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Tuesday, 11 March 2014

Amalaki ekadashi 2014

आमल की एकादशी फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। आंवले के वृक्ष में भगवान का निवास होता हैं इसलिए इस दिन आंवले के वृक्ष के नीचे बैठकर भगवान का पूजन किया जाता हैं। आंवला विष्णु भगवान का प्रिय फल है।

आमल की एकादशी एक पवित्र हिन्दू पर्व है। इस दिन अमला को भगवान विष्णु लक्ष्मी के रूप में पूजा जाता है। आमल की एकादशी व्रत फाल्गुन शुक्ल पक्ष को एकादशी के दिन किया जाता। ऐसा माना जाता है कि एकादशी समस्त पाप नाश करने में समर्थ है। सौ गाय दान करने का जो फल होता है वही फल आमल की एकादशी करने से प्राप्त होता है।

अमला एकादशी पूजा

अमला एकादशी भी आमल की एकादशी के रूप में जाना जाता है। इसे फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन पर रखा जाता है। इस साल, आंवला एकादशी 12 मार्च 2014 को मनाया जाएगा। यह अमला एकादशी पापों के सभी प्रकार से व्यक्ति को मुक्त कर देते है।

माना जाता है कि आंवला पेड़ भगवान विष्णु के चेहरे से उत्पन्न माना जाता है। इस दिन आंवला के पेड़ में जल चढ़ाना चाहिए। इसके बाद धूप, चंदन, रोली, फूल, आदि से पूजन करना चाहिए। आंवला के पेड़ के नीचे ब्राहमणों को भोजन कराना चाहिए। भगवान विष्णु के भक्त एकादशी व्रत करते हैं। इसमें आंवले के पेड़ की पूजा होती है। ऐसा माना जाता है कि जो एकादशी की रात में भगवान विष्णु के आगे वैष्णव भक्तों के समीप गीता और विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ करता है, वह उस परम धाम में जाता है, जहां साक्षात् भगवान नारायण विराजमान हैं।

अमला की एकादशी पर चौघड़िया मुहूर्त।

इस बार संवत 2070 चैत्र शुक्ल पक्ष 12 मार्च 2014 [बुधवार] को अमला एकादशी मनाई जाएगी।

अगले दिन पाराना समय- 06: 52

17: 32 पाराना दिन द्वादशी समाप्ति पल पर

एकादशी तिथि 11 मार्च 2014 पर- 00: 40 पर शुरू होता है।

एकादशी तिथि 12 मार्च 2014 के 15: 11 पर समाप्त होता है।

फाल्गुन शुक्ल पक्ष एकादशी अमला एकादशी के रूप में जाना जाता है। अमला एकादशी महा शिवरात्रि व होली के बीच पड़ता है। वर्तमान में यह अंग्रेजी में फरवरी या मार्च के महीने में मनाया जाता है।

एकादशी व्रत विधि-

दशमी की रात्रि को पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करें तथा भोग विलास से भी दूर रहें। प्रात: एकादशी को लकड़ी का दातुन तथा पेस्ट का उपयोग न करें; नींबू, जामुन या आम के पत्ते लेकर चबा लें और उंगली से कंठ शुद्ध कर लें। वृक्ष से पत्ता तोड़ना भी वर्जित है, अत: स्वयं गिरे हुए पत्ते का सेवन करे। यदि यह सम्भव न हो तो पानी से बारह कुल्ले कर लें। फिर स्नानादि कर आंवले के पेड़ के नीचे जाकर पूजा करें गीता पाठ करें या पुरोहितादि से श्रवण करें।

विष्णु के द्वादश अक्षर मंत्र अथवा गुरुमंत्र का जाप करें।

महात्म-

जिन्होंने श्रीहरि के व्रत किया है, उन्होंने चारों वेदों का स्वाध्याय, देवताओं का पूजन, यज्ञों का अनुष्ठान तथा सब तीर्थो में स्नान कर लिया। श्रीकृष्ण से बढ़कर कोई देवता नहीं है और एकादशी व्रत के समान दूसरा कोई व्रत नहीं है। जहां भागवत शास्त्र है, भगवान विष्णु के लिए जहां जागरण किया जाता है और जहां शालीग्राम शिला स्थित होती है, वहां साक्षात् भगवान विष्णु उपस्थित होते हैं ।

व्रत खोलने की विधि-

द्वादशी को सेवापूजा की जगह पर बैठकर भुने हुए सात चनों के चौदह टुकड़े करके अपने सिर के पीछे फेंकना चाहिए। मेरे सात जन्मों के शारीरिक, वाचिक और मानसिक पाप नष्ट हुए - यह भावना करके सात अंजलि जल पीना और चने के सात दाने खाकर व्रत खोलना चाहिए ।

