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Friday, 6 June 2014

Harimandir Sahib Sikh organizations engaged in

ऑपरेशन ब्लूस्टार की 30वीं वर्षगांठ पर शुक्रवार को सुबह श्री हरिमंदिर साहिब के परिसर में अलगाववादी नेता सिमरनजीत सिंह मान व विभिन्न सिख संगठनों के कार्यकर्ताओं और एसजीपीसी टास्क फोर्स के बीच तलवारें चलीं और एक-दूसरे पर लाठियां भांजी गई। टकराव में एक दर्जन लोग घायल हो गए, जिसमें आठ सदस्य टास्क फोर्स के थे। गंभीर हालत में एक व्यक्ति को श्री गुरु रामदास अस्पताल में दाखिल करवाया गया है।

श्री अकाल तख्त साहिब के पवित्र मुख्य भवन में सुशोभित श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की हजूरी (के समक्ष) में अलगाववादी संगठनों के कार्यकर्ताओं ने खालिस्तान समर्थक नारे भी लगाए। टास्क फोर्स द्वारा रोकने पर दोनों के बीच तलवारें चली। टास्क फोर्स व अलगाववादी संगठनों के कार्यकर्ता लगभग दो घंटे तक अकाल तख्त साहिब परिसर के सामने एक-दूसरे के सामने नंगी तलवारें लिए खडे़ रहे। श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह के समझाने पर वह हटे। हिंसक झड़प के दौरान एसजीपीसी ने मीडिया को भी बाहर निकाल दिया। बता दें, ऑपरेशन ब्लूस्टार की वर्षगांठ पर यहां हर साल इस तरह की झड़पें होती रही हैं।

उधर, शुक्रवार को सिख संगठनों ने अमृतसर बंद का ऐलान भी किया। इसके मद्देनजर शहर में चप्पे-चप्पे पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। राज्य के अन्य जिलों से भी पुलिस फोर्स मंगाई गई है। बंद का मिलाजुला असर देखने को मिल रहा है।

Tuesday, 13 May 2014

Changed geography and history became Ó Rambadha

गौरीकुंड से केदारनाथ पैदल मार्ग पर इसी जगह कभी आबाद बस्ती रामबाड़ा हुआ करती थी। आपदा के बाद इसका नामो-निशान नहीं बचा। जिसने रामबाड़ा देखा था उसे विश्वास नहीं हो रहा और जिसने नहीं देखा, वह मानने को तैयार ही नहीं कि जिन चट्टानों के बीच मंदाकिनी शांत रूप में बह रही है, वहां कभी खुशहाल बस्ती हुआ करती थी। देखने वाले तो बस यही कह रहे हैं कि कुदरत ने यहां का भूगोल क्या बदला, इतिहास बनकर रह गया रामबाड़ा।

पिछले साल 16-17 जून को आई आपदा ने पूरी मंदाकिनी घाटी को हिला कर रख दिया था। घर, बाजार, खेत-खलिहान सब तबाह हो गए। इन्हीं में रामबाड़ा नामक केदारनाथ पैदल मार्ग का वह महत्वपूर्ण पड़ाव भी था, जिसका आज कहीं नामो-निशान तक नहीं है। यहां गढ़वाल मंडल विकास निगम का होटल, बाबा काली कमली वाले की धर्मशाला समेत दर्जनों होटल और धर्मशालाएं थीं। यहां ढाई सौ से अधिक दुकानें भी हुआ करती थी। यात्रा के दौरान यहां पांच हजार से अधिक यात्री रोजाना रात्रि विश्राम के लिए रुकते थे।

उस दिन मंदाकिनी ने ऐसा विकराल रूप धारण किया कि सबकुछ नेस्तनाबूद हो गया। रामबाड़ा इतिहास के पन्नों में दफन होकर रह गया।

यहां से गुजरने वाले स्थानीय लोग और रामबाड़ा को पहले देख चुके यात्री अब बस अंदाजा लगाकर ही बता पाते है कि इधर होटल था उधर दुकानें। यहां का भूगोल इस कदर बदल गया है कि ठीक से बता पाना भी मुश्किल है कि कहां क्या था। कभी बस्ती से 50 मीटर नीचे बहने वाली मंदाकिनी में अचानक ऐसा उफान आया कि वह सबकुछ बहा ले गई। कुछ ही पल में बड़े-बड़े भवन ताश के पत्तों की तरह ढह गए। और.पलक झपकते ही इतिहास बन गया 'रामबाड़ा'।

Saturday, 3 May 2014

Yamunotri still in the shadow of controversy!

