेव के महापर्व शिवरात्रि पर न केवल नर नारी बल्कि देवगण भी अर्चना प्रस्तुत करते नजर आए। महाशिवरात्रि पर सुबह से ठहर-ठहर कर बारिश होती रही। ऐसा लगा मानों इंद्रदेव स्वयं महादेव को जलाभिषेक करने को आतुर हों। वहीं मंदिरों और शिवालयों में दिनभर भक्तों का तांता लगा रहा। इस दौरान शिवभक्त अपने आराध्य का अभिषेक करते रहे।

मंदिर परिसरों में दिनभर बोल बम और हर-हर महादेव के जयकारे गूंजते रहे। भक्तों ने दूध व जल से अभिषेक कर शमी, धतूरा, बेलपत्रों से महादेव का श्रृंगार किया। वहीं हजारों भक्तों ने मंदिरों में रातभर जागकर महाशिवरात्रि मनाई। इस दौरान रात भर भक्त भजन कीर्तन व मंत्रोच्चार के जरिए शिव आराधना में लीन रहे। वहीं मंदिरों और शहर की तमाम संस्थाओं की ओर से शिव बरात निकाली गई। बरसात के बीच निकाली गई शिवबरात में भूत, पिचाश और औघड़ों का भेष धरे तमाम बाराती शामिल रहे।

शिवकुटी स्थित शंकर जी की कचहरी, शिव कोटेश्वर महोदव, कमौरी नाथ महादेव, मनकामेश्वर महादेव, तक्षकेश्वर महादेव, ऋणमुक्तेश्वर महादेव, सिविल लाइंस स्थित हनुमत निकेतन में भगवान शिवमंदिर, पंचमुखी महादेव, दशाश्वमेघ महादेव, छतनाग स्थित छतनाग महादेव, झूंसी स्थित गंगोली शिवाला महादेव, करछना स्थित समोगर नाथ महादेव आदि मंदिरों पर दिनभर शिवभक्तों का तांता लगा रहा। माघ मेला प्रशासन पंडाल में विशेष पूजापाठ एवं हवन का आयोजन हुआ।

युवा चौरसिया समाज सेवा समिति की ओर से बजे पान दरीबा शिवमंदिर, नेपाली धर्म समाज की ओर से गंगानगर में, जय शिव सेना लूकरगंज, सत्ती चौरा चढ़ान मालवीय नगर, श्रीश्री भोले बाबा मंदिर समिति बादशाही मंडी, हरिहर आरती समिति, श्रीनारायण आध्यात्मिक ज्योतिषपीठ नर्मदेश्वर महादेव बेनीगंज, शिवशक्ति सेना का अखाड़ा त्रिशूल नंदी दर्शन, शोभायात्र कमौरी महादेव मंदिर सिद्धपीठ भोलेगिरि मंदिर कटघर प्रयाग, श्री निम्बार्क आश्रम रामबाग में शिवरात्रि पर भीड़ रही। सिद्धपीठ मां ललिता देवी मंदिर स्थित ललितेश्वर महादेव का भांग धतूरा एवं पुष्प के आभूषणों से श्रृंगार किया गया। शाम को महामंत्री धीरज नागर, सुमित श्रीवास्तव, पीसी वर्मा, अनुराग चंद्रा, शिवनाथ शर्मा, अशोक मिश्र की देखरेख में भजन एवं भंडारा आयोजित किया। दशाश्वमेघ महादेव, माधवेश्वर महादेव पर शंखनाद और घंटा घडियाल बजाकर संगम को विश्व धरोहर बनाए जाने की कामना की गई। इस मौके पर धर्मराज पांडेय, ध्रुवराज पांडेय, भक्तराज पांडेय, केसी पांडेय, विष्णु दयाल श्रीवास्तव, आशा, अनुपमा, विश्व धरोहर महाअभियान के संयोजक तीर्थराज पांडेय आदि मौजूद रहे।