अमला एकादशी के बारे में एक कथा प्रचलित है।

कथा- प्राचीन काल में भारत में चित्रसेन नामक राजा राज्य करता था । उनके राज्य में एकादशी व्रत का प्रचलन था। प्रजा एवं राजा एकादशी का व्रत रखते थें। एक दिन राजा चित्रसेन शिकार खेलते खेलते दूर निकल गए। वहां पर जंगली जातियों ने उन पर आक्रमण कर दिया। उनके शस्त्रों-अस्त्रों का उनपर कोई प्रभाव नही पड़ा। देखते- देखते जंगली जाति के आदमियों की संख्या बढ़ गई। तो उनके आक्रमण से राजा चित्रसेन संज्ञाहीन होकर पृथ्वी पर गिर पडे़। पृथ्वी पर गिरते ही राजा के शरीर से एक दिव्य शक्ति प्रकट हुई जो समस्त राक्षसों को मारकर अदृष्य हो गई। जब राजा की मुर्छा टुटी तो उन्हे सब राक्षस मृत पडे़ दिखाई दिये। वे बडे़ आश्चर्य में पड़कर सोचने लगे कि इन्हें किसने मारा है तभी आकाशवाणी हुई, ये समस्त राक्षस तुम्हारे आमला एकादशी व्रत के प्रभाव के कारण मारे गए हैं। यह सुनकर राजा बहुत प्रसन्न हुआ तथा अपने राज्य में उसने आमला एकादशी के व्रत का प्रचार करवाया।

[प्रीति झा]

Friday, 7 March 2014

Sage reminder of an era of

सरयू तट पर स्थित लक्ष्मण किला में इन दिनों पूर्व आचार्य एवं रामकथा की शास्त्रीय धारा के दिग्गज विद्वान स्वामी सीतारामशरण की 17वीं पुण्यतिथि मनाई जा रही है। स्मृति दिवस की शुरुआत सोमवार को रहस्योपासना के प्रतिनिधि ग्रंथों नामकांति, रूपकांति, लीलाकांति, धामकांति आदि के पारायण से हुई।

वर्तमान लक्ष्मण किलाधीश एवं दिवंगत आचार्य के शिष्य महंत मैथिलीरमण शरण ने बताया कि 10 मार्च को श्रद्धांजलि सभा एवं वृहद भंडारा के साथ पुण्यतिथि के कार्यक्रम का समापन होगा।

लक्ष्मण किलाधीश स्वामी सीतारामशरण को याद करना संतत्व के एक युग का स्मरण है। यद्यपि उनकी प्रतिभा दुनियादारी के किसी भी आयाम में लगकर अपना लोहा मनवा सकती थी किंतु उन्होंने तरुणाई में ही संतत्व की जो राह अख्तियार की, उससे कभी विचलित नहीं हुए। बिहार प्रांत के पटना जिलांतर्गत अपनी समृद्ध पैतृकता को तिलांजलि देकर अयोध्या आए स्वामी जी यहीं के होकर रह गए।

राम भक्ति के साथ उनका मन रामकथा के प्रसंगों में बखूबी रमा और शीघ्र ही उन्होंने अपनी पहचान तेजस्वी साधक व रामकथा के मार्मिक व्याख्याकार की बनाई। 1957 में प्रतिष्ठित पीठ लक्ष्मण किला की महंती संभालने के साथ उन्होंने धर्म, संस्कृति एवं अध्यात्म को संस्थाबद्ध भी किया। इस बीच उनका प्रभामंडल रामनगरी से आगे बढ़ता हुआ संपूर्ण सनातन जगत में स्थापित हुआ। वे स्वामी अखंडानंद एवं करपात्री जी के साथ संतों की शीर्ष त्रिमूर्ति में से एक माने जाते रहे। बीएचयू में बाल्मीकि रामायण पर उनका व्याख्यान मील का पत्थर माना जाता है। कहां तो वह गए थे एक सत्र को संबोधित करने पर साहित्य-संस्कृति के युवा अध्येताओं एवं अध्यापकों पर उनकी ऐसी छाप पड़ी कि दशकों तक उन्हें व्याख्यान के लिए विश्वविद्यालय आमंत्रित किया जाता रहा। 1973 में उन्होंने अयोध्या से सीतामढ़ी तक ऐसी रामबारात निकाली, जिसकी मिसाल आज भी दी जाती है। बिहार के तत्कालीन राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री आदि ने बारात का राजकीय सम्मान किया और बारात की शोभा-सजावट कुछ वैसी झलक पेश करने वाली थी, जैसी त्रेता में भगवान राम की बारात रही होगी।

1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के समय जब मंदिरों के अधिग्रहण की आशंका छिड़ी तो वे किलाधीश ही थे, जिनकी मध्यस्थता में अधिग्रहण का बादल छटा। उनके इस प्रभाव के पीछे प्रवचन के फलक पर उनकी राष्ट्रीय ख्याति और बड़ी संख्या में शिष्यों प्रशंसकों की फौज रही। 1997 में इहलीला का संवरण करते हुए सांस्कृतिक-आध्यात्मिक जगत में ऐसी शून्यता छोड़ी, जिसे 17 वर्षो बाद भी महसूस किया जा रहा है।

