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Tuesday, 24 June 2014

Youth killed in firing during Kashmir clash

Kashmir soldier
The incident took place when the mob started pelting stones at security forces following the death of a Pakistani militant identified as Mehmood Bhai of the Lashkar-e-Taiba (LeT) outfit in an overnight gun battle with the security forces.

Police said in a statement that after the completion of the operation in Baba Raza Krankshevan area in which the Pakistani militant was killed, the security personnel were returning from the area when they were pelted with stones.

"The mob attempted to set afire a security armoured vehicle. Security forces used non-lethal weapons but the situation could not be controlled," police said.

A few shots were fired injuring four people.

One of the injured, identified as Arshad Ahmad Shah, son of Abdul Aziz Shah and resident of Seer Jagir area, succumbed to the injuries.

The other injured were hospitalised and were said to be out of danger.

Protestors carrying the body of the youth refused to bury him unless those responsible for the killing were punished..

Source: Hindi News

Friday, 20 June 2014

Valley 'Rbita Business Summit 2014 "organized

कश्मीर में उभरते उद्यमियों को प्रोत्साहित करने के लिए श्रीनगर में ‘रबीता व्यापार शिखर सम्मेलन 2014' का आयोजन किया गया।
Source: News Videos 

Monday, 2 December 2013

BJP defends Modi, challenges Omar for debate on Article 370

farooq abdullah
धारा 370: मोदी के बयान पर सुलगी सियासत
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। कश्मीर और कश्मीरियों के विकास में अनुच्छेद 370 की उपयोगिता पर नरेंद्र मोदी के सवाल और बहस की अपील ने राजनीति गर्म कर दी है। भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार की ओर से छेड़ी गई इस बहस को कांग्रेस के साथ ही नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी ने जहां सिरे से खारिज कर दिया है, वहीं भाजपा मोदी के पीछे खड़े हो गई है। सुषमा स्वराज और अरुण जेटली ने संविधान के अनुच्छेद 370 पर नरम रुख को नकारते हुए आरोप लगाया कि इसी के सहारे कुछ लोग अभी भी भारत से 'आजादी' जैसी भावनाओं को बढ़ावा दे रहे हैं।
नरेंद्र मोदी ने रविवार को जम्मू की रैली में यह कहकर पार्टी के अंदर और बाहर बहस छेड़ दी थी कि अनुच्छेद 370 पर चर्चा होनी चाहिए कि यह जम्मू-कश्मीर की आम जनता के लिए कितना फायदेमंद रहा। भाजपा अनुच्छेद 370 को किसी भी शर्त पर समझौते का मुद्दा नहीं मानती। ऐसे में मोदी की ओर से बहस की अपील ने कुछ नरमी का शुरुआती संकेत भले ही दिया हो, लेकिन कांग्रेस समेत दूसरे दलों ने इसे खारिज कर दिया है। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने चुटकी लेते हुए पूछा, 'क्या मोदी की अगुआई में भाजपा ने वाजपेयी और आडवाणी की विरासत को रुखसती दे दी है? कश्मीर पर यू टर्न ले लिया है?'
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पीडीपी नेता मुफ्ती मोहम्मद सईद के अलावा कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह भी मोदी पर बरसे। तीनों नेताओं ने इसे भाजपा की विभाजनकारी नीति करार देते हुए कहा कि इस पर कोई पुनर्विचार और बहस नहीं हो सकती है। उमर ने जहां मोदी के ज्ञान पर सवाल खड़ा किया तो सईद ने दावा किया कि केंद्र सरकार चाहकर भी इस अनुच्छेद से छेड़छाड़ नहीं कर सकती। पार्टी ने आगाह किया कि इससे छेड़छाड़ की कोशिश हुई तो उसका व्यापक असर दिखेगा।
