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Thursday, 20 February 2014

Shri Amarnath Yatra 2014 Guidebook Released

राज्यपाल एनएन वोहरा ने मंगलवार को जम्मू, कश्मीर एंड लद्दाख टूरिज्म डेवलपमेंट कोऑपरेटिव लिमिटेड (जेकेएलटीडीसी) द्वारा तैयार की गई श्री अमरनाथ यात्रा-2014 गाइड बुक के दूसरे संस्करण का विमोचन किया।

उन्होंने जेकेएलटीडीसी के कार्य की सराहना करते हुए कहा कि यात्रा से संबंधित पुस्तक में दी गई समग्र देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए उपयोगी सिद्ध होगी। जेकेएलटीडीसी के चेयरमैन राजेश गुप्ता ने बताया कि गाइड में यात्रा के दौरान आने वाले स्थलों की जानकारी के अलावा, यात्रा रजिस्ट्रेशन सेंटर, ग्रुप रजिस्ट्रेशन, एनआरआई रजिस्ट्रेशन, स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी के अलावा यात्र के दौरान क्या करें, क्या न करें के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई है। गुप्ता ने बताया कि इसके अलावा गाइड में स्वास्थ्य प्रमाण पत्र हासिल करने के लिए क्या करना है, के बारे में भी बताया गया है। यही नहीं श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए गाइड में होटल के नंबर, हेलीकॉप्टर बुकिंग व अन्य सुविधाओं के बारे में भी जानकारी दी गई है।

इस अवसर पर श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड के सीईओ नवीन के चौधरी के अलावा कोऑपरेटिव के स. अमरीक सिंह, अजय कुमार गुप्ता, स. गुरमीत सिंह, एसएस मदनी, निशांत कुमार गुप्ता, एडवोकेट शकील अहमद सहित अन्य शामिल थे।

Monday, 2 December 2013

BJP defends Modi, challenges Omar for debate on Article 370

farooq abdullah
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। कश्मीर और कश्मीरियों के विकास में अनुच्छेद 370 की उपयोगिता पर नरेंद्र मोदी के सवाल और बहस की अपील ने राजनीति गर्म कर दी है। भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार की ओर से छेड़ी गई इस बहस को कांग्रेस के साथ ही नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी ने जहां सिरे से खारिज कर दिया है, वहीं भाजपा मोदी के पीछे खड़े हो गई है। सुषमा स्वराज और अरुण जेटली ने संविधान के अनुच्छेद 370 पर नरम रुख को नकारते हुए आरोप लगाया कि इसी के सहारे कुछ लोग अभी भी भारत से 'आजादी' जैसी भावनाओं को बढ़ावा दे रहे हैं।

नरेंद्र मोदी ने रविवार को जम्मू की रैली में यह कहकर पार्टी के अंदर और बाहर बहस छेड़ दी थी कि अनुच्छेद 370 पर चर्चा होनी चाहिए कि यह जम्मू-कश्मीर की आम जनता के लिए कितना फायदेमंद रहा। भाजपा अनुच्छेद 370 को किसी भी शर्त पर समझौते का मुद्दा नहीं मानती। ऐसे में मोदी की ओर से बहस की अपील ने कुछ नरमी का शुरुआती संकेत भले ही दिया हो, लेकिन कांग्रेस समेत दूसरे दलों ने इसे खारिज कर दिया है। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने चुटकी लेते हुए पूछा, 'क्या मोदी की अगुआई में भाजपा ने वाजपेयी और आडवाणी की विरासत को रुखसती दे दी है? कश्मीर पर यू टर्न ले लिया है?'

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पीडीपी नेता मुफ्ती मोहम्मद सईद के अलावा कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह भी मोदी पर बरसे। तीनों नेताओं ने इसे भाजपा की विभाजनकारी नीति करार देते हुए कहा कि इस पर कोई पुनर्विचार और बहस नहीं हो सकती है। उमर ने जहां मोदी के ज्ञान पर सवाल खड़ा किया तो सईद ने दावा किया कि केंद्र सरकार चाहकर भी इस अनुच्छेद से छेड़छाड़ नहीं कर सकती। पार्टी ने आगाह किया कि इससे छेड़छाड़ की कोशिश हुई तो उसका व्यापक असर दिखेगा।