Vaishno Devi reduction in the number of devotees in court

स्कूलों में परीक्षा और मौसम के बिगड़े मिजाज के कारण इन दिनों माता वैष्णो देवी के दरबार में श्रद्धालुओं की संख्या कम हो गई है। हालांकि, वीरवार को मौसम साफ होने से श्रद्धालुओं ने राहत की सांस ली है। वहीं, श्रद्धालुओं की संख्या आठ से दस हजार के बीच होने के कारण प्राचीन गुफा खुली हुई है।

विदित हो कि बुधवार को आधार शिविर कटड़ा सहित वैष्णो देवी मार्ग और आसपास के क्षेत्रों में बारिश हुई थी। त्रिकुटा पर्वत की ऊपरी चोटियों पर हल्का हिमपात हुआ था। मार्च में हिमपात देखकर लोग हैरान हैं। ऐसे में ठिठुरन बढ़ गई है। मां वैष्णो देवी के दर्शनों को देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं को गर्म कपड़े पहनकर परिवार सहित पंजीकरण करवा कर भवन की ओर रवाना हुए। नगर से जारी हेलीकॉप्टर सेवा सहित वैष्णो देवी मार्ग पर चलने वाली बैट्री कार सेवा श्रद्धालुओं को उपलब्ध रही।

संभावना जताई जारी है कि मार्च के दूसरे पखवाड़े या फिर अप्रैल में वैष्णो देवी यात्रा में वृद्धि देखने को मिल सकती है। जिसका व्यापारी वर्ग बेसब्री से इंतजार कर रहा है।

दस मार्च से फिर बिगड़ेगा मौसम का मिजाज-

वादी में ताजा बर्फबारी के बाद फिर हिमस्खलन का खतरा पैदा हो गया है। इसके चलते प्रशासन ने उच्च पर्वतीय इलाकों टंगडार, करनाह, केरन, सोनमर्ग, गुरेज, तुलैल और साधना टॉप में रहने वाले लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है।

बीते चार दिनों से वादी में जारी बर्फबारी व बारिश का सिलसिला वीरवार को थम गया। मौसम विभाग ने मौसम शुष्क रहने की संभावना जताई है। विभाग की मानें तो 10 मार्च से वादी में फिर से बर्फबारी की संभावना है। मौसम विभाग के निदेशक सोनम लोट्स ने कहा कि पश्चिमी विक्षोभ 10 मार्च से वादी के वायुमंडल में फिर से सक्त्रिय होगा। इसके चलते वादी में फिर से बर्फबारी व बारिश हो सकती है। इस बीच तापमान में भी गिरावट आ सकती है। वहीं, चार दिनों से जारी बर्फबारी और बारिश का सिलसिला थमने से लोगों ने राहत की सांस ली है। दिन में हलकी धूप भी छाई रही। हालांकि, बर्फीली हवा चलने से लोगों को ठंड का अहसास हुआ। श्रीनगर में अधिकतम तापमान 10.2 डिग्री और न्यूनतम 3.0 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।

Seven-day international is Shivaratri Festival

अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि मेले में शिवरात्रि महोत्सव की तीसरी व आखिरी शाही जलेब देव छांजणू व छमाहूं के नेतृत्व में वीरवार को निकली। आखिरी जलेब के साथ ही शिवरात्रि महोत्सव भी संपन्न हो गया।

शाही जलेब में बतौर मुख्य अतिथि राज्यपाल उर्मिला सिंह ने भाग लिया। शाही जलेब निकलने से पहले राज्यपाल उर्मिला सिंह ने अराध्य देव राज माधवराय के मंदिर में पूजा-अर्चना की। इसके बाद बाबा भूतनाथ मंदिर जाकर पूजा की। दोनों जगह पूजा करने के बाद उन्होंने शाही जलेब में भाग लिया। शाही जलेब अराध्य देव राज माधव राय के मंदिर से निकली जो चौहाटा होकर समखेतर बाजार से घूमती हुई दोबारा चौहाटा पहुंची। जहां से राज्यपाल उर्मिला सिंह ने जलेब में शिरकत की। जलेब में अराध्य देव राज माधो राय की पालकी संग अन्य देवी-देवता पड्डल पहुंचे।

राज माधव राय ने देवी-देवताओं के साथ की मिलनी-

शिवरात्रि महोत्सव के आगाज पर सभी देवी-देवताओं ने अराध्य देव राज माधव राय के दरबार में जाकर हाजिरी भरी थी। मगर शिवरात्रि महोत्सव के समापन पर राज माधव राय ने चौहाटा जातर के दौरान देवी-देवताओं से मिलनी की और उन्हें विदाई दी। इसके लिए राज माधव राय अपनी पालकी पर विराजमान होकर चौहटा पहुंचे और देवी-देवताओं को विदाई दी।