गंगोत्री व यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ ही दोनों धामों में मानव हलचल भी शुरू हो गई है। हालांकि दोनों धामों में कपाट खुलने पर इस बार पहले जैसी रौनक नजर नहीं आई। जो यात्री पहले दिन यहां पहुंचे वे भी खामियों से निराश नजर आए।

शुक्रवार की सुबह जब गंगोत्री धाम के कपाट खुले तो मंदिर परिसर में एक हजार से अधिक लोग मौजूद रहे। इनमें करीब सौ यात्री बाहर के व अन्य स्थानीय श्रद्धालु, व्यवसायी, कर्मचारी व साधू संत शामिल थे। कम तादाद के बावजूद श्रद्धालुओं को गंगोत्री में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। देहरादून से पहुंचे रमेश कुमार व कनाडा से पहुंची एड्रोईया ने बताया कि यात्रा को जैसा सरकार ने प्रोजेक्ट किया है, वैसा कुछ भी नहीं है। यहां का कुदरती सौंदर्य अनोखा है, लेकिन सुविधाएं निराश करती हैं।

अन्नपूर्णा मंदिर के कपाट खुले-

अक्षय तृतीया पर्व पर डोडीताल स्थित मां अन्नपूर्णा मंदिर के कपाट भी श्रद्धालुओं के लिए खोले। बीते गुरुवार को ही केलसू क्षेत्र के लोग देवडोलियों के साथ डोडीताल पहुंच गए थे। अगोड़ा, गजोली, आदि से भी लोग आराध्यों की डोलियों को साथ ले गए।

यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के मौके पर एक बार फिर विवाद की छाया दिखाई पड़ी। पहले से नियत समय को बदलकर अंतिम समय पर कपाट खोले जाने का मुहूर्त बदल दिया गया। हालांकि तीर्थ पुरोहित इसके पीछे अभिजीत मुहुर्त बता रहे हैं, लेकिन दबी जुबान में मंदिर समिति में चल रहे विवाद को कारण बताया जा रहा है।

शुक्रवार की सुबह तक यमुनोत्री के तीर्थ पुरोहितों के गांव खरसाली में डोली यात्रा की तैयारियां पूरी कर ली गई थी। सुबह आठ बजे जैसे ही यमुना व शनिदेव की डोलियां उठाई जाने लगी तो कुछ तीर्थ पुरोहितों में आपस में सुगबुगाहट होने लगी। कुछ ही देर में पुरोहित परिवार से जुड़े एक सदस्य ने धाम के कपाट खुलने का समय दोपहर 11.55 के स्थान पर 12.25 किए जाने की ऐलान कर डाला। इसके बाद डोली यात्रा यमुनोत्री की ओर रवाना हो गई। इससे पहले यमुनोत्री धाम में भी कपाट खुलने के समय को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा बनी रही। हालांकि पुरोहितों ने पंचांग के अनुसार ही समय बदले जाने की बात कही। बता दें कि इसी विवाद के चलते बीते साल तक धाम में दो समानांतर मंदिर समितियां खड़ी हो गई थी। 

Wednesday, 9 April 2014

Pilgrims descended on shaktipeeths

चैत्र माह के नौवें नवरात्र पर कांगड़ा के तीनों प्रसिद्ध शक्तिपीठों पर हजारों श्रद्धालुओं ने माथा टेका व मां का आशीर्वाद लिया।

श्री चामुंडा नंदिकेश्वर धाम में करीब दस हजार श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की। यहां नवरात्र मेले का समापन पूर्णाहुति के साथ हुआ।