उमर की आलोचना के बावजूद मोदी ने सोमवार को भी बहस जारी रखी और उसमें दूसरे नेता भी शामिल हो गए। मोदी ने ट्वीट पर कहा कि उन्हें खुशी है कि अनुच्छेद 370 पर बहस तो शुरू हुई। ट्वीट में उन्होंने यह भी जोड़ा कि अनुच्छेद 370 के साथ-साथ कश्मीरी पंडितों जैसे समाज के दूसरे वर्गो की दशा पर भी तार्किक चर्चा होनी चाहिए। कश्मीरी पंडितों के मुद्दे पर भाजपा लगातार सवाल उठाती रही है।

उमर और सईद पर पलटवार जेटली की ओर से हुआ। उन्होंने कश्मीर के लिए अलग दर्जे के निर्णय पर सवाल खड़ा किया और कहा कि देश से आजादी जैसी भावनाओं को बढ़ाने वाले प्रदेश के नेताओं ने इस सूबे को देश के दूसरे हिस्सों से नहीं जुड़ने दिया। अलग दर्जा देश के साथ जुड़ाव की बजाय अलगाववाद की ओर बढ़ता जा रहा है। जम्मू-कश्मीर रेजीडेंट विधेयक का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य की महिलाओं को संपत्ति के अधिकार से दूर करने की कोशिश हो रही है। कश्मीरियत को महिला अधिकार के खिलाफ खड़ा किया जा रहा है।
पनुन कश्मीर ने किया स्वागत
जम्मू। पनुन कश्मीर की राजनीतिक मामलों की कमेटी ने जम्मू कश्मीर को मिले विशेष दर्जे वाली धारा 370 पर नरेंद्र मोदी के बयान का स्वागत किया है। कमेटी की बैठक प्रो. एमएल रैना की अध्यक्षता में हुई, जिसमें प्रधान अश्विनी कुमार चरंगु, वीरेंद्र रैना, जेएल कौल, उपेंद्र कौल, कमल भगती, विजय काजी व अन्य शामिल हुए।
कश्मीर पंडितों के इस संगठन की बैठक को संबोधित करते हुए अश्विनी कुमार चरंगु ने कहा कि ललकार रैली में नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रवादी ताकतों का मनोबल बढ़ाया है।
-''अलग दर्जा भारत में कश्मीर के जुड़ाव की बजाय अलगाववाद को दे रहा है बढ़ावा, भाजपा के रुख से नरम नहीं पड़े हैं मोदी''
- अरुण जेटली, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष
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-''2004 में भाजपा ने नहीं किया था अनुच्छेद 370 का उल्लेख, अब चर्चा के लिए हो गए तैयार.यह भाजपा का यू टर्न''
-मनीष तिवारी, सूचना एवं प्रसारण मंत्री
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Wednesday, 6 November 2013

Rahul Gandhi addresses rally in Jammu

Rahul Gandhi

जम्मू [जागरण ब्यूरो]। जम्मू-कश्मीर के पंच-सरपंचों को अधिकार दिलाने का वादा करने जम्मू पहुंचे राहुल गांधी ने कहा कि
गुटबाजी करने वाले नेताओं की सुलह करवाते समय मन करता है कि उन्हें डंडे मारूं। गुटबाजी खत्म करने के लिए जो छत्तीसगढ़ में किया है वह कांग्रेस की एकजुटता के लिए जम्मू-कश्मीर में भी करेंगे। राहुल गांधी पंच-सरपंचों के सम्मेलन में हिस्सा लेने से पूर्व बुधवार दोपहर को यहां कांग्रेस कार्यालय में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे। राहुल गांधी ने चुनाव में बार-बार हारने के बाद भी टिकट की दावेदारी जताने वाले नेताओं के दिन लद जाने के संकेत भी दिए। उन्होंने कहा कि दो बार चुनाव में नाकाम रहे नेताओं को अब टिकट नहीं दी जाएगी।

