अब तक करीब 1,550 करोड़ रुपये की रकम वसूली के लिए खाते जब्त किए गए हैं। इसमें से 1,520 करोड़ रुपये की रकम केवल एक मामले से संबंधित है। यह मामला पश्चिम बंगाल की एमपीएस ग्रीनरी डेवलपर्स की अवैध सामूहिक निवेश योजना का है।
पिछले करीब एक महीने में शुरू की गई इस कार्रवाई के तहत सेबी अपने नए अधिकारों का इस्तेमाल कर रहा है। इनमें बैंक खाते जब्त करने, संपत्तियां जब्त करने और वसूली के लिए छापेमारी के अधिकार शामिल हैं। इसके अलावा नियामक इस काम में मदद के लिए सीबीआइ, टैक्स डिपार्टमेंट और अन्य जांच एवं प्रवर्तन एजेंसियों से भी विचार-विमर्श कर रहा है। इस काम को अंजाम देने के लिए सेबी ने अपने कर्मचारियों की संख्या में भी खासा इजाफा किया है। नियामक ने हाल ही में 75 नए अधिकारियों की नियुक्ति की है।
37 कंपनियों पर कार्रवाई
फर्जी एसएमएस संदेशों के जरिये निवेशकों को लुभाने वाली 37 कंपनियां सेबी के हत्थे चढ़ी हैं। नियामक ने इन कंपनियों को बाजार में कारोबार से प्रतिबंधित कर दिया है। इनमें एक सूचीबद्ध कंपनी भी शामिल हैं। सेबी ने इन कंपनियों के निदेशकों और प्रमोटरों पर भी प्रतिबंध लगाया है। सेबी ने फरवरी-मार्च 2013 के दौरान अचानक निवेश सलाह देने वाले एसएमएस में भारी बढ़ोतरी को देखते हुए इस मामले की जांच शुरू की थी। बड़ी संख्या में इन संदेशों में निवेशकों को एसएमएस टेकसॉफ्ट (इंडिया) लिमिटेड नाम की कंपनी के शेयर खरीदने के लिए लुभाया जा रहा था।
नियामक ने अब इन कंपनियों को छह करोड़ रुपये की रकम एस्क्रो अकाउंट में जमा करने को कहा है। इन संदेशों के कारण एसएमएस टेकसॉफ्ट के शेयरों में आई तेजी से इन कंपनियों ने यह लाभ कमाया था। इसके अलावा एसएमएस टेकसॉफ्ट ने इन कंपनियों को तरजीही आधार पर जो शेयर जारी किए थे उन्हें बेचकर भी इन कंपनियों ने लाभ कमाया।
Source- News in Hindi