उधर, श्री ज्वालामुखी मंदिर में हवन पूजा व कन्या पूजन के साथ सहायक मंदिर आयुक्त विनय कुमार ने नवरात्र मेले का समापन किया। यहां बीस हजार भक्तों ने मां के दर्शन किए। वहीं, श्री बज्रेश्वरी मंदिर कांगड़ा में करीब 15 हजार श्रद्धालुओं ने माथा टेका, लेकिन उन्हें प्रशासन की अव्यवस्था के चलते परेशानी झेलनी पड़ी। यहां सफाई कर्मचारियों ने श्रद्धालुओं के जूते व चप्पल को उठा कर कांगड़ा के कूड़े स्थल पर फेंक दिया, जिससे उन्हें भारी परेशानी हुई।

Tuesday, 8 April 2014

Gross Bhaye friendly yoga diligently on Grhwar

योग लगन ग्रहवार तिथि सकल भये अनुकूल चर अरु अचर हर्ष युत राम जनम सुख मूल। राम जन्म का प्रसंग निरूपित करती रामचरितमानस की यह पंक्ति राम जन्मोत्सव की पूर्व संध्या पर साकार प्रतीत हो रही है। नगरी की परिधि में लाखों-लाख श्रद्धालु दाखिल हो चुके हैं और सबके चेहरे पर राम जन्मोत्सव की शुभ घड़ी की प्रतीक्षा का उल्लास झलक रहा है।

भिंड के रामबरन दंडौतिया को यद्यपि अपनी पूर्ण विकलांगता की वजह से चलने-फिरने में काफी दिक्कत होती है पर लकड़ी के हत्थे पर अपना भार उठाकर आगे बढ़ते दंडौतिया पूरे जोश में होते हैं और कनकबिहारी सरकार के दर्शन का संतोष उनके चेहरे से साफ पढ़ा जा सकता है। हालांकि दंडौतिया जैसा जोश तो बिरलों में होता है पर उन वृद्धों, बच्चों, युवाओं, महिलाओं आदि के उत्साह को अनदेखा नहीं किया जा सकता जो भीड़ के दबाव और पदयात्र की थकान को बौना कर मंदिर-मंदिर आराध्य के दर्शन की ललक बयां करते हैं। बजरंगबली की प्रधानतम पीठ हनुमान गढ़ी के अर्चक रमेशदास के अनुसार यह अध्यात्म की गंगा है और यहां मानसिक एवं आत्मिक सुख के आगे सारे सुख फींके हैं। हनुमानगढ़ी एवं कनकभवन से लेकर नगरी के पूर्वी मुहाने पर भी श्रद्धालुओं का सैलाब प्रवाहित नजर आता है। इसी क्षेत्र में स्थित निष्काम सेवा ट्रस्ट के व्यवस्थापक महंत रामचंद्र दास यद्यपि ज्योतिष के आचार्य हैं पर आस्था के महाकुंभ में वे भक्ति की भाषा बोलते हैं और कहते हैं कि सच्ची भक्ति घटित होने पर राहुकाल भी शुभ मुहूर्त सिद्ध हो जाता है और यहां तो राम जन्म की पूर्व बेला के साथ अभीप्सित भक्ति की धार बह रही है।

रामनवमी मेले में श्रद्धालुओं के सैलाब ने प्रशासन के अनुमान को तोड़ दिया। सुरक्षा व प्रशासनिक तंत्र चुनाव व खेती को देखते हुए इसबार श्रद्धालुओं के कम आने की संभावना व्यक्त कर रहा था, लेकिन रविवार की रात से लगातार बढ़ रहे श्रद्धालुओं की आमद प्रशासन और पुलिस दोनों के सांस फुलाने वाली साबित हो रही है।