उमर की आलोचना के बावजूद मोदी ने सोमवार को भी बहस जारी रखी और उसमें दूसरे नेता भी शामिल हो गए। मोदी ने ट्वीट पर कहा कि उन्हें खुशी है कि अनुच्छेद 370 पर बहस तो शुरू हुई। ट्वीट में उन्होंने यह भी जोड़ा कि अनुच्छेद 370 के साथ-साथ कश्मीरी पंडितों जैसे समाज के दूसरे वर्गो की दशा पर भी तार्किक चर्चा होनी चाहिए। कश्मीरी पंडितों के मुद्दे पर भाजपा लगातार सवाल उठाती रही है।
उमर और सईद पर पलटवार जेटली की ओर से हुआ। उन्होंने कश्मीर के लिए अलग दर्जे के निर्णय पर सवाल खड़ा किया और कहा कि देश से आजादी जैसी भावनाओं को बढ़ाने वाले प्रदेश के नेताओं ने इस सूबे को देश के दूसरे हिस्सों से नहीं जुड़ने दिया। अलग दर्जा देश के साथ जुड़ाव की बजाय अलगाववाद की ओर बढ़ता जा रहा है। जम्मू-कश्मीर रेजीडेंट विधेयक का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य की महिलाओं को संपत्ति के अधिकार से दूर करने की कोशिश हो रही है। कश्मीरियत को महिला अधिकार के खिलाफ खड़ा किया जा रहा है।
पनुन कश्मीर ने किया स्वागत
जम्मू। पनुन कश्मीर की राजनीतिक मामलों की कमेटी ने जम्मू कश्मीर को मिले विशेष दर्जे वाली धारा 370 पर नरेंद्र मोदी के बयान का स्वागत किया है। कमेटी की बैठक प्रो. एमएल रैना की अध्यक्षता में हुई, जिसमें प्रधान अश्विनी कुमार चरंगु, वीरेंद्र रैना, जेएल कौल, उपेंद्र कौल, कमल भगती, विजय काजी व अन्य शामिल हुए।
कश्मीर पंडितों के इस संगठन की बैठक को संबोधित करते हुए अश्विनी कुमार चरंगु ने कहा कि ललकार रैली में नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रवादी ताकतों का मनोबल बढ़ाया है।
-''अलग दर्जा भारत में कश्मीर के जुड़ाव की बजाय अलगाववाद को दे रहा है बढ़ावा, भाजपा के रुख से नरम नहीं पड़े हैं मोदी''
- अरुण जेटली, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष
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-''2004 में भाजपा ने नहीं किया था अनुच्छेद 370 का उल्लेख, अब चर्चा के लिए हो गए तैयार.यह भाजपा का यू टर्न''
-मनीष तिवारी, सूचना एवं प्रसारण मंत्री
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BJP defends Modi, challenges Omar for debate on Article 370

farooq abdullah
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। कश्मीर और कश्मीरियों के विकास में अनुच्छेद 370 की उपयोगिता पर नरेंद्र मोदी के सवाल और बहस की अपील ने राजनीति गर्म कर दी है। भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार की ओर से छेड़ी गई इस बहस को कांग्रेस के साथ ही नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी ने जहां सिरे से खारिज कर दिया है, वहीं भाजपा मोदी के पीछे खड़े हो गई है। सुषमा स्वराज और अरुण जेटली ने संविधान के अनुच्छेद 370 पर नरम रुख को नकारते हुए आरोप लगाया कि इसी के सहारे कुछ लोग अभी भी भारत से 'आजादी' जैसी भावनाओं को बढ़ावा दे रहे हैं।

नरेंद्र मोदी ने रविवार को जम्मू की रैली में यह कहकर पार्टी के अंदर और बाहर बहस छेड़ दी थी कि अनुच्छेद 370 पर चर्चा होनी चाहिए कि यह जम्मू-कश्मीर की आम जनता के लिए कितना फायदेमंद रहा। भाजपा अनुच्छेद 370 को किसी भी शर्त पर समझौते का मुद्दा नहीं मानती। ऐसे में मोदी की ओर से बहस की अपील ने कुछ नरमी का शुरुआती संकेत भले ही दिया हो, लेकिन कांग्रेस समेत दूसरे दलों ने इसे खारिज कर दिया है। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने चुटकी लेते हुए पूछा, 'क्या मोदी की अगुआई में भाजपा ने वाजपेयी और आडवाणी की विरासत को रुखसती दे दी है? कश्मीर पर यू टर्न ले लिया है?'

