नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। केंद्र सरकार के तेज-तर्रार मंत्री जयराम रमेश की साफगोई एक बार फिर कांग्रेस को भारी पड़ रही है। निशाना तो उन्होंने भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी पर साधा। मगर वह लगा कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को। मोदी को तानाशाह बताने के साथ-साथ उन्होंने राहुल की मौजूदा रणनीति से असहमति जताते हुए सवाल उठा गए। इतना ही नहीं जयराम का बयान लोकसभा चुनावों में कांग्रेस की हार की आशंका को भी दर्शा गया। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस इस दफा हारी तो अगली बार राहुल के पास वापसी का मौका भी होगा।
सरकार के साथ-साथ कांग्रेस में भी जयराम का कद खासा बढ़ा है। राहुल के साथ उनकी नजदीकी का असर है कि सभी चुनाव समितियों का उन्हें समन्वयक भी बना दिया गया है। यह अलग बात है कि बीच-बीच में जयराम रमेश के बयानों पर कांग्रेस बगले झांकती नजर आती है। इस दफा भी उन्होंने कुछ ऐसा ही किया है। नरेंद्र मोदी पर प्रहार करते-करते जहां वह हल्की भाषा का इस्तेमाल कर गए। वहीं, कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की मौजूदा रणनीति पर भी सवाल उठा गए। एक विदेशी न्यूज एजेंसी को दिया गया जयराम का साक्षात्कार फिलहाल कांग्रेस में खासा चर्चा का सबब बना हुआ है।
जयराम ने इस साक्षात्कार में मौजूदा समय में राहुल गांधी के संगठन में बदलावों पर उठ रहे सवालों पर पार्टी के भीतर चल रही बेचैनी को जाहिर कर दिया। उन्होंने कहा कि वह आगे की सोच रहे हैं, लेकिन पहले चुनाव देखने चाहिए। इसके आगे वह यह भी कह गए कि कांग्रेस यदि हार गई तो भी राहुल गांधी वापसी कर सकते हैं, जबकि मोदी हारे तो वह खत्म हो जाएंगे। हालांकि, वह मोदी की बढ़ती लोकप्रियता की बात मानने के साथ-साथ अगले चुनावों को लेकर कांग्रेस की आशंका को भी जता गए। जयराम ने कहा कि मोदी की लोकप्रियता बढ़ी है, लेकिन वह कांग्रेस के लिए खतरा नहीं हैं।
मोदी ने अपनी पार्टी को हाशिये पर कर दिया है। राहुल की सियासत पर सवाल उठाने के बाद भाजपा पर हमला करने में जयराम भाषाई मर्यादा लांघ गए। रमेश के बयान पर कांग्रेस को सफाई देना मुश्किल हो गया है। इस संबंध में पूछे जाने पर पार्टी प्रवक्ता मीम अफजल ने कहा, 'मैंने उनका बयान नहीं देखा। मैंने कोशिश की, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया है।' वहीं, भाजपा ने इसे चुनाव से पहले हार मान लेने वाला बयान करार दिया है।
'राहुल बहुत दूर तक देख रहे हैं। व्यवस्था के साथ कांग्रेस को आगे के लिए तैयार कर रहे हैं। मेरा कहना है कि उन्हें फिलहाल ये प्रयास आने वाले चुनाव को ध्यान में रखकर करने चाहिए।'
- जयराम रमेश, केंद्रीय मंत्री
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-यह प्रमाणित तथ्य है कि राहुल गांधी सीखने में बहुत समय ले रहे हैं। कांग्रेसी कार्यकर्ता हताश हो गए हैं क्योंकि राहुल गांधी नेतृत्व प्रदान करने की उनकी उम्मीदों पर खरे नहीं उतर रहे।
- कैप्टन अभिमन्यु, भाजपा प्रवक्ता