आज ही पांच लाख श्रद्धालुओं ने सरयू में डुबकी लगाई। मंदिरों में भी ढाई लाख लोगों के रुके होने की संभावना सुरक्षा तंत्र व्यक्त कर रहा है। श्रीरामजन्मोत्सव के उल्लास में डूबी अयोध्या में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने लगी है। रविवार की रात से ही श्रद्धालुओं की भीड़ जुटना शुरू होने से पूरी रात प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों को गश्त करनी पड़ी। रामनगरी में भीड़ बढ़ने से सुरक्षा व्यवस्था को सतर्क कर दिया गया है। सोमवार की सुबह सरयू स्नान के लिए घाट ऐतिहासिक भीड़ देखने को मिली। सुरक्षा तंत्र का मानना है कि करीब पांच लाख श्रद्धालुओं ने सरयू स्नान किया। सुरक्षा के दृष्टिगत मंदिरों एवं घाटों के पास अतिरिक्त फोर्स तैनात करनी पड़ी। जिलाधिकारी इंद्रवीर सिंह, एसएसपी केबी सिंह, एसपी सिटी आरएस गौतम व एडीएम सिटी ने पैरामिलिट्री फोर्स के साथ पूरे मेला क्षेत्र में रूटमार्च किया। एसपी सिटी ने बताया 8 अप्रैल को मुख्य पर्व होगा। इस दिन करीब 15 से 16 लाख श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हैं।

शुरू हुआ यातायात डायवर्जन- मेले के मद्देनजर यातायात पाबंदिया रविवार की देर शाम से लागू कर दी गईं। अयोध्यानगर की सीमा में वाहनों का प्रवेश पूरी तरह वर्जित कर दिया गया है। पाबंदियों के चलते अयोध्या में निवास करने वाले नागरिकों को आवागमन में काफी समस्या उठानी पड़ रही है। मंगलवार को पाबंदियां और बढ़ने की उम्मीद है।

काम आया सीसी कैमरा- घाट व मंदिरों पर लगाए गए सीसी कैमरे पुलिस के लिए काफी मददगार साबित हुए। सोमवार को स्नान व मंदिर में दर्जन के दौरान मेला क्षेत्र से दर्जन भर जेबकतरों को गिरफ्तार किया गया। सीसी कैमरे में इनके फुटेज को देख पुलिस टीम ने सफलता हासिल की। एसपी सिटी ने कहा कि पकड़े गए सभी जेबकतरों को जेल भेजा जाएगा।

Tuesday, 1 April 2014

Vaishno devi devotees were buzzing court

प्रथम नवरात्र पर आधार शिविर कटड़ा में श्रद्धालुओं की खूब चहल पहल देखने को मिली। श्रद्धालु श्रद्धाभाव के साथ मां के दर्शनों के लिए प्रस्थान कर रहे थे। मां वैष्णो देवी का भवन भी श्रद्धालुओं से गुलजार रहा।

श्रद्धालुओं ने नवरात्र पर मां वैष्णो देवी की दिव्य पींडियों के आगे नतमस्तक होकर अपने परिवार की सुख शांति की कामना की। वहीं, पवित्र चैत्र नवरात्र पर जनता कटड़ा दुर्गा समिति द्वारा विशेष पूजा अर्चना के लिए बनाए गए पंडाल में मां की अखंड ज्योति विधिपूर्वक पूर्व प्रधानाचार्य ब्रह्मस्वरूप द्वारा स्थापित कर दी गई। इससे पहले अखंड ज्योति को भवन से प्रज्जवलित कर रघुनाथ मंदिर में लाया गया।

यहां से स्थानीय लोगों ने विशाल शोभायात्रा निकाल कर अखंड ज्योति को मुख्य बस अड्डे पर स्थित पंडाल तक लाया। शोभा यात्रा अपर बाजार, मुख्य बाजार से होती हुई पंडाल में संपन्न हुई। शोभा यात्रा में बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों सहित मां वैष्णो देवी को आने वाले श्रद्धालु शामिल थे। वहीं, बोर्ड प्रशासन के अधिकारियों का कहना था कि नवरात्र के दौरान मां वैष्णो देवी की भीड़ में दिन प्रतिदिन बढ़ोतरी होने की संभावना है। इसलिए बोर्ड प्रशासन पूरी तरह से सतर्क है। समाचार लिखे जाने तक प्रथम नवरात्र पर करीब पच्चीस हजार श्रद्धालु अपना पंजीकरण करवा कर भवन की ओर रवाना हो चुके थे।

