जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। फंसे कर्ज (एनपीए) की गाज एक के बाद एक बैंकों पर गिर रही है। देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआइ) का मुनाफा भी इसकी भेंट चढ़ गया है। एनपीए के लिए ज्यादा प्रावधान करने की वजह से चालू वित्त वर्ष की जुलाई-सितंबर तिमाही में एसबीआइ का मुनाफा 33 फीसद गिर गया है।
इससे पहले पीएनबी, विजया बैंक समेत लगभग छह सरकारी बैंकों का लाभ भी बढ़े एनपीए की वजह से घटा है। चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में एसबीआइ ने 3,072.77 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया है। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह राशि 4,574.11 करोड़ रुपये थी। इस गिरावट के लिए असली वजह 2,645 करोड़ रुपये का एनपीए प्रावधान है।
जब ग्राहक समय पर कर्ज वापस नहीं करते तो एक निश्चत अवधि के बाद उसे एनपीए में डाल दिया जाता है। इस एनपीए के एक हिस्से के बराबर राशि का समायोजन बैंकों को अपने मुनाफे में से करना पड़ता है। एसबीआइ का सकल एनपीए बढ़ कर 5.64 फीसद हो गया है। 3.5 फीसद से ज्यादा एनपीए को बैंकिंग उद्योग में खतरनाक माना जाता है।
एक दिन पहले ही एक निजी एजेंसी इंडियन रेटिंग्स एंड रिसर्च ने अपनी सालाना रिपोर्ट में भारत के सरकारी बैंकों की बिगड़ती वित्तीय स्थिति का उल्लेख किया है। इसमें कहा गया है कि एनपीए यूं ही बढ़ता रहा तो भारतीय बैंकों के पूंजी आधार में लगातार कमी होती जाएगी और इसकी भरपाई केंद्र सरकार को करनी पड़ेगी।
केंद्र सरकार पिछले चार वर्षो से लगातार सरकारी बैंकों को 15,000 से 20,000 करोड़ रुपये की राशि दे रही है। चालू वित्त वर्ष के दौरान भी इन्हें 14,000 करोड़ रुपये दिए गए हैं। वर्ष 2010 से वर्ष 2013 के बीच बैंकों की जरूरत का 95 फीसद हिस्सा सरकार ने दिया है। बेसिल-3 मानक को लागू करने के लिए इन बैंकों को अगले कुछ वर्षो तक और ज्यादा राशि की जरूरत है। अगर एनपीए की समस्या यूं ही बढ़ती रही तो फिर सरकार को बहुत ज्यादा राशि देनी पड़ सकती है।
Source- Business Hindi News
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