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Thursday, 26 December 2013

Beni Prasad flays UP govt for conditions at riot-relief camps


नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। मुजफ्फरनगर के दंगा राहत शिविरों में अखिलेश सरकार के खिलाफ साजिश के बयान पर मौलाना-मौलवियों के निशाने पर आए मुलायम सिंह यादव पर कांग्रेस भी बरस पड़ी है। केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा ने कहा कि एक तरफ दंगा राहत शिविरों में भूख और ठंड से जूझते हुए बच्चों की मौतें हो रही हैं, दूसरी तरंफ मुलायम सिंह अपने गांव में सैफई महोत्सव में विदेशी डांसरों से डांस करा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुलायम में जरा भी शर्म हो तो उन्हें सैफई महोत्सव को तुरंत बंद कर राहत शिविरों में साजिशकर्ताओं के बयान पर माफी मांगनी चाहिए।

केंद्रीय इस्पात मंत्री वर्मा ने बृहस्पतिवार को यहां पत्रकारों से बातचीत में सपा प्रमुख मुलायम के पूरे व्यक्तित्व व कार्यशैली पर सीधा हमला बोला। कहा, फर्क देखिए, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने दक्षिण अफ्रीका के 'गांधी' नेल्सन मंडेला के निधन के बाद अपना जन्मदिन नहीं मनाया। जबकि, मुजफ्फरनगर व शामली में हुए दंगों के महीनों बाद भी वहां के राहत शिविरों में ठंड व भूख से बच्चों की लगातार मौत हो रही है। फिर भी मुलायम सिंह सैफई महोत्सव करा रहे हैं। उसमें डांस के लिए विदेश से डांसर बुलाई गई हैं। इतना ही नहीं, उलटे वह दंगा राहत शिविरों में साजिशकर्ताओं के होने की बात कह रहे हैं। कोई समाजवादी ऐसा नहीं होता। लिहाजा, उन्हें सैफई महोत्सव तुरंत बंद करने के साथ ही अपने बयान के लिए देश से माफी मांगनी चाहिए।

तीन दशक से ज्यादा समय तक मुलायम के दोस्त रहे बेनी ने कहा कि किसी प्रदेश सरकार की साजिश के बिना कोई दंगा लंबा नहीं चल सकता, जबकि मुजफ्फरनगर का चल रहा है। उप्र में 18 से 20 प्रतिशत मुसलमान हैं। इस बार हिंदू-मुस्लिम वोटों को अपने-अपने पक्ष में कराने के लिए नरेंद्र मोदी और मुलायम मिल गए हैं। इसीलिए मुलायम सिंह बार-बार भाजपा नेताओं, कार्यकर्ताओं की खुले मंच से तारीफ कर रहे हैं। अपने पार्टी कार्यकर्ताओं को भाजपा से सीखने की नसीहत दे रहे हैं।

वर्मा ने कहा कि मुलायम को नहीं भूलना चाहिए कि आय से अधिक संपत्ति मामले में वह भले ही छूट गए हों, लेकिन उनके भ्रष्टाचार के कई मामले अब भी सीबीआइ के पास हैं। लोकपाल कानून बन गया है। उन्हें जेल जाना ही पड़ेगा। वह सपा कार्यकर्ताओं से गुंडई न करने की बात करते हैं। जबकि, उनके सत्ता में आने पर यह और बढ़ जाती है। उनके संसदीय क्षेत्र गोंडा में जब ऐसे लोग पकड़े जाते हैं तो सपा नेता उन्हें छुड़वा देते हैं।
खाली पतीली पर टिकीं पनीली निगाहें

शामली, [मनीष शर्मा]। 85 साल की मकसूदी भूख नहीं होने का बहाना कर बच्चों को कुछ खिला देने की बात कहती है तो उसके बहू-बेटे की आंखें नम हो जाती हैं। एक माह की रिजवाना भूख से बिलख रही है, क्योंकि खुराक की कमी से मां मोहसीना के आंचल में दूध नहीं उतर रहा। शामली के शिविरों में रह रहीं हजारों जिंदगियों का यही हाल है। दाने-दाने को मोहताज हुए दंगा पीड़ितों से हुकूमत ने आंखें फेर ली हैं। शिविरों का अस्तित्व मानने से इन्कार कर रहे हुक्मरानों ने राशन तक भेजना बंद कर दिया, दूध भी बेहद कम भेजा जा रहा है। भूख से बिलखते बच्चों को दिखाने के लिए चूल्हे पर पानी भरी पतीली चढ़ाई जाती है तो समझने वालों की आंखों में उबाल आ जाता है। शामली के दंगा राहत शिविरों की व्यथा व्यवस्था से जवाब मांग रही हैं। मलकपुर, खुरगान, बरनावी, कांधला, मन्ना माजरा के राहत कैंपों में रह रहे परिवारों का हाल भी ऐसा ही है। मलकपुर कैंप में तकरीबन 700 परिवार शरण पाए हैं। शिविर को छह वार्डो में बांटकर करीब 5500 लोगों की खिदमत की जा रही है। इनमें पांच साल से कम उम्र के करीब 1200 बच्चे भी हैं। यहां सिर्फ ढाई कुंतल दूध की सप्लाई है, यानी एक व्यक्ति को औसतन 50 ग्राम से भी कम और परिवार को 200 ग्राम दूध मिल रहा है। यही मात्रा खुरगान राहत कैंप में दिए जाने वाले दूध की भी है।

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के दावों के विपरीत तकरीबन एक माह से सरकारी राशन नहीं आया है। शिविर में रह रहे अहमद, दिलशाद, रहमत आदि के मुताबिक उन्हें व उनके बच्चों को भूखे पेट सोना पड़ रहा है। शिविर के खिदमतगारों के मुताबिक लोग कंबल और गर्म कपड़े तो भेज रहे हैं, लेकिन राशन नहीं।