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Sunday, 17 November 2013

Loan recast has gone "out of control," says RBI Official

Loan
मुंबई। देश के बैंकिंग तंत्र में कर्ज पुनर्गठन के मामले बेतहाशा बढ़ रहे हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर बी महापात्रा का कहना है कि कर्ज पुनर्गठन की स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई है। इस साल जून तक पूरे बैंकिंग तंत्र में पुनर्गठित की गई कर्ज संपत्ति बढ़कर 3.25 लाख करोड़ रुपये हो गई। कर्ज पुनर्गठन का समझौता एक तरह से नुकसान साझा करने की व्यवस्था है।

सालाना बैंकॉन सम्मेलन में महापात्रा ने कहा कि मार्च, 2011 तक पुनर्गठित किए गए कर्ज 1.1 लाख करोड़ रुपये के प्रबंधन योग्य स्तर पर थे, लेकिन हालात अब काबू से बाहर हो गए हैं। अब ऐसे कर्ज बढ़कर 2.7 लाख करोड़ रुपये के हो गए हैं। यह स्थिति केवल कॉरपोरेट क्षेत्र के कर्जो की है। द्विपक्षीय कर्ज पुनर्गठन के मामलों को जोड़ने पर कुल 3.25 लाख करोड़ रुपये के कर्ज पुनर्गठित किए जा चुके हैं। इस समस्या से निपटने के लिए सभी पक्षों को मिलकर कदम उठाने की जरूरत है। 

आरबीआइ कुछ हद तक पुनर्गठन में वृद्धि को स्वीकार करता है। नियमन के स्तर पर केंद्रीय बैंक कुछ हद तक छूट देने को तैयार हैं, लेकिन बैंकरों को इसके लिए ज्यादा रकम सुरक्षित करने का प्रावधान करना होगा। कर्ज लेने वालों को भी इसके लिए त्याग करना चाहिए और उन्हें ज्यादा हिस्सेदारी जुटानी चाहिए। महापात्रा ने रेखांकित किया कि आरबीआइ ने कुछ मामलों में पुनर्गठित कर्जो पर सुरक्षित रखी जाने वाली रकम दो से बढ़ाकर पांच फीसद कर दी है। 

महापात्रा के मुताबिक, फिलहाल हालात दहशत पैदा करने वाले नहीं हैं। फंसे हुए कर्ज (एनपीए) और पुनर्गठित कर्जो की कुल रकम 10 फीसद से कम है। यह वर्ष 1997 में पैदा हुए एशियाई वित्तीय संकट के दौर से काफी कम है। उस वक्त यह स्तर कुल कर्जो के 16 फीसद तक पहुंच गया था।

Source- Business Hindi News

Tuesday, 5 November 2013

SBI Hikes Base Rates by 20 bps to 10 Percent

SBI

नई दिल्ली। जिस बात का डर था वो अब शुरू हो गया है। बैंकों ने होम लोन, ऑटो लोन आदि की ईएमआई बढ़ाने का सिलसिला शुरू का दिया है। एचडीएफसी बैंक के बाद देश के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) का भी लोन महंगा हो गया है।
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने बेस रेट 0.20 फीसद बढ़ाकर 10 फीसद और बीपीएलआर भी 0.20 फीसद बढ़ाकर 14.75 फीसद कर दिया। स्टेट बैंक की नई दरें 07 नवंबर से लागू होंगी। आरबीआई के रेपो रेट में बढ़ोतरी के बावजूद एमएसएप दरों में कमी किए जाने से जानकार उम्मीद जता रहे थे कि बैंक शायद ही बेस रेट में बढ़ोतरी करें। लेकिन लगता है कि फिलहाल बैंक ग्राहकों को महंगे लोन से राहत देने के मूड में नहीं हैं।
एसबीआई की चेयरपर्सन अरुंधति भट्टाचार्य का कहना है कि फंड की लागत में बढ़ोतरी के चलते बैंक ने बेस रेट में बढ़ोतरी की है। हालांकि छोटी अवधि में दरों में और बढ़ोतरी की कोई योजना नहीं है। अरुंधति भट्टाचार्य के मुताबिक ज्यादातर बैंकों के बेस रेट एसबीआई से ज्यादा हैं। वहीं, एसबीआई का क्रेडिट ग्रोथ 17-18 फीसद होने का अनुमान है। आरबीआई की ओर से रेपो रेट में 0.5 फीसद की बढ़ोतरी के बावजूद बेस रेट में केवल 0.2 फीसद की बढ़ोतरी की है। मौजूदा स्तरों से ब्याज दरों में बहुत ज्यादा बढ़त की आशंका नहीं है।