वहीं, दूसरी तरफ राहुल को कुछ पंचायत प्रतिनिधियों की खरी-खरी सुननी पड़ी। पंचायत सम्मेलन में एक सरपंच ने इतना हंगामा किया कि राहुल को अपना भाषण बीच में ही छोड़ना पड़ा। सम्मेलन में एक तरफ सरपंच परीक्षित सिंह ने पंचायतों को अधिकार न मिलने पर अपना गुस्सा निकालना शुरू किया तो कई अन्य पंच-सरपंचों ने राहुल गांधी के समर्थन में नारे लगाने शुरू कर दिए। इस शोर-शराबे के कारण सम्मेलन में खलल पड़ गया। अंतत: राहुल कार्यक्रम समेटकर निकल गए।

हुआ यूं कि मौलाना आजाद स्टेडियम के पंचायत सम्मेलन में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने जब पंचायतों को अधिकार दिलाने के लिए फिर से लड़ाई छेड़ने की बात कही तो ऊधमपुर जिला की रामनगर तहसील की पंचायत बुखतान के सरपंच परीक्षित सिंह व कुछ अन्य पंच भड़क गए। पंचायतों को अधिकार दिलाने के राहुल के वादे से गुस्साए परीक्षित ने कहा कि पिछले तीन साल से पंच-सरपंचों को बेवकूफ बनाया जा रहा है। हमें न्याय चाहिए। हमें आज तक अधिकार नहीं मिल पाए हैं। हमें अधिकार दिए जाने का दिन कब आएगा? परीक्षित के हंगामे के कारण राहुल को अपना भाषण में बीच में रोड़ना पड़ा।

इस बीच, कई सरपंचों व पंचों ने राहुल गांधी जिंदाबाद के नारे लगाने शुरू कर दिए। इस शोर-शराबे के बीच ही राहुल ने कहा, 'मैं पंचायतों को अधिकार दिलाने के मुद्दे पर सरकार पर दवाब बनाने की बात कह चुका हूं। एक मिनट में कुछ नहीं होने वाला है। हमें दबाव डालना होगा। मैं बार-बार जम्मू-कश्मीर आऊंगा और पंचायतों को अधिकार दिलाकर ही रहूंगा।'

इतना कहकर राहुल मंच से उतर गए लेकिन वहां पर हंगामा होता रहा। इस बीच प्रदेश प्रभारी अंबिका सोनी मंच पर पहुंची और उन्होंने कहा कि प्रत्येक पंचायत को दस-दस लाख रुपये जारी करने का प्रस्ताव केंद्र के पास है और वित्तीय विभाग में यह फाइल अंतिम चरण में है। अंबिका सोनी ने कहा कि इस समय चुनाव नजदीक है, इसलिए राहुल गांधी ने यह घोषणा नहीं की। इससे पूर्व सम्मेलन में राहुल गांधी ने जम्मू-कश्मीर के पंच-सरपंचों को पूरा हक दिलाने का यकीन दिलाते हुए कहा कि वह भारतीय संविधान के 73 व 74 वें संशोधन को लागू करवाने के लिए राज्य सरकार पर दबाव बनाएंगे।

करीब 16 मिनट के भाषण में राहुल ने केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भोजन अधिकार कानून जम्मू-कश्मीर में लागू होना चाहिए। उनकी इस सिलसिले में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से बात हुई है। भोजन अधिकार कानून को लागू करने के लिए केंद्र सरकार कमियां पूरी करेगी।
Source- News in Hindi

Monday, 4 November 2013

Modis Influence, but not Wave

Narendra Modi

नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। नरेंद्र मोदी की सेंध अब संप्रग सहयोगियों में भी दिखने लगी है। जदयू नेता शिवानंद तिवारी की प्रशंसा के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी मान लिया कि मोदी का असर है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि वह पाला बदलने वाले नहीं हैं। बहरहाल, उनके बयान ने राजनीतिक दलों और लोगों में चिंतन-मंथन को जरूर तेज कर दिया है। उत्साहित भाजपा उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी ने भी यह कहने में देर नहीं की कि मोदी के सुशासन की सुनामी आ गई है।
उमर नेशनल कांफ्रेंस के नेता और मुख्यमंत्री होने के साथ-साथ कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के प्रशंसक और समर्थक हैं। ऐसे में उनके इस नए बयान ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। कांग्रेस जहां मोदी के असर को 'कृत्रिम' करार देती रही है वहीं उमर का मानना है कि मोदी का असर है। लहर तो नहीं है, लेकिन उनको नकारना गलत होगा। उन्होंने अपनी ओर से यह साफ करने में देर नहीं लगाई कि वह खुद को कांग्रेस के ही नजदीक पाते हैं। लेकिन उनकी ओर से यह संकेत देना ही अहम है कि जम्मू-कश्मीर में बैठकर भी वह मोदी का असर देख रहे हैं। कुछ दिन पहले ही जदयू नेता शिवानंद तिवारी पार्टी मंच से ही मोदी का लोहा मान चुके हैं। जबकि खुद कांग्रेस के मंत्री जयराम रमेश ने भी आगाह किया था कि मोदी पार्टी के लिए एक चुनौती हैं। 