हर हर महादेव प्राचीन शिवमंदिर मुंडेरा की ओर से सुबह रुद्राभिषेक के बाद शिवबरात निकाली गई। इस मौके पर स्वामी रामभद्र करपात्री बाबा, क्षेत्रीय विधायक पूजा पाल, व्यापार मंडल अध्यक्ष धनंजय सिंह, संयोजक राहुल सिंह आदि मौजूद रहे।1फाफामऊ प्रतिनिधि के अनुसार देवाधिदेव महादेव की आराधना और पूजन को लेकर क्षेत्र के शिवालयों में सुबह से ही भक्तों की भीड़ जुटी रही। यह क्त्रम देर शाम तक चलता रहा। बारिश में भीगते हुए शिवालयों तक जाना पड़ा। मगर आस्था के आगे बारिश का लोगों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। क्षेत्र के मलाकहरहर, शिवपुर, मोरहूं, गद्दोपुर, गोहरी, फाफामऊ गांव, शांतिपुरम कालोनी आदि स्थानों पर मौजूद शिवालयों में शिव शंकर के जयकारे लगाने के साथ शिवलिंग पर जलाभिषेक भी किए गए।1पड़िला महादेव में शुरू हुआ मेला1पांडेश्वर नाथ धाम पड़िला महादेव में गुरुवार भोर से ही चहल पहल रही। बरसात के बीच स्थानीय और आस-पास जिलों के हजारों की संख्या में भक्त जलाभिषेक करने पहुंचे।

इस दौरान हजारों लोगों ने झंडा, पताका और घंटा आदि का निशान भी चढ़ाया। देर शाम को महाआरती हुई और छप्पन भोग का प्रसाद चढ़ाया गया। इस मौके पर भजन कीर्तन आयोजित हुआ। इसमें कृष्ण कुमार गिरि, देवेंद्र गिरि, बिंदु गुप्ता, दीप नारायण, डॉ. धर्मराज यादव, शिवचंद्र यादव, जिलेदार शुक्ला, वरिष्ठ नारायण शुक्ला, सुजीत समेत सैकड़ों लोग मौजूद रहे। गुरुवार को व्यवस्था का जायजा लेने के लिए सांसद कपिलमुनि करवरिया पहुंचे।..


Monday, 24 February 2014

Amritanandamayi Math blaming the attack on Hindus

आरएसएस विचारक पी. परमेश्वरन ने झप्पी देने वाली अम्मा के रूप में प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु माता अमृतानंदमयी के मठ के खिलाफ उनकी पूर्व शिष्या द्वारा लगाए गए आरोपों को हिंदुओं पर हमला करार दिया है। उनका कहना है कि मठ के प्रति लोगों में श्रद्धा भाव कम करने के लिए ऐसी बातें फैलाई जा रही हैं।

अमृतानंदमयी की शिष्या रहीं आस्ट्रेलियाई मूल की गेल गायत्री ट्रेडवेल ने अपनी किताब 'होली हेल-ए मेमॉयर ऑफ फेथ, डिवोशन एंड प्योर मैडनेस' में माता और उनके मठ को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां की हैं।

इसी सिलसिले में भारतीय विचारकेंद्रम के निदेशक परमेश्वरन ने रविवार जारी बयान में कहा, मठ का चयन इसलिए किया गया क्योंकि अम्मा (अमृतानंदमयी) और मठ जाति, धर्म और क्षेत्र से उठकर अध्यात्मिकता और सेवा में रत हैं। केरल में मीडिया के एक तबके द्वारा मठ पर लगाए गए आरोपों के पीछे आध्यात्मिकता और सेवा के क्षेत्र में सक्त्रिय मठ के प्रति लोगों में श्रद्धा भाव को कम करना है। 1परमेश्वरन के मुताबिक, अभिव्यक्ति की आजादी का मतलब झूठ का प्रचार कर धार्मिक भावना को आहत करना नहीं है। ट्रेडवेल ने अपने संस्मरण में दावा किया है कि वह कई ऐसे राज जानती हैं, जिनके उजागर होने पर सनसनी फैल जाएगी। माता अमृतानंदमयी ने संस्मरण में लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज किया है।

Kripalu Maharaj's daughter officially assumed command

कृपालु महाराज के अपने धाम जाने के उनकी बड़ी बेटी डॉ. विशाखा त्रिपाठी ने प्रकल्पों को आगे बढ़ाने की कमान संभाल ली है। इसकी रविवार को आधिकारिक घोषणा हो गई। डॉ. विशाखा ने कहा कि 'प्रेम मंदिर' का निर्माण विश्व में प्रेम-धर्म की स्थापना के लिए किया गया है। साथ ही जगदगुरु के कई प्रकल्प भी चल रहे हैं। वह चाहेंगी कि यह अपना काम बेहतर ढंग से करते रहें।

