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Wednesday, 15 January 2014

Codex letter aside, Porridge festival celebrated


वाराणसी। पोथी पत्र दरकिनार कर लोकमन ने मंगलवार को खिचड़ी का त्योहार मना लिया। संख्या भले ही कम रही हो लेकिन रौनक में खास कमी नहीं रही। लोगों ने विभिन्न गंगा घाटों पर स्नान किया, मंदिरों में मत्था टेका और पुण्य कामना से दान किया। हालांकि धर्ममना काशी में ज्यादातर लोग मकर संक्त्रांति का त्योहार बुधवार को सूर्य के मकर राशि में जाने की सुबह यानी उदयातिथि में मनाएंगे। 

एक दिन पहले इसकी तैयारियों में लोग तन मन से जुटे रहे। इसमें ऐसे भी होंगे जो सभी विधान दूसरे दिन दोहराएंगे। मुंह अंधेरे से ही गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं को भीड़ उमड़ी पड़ी थी। दशाश्वमेध घाट, राजेंद्र प्रसाद घाट, शीतला घाट, सिंधिया घाट, अस्सी, केदारघाट और न जाने कितने घाट-पाट श्रद्धा और आस्था के रंग में रंगे। लोगों ने ठंड के बाद भी पतित पावनी गंगा की धारा में डुबकी लगाई। पुरोहितों और जरूरतमंदों को यथाशक्ति खिचड़ी, तिल, गुड़, वस्त्र आदि का दान किया। इसमें स्थानीयजनों के साथ ही दूसरे जिलों और प्रदेशों से भी आए लोग जो गंगा नहाने के बाद त्रिवेणी जाएंगे, वहां माघ नहाएंगे या कल्पवास में रम जाएंगे। इन लोगों ने स्नान दान के बाद मंदिरों में दर्शन पूजन भी किया। काशी विश्वनाथ, कालभैरव मंदिर, महामृत्युंजय महादेव, संकट मोचन समेत विभिन्न मंदिरों में सुबह से ही खूब भीड़ रही।

मनसायन रहा आसमान- मंगल हो या बुध, बच्चों के लिए तो पतंग उड़ाने और पेंच लड़ाने का मौका हाथ लगा। ठंड के बाद भी सुबह से जो छत पर चढ़े तो शाम को धुंधलके के साथ ही उतरे। मैदान, पार्क, गंगा के घाट, रेती और नावों पर से भी लोगों ने पतंगबाजी का जमकर आनंद लिया।

दशाश्वमेध स्थित खिचड़ी बाबा मंदिर में मंगलवार को महाभंडारा किया गया। बाबा का श्रृंगार किया गया और भक्तों को आलू, गोभी, मटर, टमाटर, बैंगन व मेवा खिचड़ी खिलाई गई। प्रकृति पुरुष सिद्धपीठ घमहापुर (कंदवा) में भी सत्संग व भंडारा किया गया। शिवशंकर सिंह, त्रिलोकीनाथ पांडेय आदि ने भजन पेश किए। 

स्नानार्थियों की सेवा-यादव सर्व समाज सेवा समिति ने दशाश्वमेध क्षेत्र में डाक्टरों संग बीमार श्रद्धालुओं का परीक्षण किया। 

आर्य समाज ने किया यज्ञ - काशी आर्य समाज ने बुलानाला में मकर संक्त्रांति में वैदिक यज्ञ किया। पं. रामदेव शास्त्री के आचार्यत्व में हवन कुंड में आहुतियां दी गईं। समाज मंत्री हीरालाल यादव, गायत्री देवी, सरस्वती देवी, मोतीलाल आर्य आदि शांति पाठ में शामिल थे।

Impossible to discharge resolution, alternative target

वाराणसी। गंगा में कपड़े न धोए जाएं इसके लिए रजक समुदाय को दिलाए गए संकल्प से उन्हें मुक्त नहीं किया जा सकता है। ऐसे में अब एकमात्र रास्ता विकल्प का बचता है। 

