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Wednesday, 8 January 2014

IM terrorist Abdul Subhan wants to form new module

नई दिल्ली [राज्य ब्यूरो]। लश्कर आतंकी अब्दुल सुब्हान इंडियन मुजाहिदीन [आइएम] के कमजोर होने के बाद नया मॉड्यूल खड़ा करना चाहता है। इसके लिए वह मुजफ्फरनगर दंगे को ढाल बनाकर युवाओं को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रहा है। युवाओं को भड़काने के लिए जेहादी भाषण तथा दंगों में मारे जाने वाले लोगों के वीडियो आदि जरूरी सामान उसे लश्कर-ए-तैयबा का कमांडर जावेद बलूची उपलब्ध करा रहा है। मेवात में मजबूत नेटवर्क स्थापित कर चुके सुब्हान की तलाश में स्पेशल सेल समेत केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां लगातार छापेमारी कर रही हैं। मुजफ्फरनगर इलाके में भी उसकी तलाश की जा रही है। उसकी गिरफ्तारी से आतंक के कुछ नए चेहरे सामने आ सकते हैं। 

लश्कर से संबंध रखने पर मेवात से गिरफ्तार मौलवी मोहम्मद शाहिद तथा राशिद ने अब्दुल सुब्हान से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारी सुरक्षा एजेंसियों को दी हैं। वहीं, पुलिस के गवाह बन चुके शामली निवासी जमीर तथा लियाकत से भी सुब्हान के खतरनाक मंसूबों का पता चला है। सुब्हान ने दोनों से मुलाकात कर मुजफ्फरनगर दंगों का बदला लेने की बात कही थी। इस काम के लिए उसके दंगा पीड़ित युवकों से संपर्क साधने की कोशिश भी सामने आ चुकी हैं।

सूत्रों के अनुसार दंगा पीड़ित युवकों को लश्कर के साथ जोड़ने के लिए शाहिद और राशिद भी कई बार मुजफ्फरनगर गए थे। दोनों ने पुलिस की नजर से बचने के लिए देवबंद आने-जाने के दौरान इन इलाकों का दौरा किया। जांच में सामने आया है कि अब्दुल सुब्हान के बाद पाकिस्तान में बैठे जावेद बलूची से राशिद की अधिकतर बातचीत होती थी। बलूची ने भी उसे युवाओं को लश्कर के साथ जोड़ने का हुक्म दिया था। उनका मानना था कि नए युवकों के माध्यम से वे आइएम के विकल्प के रूप में नया मॉडयूल खड़ा कर सकते हैं, जिससे कि देश में आतंकी गतिविधियों को अंजाम दिया जा सके। 

जेहाद व लालच का सहारा :
पुलिस अधिकारियों के अनुसार युवाओं को अपने साथ जोड़ने के लिए सुब्हान जेहाद के अलावा पैसे का भी लालच देता है। राशिद से पूछताछ में पता चला है कि एक दर्जन से अधिक युवक सुब्हान के संपर्क में थे। स्पेशल सेल की छापेमारी के बाद सभी युवक फरार हैं। 

Thursday, 26 December 2013

Beni Prasad flays UP govt for conditions at riot-relief camps


नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। मुजफ्फरनगर के दंगा राहत शिविरों में अखिलेश सरकार के खिलाफ साजिश के बयान पर मौलाना-मौलवियों के निशाने पर आए मुलायम सिंह यादव पर कांग्रेस भी बरस पड़ी है। केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा ने कहा कि एक तरफ दंगा राहत शिविरों में भूख और ठंड से जूझते हुए बच्चों की मौतें हो रही हैं, दूसरी तरंफ मुलायम सिंह अपने गांव में सैफई महोत्सव में विदेशी डांसरों से डांस करा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुलायम में जरा भी शर्म हो तो उन्हें सैफई महोत्सव को तुरंत बंद कर राहत शिविरों में साजिशकर्ताओं के बयान पर माफी मांगनी चाहिए।