दरबार में शतचंडी महायज्ञ का शुभारंभ-

चैत्र नवरात्र को लेकर वैष्णो देवी भवन पर हर साल की तरह इस वर्ष भी श्री माता वैष्णो देवी श्रइन बोर्ड की ओर से शत चंडी महायज्ञ का शुभारंभ किया गया। प्रधान पंडित डॉ. विश्वमूर्ति शास्त्री की देखरेख में 51 प्रकांड पंडित पवित्र नवरात्र में हवन यज्ञ व पूजा अर्चना करेंगे। इस मौके पर बोर्ड प्रशासन के सीईओ एमके भंडारी ने बतौर मुख्य अतिथि यज्ञ का श्रीगणोश किया। भवन पर आए श्रद्धालुओं ने भी यज्ञशाला में हुई पूजा अर्चना में भाग लिया।

चैत्र नवरात्र का शुभारंभ होते ही आधार शिविर रनसू शिवखोड़ी में श्रद्धालुओं की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है। गुफा परिसर में पहले नवरात्र से अखंड च्योति जल रही है, जिसमें श्रद्धालु पूजा-अर्चना करने के बाद गुफा के अंदर भोले शंकर के दर्शन के लिए आगे बढ़ रहे हैं। श्रद्धालु बाबा की एक झलक पाने के लिए लंबी कतारों में खड़े होकर बम-बम भोले के जयघोष लगा रहे हैं।

परिवार सहित जम्मू के विभिन्न धार्मिक स्थलों के दर्शन के करने के लिए आए श्रद्धालु अशोक गुप्ता, राम गुप्ता, सोहन शर्मा, संदीप शर्मा का कहना था कि उनके घर से निकले पंद्रह दिन हो गए हैं। इस दौरान उन्होंने माता वैष्णो देवी के दर्शन करने के बाद शिवखोड़ी भोले बाबा के दर्शन किए हैं। श्रद्धालुओं के चेहरों पर काफी खुशी देखने को मिल रही है। श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की कोई परेशानी न हो, इसके लिए प्रशासन व शिवखोड़ी श्रइन बोर्ड की तरफ से व्यापक प्रबंध किए गए हैं। श्रद्धालुओं की हर सुविधा का पूरा ख्याल रखा जा रहा है। शिवखोड़ी श्रइन बोर्ड रनसू के मैनेजर अजीत कुमार का कहना था कि श्रद्धालुओं के खाने-पीने, रहने व सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। उन्होंने कहा कि श्रद्धालु बाबा के दर्शन करने के लिए कतारों में खड़े होकर गुफा की ओर बढ़ रहे हैं।

Wednesday, 26 March 2014

Baba Amarnath Yatra helicopter for booking 27

बाबा अमरनाथ यात्रा के लिए हेलीकॉप्टर की आनलाइन टिकट बुकिंग 27 मार्च सुबह दस बजे शुरू होगी। श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड ने नीलग्रथ बालटाल-पंजतरणी के बीच पवन हंस लिमिटेड व ग्लोबल विकट्रा हेलीकॉर्प लिमिटेड की हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध करवाने का प्रबंध किया है, जबकि पहलगाम-पंजतरणी के बीच हिमालयन हेली सर्विस प्राइवेट लिमिटेड की हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध रहेगी।

