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Tuesday, 12 November 2013

Next year King Khan will Welcomes Bengal People in Bengali Language

kolkata International film festival
मुंबई। ..तो भाई शाहरुख खान बंगाली सीखेंगे। दरअसल, बॉलीवुड के किंग खान को यह अफसोस है कि उन्हें अभी तक बंगाली बोलना नहीं आता। उनका कहना है कि तीन साल से उनका कोलकाता आना जाना है, लेकिन वे आज तक बांग्ला नहीं बोल पाते हैं। पर अब उन्होंने ये भाषा सीखने की ठान ली है। वह बांग्ला के लिए जया बच्चन को अपना गुरु बनाना चाहते हैं।

कोलकाता में अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल के उद्घाटन समारोह में शिरकत करने पहुंचे किंग खान ने रविवार को जया बच्चन के संदर्भ में ये बाते कहीं। उन्होंने कहा कि अगले साल तक वे अच्छी तरह से बांग्ला भाषा सीख लेंगे और स्टेज पर सबको इसी भाषा से संबोधित करेंगे। उन्होंने ये बातें तब कहीं जब जया बच्चन ने कमल हसन, अमिताभ बच्चन और शाहरुख खान को असली बंगालियों के सामने नकली बंगाली कहा।
गौरतलब है कि किंग खान पश्चिम बंगाल के ब्रैंड अंबेसडर हैं। फेस्टिवल के उदघाटन समारोह में अमिताभ बच्चन,बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और कमल हसन भी मौजूद थें। आठ दिनों तक चलने वाला इस फिल्म फेस्टिवल में 63 देशों की 189 फिल्में दिखाई जाएंगी। समारोह में टॉलीवुड के कई बड़े स्टार भी मौजूद थें।

Source- Entertainment News in Hindi

Sunday, 10 November 2013

Jugal Kishore Got Additional Responsibility

Mayawati
लखनऊ। मिशन 2014 की तैयारी में शिद्दत से जुटी बहुजन समाज पार्टी सभी कील-कांटे दुरुस्त रखना चाहती है। इसी क्रम में बसपा सुप्रीमो ने लखनऊ में तीन दिन से डेरा डाल रखा है। पार्टी ने कल जोनल कोआर्डिनेटरों के क्षेत्र में भी बदलाव किया है। अब सांसद जुगल किशोर को गोरखपुर मंडल का भी प्रभार देकर उनका कद बढ़ाया गया है। इसके साथ ही पार्टी ने बहराइच से प्रत्याशी भी बदला है। 

जुगल किशोर फिर बने गोरखपुर के जोनल कोआर्डिनेटर :
बसपा प्रमुख मायावती ने राज्यसभा सदस्य जुगल किशोर को फिर गोरखपुर मंडल का जोनल कोआर्डिनेटर बनाया है। जुगल बस्ती, देवीपाटन व फैजाबाद मंडल के भी जोनल कोआर्डिनेटर हैं। अब तक विधायक डाक्टर विजय प्रताप गोरखपुर के जोनल कोआर्डिनेटर थे। डाक्टर प्रताप अब इलाहाबाद व आजमगढ़ मंडल के ही जोनल कोआर्डिनेटर रहेंगे।
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बदला गया बहराइच का प्रत्याशी
बसपा प्रमुख मायावती ने प्रत्याशियों की स्थिति की समीक्षा करने के बाद बहराइच लोकसभा क्षेत्र से घोषित प्रत्याशी त्रिभुवन दत्त का टिकट काट दिया। दत्त के बारे में उन्हें शिकायतें मिली थी। बसपा प्रमुख ने बांसगांव से पार्टी के ही विधायक डा. विजय कुमार को प्रत्याशी बनाने की घोषणा की। उल्लेखनीय है कि बहराइच से पहले रमेश गौतम को पार्टी ने प्रत्याशी बनाया था। बसपा प्रमुख ने पदाधिकारियों को घोषित प्रत्याशियों का पूरा ख्याल रखने के निर्देश दिए। सूत्र बताते है कि कुछ और लोकसभा क्षेत्र के पार्टी प्रत्याशियों में बदलाव हो सकता है।