केंद्रीय इस्पात मंत्री वर्मा ने बृहस्पतिवार को यहां पत्रकारों से बातचीत में सपा प्रमुख मुलायम के पूरे व्यक्तित्व व कार्यशैली पर सीधा हमला बोला। कहा, फर्क देखिए, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने दक्षिण अफ्रीका के 'गांधी' नेल्सन मंडेला के निधन के बाद अपना जन्मदिन नहीं मनाया। जबकि, मुजफ्फरनगर व शामली में हुए दंगों के महीनों बाद भी वहां के राहत शिविरों में ठंड व भूख से बच्चों की लगातार मौत हो रही है। फिर भी मुलायम सिंह सैफई महोत्सव करा रहे हैं। उसमें डांस के लिए विदेश से डांसर बुलाई गई हैं। इतना ही नहीं, उलटे वह दंगा राहत शिविरों में साजिशकर्ताओं के होने की बात कह रहे हैं। कोई समाजवादी ऐसा नहीं होता। लिहाजा, उन्हें सैफई महोत्सव तुरंत बंद करने के साथ ही अपने बयान के लिए देश से माफी मांगनी चाहिए।

तीन दशक से ज्यादा समय तक मुलायम के दोस्त रहे बेनी ने कहा कि किसी प्रदेश सरकार की साजिश के बिना कोई दंगा लंबा नहीं चल सकता, जबकि मुजफ्फरनगर का चल रहा है। उप्र में 18 से 20 प्रतिशत मुसलमान हैं। इस बार हिंदू-मुस्लिम वोटों को अपने-अपने पक्ष में कराने के लिए नरेंद्र मोदी और मुलायम मिल गए हैं। इसीलिए मुलायम सिंह बार-बार भाजपा नेताओं, कार्यकर्ताओं की खुले मंच से तारीफ कर रहे हैं। अपने पार्टी कार्यकर्ताओं को भाजपा से सीखने की नसीहत दे रहे हैं।

वर्मा ने कहा कि मुलायम को नहीं भूलना चाहिए कि आय से अधिक संपत्ति मामले में वह भले ही छूट गए हों, लेकिन उनके भ्रष्टाचार के कई मामले अब भी सीबीआइ के पास हैं। लोकपाल कानून बन गया है। उन्हें जेल जाना ही पड़ेगा। वह सपा कार्यकर्ताओं से गुंडई न करने की बात करते हैं। जबकि, उनके सत्ता में आने पर यह और बढ़ जाती है। उनके संसदीय क्षेत्र गोंडा में जब ऐसे लोग पकड़े जाते हैं तो सपा नेता उन्हें छुड़वा देते हैं।
खाली पतीली पर टिकीं पनीली निगाहें

शामली, [मनीष शर्मा]। 85 साल की मकसूदी भूख नहीं होने का बहाना कर बच्चों को कुछ खिला देने की बात कहती है तो उसके बहू-बेटे की आंखें नम हो जाती हैं। एक माह की रिजवाना भूख से बिलख रही है, क्योंकि खुराक की कमी से मां मोहसीना के आंचल में दूध नहीं उतर रहा। शामली के शिविरों में रह रहीं हजारों जिंदगियों का यही हाल है। दाने-दाने को मोहताज हुए दंगा पीड़ितों से हुकूमत ने आंखें फेर ली हैं। शिविरों का अस्तित्व मानने से इन्कार कर रहे हुक्मरानों ने राशन तक भेजना बंद कर दिया, दूध भी बेहद कम भेजा जा रहा है। भूख से बिलखते बच्चों को दिखाने के लिए चूल्हे पर पानी भरी पतीली चढ़ाई जाती है तो समझने वालों की आंखों में उबाल आ जाता है। शामली के दंगा राहत शिविरों की व्यथा व्यवस्था से जवाब मांग रही हैं। मलकपुर, खुरगान, बरनावी, कांधला, मन्ना माजरा के राहत कैंपों में रह रहे परिवारों का हाल भी ऐसा ही है। मलकपुर कैंप में तकरीबन 700 परिवार शरण पाए हैं। शिविर को छह वार्डो में बांटकर करीब 5500 लोगों की खिदमत की जा रही है। इनमें पांच साल से कम उम्र के करीब 1200 बच्चे भी हैं। यहां सिर्फ ढाई कुंतल दूध की सप्लाई है, यानी एक व्यक्ति को औसतन 50 ग्राम से भी कम और परिवार को 200 ग्राम दूध मिल रहा है। यही मात्रा खुरगान राहत कैंप में दिए जाने वाले दूध की भी है।