डॉ. विशाखा ने कृपालु महाराज के औपचारिक रूप से काम संभालने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि ब्रज- वृंदावन से भगवान श्रीकृष्ण ने जगत को 'प्रेम' का संदेश दिया तो उनके भक्त कृपालु ने इस संदेश के सार को जगत के सामने रखने का खाका तैयार किया। 'प्रेम मंदिर' कृपालु द्वारा भगवान श्रीकृष्ण के प्रेम तत्व को साक्षात् रूप देने का एक छोटा प्रयास भर था। इसकी कल्पना उन्होंने दशकों पहले की। अपनी कल्पना को मूर्त रूप देने में कृपालु को कई साल लगे।

डॉ. विशाखा त्रिपाठी ने बताया कि विश्व भर में सनातन धर्म की पताका फराहने के साथ 'प्रेम मंदिर' निर्माण में किसी प्रकार की कोई कोताही न रहे, ऐसा प्रयास जगद्गुरु ने हमेशा किया।

प्रेम के इस संवाहक मंदिर के अलावा अत्याधुनिक सत्संग भवन, तीन सौ बेड का अस्पताल बनाने की योजना को मूर्तरूप मिलता, इससे पहले ही जगद्गुरु ने गोलोक धाम का रुख कर लिया। अब इसका जिम्मा वह संभाल रही हैं। उनका कहना है कि निराश्रित, दरिद्र नारायण सेवा, सत्संग भवन, अस्पताल निर्माण की व्यवस्था को उन्होंने गति देना शुरू कर दिया है। कृपालु परिषद की अध्यक्षा डॉ. विशाखा त्रिपाठी ने बताया कि मनगढ़ में 'श्रीभक्ति धाम', वृंदावन में 'श्री श्यामा श्याम धाम', बरसाना का 'रंगीली महल' और दिल्ली की राधा गोविंद समिति हैं। इन केंद्रों ने समाजसेवा में नये आयाम स्थापित किए। वृंदावन में 100 बेड वाला नि:शुल्क चिकित्सालय तीन महीने में शुरू कर दिया जाएगा। अत्याधुनिक मशीनों व विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा यहां हर रोग का उपचार होगा।

Sunday, 23 February 2014

Holly wears a bright white dress before Takurji

चल री लड्डूगोपाल कूं नई पोशाक लैं आवें.। वृंदावन की कुंज गलियों में महिलाओं के कुछ ऐसे ही बोल आजकल सुनाई दे रहे हैं। परंपरा के अनुसार होली से पहले घर-घर में लड्डू गोपाल को सफेद पोशाक पहनाई जाएगी। जबकि होली के बाद लाला रंगबिरंगी पोशाक धारण करते हैं।

वृंदावन और ब्रज में मौसम बदलने के साथ लाड़ले कन्हैया की पोशाक में बदलाव नजर आने लगा है। होली पर लड्डू गोपाल को नई पोशाक पहनाने को महिलाएं खरीदारी में जुट गई हैं। कारण वृंदावन में भगवान कृष्ण की घरों में बालक रूप में पूजा होती है। जिस तरह घरों में बालकों के खानपान और कपड़ों में मौसम के साथ बदलाव होता है, ठीक उसी तरह 'लाला' की परवरिश भी महिलाएं यशोदा मैया की तरह करती हैं। अब जबकि ब्रज में फागुनी बयार उड़ने लगी है तो महिलाओं को भी अपने लाड़ले के परिधान की चिंता सता रही है। स्थानीय निवासी रामनारायन बृजवासी का कहना है कि होली पर ठाकुरजी धवल सफेद वस्त्र ही धारण करेंगे। ताकि जो भी रंग उनके ऊपर चढ़े चटख दिखायी दे।

पर्व पर देसी-विदेशी भक्त उन्हें रंग से सराबोर देश मदमस्त हो जायें। बाजार के कई पोशाक विक्रेताओं ने बताया कि रेशम और बेलवेट की सफेद धवल पोशाक की बिक्री इन दिनों तेज हो गयी है।

पोशाक व्यापारी पुरुषोत्तम शर्मा का कहना है कि हर साल होली से पहले धवल पोशाक की बिक्त्री अधिक होती है। होली पर ठाकुर जी के सफेद परिधान पर पड़े चटख रंग श्रद्धालुओं को लुभाते हैं तो होली के बाद उनके आकर्षक परिधान। होली के बाद कान्हा शनील और वेलवेट के बने रत्‍‌न जड़ित परिधान धारण कर श्रद्धालुओं को भव्य दर्शन देंगे।

