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Friday, 29 November 2013

Subrata Roy on Fire on Srinivasan

bcci
श्रीनिवासन पर बरसे सुब्रत रॉय, कहा नहीं निभाया वादा
कोलकाता। भारतीय क्रिकेट टीम की स्पांसरशिप छोड़ने के लिए एन. श्रीनिवासन को जिम्मेदार ठहराते हुए सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत रॉय ने कहा है कि बीसीसीआइ अध्यक्ष ने अपना वादा नहीं निभाया। शुक्रवार को रॉय ने कहा, 'बीते समय में हमारे बीसीसीआइ के साथ संबंध अच्छे रहे हैं लेकिन मौजूदा अध्यक्ष दूसरी मानसिकता के हैं। उन्होंने अपने वादे नहीं पूरे किए। उनमें बहुत झूठा अहम हैं, लिहाजा हम बीसीसीआइ के साथ अपने संबंध बनाए रखने के इच्छुक नहीं हैं।'
बोर्ड के साथ इन्हीं मतभेदों के कारण सहारा ने इंडियन प्रीमियर लीग (आइपीएल) से पुणे वॉरियर्स फ्रेंचाइजी का करार रद कर दिया था। इसके साथ ही रॉय ने संट्टेबाजी और फिक्सिंग मामले में कथित तौर पर शामिल रहने पर चेन्नई सुपर किंग्स के पूर्व प्रमुख और श्रीनिवासन के दामाद गुरुनाथ मयप्पन पर भी निशाना साधा।
उन्होंने कहा, 'चेन्नई पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। अगर किसी और टीम का प्रमुख इस मामले में शामिल होता तो उसे अब तक आइपीएल से हटा दिया गया होता। हम ऐसे माहौल में काम नहीं करना चाहते।' भारतीय टीम के साथ सहारा की स्पांसरशिप इस साल दिसंबर में खत्म हो रही है। इस बारे में पूछे जाने पर रॉय ने कहा कि बीसीसीआइ के साथ स्पांसरशिप बढ़ाने की हमारा कोई योजना नहीं है, लेकिन कुछ बुजुर्ग लोग और खिलाड़ी हमसे स्पांसरशिप जारी रखने के लिए कह रहे हैं।

Thursday, 21 November 2013

SC Grounds Subrata Roy, Bars Sahara from Selling any Property

SC grounds Subrata Roy
नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। निवेशकों का पैसा न लौटाए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सहारा समूह के खिलाफ सख्त रुख अपना लिया है। कोर्ट ने सहारा समूह के कर्ताधर्ता सुब्रत राय और तीन अन्य निदेशकों- वंदना भारद्वाज, रवि शंकर दुबे व अशोक राय चौधरी के देश छोड़ने पर रोक लगा दी है। इतना ही नहीं, सहारा समूह की कोई भी कंपनी अचल संपत्तिायों की बिक्री नहीं कर सकेगी। ये आदेश गुरुवार को न्यायमूर्ति केएस राधाकृष्णन और जेएस खेहर की खंडपीठ ने सेबी की शिकायत पर दिए हैं।

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड ने सहारा पर शीर्ष अदालत के आदेश का पूरी तरह पालन नहीं करने का आरोप लगाया था। कोर्ट ने 28 अक्टूबर को निवेशकों के 20,000 करोड़ रुपये लौटाने के लिए समूह को इतनी ही कीमत की संपत्तिायों के मूल मालिकाना दस्तावेज सेबी के समक्ष जमा कराने के आदेश दिए थे।

सेबी के वकील अरविंद दत्तार ने कहा कि सहारा ने संपत्तिायों का बढ़ा-चढ़ा कर मूल्यांकन किया है। ंउसने संपत्तिायों के मूल कागजात भी नहीं जमा कराए हैं। समूह ने वर्सोवा की 106 एकड़ जमीन का मूल्य 19,000 करोड़ रुपये लगाया है, जबकि इसकी आधिकारिक कीमत मात्र 118.42 करोड़ है। इस जमीन का इस्तेमाल डेवलेपमेंट के लिए नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह हरित क्षेत्र में आती है। पीठ भी जमीन के मूल्यांकन के बारे में दत्तार की दलीलों से कुछ हद तक सहमत थी। पीठ ने दत्तार से कहा कि सेबी सहारा की ंउन संपत्तिायों का पता लगाए, जिन्हें 20,000 करोड़ की जमानत के लिए विचार किया जा सकता है।

हालांकि सहारा की ओर से पेश वकील सीए सुंदरम ने सेबी के आरोपों का जबरदस्त विरोध किया। सुंदरम ने कहा कि सहारा ने कोर्ट के आदेश का पालन किया है। लेकिन पीठ उनकी दलीलों से प्रभावित नहीं हुई। कोर्ट ने कहा कि आदेश पर पूरी तरह से अमल नहीं किया गया है। पीठ ने मामले में आगे सुनवाई के लिए 11 दिसंबर की तारीख तय की है। तब तक सुब्रत राय व तीन अन्य निदेशकों के देश से बाहर जाने पर रोक लगा दी है। साथ ही कोर्ट ने इस दौरान सहारा समूह की अचल संपत्तिायों को कोर्ट की अनुमति के बिना बेचने पर भी पाबंदी आयद कर दी है।

