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Thursday, 20 February 2014

Chardham streets aim to April 15

सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) आगामी 15 अप्रैल तक चारधाम की सभी क्षतिग्रस्त सड़कों को ठीक कर देगा। राज्य सरकार बीआरओ को सभी तरह की सहूलियत उपलब्ध कराएगी। मजदूरों को बीपीएल की दर पर राशन दिया जाएगा।

जिलाधिकारी हर शुक्रवार को कार्य की प्रगति की जानकारी शासन को देंगे। बुधवार को मुख्य सचिव सुभाष कुमार की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में ये निर्णय लिए गए। बैठक में मुख्य सचिव ने बीआरओ को निर्देश दिए कि राज्य सरकार उन्हें मानव संसाधन, मशीनरी, धन, आरबीएम (रिवर बेड मैटेरियल), मेडिकल सहित सभी सुविधाएं उपलब्ध कराएगी। सड़क निर्माण का कार्य युद्धस्तर पर समयबद्ध रूप से किया जाए। 15 अप्रैल तक चार धाम की सभी सड़कों को दुरुस्त करने का लक्ष्य रखा गया है। शासन स्तर पर मानीटरिंग के अलावा जिलाधिकारियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे हर शुक्रवार को शाम चार बजे बैठक कर निर्माण कार्य में आ रही दिक्कतों को दूर करें। साथ ही सड़क निर्माण कार्य की प्रगति की रिपोर्ट भी साप्ताहिक रूप से शासन को भेजें।

बैठक में यह भी तय किया गया कि दूरदराज के इलाकों में कार्य कर रहे लोक निर्माण विभाग और बीआरओ के मजदूरों को बीपीएल की दर पर राशन दिया जाएगा। इसके अलावा तवाघाट-सोबला सहित अन्य स्थानों पर लोनिवि वैली ब्रिज बनाएगा। बीआरओ द्वारा अवगत कराया गया कि 300 करोड़ रुपये का एस्टीमेट भारत सरकार को भेजा गया है, जिसके जल्द स्वीकृत होने की उम्मीद है। राज्य सरकार द्वारा बीआरओ को भरोसा दिया गया कि बजट का इंतजार किए बिना तुरंत कार्य शुरू कर दिया जाए। राज्य सरकार हर तरह की मदद करेगी। 

बैठक में अपर मुख्य सचिव राकेश शर्मा, प्रमुख सचिव लोनिवि एसएस संधू, मुख्य अभियंता बीआरओ केके राजदान, प्रभारी सचिव लोनिवि अमित नेगी, अपर सचिव वन मनोज चंद्रन सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

Sunday, 5 January 2014

Height and medium tourist attractions include the pilgrimage

देहरादून। देर आए-दुरुस्त आए, कम से कम प्रदेश में आई भीषण दैवीय आपदा के बाद शासन अब सबक तो लेता दिख रहा है। इस कड़ी में पर्यटन विभाग अब प्रदेश के विभिन्न पर्यटन क्षेत्रों के साथ ही तीर्थ स्थलों में यात्री क्षमता का अध्ययन करने जा रहा है। इसका मकसद यह आकलन करना है कि इन स्थानों पर एक समय में अधिकतम कितने पर्यटकों का आना सुरक्षित होगा। मकसद यह कि यदि भविष्य में कहीं कोई आपदा आती है तो इन यात्रियों को निकालने में परेशानी न हो। 

उत्तराखंड के पर्यटन स्थल और तीर्थ स्थल अरसे से देशी और विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करते रहे हैं। यहां की मनोरम वादियां पर्यटकों को बरबस ही अपनी ओर खींचती हैं। यही कारण है कि साल दर साल प्रदेश में आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ती जा रही है। इस बार जून में आई आपदा ने एकाएक प्रदेश की छवि को गहरा नुकसान पहुंचाया। यहां तक कि आपदा प्रबंधन को लेकर सरकार व शासन को कटघरे में खड़ा किया गया। नतीजतन, पर्यटक प्रदेश से दूर होते गए। अब शासन व पर्यटक विभाग की ओर से लगातार पर्यटकों को आकर्षित करने के प्रयास हो रहे हैं।

इस कड़ी में प्रदेश में पर्यटन को सुरक्षित करने के लिए अब शासन द्वारा पर्यटन व तीर्थ स्थलों की यात्री क्षमता का अध्ययन करने की तैयारी की जा रही है। इसके तहत ऊंचाई वाले पर्यटन क्षेत्र, मध्यम ऊंचाई के पर्यटन क्षेत्र व सभी सूचीबद्ध तीर्थ स्थलों का अलग-अलग अध्ययन किया जाना है। अध्ययन में यह देखा जाएगा कि ये पर्यटन स्थल एक समय में कितने यात्रियों को वहन कर सकते हैं। यहां पर यात्री सुविधा के क्या इंतजाम हैं। यहां की सड़कें कैसी हो और यहां अन्य व्यवस्थाएं कैसी हैं। इस अध्ययन के बाद इसकी एक रिपोर्ट तैयार की जाएगी, ताकि पर्यटन गतिविधियों को नियंत्रित रूप में संचालित किया जा सके। इसके लिए विभाग एडीबी के माध्यम से बजट लेने का प्रयास कर रहा है। 

अपर सचिव पर्यटन सचिन कुर्वे ने इसकी पुष्टि की है। उनका कहना है कि एडीबी के माध्यम से इसका अध्ययन कराए जाने की योजना है।