Thursday, 20 February 2014

Shri Amarnath Yatra 2014 Guidebook Released

राज्यपाल एनएन वोहरा ने मंगलवार को जम्मू, कश्मीर एंड लद्दाख टूरिज्म डेवलपमेंट कोऑपरेटिव लिमिटेड (जेकेएलटीडीसी) द्वारा तैयार की गई श्री अमरनाथ यात्रा-2014 गाइड बुक के दूसरे संस्करण का विमोचन किया।

उन्होंने जेकेएलटीडीसी के कार्य की सराहना करते हुए कहा कि यात्रा से संबंधित पुस्तक में दी गई समग्र देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए उपयोगी सिद्ध होगी। जेकेएलटीडीसी के चेयरमैन राजेश गुप्ता ने बताया कि गाइड में यात्रा के दौरान आने वाले स्थलों की जानकारी के अलावा, यात्रा रजिस्ट्रेशन सेंटर, ग्रुप रजिस्ट्रेशन, एनआरआई रजिस्ट्रेशन, स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी के अलावा यात्र के दौरान क्या करें, क्या न करें के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई है। गुप्ता ने बताया कि इसके अलावा गाइड में स्वास्थ्य प्रमाण पत्र हासिल करने के लिए क्या करना है, के बारे में भी बताया गया है। यही नहीं श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए गाइड में होटल के नंबर, हेलीकॉप्टर बुकिंग व अन्य सुविधाओं के बारे में भी जानकारी दी गई है।

इस अवसर पर श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड के सीईओ नवीन के चौधरी के अलावा कोऑपरेटिव के स. अमरीक सिंह, अजय कुमार गुप्ता, स. गुरमीत सिंह, एसएस मदनी, निशांत कुमार गुप्ता, एडवोकेट शकील अहमद सहित अन्य शामिल थे।

Nanda Devi Rajjat ??trip: visit of Faith Initiative Biswasbri

दुनिया की सबसे लंबी (280 किमी) दुर्गम पैदल यात्रा 'श्री नंदा देवी राजजात' को सुरक्षित एवं निरापद बनाने के लिए पर्यटन विभाग ने कमर कस ली है। लगभग 280 किमी की यह यात्रा 14 अगस्त को चमोली जनपद के नौटी गांव से प्रारंभ होकर छह सितंबर को विश्राम लेगी।

12 साल के अंतराल में होने वाली इस धार्मिक यात्रा से पूरी देवभूमि की आस्था जुड़ी हुई है। बता दें कि 2013 में राजजात उत्तराखंड में आई भीषण आपदा के कारण स्थगित कर दी गई थी। इसलिए इस बार इसका महत्व और भी बढ़ गया है। उम्मीद की जा रही है कि राजजात आपदा में बुरी तरह चरमरा गई सूबे की अर्थव्यवस्था के लिए संजीवनी का काम करेगी। साथ ही इससे पर्यटन एवं तीर्थाटन की नई संभावनाएं भी विकसित होंगी। इन्हीं तमाम बिंदुओं को ध्यान में रखकर पर्यटन विभाग अपनी तैयारियां कर रहा है।

'श्री नंदा राजजात-2014' के लिए पर्यटन विभाग को नोडल एजेंसी बनाया गया है। इसलिए जिम्मेदारियों का बोझ भी सबसे ज्यादा उसी पर है। उसे कार्य करने के साथ उनकी निगरानी भी रखनी है, ताकि यात्रापथ में कोई कमियां न रह जाएं। 12 साल के अंतराल में होने वाली आस्था की यह ऐसी यात्र है, जिससे संपूर्ण देवभूमि की भावनाएं जुड़ी हुई हैं। ऐसे में राजजात को निर्विघ्न संपन्न कराना किसी चुनौती से कम नहीं। एक तरफ आपदा में बुरी तरह क्षतिग्रस्त यात्रापथ को व्यवस्थित करने की चुनौती है तो दूसरी तरफ देश-दुनिया के सामने खुद को साबित करने की। यही वजह है कि पर्यटन विभाग राजजात की तैयारियों को लेकर खासा संजीदा है। कुरुड़-नंदकेशरी-वाण-बेदनी झील हेरिटेज एवं इको टूरिज्म सर्किट आठ करोड़ों नौटी-कांसुवा-चांदपुर गढ़ी-सेम हेरिटेज एवं इको टूरिज्म सर्किट आठ करोडों पौड़ी-चमोली में मार्गीय सुविधाएं- आठ करोड़ यात्रा पथ की सबसे बड़ी चुनौती निर्जन पड़ावों में जरूरी सुविधाएं जुटाने की है। पर्यावरण को कोई नुकसान न पहुंचे, इसलिए इन पड़ावों में 121 अस्थाई शौचालय बनाए जाएंगे। इसके लिए जिलाधिकारी चमोली पांच निर्जन पड़ाव सुझाए हैं।