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पीडीपी नेता मुफ्ती मोहम्मद सईद के अलावा कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह भी मोदी पर बरसे। तीनों नेताओं ने इसे भाजपा की विभाजनकारी नीति करार देते हुए कहा कि इस पर कोई पुनर्विचार और बहस नहीं हो सकती है। उमर ने जहां मोदी के ज्ञान पर सवाल खड़ा किया तो सईद ने दावा किया कि केंद्र सरकार चाहकर भी इस अनुच्छेद से छेड़छाड़ नहीं कर सकती। पार्टी ने आगाह किया कि इससे छेड़छाड़ की कोशिश हुई तो उसका व्यापक असर दिखेगा।

उमर की आलोचना के बावजूद मोदी ने सोमवार को भी बहस जारी रखी और उसमें दूसरे नेता भी शामिल हो गए। मोदी ने ट्वीट पर कहा कि उन्हें खुशी है कि अनुच्छेद 370 पर बहस तो शुरू हुई। ट्वीट में उन्होंने यह भी जोड़ा कि अनुच्छेद 370 के साथ-साथ कश्मीरी पंडितों जैसे समाज के दूसरे वर्गो की दशा पर भी तार्किक चर्चा होनी चाहिए। कश्मीरी पंडितों के मुद्दे पर भाजपा लगातार सवाल उठाती रही है।

उमर और सईद पर पलटवार जेटली की ओर से हुआ। उन्होंने कश्मीर के लिए अलग दर्जे के निर्णय पर सवाल खड़ा किया और कहा कि देश से आजादी जैसी भावनाओं को बढ़ाने वाले प्रदेश के नेताओं ने इस सूबे को देश के दूसरे हिस्सों से नहीं जुड़ने दिया। अलग दर्जा देश के साथ जुड़ाव की बजाय अलगाववाद की ओर बढ़ता जा रहा है। जम्मू-कश्मीर रेजीडेंट विधेयक का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य की महिलाओं को संपत्ति के अधिकार से दूर करने की कोशिश हो रही है। कश्मीरियत को महिला अधिकार के खिलाफ खड़ा किया जा रहा है।
पनुन कश्मीर ने किया स्वागत
जम्मू। पनुन कश्मीर की राजनीतिक मामलों की कमेटी ने जम्मू कश्मीर को मिले विशेष दर्जे वाली धारा 370 पर नरेंद्र मोदी के बयान का स्वागत किया है। कमेटी की बैठक प्रो. एमएल रैना की अध्यक्षता में हुई, जिसमें प्रधान अश्विनी कुमार चरंगु, वीरेंद्र रैना, जेएल कौल, उपेंद्र कौल, कमल भगती, विजय काजी व अन्य शामिल हुए।
कश्मीर पंडितों के इस संगठन की बैठक को संबोधित करते हुए अश्विनी कुमार चरंगु ने कहा कि ललकार रैली में नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रवादी ताकतों का मनोबल बढ़ाया है।
-''अलग दर्जा भारत में कश्मीर के जुड़ाव की बजाय अलगाववाद को दे रहा है बढ़ावा, भाजपा के रुख से नरम नहीं पड़े हैं मोदी''
- अरुण जेटली, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष
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-''2004 में भाजपा ने नहीं किया था अनुच्छेद 370 का उल्लेख, अब चर्चा के लिए हो गए तैयार.यह भाजपा का यू टर्न''
-मनीष तिवारी, सूचना एवं प्रसारण मंत्री
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Thursday, 14 November 2013

