Showing posts with label upa government. Show all posts
Showing posts with label upa government. Show all posts

Friday, 20 June 2014

Aziz Qureshi to take additional charge as Uttar Pradesh Governor

Aziz Qureshi
Qureshi was given the additional charge of UP Governor after BL Joshi resigned from the post on June 16 after a nudge from the Centre to some Governors appointed by the previous UPA government to quit.
  
The tenure of Joshi had expired a few months ago and he was sworn in again for another term.
  
Qureshi will be administered the oath of office as the UP Governor by Allahabad High Court Chief Justice DY Chandrachood at Raj Bhawan in Lucknow on June 23, an official release said on Friday.

Source: States News

Wednesday, 15 January 2014

Modi attacks UPA government

गांधीनगर। भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार और गुजरात के मुख्यमंत्री ने बुधवार को कहा कि देश लच्छेदार भाषणों से नहीं चलता। देश की अर्थव्यस्था को पटरी में लाने के लिए विश्वास का माहौल चाहिए।
मोदी ने कहा देश को चलाने के लिए नेतृत्व क्षमता महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि गलत नीतियों की वजह से देश की अर्थव्यवस्था बदतर स्थिति में पहुंच गई है। देश की प्राकृतिक संपदा का सही सदुपयोग नहीं हो पा रहा है। 

Wednesday, 8 January 2014

Narendra modi represents NRIs in Delhi


नई दिल्ली। दिल्ली में चले रहे प्रवासी भारतीय सम्मेलन के आखिरी दिन भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने मुताबिक देश में बहुत जल्द अच्छे दिन आने वाले है। मोदी ने कहा कि मुझे विश्वास है कि वाकई बहुत जल्द अच्छे दिन आने वाले हैं। उन्होंने जैसे ही यह बात कही, पूरे सदन में तालियां गूंज उठीं।

इसके पहले समारोह में बुधवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने दुनिया भर में फैले 2.2 करोड़ प्रवासी भारतीयों से विश्वास और आशा के साथ भारत के भविष्य में अपनी भूमिका बनाए रखने की अपील की थी। प्रधानमंत्री ने प्रवासी भारतीयों को भरोसा दिलाया कि उन्हें मातृभूमि से संबंध बढ़ाने में हरसंभव मदद की जाएगी। उन्होंने कहा कि भारतीय कामगारों को विदेश में सामाजिक सुरक्षा देने के लिए हमने हाल में महात्मा गांधी प्रवासी सुरक्षा योजना पेश की है।

Sunday, 5 January 2014

2014, Ten Years of Manmohan Singh Exile


अमृतसर [रमेश शुक्ला 'सफर']। मेरे 'मोहन' ने मेरी सुन ली। कृष्ण भक्त हूं, बचपन से ही मोहन के साथ मन की बातें करता आया हूं। बचपन, जवानी मोहन के साथ बीती है। एक मोहन भगवान कृष्ण तो दूजे प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह [मेरा मोनू]। बीते 12 दिसंबर को मंदिर घर में मोहन से प्रार्थना की थी कि 'हे मोहन'! मेरे मनमोहन को सद्बुद्धि दे। दस साल हो चले हैं, मिला ही नहीं हमसे। अच्छा तो यही है कुर्सी छोड़े दे, उम्र भी तो हो चली है। हमारे लिए वो तो 'वनवास' ही चला गया। 

मैं धन्य हूं कि मेरी मोहन ने भी सुनी और मनमोहन ने भी। प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने दस साल बाद कहा कि 'अब प्रधानमंत्री मैं नहीं'। अब कृष्ण भगवान से यही कहता हूं कि 'हे मोहन', खुश रहे मनमोहन' खुश रखना उसे हमेशा। यह प्रार्थना वाले 'हाथ' दोस्ती के वो हाथ हैं जिन्हें राजनीति से सरोकार नहीं, वो दोस्ती का 'फूल' खिलाते हैं। हम और 'आप' की बातों में नहीं आते। यह हाथ हैं प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह के गहरे मित्र व सहपाठी पठानकोट के विक्रम सिंह के। 