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के दावों के विपरीत तकरीबन एक माह से सरकारी राशन नहीं आया है। शिविर में रह रहे अहमद, दिलशाद, रहमत आदि के मुताबिक उन्हें व उनके बच्चों को भूखे पेट सोना पड़ रहा है। शिविर के खिदमतगारों के मुताबिक लोग कंबल और गर्म कपड़े तो भेज रहे हैं, लेकिन राशन नहीं।

Tuesday, 10 September 2013

Muzaffarnagar Riots: police officer blame to cop for violence


Muzaffarnagar riots

लखनऊ [आनंद राय]। मुजफ्फरनगर में युवती से छेड़खानी की घटना के बाद पुलिस के पक्षपातपूर्ण रवैये से बात बिगड़ती चली गई। दंगा भड़क जाने के बाद अब चाहे जितनी सख्ती बरती जाए, लेकिन कहा जा रहा है कि वहां अफसरों ने हालात बिगड़ने का खुद मौका दिया। गृह सचिव कमल सक्सेना और आइजी एसटीएफ आशीष गुप्ता कहते हैं कि महापंचायत स्थल से जुड़े संवेदनशील मार्गो पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था थी, लेकिन यह अनुमान नहीं था कि स्थिति इतनी खराब हो जाएगी। पखवारे भर पहले से ही मुजफ्फरनगर समेत इर्द-गिर्द के जिलों में सुलग रही सांप्रदायिक तनाव की चिंगारी को बुझाने की योजनाबद्ध कोशिश नहीं की गई।

लापरवाही का नतीजा रहा कि मुजफ्फरनगर के नंगला-मंदौड़ की महापंचायत में एक लाख की भीड़ जुटी। फिर जो हुआ उससे निपटने को सरकार को सेना तक बुलानी पड़ी। ऐसा नहीं कि यह सब अचानक हुआ हो। उससे पहले निषेधा का उल्लंघन करके जुमे की नमाज के बाद एकत्रित हुजूम ने सभा की थी और उसमें नेताओं ने भाषण दिए थे। इसके जवाब में एक दिन और भीड़ उमड़ी और चेतावनी देकर चली गई लेकिन उससे कोई सबक नहीं लिया गया।

सरकार ने अब माना है कि खापों की महापंचायत की अनुमति नहीं दी गई थी, तो फिर सवाल भी लाजिमी है कि अनुमति न देने के बावजूद आ रही भीड़ को रोकने के बजाय आखिर वह लोग हाथ पर हाथ धरे क्यों बैठे रहे? अफसर अब जो भाषा बोलें, लेकिन इतना जरूर है कि 27 अगस्त को मुजफ्फरनगर के कवाल में तिहरे हत्याकांड के बाद से हालात का सही आकलन नहीं किया जा सका। अगर सही आकलन हुआ भी तो अफसरों ने सरकार को सही स्थिति से अवगत नहीं कराया। 

मुजफ्फरनगर में पांच सितंबर को आयोजित बंद में लोगों ने स्वत: स्फूर्त दुकानें बंद की, लेकिन अफसरों ने बताया कि बंदी केवल 40 प्रतिशत रही है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को जब खुफिया तंत्र ने आगाह किया तो उनके दिशा निर्देश पर पुलिस महानिदेशक देवराज नागर समेत कई अधिकारी मुजफ्फरनगर पहुंचे। डीजीपी ने बवाल में जबरन फंसाये गये बेगुनाहों को छोड़ने और एसटीएफ से निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया, लेकिन तब तक माहौल में काफी तनाव भर गया था। फिर भी सख्ती करने के बजाय लोगों को सड़कों पर उतरने की छूट दी गयी और यही छूट बवाल-ए-जान बन गई।