उत्तर प्रदेश और दूसरे राज्यों में व्यक्तिगत रूप से नेताओं में मोदी का असर दिखने लगा है। ऐसे में उमर के बयान का स्वागत करते हुए भाजपा ने कांग्रेस को आगाह किया कि उनकी अंतिम पारी का काउंटडाउन शुरू हो गया है। नकवी ने कहा, 'कांग्रेस के कुशासन के कहर के खिलाफ सुशासन की सुनामी आई हुई है। कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक इसका असर दिख रहा है। मोदी विश्वास और सुशासन के प्रतीक बन गए हैं। उन्हें कोई नजरअंदाज नहीं कर सकता है।

मोदी का समर्थन करेगी नेकां: शेख मुस्तफा
जागरण ब्यूरो, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा पाला नहीं बदलने के वक्तव्य के उलट उनके चाचा और नेशनल कांफ्रेंस के अतिरिक्त महासचिव शेख मुस्तफा कमाल ने भाजपा के प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी नरेंद्र मोदी को समर्थन देने की बात कही है।

उन्होंने कहा कि भाजपा यदि केंद्र की सत्ता में आती है तो उनकी पार्टी उसे अपना समर्थन देगी।
कमाल ने कहा कि अगले साल आम चुनाव में मोदी जीत दर्ज कर प्रधानमंत्री बने तो नेशनल कांफ्रेंस उनके साथ मैत्रीपूर्ण संबंध रखेगी। हालांकि हम अपने सिद्धांतों से कोई समझौता नहीं करेंगे।
हमारे वालिद शेख साहब (नेका के संस्थापक शेख मुहम्मद अब्दुला) कहा करते थे कि हमें नई दिल्ली में सत्तासीन होने वाले दल के साथ रहना है। 

Source- News in Hindi

Wednesday, 25 September 2013

News in Hindi: Jammu Kashmir never merged with India: Omar



Jammu Kashmir

जम्मू [जागरण ब्यूरो]। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का कहना है कि विशेष दर्जे वाले जम्मू-कश्मीर का भारत से विलय संपूर्ण नहीं है। चार शर्तो के साथ राज्य का देश से विलय जरूर हुआ था, लेकिन अन्य प्रदेशों की तरह वह पूर्ण रूप से देश से नहीं जुड़ पाया। यही कारण है कि राज्य का अपना अलग संविधान और ध्वज है।

श्रीनगर में बुधवार को एक बैठक के दौरान यूरोपियन यूनियन के प्रतिनिधिमंडल में शामिल विभिन्न देशों के राजदूतों से बातचीत में उमर ने कहा कि जिन चार शर्तो पर विलय हुआ था वे मुद्रा, संचार, विदेशी मामले व सुरक्षा हैं। यूरोपियन प्रतिनिधिमंडल इन दिनों कश्मीर के हालात का जायजा लेने के लिए राज्य के दौरे पर है। उमर ने कहा राजनीतिक पृष्ठभूमि वाली समस्याओं का हल राजनीतिक फ्रेमवर्क में संभव है। पैसे से या जोर जबरदस्ती से समाधान नहीं होगा। कश्मीर समस्या वर्ष 1990 में आतंकवाद के साथ नहीं बल्कि विभाजन के समय शुरू हुई थी, जब जम्मू-कश्मीर को छोड़ अन्य सभी राज्यों का फैसला कर दिया गया था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कश्मीर समस्या के समाधान के लिए जरूरी है कि इसके आंतरिक व बाहरी पहलुओं को देखते हुए केंद्र सरकार, अलगाववादियों व भारत-पाकिस्तान में बातचीत की प्रक्रिया शुरू हो।

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