Sunday, 5 January 2014

Height and medium tourist attractions include the pilgrimage

देहरादून। देर आए-दुरुस्त आए, कम से कम प्रदेश में आई भीषण दैवीय आपदा के बाद शासन अब सबक तो लेता दिख रहा है। इस कड़ी में पर्यटन विभाग अब प्रदेश के विभिन्न पर्यटन क्षेत्रों के साथ ही तीर्थ स्थलों में यात्री क्षमता का अध्ययन करने जा रहा है। इसका मकसद यह आकलन करना है कि इन स्थानों पर एक समय में अधिकतम कितने पर्यटकों का आना सुरक्षित होगा। मकसद यह कि यदि भविष्य में कहीं कोई आपदा आती है तो इन यात्रियों को निकालने में परेशानी न हो। 

उत्तराखंड के पर्यटन स्थल और तीर्थ स्थल अरसे से देशी और विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करते रहे हैं। यहां की मनोरम वादियां पर्यटकों को बरबस ही अपनी ओर खींचती हैं। यही कारण है कि साल दर साल प्रदेश में आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ती जा रही है। इस बार जून में आई आपदा ने एकाएक प्रदेश की छवि को गहरा नुकसान पहुंचाया। यहां तक कि आपदा प्रबंधन को लेकर सरकार व शासन को कटघरे में खड़ा किया गया। नतीजतन, पर्यटक प्रदेश से दूर होते गए। अब शासन व पर्यटक विभाग की ओर से लगातार पर्यटकों को आकर्षित करने के प्रयास हो रहे हैं।

इस कड़ी में प्रदेश में पर्यटन को सुरक्षित करने के लिए अब शासन द्वारा पर्यटन व तीर्थ स्थलों की यात्री क्षमता का अध्ययन करने की तैयारी की जा रही है। इसके तहत ऊंचाई वाले पर्यटन क्षेत्र, मध्यम ऊंचाई के पर्यटन क्षेत्र व सभी सूचीबद्ध तीर्थ स्थलों का अलग-अलग अध्ययन किया जाना है। अध्ययन में यह देखा जाएगा कि ये पर्यटन स्थल एक समय में कितने यात्रियों को वहन कर सकते हैं। यहां पर यात्री सुविधा के क्या इंतजाम हैं। यहां की सड़कें कैसी हो और यहां अन्य व्यवस्थाएं कैसी हैं। इस अध्ययन के बाद इसकी एक रिपोर्ट तैयार की जाएगी, ताकि पर्यटन गतिविधियों को नियंत्रित रूप में संचालित किया जा सके। इसके लिए विभाग एडीबी के माध्यम से बजट लेने का प्रयास कर रहा है। 

अपर सचिव पर्यटन सचिन कुर्वे ने इसकी पुष्टि की है। उनका कहना है कि एडीबी के माध्यम से इसका अध्ययन कराए जाने की योजना है।

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