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Sunday, 17 November 2013

Avoid read newspaper or watch news till Lok Sabha Election

Ram Gopal Yadav

लखनऊ। भाजपा के प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी नरेंद्र मोदी का फोबिया कांग्रेस के साथ-साथ समाजवादी पार्टी पर भी काफी असर दिखा रहा है। सपा के राष्ट्रीय महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव ने आगरा के बटेश्वर मेले का उद्घाटन करने के बाद लोगों से कहा है कि लोकसभा चुनाव तक न तो वो कोई अखबार पढ़े और न ही कोई समाचार चैनल देखें। 

प्रोफेसर यादव ने भाजपा तथा बसपा को कोसने के बाद मीडिया पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव तक आप लोग न्यूज चैनल मत देखना और अखबार न पढ़ना। मीडिया नरेंद्र मोदी को ज्यादा वजन दे रहा है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की रैली में पांच लाख की भीड़ को चैनल पांच मिनट दिखाते हैं और मोदी की रैली में एक लाख भीड़ हो, तो भी पूरा दिन दिखाते हैं। लिहाजा, ऐसे चैनल देखने और अखबार पढ़ने का कोई मतलब नहीं, जो सिर्फ एक आदमी के होकर रहे गए हैं। इसके अलावा उन्होंने कहा कि देश के सभी घोटाले भाजपा की देन हैं, जबकि कांग्रेस ने उन्हें पाल-पोस कर बड़ा किया है। 

केंद्रीय मंत्री अजित सिंह भी रामगोपाल के निशाने पर थे। उन्होंने कहा कि अब उत्तर प्रदेश में अजित सिंह का कोई वजूद नहीं हैं। जबकि तीसरा मोर्चा के गठन को लेकर रामगोपाल काफी आश्वस्त हैं। उन्होंने कहा कि तीसरा मोर्चा बनेगा, सपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरेगी और मुलायम सिंह प्रधानमंत्री बनेंगे। रामगोपाल ने सपा महासचिव नरेश अग्रवाल के उस बयान को भी खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि चाय बेचने वाला कभी प्रधानमंत्री नहीं बन सकता।

Friday, 1 November 2013

SP worry about Caste Balence in Cabinet


Lucknow

जागरण ब्यूरो, लखनऊ : विधायक राजाराम पाण्डेय के निधन के कारण अखिलेश मंत्रिमंडल का पाचवा विस्तार तो टल गया मगर, मंत्रिमण्डल में जातीय संतुलन को लेकर दबाव से उबरना सपा के लिए आसान नहीं है। सपा के प्रदेश की सत्ता संभालते ही प्रभावशाली छत्रपों ने मंत्रिमण्डल में आने की लामबंदी शुरू कर दी थी। इसी दबाव का नतीजा है कि डेढ़ साल से कुछ अधिक के अंतराल में ही मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को मंत्रिमण्डल का चार बार विस्तार करना पड़ा। पाचवा विस्तार भी इसी क्रम में होना था। 59 सदस्यीय मंत्रिमण्डल में एक ब्राह्मण, छह यादव, पाच क्षत्रिय, तीन मुस्लिम, दो अनुसूचित जाति और जाट जाति के एक विधायक को कैबिनेट मंत्री का दर्जा हासिल है।

दस अक्टूबर को चौथे विस्तार में निर्दलीय विधायक रघुराज प्रताप सिंह को मंत्री बनाया गया था। तीन सप्ताह बाद ही आज शुक्रवार को पांचवें विस्तार में एक राज्य मंत्री को प्रमोशन देकर कैबिनेट में स्वतंत्र प्रभार दिये जाने और एक नए राज्य मंत्री शामिल किये जाने की संभावना थी ताकि मंत्रिमंडल ब्राह्मणों की नुमाइंदगी संतुलित हो सके। कुछ दिन पहले ब्राह्मंण समाज के कई विधायकों ने सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव से मुलाकात भी की थी और तर्क दिया था कि सपा के 21 विधायक ब्राह्मण हैं मगर उनकी नुमाइंदगी के लिए मंत्रिमण्डल में एक ही कैबिनेट मंत्री है।

लोकसभा चुनाव करीब हैं, और पार्टी 17 अति पिछड़ी जातियों को एससी में शामिल करने और अति पिछड़ों को लुभाने लिए यात्रा निकाल रही है। लेकिन इस वर्ग से कैबिनेट मंत्री नहीं है, इस वर्ग से भी अब दबाव बढ़ाया जा रहा है। मुस्लिम नुमाइंदे भी पीछे नहीं है, सपा के बड़े समर्थकों में शुमार इस वर्ग के नुमाइंदों का मानना है कि उनके कोटे के तीन कैबिनेट मंत्रियों में से एक वकार अहमद गंभीर रूप से बीमार हैं। दूसरे कई विवादों से घिरे हैं, तीसरे विधान परिषद सदस्य हैं। इधर राज्यमंत्रियों व कैबिनेट मंत्रियों के बीच अख्तियार को लेकर खींचतान भी चल रही है। इस बीच हर नया विस्तार दबाब बनाने की नई जमीन तैयार कर देता है। 

Source- News in Hindi