यह जानकारी बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी नवीन कुमार चौधरी ने दी। उन्होंने बताया कि हेलीकॉप्टर की आनलाइन बुकिंग 27 मार्च से संबंधित कंपनियों की वेबसाइट से उपलब्ध होगी। बालटाल से पंजतरणी का किराया 1950 रुपये और पहलगाम से पंजतरणी का किराया 4190 रुपये निर्धारित किया गया है। हेलीकॉप्टर सेवा हासिल करने वाले श्रद्धालुओं को एडवांस पंजीकरण नहीं करवाना पड़ेगा, लेकिन यात्रियों को स्वास्थ्य प्रमाणपत्र उपलब्ध करवाना होगा। स्वास्थ्य प्रमाणपत्र उपलब्ध न करवाने पर हेलीकॉप्टर सेवा का बोर्डिग पास नहीं मिलेगा। इसके साथ ही एक डेबिट व क्रेडिट कार्ड पर अधिकतर पांच श्रद्धालुओं की टिकट की बुकिंग हो सकेगी।

गौरतलब है कि बाबा अमरनाथ यात्रा के लिए पंजीकरण शुरू है। यह यात्रा 28 जून से शुरू होगी। यात्रा 44 दिनों तक चलेगी और दस अगस्त को संपन्न होगी। जम्मू-कश्मीर सहित देश के कई पंजीकरण केंद्रों पर लोग उत्साह से बाबा अमरनाथ यात्रा पर जाने के लिए पंजकीरण करवा रहे हैं। यात्रा के लिए दो मार्ग हैं बालटाल और पहलगाम। दोनों रास्तों से लोग पंजीकरण करवा रहे हैं।

Wednesday, 12 March 2014

Splashes of colors beaten in Vrindavan Kunjaglion

रंगभरनी एकादशी पर वृंदावन में रंगों से खेली जाने वाली होली की शुरूआत हुई। होली की रंगीली फुहार सुबह पांच हजार से अधिक मंदिरों में शुरु हुई तो भक्त कान्हा संग होली खेल निहाल हो गये।

बांके बिहारी मंदिर में सुबह आरती के बाद जैसे ही जय कन्हैया लाल की जयकार लगी भक्तों और सेवायतों ने चटकीले रंग, अबीर और गुलाल की वर्षा शुरू कर दी। लोगों ने प्रेम भाव में एक दूसरे को गुलाल लगाया तो घंटों रंग मंदिर प्रांगण में उडता रहा। जिस पर रंग गिरा वह भी निहाल और जिस पर नहीं गिरा वह भी खुशहाल। भक्तिभाव में डूबे श्रद्वालु प्रिय कान्हा संग होली खेलने को मंदिर में खडे रहना चाहते थे लेकिन व्यवस्था ऐसी कि निजी गार्ड सबको विधिवत दर्शन के बाद ज्यादा देर खडे़ न रहने की ताकीद देते विनम्रता से करते देखे गये।

सड़कों पर उड़ा रंग और गुलाल

परंपरा के अनुसार एकादशी से वृंदावन में होली पर्व और रंग खेलने की शुरुआत हो जाती है। परंपरा भले ही सैकडों साल पुरानी है लेकिन इसमें कोई कोताही नहीं होती। आज के दिन कोई भी ब्रजवासी और बाहरी शहरों से आने वाले भक्त रंग में सराबोर होने को लालायित रहे। शहर की कुंज गलिया हों या पिफर सड़कें या पिफर परिक्रमा मार्ग सभी जगह रंग ही रग बिखराता रहा।

पिचकारी से खेली बांके बिहारी ने होली

बांके बिहारी मंदिर में बिहारीजी अबीर गुलाल के बाद रंगों से सैकड़ों साल पुरानी और विशाल पिचकारी से होली खेली। मंदिर के सेवायतों ने बताया कि सुबह रंग गुलाल, अबीर और दोपहर को रंग से बिहारीजी के साथ भक्तों ने होली खेली। ऐसे में देसी श्रद्वालुओं के साथ विदेशी भी निहाल हो जय श्रीकृष्णा के जयकार लगाते देखे गये।