चौहाटा जातर के दौरान सभी देवी-देवता मंडी शहर के मुख्य बाजार चौहाटा पर विराजमान होते हैं और यहीं पर राज माधव राय पहुंचे और उन्होंने देवी-देवताओं के बीच जाकर उन्हें विदा किया।

देव कमरूनाग ने पुलिस पहरे में दिए दर्शन-चौहाटा जातर के समय चानणी परिसर में विराजमान देव कमरूनाग के दर्शन पुलिस पहरे में हुए। देव कमरूनाग के दर्शनों के लिए भीड़ उमड़ी रही। शिवरात्रि महोत्सव के दौरान देव कमरूनाग टारना मंदिर में ही विराजमान रहते हैं। मगर चौहाटा जातर के दौरान देव कमरूनाग शहर में पहुंचते हैं। मगर यहां भी देवता अन्य देवी-देवताओं के साथ नहीं बैठता है। देव कमरूनाग सेरी चानणी परिसर में ही विराजमान होते हैं। जहां वीरवार को देवता दर्शनों के लिए कुछ समय बैठे।..

Friday, 28 February 2014

Everyone - from Har Mahadev echo raised pagoda Jaykare

महाशिवरात्रि पर शिवालयों में सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा। हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयकारे से शिवालय दिनभर गूंजते रहे। चांदनी चौक स्थित गौरी शंकर मंदिर में सुबह की आरती के बाद भक्तों ने भोले बाबा का अभिषेक किया।

कालकाजी मंदिर में मंत्रोच्चारण के साथ बाबा पशुपति नाथ का रुद्राभिषेक किया गया। दूध, दही, गंगाजल, शहद, गन्ने के रस से बाबा को स्नान कराया गया। आक, धतूरा, बेल पत्र, मेहंदी, सफेद पुष्प अर्पित कर श्रृंगार किया गया। शिव स्तुति व हवन के बीच भक्तों ने भक्तों ने बाबा का अभिषेक किया। हनुमान रोड स्थित शिव मंदिर में भी दिनभर भक्तों की कतार लगी रही। उन्होंने भोले भंडारी को बेल, धतूरा और दूध अर्पित किया। भक्तों को फल, खीर और आलू आदि का प्रसाद दिया गया। काल सर्प दोष की पूजा भी हुई।

पुष्प से भरी थालियां लेकर पहुंचे भक्त1केशवपुरम के पारदेश्वर मंदिर से लेकर मंगोलपुरी, सुल्तानपुरी, रोहिणी व जहांगीरपुरी के विभिन्न शिवमंदिरों में भक्तों ने पूजा की। लोग हाथों में पुष्प से भरी थालियां व चंदन-धूप लेकर शिव की आरती करने पहुंचे। इस मौके पर कई मंदिरों में बच्चों के लिए विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया गया।

प्रवचन व भंडारे का आयोजन-उत्तम नगर, ककरौला, मोहन गार्डन, नजफगढ़, जनकपुरी, विकासनगर, विकासपुरी, तिलक नगर, रघुवीर नगर, मीरा बाग, पश्चिम विहार, सागरपुर व पालम स्थित मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। जनकपुरी सी-3 स्थित श्री सनातन धर्म मंदिर के पुजारी पं.राम कुमार दूबे ने शिव तत्व पर प्रवचन का आयोजन किया। त्रिलोकीनाथ मंदिर में भी काफी संख्या में भक्तों ने शिव का जलाभिषेक किया।

हरिनगर घंटाघर के पास राष्ट्रीय महिला जनकल्याण सेवा मंच के तत्वावधान में भंडारे का आयोजन किया गया। इस अवसर पर पंडित ध्रुवचंद पाठक, गुरबक्श सिंह, आलोक कपूर, अशप्रीत सिंह, बलजीत कौर सोनिया व सरोज सिंह सहित कई लोग उपस्थित थे।

Sunday, 23 February 2014

Holly wears a bright white dress before Takurji

चल री लड्डूगोपाल कूं नई पोशाक लैं आवें.। वृंदावन की कुंज गलियों में महिलाओं के कुछ ऐसे ही बोल आजकल सुनाई दे रहे हैं। परंपरा के अनुसार होली से पहले घर-घर में लड्डू गोपाल को सफेद पोशाक पहनाई जाएगी। जबकि होली के बाद लाला रंगबिरंगी पोशाक धारण करते हैं।

वृंदावन और ब्रज में मौसम बदलने के साथ लाड़ले कन्हैया की पोशाक में बदलाव नजर आने लगा है। होली पर लड्डू गोपाल को नई पोशाक पहनाने को महिलाएं खरीदारी में जुट गई हैं। कारण वृंदावन में भगवान कृष्ण की घरों में बालक रूप में पूजा होती है। जिस तरह घरों में बालकों के खानपान और कपड़ों में मौसम के साथ बदलाव होता है, ठीक उसी तरह 'लाला' की परवरिश भी महिलाएं यशोदा मैया की तरह करती हैं। अब जबकि ब्रज में फागुनी बयार उड़ने लगी है तो महिलाओं को भी अपने लाड़ले के परिधान की चिंता सता रही है। स्थानीय निवासी रामनारायन बृजवासी का कहना है कि होली पर ठाकुरजी धवल सफेद वस्त्र ही धारण करेंगे। ताकि जो भी रंग उनके ऊपर चढ़े चटख दिखायी दे।