Source- News in Hindi

Monday, 4 November 2013

Countdown to India's Maiden Mars Mission Begins


Mars

चेन्नई। भारत के पहले मंगल अभियान के लिए 56 घंटे 10 मिनट की उलटी गिनती रविवार को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन प्रक्षेपण केंद्र पर शुरू हो गई।
उलटी गिनती रविवार को प्रात: छह बजकर आठ मिनट पर शुरू हुई। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के एक प्रवक्ता ने फोन पर बताया कि स्वदेशी पीएसएलवी सी 35 रॉकेट का काउंट डाउन पांच नवंबर को दोपहर दो बजकर 38 मिनट पर समाप्त होगा। यह पहला मौका होगा जब भारत मंगल ग्रह के लिए अपना अंतरिक्ष यान प्रक्षेपित करेगा। 35 करोड़ किलोमीटर की मंगल ग्रह यात्रा को तय करने में इसे करीब एक वर्ष का समय लगेगा।

इससे पहले इसरो का सबसे लंबी दूरी का अभियान चंद्रयान साढ़े तीन हजार किलोमीटर का था। इस अभियान से भारत मंगल यान लॉन्च करने वाला विश्व का पांचवां देश बन जाएगा। इससे पहले अमेरिका, रूस, यूरोप और जापान साठ के दशक में मंगल ग्रह के लिए 51 अभियान लॉन्च कर चुके हैं। उनके अभियान पर 2,393 करोड़ रुपये का खर्च आया था, जबकि हमारे स्वदेशी मंगल यान की लागत सिर्फ 450 करोड़ रुपये आई है और इसका कुल भार 1,350 किलोग्राम है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य मंगल ग्रह के वातावरण और ग्रह के भू-विज्ञान का अध्ययन करना है। साथ ही लाल ग्रह पर मीथेन के रहस्य को जानने का प्रयास भी किया जाएगा, जो लंबे समय से अनसुलझा सवाल रहा है।

मंगल मिशन की सफलता से अन्य ग्रहों तक बढ़ेगा खोज का दायरा
बेंगलूर। देश की महत्वाकांक्षी मंगल मिशन परियोजना को लेकर अंतरिक्ष विज्ञानी बेहद आशान्वित हैं। इसरो के पूर्व प्रमुख के कस्तूरीरंगन का तो यहां तक मानना है कि इस अभियान की सफलता से न केवल मंगल के बारे में हमारी समझदारी और विकसित होगी बल्कि सौर मंडल के अन्य ग्रहों तक हमारी खोज का दायरा भी बढ़ेगा। उनके अनुसार इससे अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में देश की नई वैश्विक पहचान बनेगी। दुनिया हमारा लोहा मानेगी। वहीं इसरो के स्पेस अप्लीकेशन सेंटर के निदेशक एएस किरण कुमार कहते हैं, 'मार्स ऑर्बिटर को हमने जिस तकनीक से तैयार किया है। उसका इस्तेमाल कर भविष्य में हम कम लागत में उन्नत किस्म के उपग्रहों का निर्माण करने में सक्षम होंगे'।

मंगल मिशन के प्रक्षेपण की पूर्व संध्या पर कस्तूरीरंगन बेंगलूर में और किरण कुमार चेन्नई में पत्रकारों से बात कर रहे थे। कस्तूरीरंगन का कहना था, 'अभियान का मकसद भारत की तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन करना है। दुनिया को यह दिखाना है कि हम भी लाल ग्रह पर यान भेज सकते हैं और वहां पर जीवन की संभावना तलाशने की दिशा में उपयोगी परीक्षण कर सकते हैं।' ध्यान रहे कि मार्स रोवर के आंकलन के आधार पर अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा की ओर से यह बयान जारी किया जा चुका है कि मंगल ग्रह पर जीवन की कोई भी संभावना नहीं है। उन्होंने यान के साथ भेजे जा रहे पांच उपकरणों में से एक मीथेन सेंसर के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उनका कहना था कि इस सेंसर की मदद से लाल ग्रह के विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों की स्कैनिंग करने में तो आसानी होगी ही साथ ही जीवन की संभावना के लिए जरूरी मीथेन गैस की मौजूदगी का पता भी चल सकता है। जबकि किरण कुमार ने बताया कि मार्स ऑर्बिटर बेहद उम्दा तकनीक से निर्मित किया गया है। यह किसी भी गड़बड़ी से खुद निपटने वाली तकनीक से लैस है। यह खराबी का खुद पता लगाएगा और जमीन से किसी भी निर्देश के मिले बगैर उसे दुरुस्त करने में सक्षम होगा। उनके अनुसार मिशन के दौरान बहुत लंबे समय तक सूर्य पृथ्वी और मंगल के बीच में होगा। इस अवधि में वहां पर गहरा अंधेरा छाया रहेगा। ऐसे में यान पूर्व अर्जित ऊर्जा के प्रसंस्करण के जरिए संचालित रहेगा। इसके अलावा प्रक्षेपण के बाद 300 दिन तक पृथ्वी की कक्षा में रहने के बाद जब यान मंगल की ओर रवाना होगा, उस समय इसका इंजन स्वत: चालू हो जाएगा।
जीवन संभावना तलाशने की बात पर भड़के माधवन नायर

