Wednesday, 13 November 2013

RBI pegs CAD at USD 56 bn; Re recovers after Rajan's pep Talk

RBI
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। ऐसे समय जब डॉलर के मुकाबले रुपया फिर कमजोर होना लगा है। आरबीआइ गवर्नर रघुराम राजन ने अर्थव्यवस्था की उम्मीदों भरी तस्वीर पेश करने की कोशिश की है। निर्यात और औद्योगिक क्षेत्र के सकारात्मक आंकड़ों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस वर्ष चालू खाते में घाटा (सीएडी) 56 अरब डॉलर से ज्यादा का नहीं रहेगा। हालात पूरी तरह से काबू में हैं। इसलिए रुपये में और गिरावट की कोई वजह नहीं है। तरलता बनाए रखने के लिए आरबीआइ अगले हफ्ते बैंकिंग प्रणाली में 8,000 करोड़ रुपये की नकदी छोड़ेगा।

रिजर्व बैंक (आरबीआइ) के गवर्नर के बयान का असर बाजार पर भी पड़ा है। पिछले पांच कारोबारी दिनों की गिरावट के बाद बुधवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 41 पैसे मजबूत होकर 63.31 पर बंद हुआ है। राजन ने सीएडी (देश से विदेशी मुद्रा के बाहर जाने और बाहर से यहां आने के बीच का अंतर) को लेकर जो आस बंधाई है वह वित्त मंत्रालय के आंकड़ों से भी बेहतर है। वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने हाल तक इसके 70 अरब डॉलर होने की बात कह रहे थे। 

पिछले दो महीनों के निर्यात को देखकर इसके 60 अरब डॉलर होने की बात कही जा रही थी। राजन का कहना है, 'इस वर्ष सीएडी 56 अरब डॉलर होगा, जो सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का तीन फीसद है और पिछले वर्ष के मुकाबले 32 अरब डॉलर कम होगा।'

जानकारों का कहना है कि चालू खाते का घाटा बढ़ने की वजह से ही रुपये पर दबाव बढ़ा था। सीएडी को कम करने के लिए सरकार ने सोने के आयात पर काफी अंकुश लगा दिया है। राजन ने इस बारे में कहा कि सोने पर अंकुश लगा रहेगा। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि इससे सोने की तस्करी बढ़ी है। आंकड़ों के जरिये रघुराम ने साबित किया है कि अगर देश में कोई विदेशी निवेश नहीं आए तब भी सरकार के लिए बाहर जा रहे डॉलर के भुगतान में कोई परेशानी नहीं आने वाली।

राजन के मुताबिक, आने वाले दिनों में ब्याज दरों का रुख पूरी तरह से महंगाई दर और रुपये की कीमत पर निर्भर करेगी। जहां तक महंगाई का सवाल है, कम मांग, बेहतर खाद्य आपूर्ति और आरबीआइ की तरह से उठाए गए कदमों का असर जल्द दिखाई देगा। इससे महंगाई में कमी आएगी। निकट भविष्य में खाद्य उत्पादों व ईंधन की कीमत में वृद्धि के असर पर भी रिजर्व बैंक की नजर रहेगी। 

राजन ने उम्मीद जताई है कि निर्यात बढ़ने, बेहतर मानसून होने, औद्योगिक उत्पादन की रफ्तार बढ़ने और बिजली की स्थिति में सुधार की वजह से दूसरी छमाही (अक्टूबर-मार्च, 2013-14) में आर्थिक विकास दर भी बेहतर रहेगी।

Source- Business Hindi News

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