SC grounds Subrata Roy, bars Sahara from Selling any Property

SC grounds Subrata Roy
नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। निवेशकों का पैसा न लौटाए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सहारा समूह के खिलाफ सख्त रुख अपना लिया है। कोर्ट ने सहारा समूह के कर्ताधर्ता सुब्रत राय और तीन अन्य निदेशकों- वंदना भारद्वाज, रवि शंकर दुबे व अशोक राय चौधरी के देश छोड़ने पर रोक लगा दी है। इतना ही नहीं, सहारा समूह की कोई भी कंपनी अचल संपत्तिायों की बिक्री नहीं कर सकेगी। ये आदेश गुरुवार को न्यायमूर्ति केएस राधाकृष्णन और जेएस खेहर की खंडपीठ ने सेबी की शिकायत पर दिए हैं।

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड ने सहारा पर शीर्ष अदालत के आदेश का पूरी तरह पालन नहीं करने का आरोप लगाया था। कोर्ट ने 28 अक्टूबर को निवेशकों के 20,000 करोड़ रुपये लौटाने के लिए समूह को इतनी ही कीमत की संपत्तिायों के मूल मालिकाना दस्तावेज सेबी के समक्ष जमा कराने के आदेश दिए थे।

सेबी के वकील अरविंद दत्तार ने कहा कि सहारा ने संपत्तिायों का बढ़ा-चढ़ा कर मूल्यांकन किया है। ंउसने संपत्तिायों के मूल कागजात भी नहीं जमा कराए हैं। समूह ने वर्सोवा की 106 एकड़ जमीन का मूल्य 19,000 करोड़ रुपये लगाया है, जबकि इसकी आधिकारिक कीमत मात्र 118.42 करोड़ है। इस जमीन का इस्तेमाल डेवलेपमेंट के लिए नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह हरित क्षेत्र में आती है। पीठ भी जमीन के मूल्यांकन के बारे में दत्तार की दलीलों से कुछ हद तक सहमत थी। पीठ ने दत्तार से कहा कि सेबी सहारा की ंउन संपत्तिायों का पता लगाए, जिन्हें 20,000 करोड़ की जमानत के लिए विचार किया जा सकता है।

हालांकि सहारा की ओर से पेश वकील सीए सुंदरम ने सेबी के आरोपों का जबरदस्त विरोध किया। सुंदरम ने कहा कि सहारा ने कोर्ट के आदेश का पालन किया है। लेकिन पीठ उनकी दलीलों से प्रभावित नहीं हुई। कोर्ट ने कहा कि आदेश पर पूरी तरह से अमल नहीं किया गया है। पीठ ने मामले में आगे सुनवाई के लिए 11 दिसंबर की तारीख तय की है। तब तक सुब्रत राय व तीन अन्य निदेशकों के देश से बाहर जाने पर रोक लगा दी है। साथ ही कोर्ट ने इस दौरान सहारा समूह की अचल संपत्तिायों को कोर्ट की अनुमति के बिना बेचने पर भी पाबंदी आयद कर दी है।

Wednesday, 20 November 2013

Sahara lied about value of assets, Sebi tells SC


Sahara group
नई दिल्ली। पूंजी बाजार नियामक सेबी सहारा समूह के खिलाफ शिकायत लेकर फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। नियामक ने आरोप लगाया है कि समूह ने अपनी संपत्तियों का मूल्य बढ़ा-चढ़ा कर बताया है और 20 हजार करोड़ रुपये की संपत्तियों के सभी मूल दस्तावेज (टाइटल डीड) नहीं सौंपे हैं। शीर्ष अदालत ने 28 अक्टूबर को आदेश दिया था कि सहारा ये दस्तावेज सेबी को सौंप दे।

नियामक इन संपत्तियों की नीलामी कर समूह की दो कंपनियों द्वारा निवेशकों से वसूली गई रकम लौटाएगा।

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने बुधवार को शीर्ष अदालत में बताया कि सहारा ने सिर्फ जमीन के दो प्लाटों की संपत्ति के मालिकाना हक के दस्तावेज उसे दिए हैं। इनमें से 106 एकड़ का एक प्लॉट मुंबई के वर्सोवा में है। समूह ने इसकी कीमत 19,000 करोड़ रुपये बताई है। दूसरा प्लॉट ठाणो के पास वसई इलाके में है। समूह के अनुसार दो सौ एकड़ के इस प्लॉट का मूल्य एक हजार करोड़ रुपये के करीब है।

जस्टिस केएस राधाकृष्णन और जेएस खेहर की खंडपीठ ने आदेश पालन नहीं किए जाने पर नाराजगी जताई, लेकिन कोई आदेश जारी नहीं किया, क्योंकि सहारा के वकील बहस के लिए अदालत में मौजूद नहीं थे। खंडपीठ ने कहा, 'अगर हमारे आदेश का पालन इस तरह किया जाता है तो यह निरा मजाक है।'

