अमेठी [दिलीप सिंह]। कांग्रेस के अभेद दुर्ग 'अमेठी' में पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी से पार पाना आम आदमी पार्टी [आप] के नेता कुमार विश्वास के लिए आसान नहीं होगा। गांधी-नेहरू परिवार का यहां के लोगों से खास रिश्ता है जो वीवीआइपी व आम आदमी के बीच लंबी दीवार के बाद भी मजबूत डोर में बंधा है। इसके पीछे जरूरतमंदों की मदद को बढ़ने वाला 'हाथ' अहम कारण हैं। यही वजह है कि अमेठी का हाथ, कांग्रेस के साथ होता है। दो दिन से यहां की गलियों में घूम रहे कुमार विश्वास को यह तिलिस्म तोड़ने के लिए कड़ी मशक्कत करनी होगी।
यहां से 1977 में पहली बार चुनावी समर में उतरे संजय गांधी को भले ही इमरजेंसी की कीमत पर शिकस्त मिली हो, लेकिन उसके बाद से अमेठी इनके परिवार की होकर रही है। इस रिश्ते के पीछे के सच काफी दिलचस्प है। गौरीगंज में राहुल के केंद्रीय कार्यालय में हर दिन दर्जनों लोग इस उम्मीद से पहुंचते हैं कि राहुल उनके बेटे की पढ़ाई में मदद करेंगे तो बूढ़े मां-बाप के इलाज की व्यवस्था भी। अब कार्यालय में बैठे लोग भी केवल नाम व पता जान कर जरूरी मदद के लिए पत्र लिखते हैं। अमेठी के संजय गांधी अस्पताल में इलाज करवाया जाता है। बीमारी गंभीर होने पर उन्हें दिल्ली भेजने की व्यवस्था की जाती है।
पिछले एक साल में राहुल के कार्यालय से छह हजार लोगों का नि:शुल्क इलाज कराया गया। कैंसर, हृदय रोग जैसी बीमारी से जूझ रहे नौ सौ लोगों के जीवन में खुशहाली आई। 27 लोगों की किडनी राहुल की दखल पर दिल्ली में बदली गई। राजीव गांधी सचल स्वास्थ्य सेवा की दस बसें प्रतिदिन अमेठी के गांव में नि:शुल्क इलाज के लिए पहुंचती हैं। 16 राजीव गांधी आरोग्य केंद्रों पर इलाज की नि:शुल्क व्यवस्था है।
Source: Hindi News
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