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Thursday, 20 February 2014

Nanda Devi Rajjat ??trip: visit of Faith Initiative Biswasbri

दुनिया की सबसे लंबी (280 किमी) दुर्गम पैदल यात्रा 'श्री नंदा देवी राजजात' को सुरक्षित एवं निरापद बनाने के लिए पर्यटन विभाग ने कमर कस ली है। लगभग 280 किमी की यह यात्रा 14 अगस्त को चमोली जनपद के नौटी गांव से प्रारंभ होकर छह सितंबर को विश्राम लेगी।

12 साल के अंतराल में होने वाली इस धार्मिक यात्रा से पूरी देवभूमि की आस्था जुड़ी हुई है। बता दें कि 2013 में राजजात उत्तराखंड में आई भीषण आपदा के कारण स्थगित कर दी गई थी। इसलिए इस बार इसका महत्व और भी बढ़ गया है। उम्मीद की जा रही है कि राजजात आपदा में बुरी तरह चरमरा गई सूबे की अर्थव्यवस्था के लिए संजीवनी का काम करेगी। साथ ही इससे पर्यटन एवं तीर्थाटन की नई संभावनाएं भी विकसित होंगी। इन्हीं तमाम बिंदुओं को ध्यान में रखकर पर्यटन विभाग अपनी तैयारियां कर रहा है।

'श्री नंदा राजजात-2014' के लिए पर्यटन विभाग को नोडल एजेंसी बनाया गया है। इसलिए जिम्मेदारियों का बोझ भी सबसे ज्यादा उसी पर है। उसे कार्य करने के साथ उनकी निगरानी भी रखनी है, ताकि यात्रापथ में कोई कमियां न रह जाएं। 12 साल के अंतराल में होने वाली आस्था की यह ऐसी यात्र है, जिससे संपूर्ण देवभूमि की भावनाएं जुड़ी हुई हैं। ऐसे में राजजात को निर्विघ्न संपन्न कराना किसी चुनौती से कम नहीं। एक तरफ आपदा में बुरी तरह क्षतिग्रस्त यात्रापथ को व्यवस्थित करने की चुनौती है तो दूसरी तरफ देश-दुनिया के सामने खुद को साबित करने की। यही वजह है कि पर्यटन विभाग राजजात की तैयारियों को लेकर खासा संजीदा है। कुरुड़-नंदकेशरी-वाण-बेदनी झील हेरिटेज एवं इको टूरिज्म सर्किट आठ करोड़ों नौटी-कांसुवा-चांदपुर गढ़ी-सेम हेरिटेज एवं इको टूरिज्म सर्किट आठ करोडों पौड़ी-चमोली में मार्गीय सुविधाएं- आठ करोड़ यात्रा पथ की सबसे बड़ी चुनौती निर्जन पड़ावों में जरूरी सुविधाएं जुटाने की है। पर्यावरण को कोई नुकसान न पहुंचे, इसलिए इन पड़ावों में 121 अस्थाई शौचालय बनाए जाएंगे। इसके लिए जिलाधिकारी चमोली पांच निर्जन पड़ाव सुझाए हैं।

रामचंद्र भारद्वाज, संयुक्त निदेशक, पर्यटन

राज्य आकस्मिकता निधि व राज्य सेक्टर से राजजात की अवस्थापना सुविधाओं के लिए वर्ष 2012-13 में पर्यटन विभाग ने 1941.48 लाख की धनराशि अवमुक्त की। इसमें से 1698.11 लाख की धनराशि कार्यदायी संस्थाओं को आवंटित हो चुकी है, जिससे 220 कार्य होने हैं। इससे पूर्व, 2011-12 में राज्य सेक्टर से यात्रा मार्ग के सुधार के लिए वन विभाग को 83.32 लाख की धनराशि आवंटित हो चुकी है।

Sunday, 5 January 2014

Height and medium tourist attractions include the pilgrimage

देहरादून। देर आए-दुरुस्त आए, कम से कम प्रदेश में आई भीषण दैवीय आपदा के बाद शासन अब सबक तो लेता दिख रहा है। इस कड़ी में पर्यटन विभाग अब प्रदेश के विभिन्न पर्यटन क्षेत्रों के साथ ही तीर्थ स्थलों में यात्री क्षमता का अध्ययन करने जा रहा है। इसका मकसद यह आकलन करना है कि इन स्थानों पर एक समय में अधिकतम कितने पर्यटकों का आना सुरक्षित होगा। मकसद यह कि यदि भविष्य में कहीं कोई आपदा आती है तो इन यात्रियों को निकालने में परेशानी न हो। 

उत्तराखंड के पर्यटन स्थल और तीर्थ स्थल अरसे से देशी और विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करते रहे हैं। यहां की मनोरम वादियां पर्यटकों को बरबस ही अपनी ओर खींचती हैं। यही कारण है कि साल दर साल प्रदेश में आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ती जा रही है। इस बार जून में आई आपदा ने एकाएक प्रदेश की छवि को गहरा नुकसान पहुंचाया। यहां तक कि आपदा प्रबंधन को लेकर सरकार व शासन को कटघरे में खड़ा किया गया। नतीजतन, पर्यटक प्रदेश से दूर होते गए। अब शासन व पर्यटक विभाग की ओर से लगातार पर्यटकों को आकर्षित करने के प्रयास हो रहे हैं।

इस कड़ी में प्रदेश में पर्यटन को सुरक्षित करने के लिए अब शासन द्वारा पर्यटन व तीर्थ स्थलों की यात्री क्षमता का अध्ययन करने की तैयारी की जा रही है। इसके तहत ऊंचाई वाले पर्यटन क्षेत्र, मध्यम ऊंचाई के पर्यटन क्षेत्र व सभी सूचीबद्ध तीर्थ स्थलों का अलग-अलग अध्ययन किया जाना है। अध्ययन में यह देखा जाएगा कि ये पर्यटन स्थल एक समय में कितने यात्रियों को वहन कर सकते हैं। यहां पर यात्री सुविधा के क्या इंतजाम हैं। यहां की सड़कें कैसी हो और यहां अन्य व्यवस्थाएं कैसी हैं। इस अध्ययन के बाद इसकी एक रिपोर्ट तैयार की जाएगी, ताकि पर्यटन गतिविधियों को नियंत्रित रूप में संचालित किया जा सके। इसके लिए विभाग एडीबी के माध्यम से बजट लेने का प्रयास कर रहा है। 

अपर सचिव पर्यटन सचिन कुर्वे ने इसकी पुष्टि की है। उनका कहना है कि एडीबी के माध्यम से इसका अध्ययन कराए जाने की योजना है।