पर्व पर देसी-विदेशी भक्त उन्हें रंग से सराबोर देश मदमस्त हो जायें। बाजार के कई पोशाक विक्रेताओं ने बताया कि रेशम और बेलवेट की सफेद धवल पोशाक की बिक्री इन दिनों तेज हो गयी है।

पोशाक व्यापारी पुरुषोत्तम शर्मा का कहना है कि हर साल होली से पहले धवल पोशाक की बिक्त्री अधिक होती है। होली पर ठाकुर जी के सफेद परिधान पर पड़े चटख रंग श्रद्धालुओं को लुभाते हैं तो होली के बाद उनके आकर्षक परिधान। होली के बाद कान्हा शनील और वेलवेट के बने रत्‍‌न जड़ित परिधान धारण कर श्रद्धालुओं को भव्य दर्शन देंगे।

Wednesday, 19 February 2014

Banke Bihari Temple

वृंदावन। जगप्रसिद्ध बांकेबिहारी और उनके भक्तों के बीच 'दीवाल' नजर नहीं आएगी। जगमोहन में तीन से अधिक सेवायतों के जाने पर मंदिर प्रबंध कमेटी ने रोक लगा दी है।

गत दिवस 'जागरण' में प्रकाशित खबर 'बांकेबिहारी और भक्तों के बीच 'दीवाल' सेवायत' का असर प्रबंध कमेटी के अध्यक्ष नंदकिशोर उपमन्यु के आदेश में देखने को मिला।

उपमन्यु ने सेवायतों को पत्र जारी कर दर्शन के दौरान नियम के अनुसार केवल तीन लोगों को ही ठाकुरजी के जगमोहन में मौजूद रहने की अनुमति दी गई है। उन्होंने कहा कि अगर इससे तीन से अधिक कोई व्यक्ति मंदिर के जगमोहन में दिखाई देगा, तो सेवा अधिकारी के ऊपर कार्रवाई की जाएगी। 

जगमोहन में मौजूद रहने वाले तीन लोगों में सेवायत हो या फिर मंदिर के भंडारी, केवल तीन लोग ही जगमोहन में श्रद्धालुओं की माला, प्रसाद लगाने के लिए मौजूद रहेंगे।

Thursday, 13 February 2014

Tarun sagar maharaj discourse


कड़वे प्रवचनों के लिए विख्यात राष्ट्र संत तरुण सागर महाराज ने बुधवार को कड़वी बातों में नसीहतें दीं। उन्होंने धन के पीछे नहीं भागने, इच्छाओं पर नियंत्रण करने और तपस्या में समस्या का समाधान छुपा होने की बात कही। राष्ट्र संत के प्रवचन सुनने के लिए भीड़ उमड़ी। खचाखच भरे पंडाल में तरुण सागर महाराज की जय-जयकार होती रही।

एमडी जैन इंटर कॉलेज के प्रांगण में प्रवचन करते हुए मुनिश्री ने कहा कि जीवन में परिवर्तन के लिए संवर्धन के लिए यह बात मान लो, सुख का संबंध केवल मन से है। जो तुम्हारे पास है, उसी में सुखी रहो। जो तुम्हारे पास नहीं है, उसके पीछे मत भागो। पैसे से सुविधाएं तो मिलेंगी, मगर सुख नहीं। उन्होंने कहा कि हर आदमी के सामने समस्याएं हैं। गरीब के आगे भूख लगे तो क्या खाए और अमीर के सामने समस्या यह है कि क्या खाए जो भूख लगे। सभी समस्याओं का समाधान तपस्या में है। जीवन में अनुकूलता आने पर भजन करने का इंतजार मत करो। भजन करना है तो तुरंत कर लेना। जब तक जीवन है, समस्याओं का अंत नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि जबान पर संयम रखो। परिवार में झगड़े इसी वजह से होते हैं। कुछ लोग वाणी की वजह से दिलों में उतर जाते हैं और कुछ दिल से उतर जाते हैं। ऐसा बोलो कि दिल बाग-बाग हो जाए। इससे पूर्व मुनिश्री की सात भागों में प्रकाशित हुई पुस्तक कड़वे प्रवचन के लोकार्पण के लिए बोलियां लगाई गई। पाद प्रक्षालन शिखरचंद्र जैन परिवार और गुरु पूजन जैन जागृति महिला मंच और पुलक जनचेतना मंच ने किया। मुनिश्री को शास्त्र भेंट अजय कुमार व अनंत कुमार परिवार ने किया।