Original.. http://www.jagran.com/news/national-muzaffarnagar-riots-police-officer-blame-to-cop-for-violence-10713522.html

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Muzaffarnagar violence: death toll rise 39 dead


Muzaffarnagar violence

लखनऊ। मुजफ्फरनगर में सेना की तैनाती तथा क‌र्फ्यू के चौथे दिन मंगलवार को भी हालात सुधरे नहीं हैं। देहात क्षेत्र में आज भी तीन शव मिले हैं। जिसके बाद हिंसा में मरने वालों की संख्या 39 तक पहुंच गई है। इस बीच स्थिति को सामान्य करने में लगे प्रशासन ने मुजफ्फरनगर में 3.45 से 5.30 बजे तक क‌र्फ्यू में ढील दी है। पुलिस ने कई जगहों पर तलाशी अभियान चलाया हुआ है। दर्जनों लोगों को हिरासत में लेने के साथ ही बड़ी मात्रा में हथियार भी बरामद किए गए हैं।
उधर शहर में कई स्थानों पर दूध का वितरण किया गया। शाहपुर थाना क्षेत्र के गांव सोरम में दलित बिरादरी के युवक की तेजधार वाले हथियारों से काटकर हत्या कर दी गई। इसमें दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस आपसी रंजिश का मामला बता रही है। शाहपुर थाना क्षेत्र के ही गांव कसेरवा में नहर के पास एक शव मिला है। मीरापुर थाना क्षेत्र के सिखेड़ा गांव में मुस्लिम समुदाय के एक युवक की चाकू से गोदकर हत्या कर दी गई है। युवक कल से लापता था। 

इसके अलावा थाना रतनपुरी क्षेत्र के गांव भूखेड़ी में 52 वर्षीय महफूज पर कोल्हू पर सोते समय हमला किया गया। गंभीर हालत उसे मेरठ रैफर किया गया है। खतौली में कुछ दुकानें खुलीं। बुढ़ाना में देर रात में फायरिंग होने की सूचना है। लोगों ने एसडीएम से तलाशी अभियान चलाने की मांग है। मीरापुर में दूसरे दिन भी हत्या होने पर थानाध्यक्ष प्रमोद यादव को लाइन हाजिर कर दिया गया है।

इस बीच, हालात पर काबू पाने में जुटी सरकार ने किसी भी तरह की पंचायत-महापंचायत आयोजित करने पर रोक लगा दी है। यह भी निर्देश जारी किया है कि जिनके भ्रमण से सांप्रदायिक सद्भाव प्रभावित हो, उनके खिलाफ सही सूचना संकलित कर गिरफ्तार किया जाए। प्रमुख सचिव गृह आरएम श्रीवास्तव ने बताया कि शांति-व्यवस्था एवं साम्प्रदायिक सद्भाव बनाये रखने के लिए संवेदनशील स्थानों पर समुचित पुलिस व्यवस्था के साथ सीसीटीवी, वीडियो कैमरा आदि इलेक्ट्रानिक्स उपकरणों से निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। 

संवेदनशील स्थानों पर धारा 144 लगाने और साम्प्रदायिक सद्भाव बनाये रखने के लिए शांति समिति की बैठकें आयोजित करने पर विशेष बल दिया गया है। श्रीवास्तव ने बताया कि सभी डीएम और एसपी को सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। शासन का मानना है कि मुजफ्फरनगर में महापंचायत के बाद ही हिंसा भड़की और माहौल बिगड़ा। 

गृह सचिव कमल सक्सेना व आइजी एसटीएफ आशीष गुप्ता ने उन्होंने कहा महापंचायत के विरोध में ही कई थाना क्षेत्रों में हिंसा भड़की। सरकार ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की स्थिति के बारे में एलान किया है कि अब जरा भी ढिलाई नहीं बरतेंगे और दोषियों पर रासुका लगाया जाएगा।

Original..  http://www.jagran.com/news/national-muzaffarnagar-violence-death-toll-rise-39-dead-10713543.html

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