विक्रम सिंह प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के वहीं सहपाठी है, जिन्होंने दैनिक जागरण के माध्यम से डॉ. मनमोहन सिंह से कुर्सी छोड़ने की सलाह बीते 13 दिसंबर को दी थी। 'मोनू! छोड़ दो कुर्सी, बाकी मर्जी 'आप' की' दैनिक जागरण में प्रकाशित हुई तो चैनल दौड़े थे।

विक्रम सिंह हंसते हुए कहते हैं कि 'अब कहीं मेरे मोनू को लेकर 'आप' यह मत छाप देना की वो राजनीति के काबिल नहीं हैं। वो हैं काबिल, लेकिन स्वच्छ, निष्पक्ष राजनीति के। दस साल तक मेरा मोहन बोला, लेकिन 'मन' से नहीं। मोहन ने क्या नहीं दिया देश को। मोहन ने तन, मन, धन सब कुछ अर्पण किया है देश के लिए।
मैं जानता हूं कि वो कितने ईमानदार हैं, शायद 'आप' भी नहीं। खुशी है कि मोनू! कालेज के दिनों में कहा करता था कि विक्रम, देखना एक दिन तेरा मोनू तुझे कुछ बनकर दिखाएगा, सच हुआ, मोनू से कब वो डॉ. मनमोहन सिंह हुआ, और कब नोटों पर उसके हस्ताक्षर चलने लगे और कब प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठे। जिंदगी जैसे पलों में गुजर गई'। इतने के साथ ही फोन पर ही विक्रम सिंह भावुक हो गए। 

Thursday, 2 January 2014

Live manmohan singh address media

 Latest Hindi News
नई दिल्ली। करीब चार साल बाद शुक्रवार को मीडिया से रूबरू होते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पिछले दस वर्षो में यूपीए सरकार द्वारा किए गए कार्यो का बखान किया, वहीं खराब आर्थिक हालात के लिए मंदी को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने के संकेत देते हुए कहा कि मैं अगले पीएम को सत्ता सौंपने को तैयार हूं। उम्मीद है अगला पीएम यूपीए का ही होगा। पीएम ने एक सवाल के जवाब में नरेंद्र मोदी पर हमला करते हुए कहा अगर वे प्रधानमंत्री बनते हैं तो यह देश के लिए विनाशकारी होगा। सभी को पता है कि किस तरह अहमदाबाद की सड़कों पर कत्लेआम हुआ।

प्रधानमंत्री सिंह ने कहा कि चुनाव में हमारी पार्टी ने अच्छा नहीं किया। लोकतंत्र में जनता की भागीदारी दिखी। उन्होंने विकास दर में तेजी का भरोसा जाहिर करते हुए कहा कि नौ साल में विकास दर सबसे बेहतर रहा। पहली स्थिति अच्छी थी फिर बीच में खराब हुई। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था के हित में हमने कई फैसले लिए हैं जिससे स्थिति ठीक हो रही है।

प्रधानमंत्री सिंह ने विकास में सभी की भागीदारी पर जोर देते हुए कहा कि मनरेगा से देश को बड़ा फायदा हुआ। ग्रामीण इलाकों तक विकास पहुंचा है और यहां तेजी से घटी है। हालांकि उन्होंने यह स्वीकार किया कि ज्यादा रोजगार बढ़ाने में रोजगार बढ़ाने में सफल नहीं रहे, लेकिन प्रति व्यक्ति आय चार गुना बढ़ने का जरूर जिक्र किया।

मनमोहन ने बढ़ते भ्रष्टाचार पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि इससे निपटने के लिए उनकी सरकार ने बेहतर काम किया है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता पर काफी काम किया है।

अपने संबोधन के बाद पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री सिंह ने कहा कि राहुल गांधी में पीएम बनने की क्षमता है, वह एक बेहतर विकल्प हो सकते हैं। लेकिन इसका फैसला पार्टी को लेना है।