इन्होंने किया मुनिश्री का स्वागत

स्वरूपचंद जैन, भोलानाथ जैन, चंदाबाबू जैन, पारसबाबू जैन, विमल कुमार, महेंद्र कुमार, अशोक जैन, आगरा दिगंबर जैन परिषद के अध्यक्ष अशोक जैन, नवीन जैन, उमेश जैन नॉटी, डॉ. राजीव जैन, अतुल बंसल, राजकुमार जैन, अखिल बरौल्या, अतुल बंसल, आशीष जैन ने मुनिश्री को श्रीफल भेंट कर उनका स्वागत किया। संचालन ब्रह्मचारी भैया सचिन और सतीश व मनोज ने किया।

चैन नहीं, इसलिए हुआ चेन्नई

राष्ट्र संत ने शहरों के नाम बदलने पर कहा कि मद्रास अच्छा नाम था मगर, उसे चेन्नई कर दिया। मैंने चिंतन किया तो समझ में आया कि ऐसा क्यों हुआ। वहां लोग लुंगी पहनते हैं और उसमें चैन नहीं होती। लुंगी में चैन नहीं इसलिए कर दिया चेन्नई।

राष्ट्र संत ने कहा कि आज देखने के लिए टीवी सेट, बैठने के लिए सोफा सेट, पीने के लिए टी सेट, पहनने के लिए डायमंड सेट है। मगर, फिर भी माइंड अपसेट है। यह जिंदगी की हकीकत है।

बड़ी चोरियां करने वाले बने संसद में

राष्ट्र संत ने कहा कि चोरी करने वाला, माता पिता की सेवा नहीं करने वाला, अतिथि की सेवा नहीं करने वाला, दूसरों का हक मारने वाला, भिखारी को धक्के मारकर घर से बाहर निकालने वाला चोर है। आज टुच्चे-मुच्चे चोर तो जेल में बंद हैं और बड़ी चोरियां करने वाले संसद और विधानसभा में पहुंच गए हैं।

खड़े-खड़े घर छोड़ने वाला संत

मुनिश्री ने कहा कि घर दो तरह से छोड़ा जाता है। पड़े-पड़े जो घर छोड़े वह मुर्दा और जो खड़े-खड़े घर छोड़े वह संत है।

राष्ट्र संत के कड़वे बोल

* बड़े-बड़े वैज्ञानिक मंगल पर जीवन की चिंता कर रहे हैं, मगर जीवन में मंगल की चिंता किसी को नहीं।

* गरीब शुगर के लिए कंट्रोल और अमीर शुगर कंट्रोल को डॉक्टर की दौड़ लगा रहे हैं।

* यह 21वीं शताब्दी का प्रभाव है। पहले अभाव में भी खुशियां थीं और आज खुशियों का ही अभाव है।

* कल तक जिंदगी मौन से चलती थी, आज लोन से चल रही है। लोन की किश्तें चुकाते-चुकाते आदमी एक दिन स्वयं चुक जाता है।

* जो शमशान तक चले वो तुम्हारे साथ नहीं, शमशान से आगे जो साथ जाए वह तुम्हारा है।

* इच्छाएं अनंत हैं, उन्हें समेटो। जेब में 90 रुपये हैं, तो 100 के फेर में मत पड़िए।

* पत्नी वह जो रहे पति से तनी-तनी, खत्म कर दे मनी।

* मौन व्रत रखें, घर में शांति आ जाएगी।


Wednesday, 12 February 2014

Keep attention to death and god

क्रांरांतिकारी जैन संत तरुण सागर महाराज ने मंगलवार को अपने कड़वे प्रवचनों से श्रोताओं के जीवन की मिठास घोलने का प्रयास किया। हंसी की फुहारों के बीच उन्होंने जीवन में आने वाले दुखों की चर्चा की और समय आते अपने जीवन में सुधार करने का संदेश दिया।

एमडी जैन इंटर कॉलेज, हरीपर्वत के मैदान में जैन मुनि के तीन दिवसीय कड़वे प्रवचनों की श्रृंखला मंगलवार से शुरू हुई। मंच पर बने ताजमहल के कटआउट के आगे आसन पर बैठकर उन्होंने अपने प्रवचन की शुरुआत में जिदंगी में प्रकृति, विकृति और संस्कृति का विशेष महत्व बताया। उन्होंने कहा कि भूख लगने पर भोजन करने को प्रकृति, भूख न लगे तब भी खाने को विकृति, खुद भूखे रहकर भूखे को खिलाना संस्कृति होती है। 

जिदंगी का सार बताते हुए संत ने कहा कि सोते में धन, जागते में धन, घर में धन, बाजार में धन। आखिर में रिजल्ट निकलता है निधन। इसलिए हमें ऐसे कर्म करने चाहिए, जिससे किसी और को हमारी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना नहीं करनी पड़े। हम ही आत्म कल्याण करें। जीवन में जो भी रिश्ते हैं, वे जीते जी हैं। मरने के बाद कोई रिश्ता किसी के साथ नहीं रहता।