Shahid kapoor's Movie Haider Shooting in Srinagar

Shahid Kapoor
श्रीनगर। लाल चौक से आठ किलोमीटर दूर पंद्रेठन में वीरवार को 'हैदर' ने ठंडी हवाओं के झोंकों के बीच झेलम दरिया में करीब चार घंटे तक सैर की। इस दौरान स्थानीय लोगों के साथ साथ पर्यटकों की भीड़ भी उसे देखने के लिए झील के आस-पास जमा हो गई।
इन दिनों कश्मीर में बॉलीवुड के निर्माता-निर्देशक विशाल भारद्वाज अपनी फिल्म हैदर की शूटिंग में व्यस्त हैं। फिल्म में मुख्य किरदार हैदर का है, जिसे शाहिद कपूर निभा रहे हैं। शेक्सपियर के नाटक हैमलेट को आधार पर बनाकर ही हैदर की पटकथा लिखी गई है, जो एक कश्मीरी युवक और कश्मीर की मौजूदा स्थित के इर्द-गिर्द घूमती है। शनिवार को शाहिद कपूर और श्रद्धा कपूर पर डल झील के विभिन्न हिस्सों में कुछ सीन फिल्माए गए थे।
अलबत्ता, वीरवार को झेलम में हैदर अपनी हीरोइन के बिना अकेला ही था। उस पर पांच शॉट फिल्माए गए। कभी वह रेत निकाल रहे श्रमिकों के बीच गया तो कभी किश्ती में बैठकर अकेला ही एक से दूसरे किनारे जा रहा था। हैदर (शाहिद) को देखने के लिए झेलम के दोनों किनारों पर दर्शकों की खूब भीड़ जमा हो गई थी। जिसे काबू करने के लिए पुलिस को भी खूब मशक्कत करनी पड़ी।
शाम पांच बजे शूटिंग का शेड्यूल पूरा हुआ और उसके बाद हैदर ने वहां मौजूद अपने कई प्रशंसकों से भी मुलाकात की और उन्हें ऑटोग्राफ भी दिए। इसके बाद उन्हें व पूरे फिल्म क्रयू को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था में पुलिस ने उन्हें उनके होटल तक पहुंचाया।

 Source - Entertainment Hindi News

Wednesday, 25 September 2013

News in Hindi: Jammu Kashmir never merged with India: Omar



Jammu Kashmir

जम्मू [जागरण ब्यूरो]। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का कहना है कि विशेष दर्जे वाले जम्मू-कश्मीर का भारत से विलय संपूर्ण नहीं है। चार शर्तो के साथ राज्य का देश से विलय जरूर हुआ था, लेकिन अन्य प्रदेशों की तरह वह पूर्ण रूप से देश से नहीं जुड़ पाया। यही कारण है कि राज्य का अपना अलग संविधान और ध्वज है।

श्रीनगर में बुधवार को एक बैठक के दौरान यूरोपियन यूनियन के प्रतिनिधिमंडल में शामिल विभिन्न देशों के राजदूतों से बातचीत में उमर ने कहा कि जिन चार शर्तो पर विलय हुआ था वे मुद्रा, संचार, विदेशी मामले व सुरक्षा हैं। यूरोपियन प्रतिनिधिमंडल इन दिनों कश्मीर के हालात का जायजा लेने के लिए राज्य के दौरे पर है। उमर ने कहा राजनीतिक पृष्ठभूमि वाली समस्याओं का हल राजनीतिक फ्रेमवर्क में संभव है। पैसे से या जोर जबरदस्ती से समाधान नहीं होगा। कश्मीर समस्या वर्ष 1990 में आतंकवाद के साथ नहीं बल्कि विभाजन के समय शुरू हुई थी, जब जम्मू-कश्मीर को छोड़ अन्य सभी राज्यों का फैसला कर दिया गया था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कश्मीर समस्या के समाधान के लिए जरूरी है कि इसके आंतरिक व बाहरी पहलुओं को देखते हुए केंद्र सरकार, अलगाववादियों व भारत-पाकिस्तान में बातचीत की प्रक्रिया शुरू हो।

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