रामचंद्र भारद्वाज, संयुक्त निदेशक, पर्यटन

राज्य आकस्मिकता निधि व राज्य सेक्टर से राजजात की अवस्थापना सुविधाओं के लिए वर्ष 2012-13 में पर्यटन विभाग ने 1941.48 लाख की धनराशि अवमुक्त की। इसमें से 1698.11 लाख की धनराशि कार्यदायी संस्थाओं को आवंटित हो चुकी है, जिससे 220 कार्य होने हैं। इससे पूर्व, 2011-12 में राज्य सेक्टर से यात्रा मार्ग के सुधार के लिए वन विभाग को 83.32 लाख की धनराशि आवंटित हो चुकी है।

Wednesday, 19 February 2014

Banke Bihari Temple

वृंदावन। जगप्रसिद्ध बांकेबिहारी और उनके भक्तों के बीच 'दीवाल' नजर नहीं आएगी। जगमोहन में तीन से अधिक सेवायतों के जाने पर मंदिर प्रबंध कमेटी ने रोक लगा दी है।

गत दिवस 'जागरण' में प्रकाशित खबर 'बांकेबिहारी और भक्तों के बीच 'दीवाल' सेवायत' का असर प्रबंध कमेटी के अध्यक्ष नंदकिशोर उपमन्यु के आदेश में देखने को मिला।

उपमन्यु ने सेवायतों को पत्र जारी कर दर्शन के दौरान नियम के अनुसार केवल तीन लोगों को ही ठाकुरजी के जगमोहन में मौजूद रहने की अनुमति दी गई है। उन्होंने कहा कि अगर इससे तीन से अधिक कोई व्यक्ति मंदिर के जगमोहन में दिखाई देगा, तो सेवा अधिकारी के ऊपर कार्रवाई की जाएगी। 

जगमोहन में मौजूद रहने वाले तीन लोगों में सेवायत हो या फिर मंदिर के भंडारी, केवल तीन लोग ही जगमोहन में श्रद्धालुओं की माला, प्रसाद लगाने के लिए मौजूद रहेंगे।

Tuesday, 18 February 2014

Governor calls for more facilities for Char Dham pilgrims

देहरादून, जागरण ब्यूरो। उत्तराखंड के राज्यपाल डॉ. अजीज कुरैशी का कहना है कि जिस तरह हज यात्रियों के लिए व्यवस्था की जाती है, उसी तरह चारधाम यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी आर्थिक सहायता व अन्य जरूरी सुविधाएं सुनिश्चित करने के लिए कोई प्रभावी फार्मूला या संसदीय कानून बनाया जाना चाहिए।

उन्होंने नई दिल्ली में राष्ट्रपति भवन में चल रहे राज्यपालों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए ये विचार व्यक्त किए। पर्वतीय राज्य उत्तराखंड के राज्यपाल डॉ. अजीज कुरैशी ने कहा कि चार धाम यात्रा को वैष्णोदेवी श्राइन बोर्ड और तिरुपति में चल रही व्यवस्था की तर्ज पर ही विकसित करना चाहिए। 

Thursday, 13 February 2014

Tarun sagar maharaj discourse


कड़वे प्रवचनों के लिए विख्यात राष्ट्र संत तरुण सागर महाराज ने बुधवार को कड़वी बातों में नसीहतें दीं। उन्होंने धन के पीछे नहीं भागने, इच्छाओं पर नियंत्रण करने और तपस्या में समस्या का समाधान छुपा होने की बात कही। राष्ट्र संत के प्रवचन सुनने के लिए भीड़ उमड़ी। खचाखच भरे पंडाल में तरुण सागर महाराज की जय-जयकार होती रही।