एक सवाल के जवाब में पीएम ने कहा कि मैंने अपने दोनों कार्यकाल में कभी ऐसा महसूस नहीं किया कि मुझे इस्तीफा दे देना चाहिए। मैंने अपने काम को पूरी ईमानदारी से किया है। पीएम ने कहा कि सच्चर कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक हमने कई कदम उठाए हैं, लेकिन दुर्भाग्यवश यह बात जनता तक नहीं पहुंच सकी है।

दैनिक जागरण के संवाददाता द्वारा यह पूछे जाने पर कि उन पर सबसे ज्यादा चुप रहने के आरोप लगे हैं, इस पर पीएम ने कहा कि जब भी जरूरत पड़ी है वह पार्टी फोरम पर अपनी बात रखते रहे हैं।

Read more : Latest Hindi News

Wednesday, 1 January 2014

lpg gas price hike by 220 rupee

नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। अपने कोटे के एलपीजी सिलेंडर का सोच-समझ कर इस्तेमाल करें, क्योंकि तेल कंपनियों ने गैर-सब्सिडी वाले सिलेंडर की कीमत एकमुश्त 220 रुपये बढ़ा दी है। रसोई गैस सिलेंडर की खुदरा कीमत में यह अभी तक की सबसे बड़ी वृद्धि है। साल में सब्सिडी वाले नौ सिलेंडर के बाद ग्राहकों को 10वें के लिए अब 1241 रुपये देना पड़ेगा।

तेल कंपनियों के इस फैसले से उन जिलों के एलपीजी ग्राहकों पर तत्काल असर पड़ेगा, जहां आधार नंबर से जुड़े बैंक खातों में सीधे गैस सब्सिडी देने की डीबीटी योजना अनिवार्य कर दी गई है। केंद्र सरकार ने डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी डीबीटी स्कीम के पहले चरण में 20 जिलों में इसे अनिवार्य कर दिया है। इनमें पंजाब [नवांशहर], हिमाचल प्रदेश [बिलासपुर, हमीरपुर, मंडी व ऊना] सहित महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, गोवा, मध्य प्रदेश [खंडवा व हरदा] सहित कई अन्य जिले हैं। इन जिलों के जिन एलपीजी ग्राहकों ने अभी तक डीबीटी योजना के तहत बैंक खाते को नहीं जोड़ा है, उन्हें रसोई गैस सिलेंडर के लिए ज्यादा कीमत [1241 रुपये से अधिक] देनी होगी।

पेट्रोलियम मंत्रालय भी इस मूल्य वृद्धि से चिंतित है। बुधवार यानी एक जनवरी से डीबीटी योजना को 34 और जिलों में अनिवार्य बनाया जाना था। लेकिन जैसे ही गैर सब्सिडी वाले रसोई गैस सिलेंडर की कीमत में इतनी बड़ी वृद्धि का पता चला मंत्रालय ने अनिवार्य बनाने की योजना को टाल दिया। मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक इन 34 जिलों में सिर्फ 50 फीसद ही एलपीजी ग्राहकों ने अभी तक आधार कार्ड बनवाया है। अगर यहां अनिवार्य बनाया गया तो आधे ग्राहकों को एलपीजी सिलेंडर के लिए 450 रुपये नहीं, बल्कि 1250 रुपये देने पड़ेंगे। इनमें पंजाब के पांच और हिमाचल प्रदेश के छह जिले शामिल हैं।

सरकार ने एक एलपीजी ग्राहक को साल में सब्सिडी वाले नौ सिलेंडर देने की नीति लागू की है। देश के 289 जिलों में ग्राहकों के बैंक खाते में एलपीजी सब्सिडी ट्रांसफर करने की नीति लागू हो चुकी है। हालांकि, सिर्फ 20 जिलों में ही इसे अनिवार्य बनाया गया है। डीबीटी स्कीम के तहत अभी तक 2,000 करोड़ रुपये की नकदी ग्राहकों के बैंक खाते में डाली जा चुकी है।

Read more : Hindi Samachar