Tuesday, 11 February 2014

Devotees crowd in banke bihari temple

एकादशी पर्व पर सोमवार को बांके बिहारी मंदिर में हजारों श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। इस दौरान भीड़ को नियंत्रित करने और सुरक्षा को लेकर पुलिस की लापरवाही उजागर हुई। पुलिस की गैर मौजूदगी का लाभ असामाजिक तत्वों ने उठाया।

बांके बिहारी के एकादशी पर्व पर दर्शन करने के लिए दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश और आसपास के श्रद्धालु सुबह से ही उमड़े। भीड़ को नियंत्रित करने को एक भी कांस्टेबल दिखाई नहीं दिया। इसका फायदा उठाते हुए चेन स्नेचरों ने मंदिर परिसर में आधा दर्जन श्रद्धालुओं की जेब साफ की और दो महिलाओं के गले से सोने की चेन तोड़ ली गई।

दिल्ली के शाहदरा निवासी कमला गुलाटी और फरीदाबाद निवासी सुभद्रा देवी ने बताया कि मंदिर में दर्शन के दौरान कब उनके गले की चेन कट गई, पता नहीं चला। मंदिर के बाहर जब वह दोनों परिजनों के साथ लस्सी पीने रुकीं, तब परिजनों की नजर गले पर पड़ी, तब जानकारी हुई।

इसी तरह गुड़गांव निवासी शुभेंद्र गुप्ता, विनोद कापरी, दिल्ली के तिलक नगर निवासी शोभित अरोड़ा, करोलबाग निवासी विनोद अग्रवाल, उत्तम नगर निवासी कुंजबिहारी गुप्ता बांके बिहारी पुलिस चौकी पर अपनी जेब कटने की शिकायत लेकर पहुंचे। जहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने उन्हें कोतवाली का रास्ता दिखा दिया।
लगता रहा जाम, सोती रही पुलिस
वृंदावन। एकादशी पर्व पर शहर की पंचकोसीय परिक्रमा को हजारों श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा। परिक्रमा मार्ग में दौड़ते अनियंत्रित वाहन और अटल्ला व इस्कॉन कट पर वाहनों से लगा जाम परेशानी का सबब बनता रहा। लेकिन पूरे परिक्रमा मार्ग में पुलिस का एक भी कांस्टेबल नहीं दिखा।

बांकेबिहारी की नगरी वृंदावन में एकादशी पर पंचकोसीय परिक्रमा करने हजाराें भक्त भोर होते हुए उमड़ पड़े। पूरे परिक्रमा मार्ग में पुलिस की अनदेखी का खामियाजा श्रद्धालुओं को उठाना पड़ा। रास्तेभर अनियंत्रित दौड़ते वाहन श्रद्धालुओं के लिए खतरा बनते दिखाई दिए। पानीगांव पक्का पुल से वृंदावन आने-जाने वाले वाहनों को रोकने या नियत स्थान पर खड़ा करवाने को कोई ट्रैफिक प्लान न तो प्रशासन ने बनाया न ही स्थानीय पुलिस ने। परिक्रमा में दौड़ते छोटे-बड़े वाहनों से बचते-बचाते जैसे-तैसे श्रद्धालुओं ने परिक्रमा पूरी की। मथुरा मार्ग पर अटल्ला चुंगी और छटीकरा मार्ग पर इस्कॉन मंदिर के निकट परिक्रमा कट के अलावा प्रेम मंदिर, इस्कॉन मंदिर पर सुबह से ही वाहनों से जाम लगा रहा। जाम खुलवाने को भी पुलिस का कोई कांस्टेबल नजर नहीं आया। सुबह 8 बजे शुरू हुआ जाम दोपहर को एक बजे तक लगा रहा। पुलिस की अनदेखी का खामियाजा पिछले दिन रविवार को भी श्रद्धालु और स्थानीय नागरिकों ने जाम के झाम में फंसकर उठाया। बावजूद इसके प्रशासन की आंख नहीं खुलीं।

Devotees crowd in banke bihari temple

वृंदावन, जागरण संवाददाता। एकादशी पर्व पर सोमवार को बांके बिहारी मंदिर में हजारों श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। इस दौरान भीड़ को नियंत्रित करने और सुरक्षा को लेकर पुलिस की लापरवाही उजागर हुई। पुलिस की गैर मौजूदगी का लाभ असामाजिक तत्वों ने उठाया।

बांके बिहारी के एकादशी पर्व पर दर्शन करने के लिए दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश और आसपास के श्रद्धालु सुबह से ही उमड़े। भीड़ को नियंत्रित करने को एक भी कांस्टेबल दिखाई नहीं दिया। इसका फायदा उठाते हुए चेन स्नेचरों ने मंदिर परिसर में आधा दर्जन श्रद्धालुओं की जेब साफ की और दो महिलाओं के गले से सोने की चेन तोड़ ली गई।