एमडी जैन इंटर कॉलेज के प्रांगण में प्रवचन करते हुए मुनिश्री ने कहा कि जीवन में परिवर्तन के लिए संवर्धन के लिए यह बात मान लो, सुख का संबंध केवल मन से है। जो तुम्हारे पास है, उसी में सुखी रहो। जो तुम्हारे पास नहीं है, उसके पीछे मत भागो। पैसे से सुविधाएं तो मिलेंगी, मगर सुख नहीं। उन्होंने कहा कि हर आदमी के सामने समस्याएं हैं। गरीब के आगे भूख लगे तो क्या खाए और अमीर के सामने समस्या यह है कि क्या खाए जो भूख लगे। सभी समस्याओं का समाधान तपस्या में है। जीवन में अनुकूलता आने पर भजन करने का इंतजार मत करो। भजन करना है तो तुरंत कर लेना। जब तक जीवन है, समस्याओं का अंत नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि जबान पर संयम रखो। परिवार में झगड़े इसी वजह से होते हैं। कुछ लोग वाणी की वजह से दिलों में उतर जाते हैं और कुछ दिल से उतर जाते हैं। ऐसा बोलो कि दिल बाग-बाग हो जाए। इससे पूर्व मुनिश्री की सात भागों में प्रकाशित हुई पुस्तक कड़वे प्रवचन के लोकार्पण के लिए बोलियां लगाई गई। पाद प्रक्षालन शिखरचंद्र जैन परिवार और गुरु पूजन जैन जागृति महिला मंच और पुलक जनचेतना मंच ने किया। मुनिश्री को शास्त्र भेंट अजय कुमार व अनंत कुमार परिवार ने किया।

इन्होंने किया मुनिश्री का स्वागत

स्वरूपचंद जैन, भोलानाथ जैन, चंदाबाबू जैन, पारसबाबू जैन, विमल कुमार, महेंद्र कुमार, अशोक जैन, आगरा दिगंबर जैन परिषद के अध्यक्ष अशोक जैन, नवीन जैन, उमेश जैन नॉटी, डॉ. राजीव जैन, अतुल बंसल, राजकुमार जैन, अखिल बरौल्या, अतुल बंसल, आशीष जैन ने मुनिश्री को श्रीफल भेंट कर उनका स्वागत किया। संचालन ब्रह्मचारी भैया सचिन और सतीश व मनोज ने किया।

चैन नहीं, इसलिए हुआ चेन्नई

राष्ट्र संत ने शहरों के नाम बदलने पर कहा कि मद्रास अच्छा नाम था मगर, उसे चेन्नई कर दिया। मैंने चिंतन किया तो समझ में आया कि ऐसा क्यों हुआ। वहां लोग लुंगी पहनते हैं और उसमें चैन नहीं होती। लुंगी में चैन नहीं इसलिए कर दिया चेन्नई।

राष्ट्र संत ने कहा कि आज देखने के लिए टीवी सेट, बैठने के लिए सोफा सेट, पीने के लिए टी सेट, पहनने के लिए डायमंड सेट है। मगर, फिर भी माइंड अपसेट है। यह जिंदगी की हकीकत है।

बड़ी चोरियां करने वाले बने संसद में

राष्ट्र संत ने कहा कि चोरी करने वाला, माता पिता की सेवा नहीं करने वाला, अतिथि की सेवा नहीं करने वाला, दूसरों का हक मारने वाला, भिखारी को धक्के मारकर घर से बाहर निकालने वाला चोर है। आज टुच्चे-मुच्चे चोर तो जेल में बंद हैं और बड़ी चोरियां करने वाले संसद और विधानसभा में पहुंच गए हैं।

खड़े-खड़े घर छोड़ने वाला संत

मुनिश्री ने कहा कि घर दो तरह से छोड़ा जाता है। पड़े-पड़े जो घर छोड़े वह मुर्दा और जो खड़े-खड़े घर छोड़े वह संत है।

राष्ट्र संत के कड़वे बोल

* बड़े-बड़े वैज्ञानिक मंगल पर जीवन की चिंता कर रहे हैं, मगर जीवन में मंगल की चिंता किसी को नहीं।

* गरीब शुगर के लिए कंट्रोल और अमीर शुगर कंट्रोल को डॉक्टर की दौड़ लगा रहे हैं।

* यह 21वीं शताब्दी का प्रभाव है। पहले अभाव में भी खुशियां थीं और आज खुशियों का ही अभाव है।

* कल तक जिंदगी मौन से चलती थी, आज लोन से चल रही है। लोन की किश्तें चुकाते-चुकाते आदमी एक दिन स्वयं चुक जाता है।

* जो शमशान तक चले वो तुम्हारे साथ नहीं, शमशान से आगे जो साथ जाए वह तुम्हारा है।

* इच्छाएं अनंत हैं, उन्हें समेटो। जेब में 90 रुपये हैं, तो 100 के फेर में मत पड़िए।

* पत्नी वह जो रहे पति से तनी-तनी, खत्म कर दे मनी।

* मौन व्रत रखें, घर में शांति आ जाएगी।