बेंगलूर। इसरो के पूर्व प्रमुख जी माधवन नायर इस दावे से सहमत नहीं है कि मंगल मिशन अभियान का मकसद लाल ग्रह पर जीवन की संभावना तलाशने को लेकर प्रयोग किए जाएंगे। उन्होंने इस संबंध में इसरो प्रमुख के राधाकृष्णन और पूर्व प्रमुख कस्तूरीरंगन के बयान पर आश्चर्य व्यक्त किया है। उनका कहना है कि मिशन के दौरान जीवन की संभावना तलाशने की बात करना मूर्ख बनाने जैसा है। एक छोटे से मीथेन सेंसर के जरिये आप जीवन के लक्षण नहीं खोज सकते हैं। क्योंकि अगर आप इस लघु उपकरण से जीवन की संभावना के लिए जरूरी मीथेन गैस खोजने की कोशिश करेंगे तो निराशा ही हाथ लगेगी। यह सेंसर गैस की मौजूदगी को नहीं तलाश कर सकता है। उन्होंने कहा, 'मार्स रोवर के आकलन के आधार पर नासा की ओर से सार्वजनिक तौर पर यह दावा किया जा चुका है कि मंगल पर जीवन की रत्ती भर भी संभावना नहीं है। इस सच्चाई के बाद जब कोई जीवन तलाशने की बात करता है तो वह देश को मूर्ख ही बना रहा है।'


Source- News in Hindi

Politics over Opinion Polls

Opinion polls

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव से पहले ओपीनियन पोल (जनमत सर्वेक्षण) पर भी कांग्रेस और भाजपा भिड़ गए हैं। ज्यादातर सर्वेक्षणों में पिछड़ रही कांग्रेस ने चुनाव आयोग से इन पर प्रतिबंध लगाने की वकालत की है। अटॉर्नी जनरल जीई वाहनवती ने भी इस पर अपनी सहमति जता दी है, लेकिन कानून मंत्रालय का मत है कि इस बारे में अंतिम फैसला चुनाव आयोग करे। वहीं, भाजपा ने इसे कांग्रेस की बौखलाहट करार दिया और अन्य दलों ने भी सर्वेक्षणों पर रोक का विरोध किया है। भाजपा नेता अरुण जेटली ने चुनाव आयोग को सलाह दी कि वह इस बहस में न पड़े क्योंकि सर्वेक्षणों पर प्रतिबंध एक तरह से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक लगाने जैसा है, जो असंवैधानिक होगा। 