दिल्ली के शाहदरा निवासी कमला गुलाटी और फरीदाबाद निवासी सुभद्रा देवी ने बताया कि मंदिर में दर्शन के दौरान कब उनके गले की चेन कट गई, पता नहीं चला। मंदिर के बाहर जब वह दोनों परिजनों के साथ लस्सी पीने रुकीं, तब परिजनों की नजर गले पर पड़ी, तब जानकारी हुई।

इसी तरह गुड़गांव निवासी शुभेंद्र गुप्ता, विनोद कापरी, दिल्ली के तिलक नगर निवासी शोभित अरोड़ा, करोलबाग निवासी विनोद अग्रवाल, उत्तम नगर निवासी कुंजबिहारी गुप्ता बांके बिहारी पुलिस चौकी पर अपनी जेब कटने की शिकायत लेकर पहुंचे। जहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने उन्हें कोतवाली का रास्ता दिखा दिया।

लगता रहा जाम, सोती रही पुलिस
वृंदावन। एकादशी पर्व पर शहर की पंचकोसीय परिक्रमा को हजारों श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा। परिक्रमा मार्ग में दौड़ते अनियंत्रित वाहन और अटल्ला व इस्कॉन कट पर वाहनों से लगा जाम परेशानी का सबब बनता रहा। लेकिन पूरे परिक्रमा मार्ग में पुलिस का एक भी कांस्टेबल नहीं दिखा।

बांकेबिहारी की नगरी वृंदावन में एकादशी पर पंचकोसीय परिक्रमा करने हजाराें भक्त भोर होते हुए उमड़ पड़े। पूरे परिक्रमा मार्ग में पुलिस की अनदेखी का खामियाजा श्रद्धालुओं को उठाना पड़ा। रास्तेभर अनियंत्रित दौड़ते वाहन श्रद्धालुओं के लिए खतरा बनते दिखाई दिए। पानीगांव पक्का पुल से वृंदावन आने-जाने वाले वाहनों को रोकने या नियत स्थान पर खड़ा करवाने को कोई ट्रैफिक प्लान न तो प्रशासन ने बनाया न ही स्थानीय पुलिस ने। परिक्रमा में दौड़ते छोटे-बड़े वाहनों से बचते-बचाते जैसे-तैसे श्रद्धालुओं ने परिक्रमा पूरी की। मथुरा मार्ग पर अटल्ला चुंगी और छटीकरा मार्ग पर इस्कॉन मंदिर के निकट परिक्रमा कट के अलावा प्रेम मंदिर, इस्कॉन मंदिर पर सुबह से ही वाहनों से जाम लगा रहा। जाम खुलवाने को भी पुलिस का कोई कांस्टेबल नजर नहीं आया। सुबह 8 बजे शुरू हुआ जाम दोपहर को एक बजे तक लगा रहा। पुलिस की अनदेखी का खामियाजा पिछले दिन रविवार को भी श्रद्धालु और स्थानीय नागरिकों ने जाम के झाम में फंसकर उठाया। बावजूद इसके प्रशासन की आंख नहीं खुलीं।

Sunday, 9 February 2014

Gupt navratri in jawalamukhi

ज्वालामुखी। विश्व विख्यात शक्तिपीठ ज्वालामुखी मंदिर में शनिवार को गुप्त नवरात्र का प्रदेश स्वतंत्रता सेनानी कल्याण बोर्ड के उपाध्यक्ष सुशील रतन ने विधिवत समापन किया।

नौ दिन तक चलने वाले इस धार्मिक अनुष्ठान में पुजारी महासभा व मंदिर प्रशासन से संयुक्त तत्वाधान में देवी आराधना, ज्वाला मां के मूलमंत्र का जाप, वटुक भैरव, गायत्री व हनुमान का जाप पाठ किया गया। इसके उपरांत कन्या पूजन किया गया। सुशील रतन ने गुप्त नवरात्र के सफल होने के लिए बधाई दी और कहा कि हजारों भक्तों ने गुप्त नवरात्र पर देवी अराधना व पूजा का पुण्य फल प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि इन दिनों में भी मां की पूजा का नवरात्र के बराबर ही पुण्य फल मिलता है।

इस अवसर पर मंदिर अधिकारी तहसीलदार देवी राम, मंदिर न्यास के सदस्य दिव्यांशू भूषण दत, पार्वती प्रसाद, सुरेंद्र चौधरी, भवानी दत्त, संजीव सूद, वेनी माधव, प्रेमानंद, पवन शर्मा, धर्मपाल शर्मा, कांग्रेस महासचिव सत्यपाल शर्मा, पुजारी लवलेश शर्मा, शैलू शर्मा, संदीप शर्मा, मनोज, भुवनीश, पीयूष व मनोहर लाल मौजूद रहे।