पांच लाख की भीड़ से सड़कें जाम

वृंदावन में बुधवार को भक्तों की भीड़ का प्रभाव बडे पैमाने पर देखा गया। करीब पांच लाख लोगों की भीड के आने का अनुमान लगाया जा रहा है। भीड़ के कारण सड़को और गलियों तक में जगह जगह जाम के हालात बनते रहे। जब कि सप्त देवालयों के आसपास और ठा. बांके बिहारी मंदिर जाने वाले मार्गो दुसायत, वीआइपी पार्किंग, विध्यापीठ, हरिनिकुज, रतन छतरी, रमणरेती, गांधी मार्ग, किशोरपुरा में भारी भीड़ देखी गई।

Monday, 10 March 2014

The range of wound healing sticks fighter

राधा और कान्हा की लीला की पावन भूमि की रज भी चमत्कारिक है। बरसाने की धूल में भी मरहम है। ऐसा महरम जो सखियों की प्रेम पगी लाठियों की मार को भी पल भर में छू मंतर कर दे।

लठामार होली के घाव को भरने वाली ये रज राधा जी के चरणों की है। जिसे दुनिया भर के लोग मस्तक पर लगाकर अपने धन्य कर रहे हैं। यहां तक कि गलियों से रज समेटकर श्रद्धालु अपने घरों को ले जा रहे हैं।

ब्रह्मांचल पर्वत के शिखर पर विराजमान राधाजी सुबह से ही होली के रंगों की बौछार देख खुश हो रही थीं। राधाजी के आंगन में उठ रही राधे जू की जयघोष की गूंज से बरसाना गुंजायमान था।

सूरज ढल रहा था। मंदिर में समाज गायन के सुर थम गए और श्रद्धालुओं का रेला रंगीली गली में आ गया। हुरियारिन भी सज संवरकर आ गईं। लाठ लेकर रंगीली गली में ठाड़ी हुरियारिनों को देख नंदगांव के हुरियारों के टोल के टोल भांग की लहरों में झूमते गाते चले आ रहे थे। हुरियारिनों को देखकर वे हास परिहास करने लगे। हुरियारिन भी कम नहीं पड़ रही थी। वे भी रसिया का जवाब रसिया से दे रही थीं। तड़ातड़ चारों दिशाओं में गूंज रही थी। अगले ही पल लाठियों की चोट से हुरियारों के कसक हो गई। वे दर्द से कराहे, मगर सिर्फ कुछ देर। राधा जी के चरणों की धूल कसक पर लगाई और हो गया दर्द दूर।

ब्रजाचार्य पीठ पीठाधीश्वर गोस्वामी दीपक राज भट्ट ने बताया कि लठामार होली के साथ ही राधा जी ने यहां की धूल को लाठियों की चोट को दूर करने की दवा बना दिया था। इस धूल में चमत्कार भी है और इसका वैज्ञानिक कारण भी। सखियां अपने पांव में महावर लगती हैं। महावर में मरकरी और पोटेशियम परमैग्नेट मिला होता है। कैल्शियम के अलावा एंटी बायोटिक तत्व भी धूल में होते हैं। सखियों की महावर के कदम पड़ने से धूल हुरियारों के लिए मरहम बन रही है।

लठ्ठ मार मांगा प्रेम का नेग-

बरसाना-

नंदगांव के हुरियाराें पर लाठियां बरसाने के बाद हुरियारिनों को जैसे ही मौका मिलता, किसी न किसी की ओर उछाल देतीं लठ्ठ। दर्शक भी यहां की परंपरा और मान्यता से परिचित हैं, लिहाजा तत्काल ही जेब से निकालकर देते रुपये। बाहर के दर्शक भी देखादेखी रुपये दे देता। इस परंपरा से अनजान लोग जब पूछते, तो बता दिया जाता कि नेग है।

दरअसल, मान्यता है कि हुरियारनें जिसके सिर पर लाठी का स्पर्श करा दें, वह अत्यंत सौभाग्यशाली माना जाता है। इसलिए श्रद्धालु हुरियारिनों से सिर पर लाठी का स्पर्श कराते हैं। वे नेग में रुपए अथवा उपहार भी देते हैं। हुरियारिनों को जैसे ही कोई बुजुर्ग दिखाई देता, उनके चरण भी स्पर्श करती रहीं।