चुनावों के दौरान सर्वेक्षणों और उनके प्रसारण पर रोक लगाने के चुनाव आयोग के विचार का कांग्रेस लिखित में पहले ही समर्थन कर चुकी है। निर्वाचन आयोग को 30 अक्टूबर को लिखित जवाब में कांग्रेस ने चुनावों के दौरान सर्वेक्षणों के प्रकाशन और प्रसारण पर रोक लगाने का समर्थन किया था। कांग्रेस का मानना है कि ओपीनियन पोल लोकतांत्रिक संस्थानों की मजबूती में सहयोग नहीं करते और हर बार वे दोषपूर्ण होते हैं। ये अधिकांश मतदाताओं के विचारों का प्रतिनिधित्व नहीं करते। कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह का कहना है कि सवा सौ करोड़ की आबादी वाले देश में महज कुछ हजार लोगों की राय रुझान तय नहीं कर सकते। इसलिए इसे तत्काल बंद किया जाना चाहिए। अटार्नी जनरल जीई वाहनवती ने भी कांग्रेस के रुख का ही समर्थन किया है। अब तक के सर्वेक्षण में पिछड़ रही सपा का मत कांग्रेस के ही साथ है। बसपा ने भी चुनाव के दौरान होने वाले ओपीनियन पोल का विरोध किया है। केंद्रीय चुनाव आयोग को लिखे पत्र में बसपा की तरफ से पार्टी महासचिव सतीश चंद्र मिश्र ने साफ कहा है कि चुनावों के दौरान कुछ लोगों से बातचीत तक सीमित होने वाले ये ओपीनियन पोल जनता व मतदाताओं की सही राय को प्रदर्शित नहीं कर पाते। खास बात यह भी है कि यह सर्वे कराने वाली एजेंसियों के पास उसके लिए कोई वैज्ञानिक तरीका भी नहीं है। लिहाजा, चुनाव के समय बाहरी तौर पर मतदाताओं को भ्रम में डालने वाले ओपीनियन पोल समेत ऐसे किसी की कदम पर रोक लगाया जाना जरूरी है। जबकि राजग से अलग हुए जदयू नेता नीतीश कुमार ओपीनियन पोल का मजाक उड़ा चुके हैं।
लेकिन भाजपा के साथ साथ दिल्ली में बड़ी ताकत के रूप में दिख रहे आम आदमी पार्टी, वाम दलों के अलावा कई अन्य दलों का मानना है कि रोक सही नहीं। भाजपा उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि कांग्रेस बौखलाहट में इसका विरोध कर रही है। फिर भी चुनाव आयोग को लगता है कि इस पर प्रतिबंध लगाना आवश्यक है तो उसे सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए। तो 'आप' के मनीष सिसोदिया ने पोल का समर्थन करते हुए आशंका जताई कि सरकार कभी मतदान पर भी प्रतिबंध की बात कर सकती है। 

भाकपा नेता डी राजा ने साफ कहा, 'इसमें कोई शक नहीं है कि कांग्रेस की यह राय उसकी घटती लोकप्रियता के कारण है।' शिरोमणी अकाली दल के नेता नरेश गुजराल का भी कहना है कांग्रेस ओपीनियन पोल से डर गई है और अब प्रतिबंध लगवाना चाहती है। चुनाव आयोग ने राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय मान्यता प्राप्त दलों से 21 अक्टूबर तक अपने विचार देने को कहा था। फिलहाल मतदान के 48 घंटे पहले से ओपीनियन पोल पर प्रतिबंध है। इससे पहले चुनाव आयोग ने सरकार को प्रस्ताव दिया था कि ओपीनियन पोल पर प्रतिबंध लगाया जाए, जिसके बाद सरकार ने आयोग से कहा कि इस मुद्दे पर वह विभिन्न दलों के साथ फिर से विचार-विमर्श करे।
किसने, क्या-कहा
'सर्वेक्षणों का दुरुपयोग मतदाताओं को प्रभावित करने में किया जा रहा है। पैसे देकर कोई भी इसे अपने पक्ष में कर लेता है।'
- दिग्विजय सिंह, कांग्रेस महासचिव
'चुनाव आयोग इस बहस में न पड़े। अगर इस पर रोक लगती है तो अगला कदम राजनीतिक विश्लेषकों पर रोक लगाने का होगा।'
- अरुण जेटली, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष
'पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों और लोकसभा चुनाव में अपनी करारी शिकस्त भांपकर ही कांग्रेस ऐसी मांग कर रही है।' - प्रकाश सिंह बादल, पंजाब के मुख्यमंत्री
'हमारी पार्टी इस पर प्रतिबंध नहीं चाहती। लेकिन यह देखा जाना चाहिए कि कहीं यह प्रायोजित न हो। इससे मीडिया और लोकतंत्र की विश्वसनीयता पर असर पड़ता है।'
- तारिक अनवर, राकांपा नेता

Source- News in Hindi