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Wednesday, 13 November 2013

SBI net falls 35 percent, steepest quarterly profit fall in Over two Years

SBI
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। फंसे कर्ज (एनपीए) की गाज एक के बाद एक बैंकों पर गिर रही है। देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआइ) का मुनाफा भी इसकी भेंट चढ़ गया है। एनपीए के लिए ज्यादा प्रावधान करने की वजह से चालू वित्त वर्ष की जुलाई-सितंबर तिमाही में एसबीआइ का मुनाफा 33 फीसद गिर गया है।

इससे पहले पीएनबी, विजया बैंक समेत लगभग छह सरकारी बैंकों का लाभ भी बढ़े एनपीए की वजह से घटा है। चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में एसबीआइ ने 3,072.77 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया है। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह राशि 4,574.11 करोड़ रुपये थी। इस गिरावट के लिए असली वजह 2,645 करोड़ रुपये का एनपीए प्रावधान है।
जब ग्राहक समय पर कर्ज वापस नहीं करते तो एक निश्चत अवधि के बाद उसे एनपीए में डाल दिया जाता है। इस एनपीए के एक हिस्से के बराबर राशि का समायोजन बैंकों को अपने मुनाफे में से करना पड़ता है। एसबीआइ का सकल एनपीए बढ़ कर 5.64 फीसद हो गया है। 3.5 फीसद से ज्यादा एनपीए को बैंकिंग उद्योग में खतरनाक माना जाता है।
एक दिन पहले ही एक निजी एजेंसी इंडियन रेटिंग्स एंड रिसर्च ने अपनी सालाना रिपोर्ट में भारत के सरकारी बैंकों की बिगड़ती वित्तीय स्थिति का उल्लेख किया है। इसमें कहा गया है कि एनपीए यूं ही बढ़ता रहा तो भारतीय बैंकों के पूंजी आधार में लगातार कमी होती जाएगी और इसकी भरपाई केंद्र सरकार को करनी पड़ेगी।
केंद्र सरकार पिछले चार वर्षो से लगातार सरकारी बैंकों को 15,000 से 20,000 करोड़ रुपये की राशि दे रही है। चालू वित्त वर्ष के दौरान भी इन्हें 14,000 करोड़ रुपये दिए गए हैं। वर्ष 2010 से वर्ष 2013 के बीच बैंकों की जरूरत का 95 फीसद हिस्सा सरकार ने दिया है। बेसिल-3 मानक को लागू करने के लिए इन बैंकों को अगले कुछ वर्षो तक और ज्यादा राशि की जरूरत है। अगर एनपीए की समस्या यूं ही बढ़ती रही तो फिर सरकार को बहुत ज्यादा राशि देनी पड़ सकती है।

Source- Business Hindi News

Tuesday, 5 November 2013

SBI Hikes Base Rates by 20 bps to 10 Percent

SBI

नई दिल्ली। जिस बात का डर था वो अब शुरू हो गया है। बैंकों ने होम लोन, ऑटो लोन आदि की ईएमआई बढ़ाने का सिलसिला शुरू का दिया है। एचडीएफसी बैंक के बाद देश के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) का भी लोन महंगा हो गया है।
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने बेस रेट 0.20 फीसद बढ़ाकर 10 फीसद और बीपीएलआर भी 0.20 फीसद बढ़ाकर 14.75 फीसद कर दिया। स्टेट बैंक की नई दरें 07 नवंबर से लागू होंगी। आरबीआई के रेपो रेट में बढ़ोतरी के बावजूद एमएसएप दरों में कमी किए जाने से जानकार उम्मीद जता रहे थे कि बैंक शायद ही बेस रेट में बढ़ोतरी करें। लेकिन लगता है कि फिलहाल बैंक ग्राहकों को महंगे लोन से राहत देने के मूड में नहीं हैं।
एसबीआई की चेयरपर्सन अरुंधति भट्टाचार्य का कहना है कि फंड की लागत में बढ़ोतरी के चलते बैंक ने बेस रेट में बढ़ोतरी की है। हालांकि छोटी अवधि में दरों में और बढ़ोतरी की कोई योजना नहीं है। अरुंधति भट्टाचार्य के मुताबिक ज्यादातर बैंकों के बेस रेट एसबीआई से ज्यादा हैं। वहीं, एसबीआई का क्रेडिट ग्रोथ 17-18 फीसद होने का अनुमान है। आरबीआई की ओर से रेपो रेट में 0.5 फीसद की बढ़ोतरी के बावजूद बेस रेट में केवल 0.2 फीसद की बढ़ोतरी की है। मौजूदा स्तरों से ब्याज दरों में बहुत ज्यादा बढ़त की आशंका नहीं है।