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Friday, 29 November 2013

May launch Nano in Indonesia and bring back to India: Tata

Nano
सिंगापुर। रतन टाटा के सपनों की कार नैनो को उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिलने से वह निराश हैं। टाटा समूह के मानद चेयरमैन ने कहा है कि यह अब नए अवतार में आएगी। इसका नया मॉडल इंडोनेशिया के रास्ते भारत आएगा। यानी इसे पहले विदेश में पेश किया जाएगा। वहां यह सस्ती नहीं रह जाएगी। इसके बाद घरेलू बाजार में नई छवि के साथ इसके सफर की नई शुरुआत होगी।

एक इंटरव्यू में टाटा ने इस कार की असफलता पर अफसोस जताते हुए स्वीकार किया कि हमने इसकी मार्केटिंग में गलती कर दी। यह उन दोपहिया वालों के लिए बनाई गई थी, जो परिवार के साथ सभी मौसम में सुरक्षित एवं सस्ती यात्रा करना चाहते हैं। हमें नैनो को दोपहिया के विकल्प के तौर पर उतारना था न कि सबसे सस्ती कार के रूप में। इस तरह की मार्केटिंग के चलते नैनो की क्षमताओं को कम कर आंका गया। इसकी ब्रांडिंग भारतीय बाजार में बेहद सस्ती कार के तौर पर हो गई, जिससे नुकसान हुआ। इसी धब्बे को धोने के लिए अब हम इसे इंडोनेशिया जैसे देश में उतारेंगे। विदेशी बाजार में इसे लेकर बहुत उत्सुकता है। यूरोपीय बाजारों के लिए भी नैनो को तैयार किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि इसकी रीलॉन्चिंग की तैयारी चल रही है। नई नैनो में अलग तरह के फीचर होंगे। हालांकि, उन्होंने इसके समय के बारे में कुछ नहीं बताया। पिछले साल भी टाटा ने कहा था कि अब नैनो को दोबारा उतारने का वक्त आ गया है। इस कार में बेहतर करने का माद्दा है। हम अपनी गलतियों से इसका पूरा फायदा नहीं उठा पाए। इस साल अप्रैल-अक्टूबर अवधि में इसकी बिक्री 71.7 फीसद घटकर 12,322 इकाई रह गई है। पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में कंपनी ने 43,627 कारें बेची थीं। अक्टूबर में टाटा मोटर्स ने नैनो का सीएनजी वर्जन भी पेश किया मगर इससे भी बिक्री में ज्यादा फर्क पड़ता नहीं दिखाई दे रहा। दिल्ली में फिलहाल इसकी एक्स शोरूम कीमत 1.45 लाख से 2.65 लाख रुपये के बीच है।

Wednesday, 6 November 2013

Record 2170 Billionaires Globally, Asia Fastest-Growing Region

Billionaire

नई दिल्ली। पूरी दुनिया मंदी के शिकंजे से निकलने को कसमसा रही है मगर दौलतमंदों के लिए यह जैसे एक मौका बनकर आया है। तभी तो अरबपतियों की संपत्ति में इतना इजाफा हुआ कि उनकी संख्या रिकॉर्ड 2,170 पर पहुंच गई। मजेदार बात यह है कि वर्ष 2009 में जब ग्लोबल वित्तीय संकट अपने चरम पर था तब से लेकर अब तक रईसों की संख्या 810 बढ़ी है। साथ ही इनकी कुल संपत्ति उस समय के मुकाबले बढ़कर दोगुने से भी ज्यादा हो गई है।
वेल्थ-एक्स और यूबीएस की वर्ष 2013 के अरबपतियों के सूचकांक में उन लोगों को शुमार किया गया है जिनकी संपत्ति 30 करोड़ डॉलर या इससे ज्यादा है। सूचकांक के मुताबिक, वर्ष 2013 में अरबपतियों की संख्या में सबसे तेज बढ़ोतरी एशिया में ही हुई है। इस दौरान इस क्षेत्र में 18 नए अरबपति शामिल हुए हैं। यहां दौलतमंदों की संख्या इससे पिछले साल के मुकाबले 3.7 फीसद बढ़ी है। वहीं, इनकी संपत्ति में 13 फीसद का इजाफा दर्ज किया गया है। वहीं, ग्लोबल स्तर पर इनकी संख्या नए रिकॉर्ड पर पहुंच गई है।
इन रईसों की कुल संपत्ति 65 खरब डॉलर हो गई है। यह वर्ष 2009 में 31 खरब डॉलर थी। इनकी संपत्ति का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि यह अमेरिका के बजट घाटे को वर्ष 2024 तक पाटने के लिए पर्याप्त है।
इसके अलावा अमेरिका और चीन को छोड़कर बाकी किसी भी देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) से कहीं ज्यादा है। इन 2,170 दौलतमंदों के पास औसतन तीन अरब डॉलर की संपत्ति है। रिपोर्ट के मुताबिक यूरोप में सबसे ज्यादा 766 अरबपति हैं। वहीं, अमेरिकी अरबपतियों के पास सबसे ज्यादा 2,158 अरब डॉलर की संपत्ति है। वहीं, एशिया में अल्ट्रा हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स (यूएचएनआइ) की संख्या 44,505 है। इनके पास कुल 6,590 अरब डॉलर की संपत्ति है। यूएचएनआइ में वे लोग भी शामिल हैं जिनके पास 30 करोड़ डॉलर से कम संपत्ति है। इनमें से 60 फीसद अरबपतियों ने खुद की बदौलत संपत्तियां बनाई हैं, जबकि 40 फीसद को विरासत में मिली है।

Source- News in Hindi