इसके बाद पीठ ने मामले की अगली सुनवाई गुरुवार को मुकर्रर कर दी। साथ ही यह ताकीद भी कर दी कि अगले दिन मामले की सुनवाई के वक्त कोई भी बहाना नहीं सुना जाएगा। समूह की कंपनियों ने बिना मंजूरी के डिबेंचर जारी कर लोगों से 24 हजार करोड़ जुटाए थे। इसी रकम को लौटाने के लिए सेबी की याचिका पर बीते साल सुप्रीम कोर्ट ने सहारा के खिलाफ फैसला सुनाया था। इसमें निवेशकों की रकम सूद समेत लौटाने की जिम्मेदारी सेबी पर डाली थी।

समूह की ओर से नियामक के पास पांच हजार करोड़ से कुछ अधिक का बैंक ड्राफ्ट जमा कराया गया था। इसके बाद सेबी ने सुप्रीम कोर्ट में अवमानना की याचिका दाखिल की थी। इसी पर 28 अक्टूबर को अदालत ने सहारा को संपत्तियों के टाइटल डीड सौंप देने का आदेश सुनाया था।

Source- Business Hindi News

Friday, 1 November 2013

Sebi cracks whip on new 'Cattle and Goat Farms' Scheme

Good News

मुंबई। अवैध निवेश योजनाओं के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई कर रहे बाजार नियामक सेबी ने अब ऐसी दो और फर्मो पर शिकंजा कस दिया है। सेबी ने मवेशी और बकरी पालन के नाम पर निवेशकों से धन जुटा रही समृद्ध जीवन फूड्स इंडिया की घेरेबंदी की है।

नियामक ने इस फर्म को धन जुटाने से प्रतिबंधित करते हुए इसके निदेशकों और प्रमोटरों को निवेशकों से अब तक जुटाई गई रकम की विस्तृत जानकारी देने को कहा है। इसके अलावा सेबी ने अवैध रीयल एस्टेट योजनाएं चलाने के आरोप में सर्वहित हाउसिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर इंडिया को भी धन जुटाने से रोक दिया है। नियामक ने दोनों कंपनियों के निदेशकों को हिदायत दी है कि निवेशकों की रकम से खरीदी गई संपत्ति हस्तांतरित करने की कोशिश न की जाए और न ही निवेश योजना के जरिये जुटाई गई रकम को डायवर्ट किया जाए।
सेबी ने इन कंपनियों को कोई नई स्कीम लांच करने से भी प्रतिबंधित किया है। कुछ महीने पहले नियामक मवेशी और बकरी पालन में निवेश की ऐसी ही अवैध योजनाएं चला रही दो अन्य कंपनियों एचबीएन डेयरीज और बीटल लाइवस्टॉक पर भी इसी तरह की कार्रवाई कर चुका है।
एचबीएन डेयरीज मवेशियों और घी में निवेश करने पर बेहतर रिटर्न का झांसा देकर निवेशकों से रकम ऐंठ रही थी। इसी तरह बीटल लाइवस्टॉक भी बकरी पालन कारोबार का झांसा दे रही थी। सेबी को शिकायत मिली थी कि समृद्ध जीवन फर्म के एजेंट मवेशी और बकरी पालन कारोबार में निवेश करने पर लोगों को 12 फीसद से ज्यादा का तय रिटर्न देने का दावा कर रहे हैं। इस शिकायत की जांच के आधार पर सेबी ने कंपनी को नोटिस जारी करके 15 दिन में जवाब देने को कहा है।
इस कंपनी की गतिविधियों को लेकर पणजी (गोवा) में पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने भी जांच शुरू की थी। इसके अलावा, सीबीआइ ने भी अपनी जांच में पाया कि कंपनी ने 6,48,406 निवेशकों से रकम जुटाई है, जबकि उसके पास केवल 16,876 मवेशी हैं। इससे स्पष्ट है कि कंपनी जितने ग्राहकों से पैसा जुटा रही है उतने मवेशियों की खरीद नहीं कर रही है। इस कंपनी ने वित्त वर्ष 2011-12 में निवेशकों से 331 करोड़, वर्ष 2010-11 में 163 करोड़ और वर्ष 2009-10 में 36 करोड़ रुपये की रकम जुटाई थी। इसी तरह सर्वजन हाउसिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर इंडिया के खिलाफ सेबी ने वर्ष 2010 की शिकायत के आधार पर कार्रवाई की है। सेबी ने पाया है कि कंपनी प्लाट की खरीद, विकास और प्रबंधन योजना के तहत लोगों को तय रिटर्न का दावा करके निवेश योजना चला रही है। इस सामूहिक निवेश योजना (सीआइएस) के लिए कंपनी ने नियमों के अनुरूप पंजीयन नहीं कराया है। सेबी के मुताबिक कंपनी रियल एस्टेट कारोबार का केवल छलावा कर रही है ताकि निवेशकों से रकम जुटाई जा सके।