रजक समुदाय चूंकि जन-जन से जुड़ा है इसलिए उनके लिए विकल्प के तौर मुहैया कराए जाने वाले धोबी घाटों के निर्माण हो रहे विलंब के खिलाफ खड़ा होना पड़ेगा। जरूरत पड़ी तो विद्वत समाज भी रजक समुदाय के संकल्प बद्धता को बनाए रखने और गंगा को प्रदूषण से बचाए रखने की दिशा में जन आंदोलन खड़ा करने में जुटेगा। यह निचोड़ निकला है तीन दिनों तक केदारमठ में चले काशी विद्वत परिषद के मंथन से। अंतिम निर्णय की घोषणा पूर्णिमा अर्थात 15 जनवरी को की जाएगी।

मंथन के अंतिम दिन जुटे विद्वानों ने एक स्वर कहा कि संकल्प मुक्ति किसी भी दशा में संभव नहीं है। यह शास्त्र सम्मत भी नहीं है। और बात जब गंगा के निर्मलीकरण से जुड़ी हो तो कत्तई कहीं कोई गुंजाइश नहीं है। दूसरी ओर रजक समुदाय की विवशता यह है कि वह संकल्प लेने के बावजूद विकल्प के अभाव में गंगा की धारा में मैले कपड़े धोने को विवश हैं जिसके चलते उन्हें आत्मग्लानि महसूस हो रही है। गंगा और लोकहित में अब यह जरूरी हो गया है कि किसी भी सूरत में रजक समुदाय को प्रस्तावित धोबी घाटों का विकल्प मुहैया कराया जाए। शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद के प्रतिनिधि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने तीन दिवसीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि बनाए जाने वाले धोबी घाटों में हो रहे विलंब के लिए जिला प्रशासन और सरकारों से वार्ता होगी। जन-जन को जोड़ते हुए जरूरत पड़ी तो इसके लिए आंदोलन की राह भी पकड़ी जाएगी। किसी भी सूरत में रजक समुदाय को उनके संकल्प पूर्ति के लिए मदद किया जाएगा और गंगा को और मैली होने से बचाने का प्रयास जारी रहेगा। बैठक में प्रो. रामयत्‍‌न शुक्ल, प्रो. वशिष्ठ त्रिपाठी, डा. श्रीप्रकाश मिश्र, प्रो. रमाकांत पांडेय, प्रो. रामकिशोर त्रिपाठी, प्रो. शिवपूजन मिश्र, आचार्य रमाकांत पांडेय, आचार्य अवधराम पांडेय आदि सहित जिला धोबी घाट बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष नंदू कनौजिया व अन्य सदस्य प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

Tuesday, 7 January 2014

Krdmeshwar temple Arga recovered, two suspects arrested...

वाराणसी। कंदवा (मंडुवाडीह) स्थित पौराणिक पुरातात्विक महत्व के कर्दमेश्वर मंदिर से एक सप्ताह पूर्व चोरी गए शिवलिंग के पीतल व अष्टधातु से निर्मित अरघे का टुकड़ा पुलिस ने सोमवार को बरामद करने का दावा किया है। इस बाबत खोजवां क्षेत्र निवासी रोहित विश्वकर्मा उर्फ शेरू व निराला नगर सिगरा के शंभू उफ सुनील को गिरफ्तार किया गया है।

मंडुवाडीह पुलिस के मुताबिक एक सप्ताह पूर्व चोर पंचकोशी मार्ग पर पड़ने वाले कर्दमेश्वर मंदिर स्थित शिवलिंग के अरघे का करीब तीन फीट हिस्सा काट ले गए थे। चोरी की जानकारी होने पर ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त हो गया था। ग्राम प्रधान के नेतृत्व में ग्रामीण अरघा बनवाने के लिए चंदा भी जुटा रहे थे। इसी बीच मंडुवाडीह थाने के उपनिरीक्षक संतोष सिंह को मुखबिर से सूचना मिली कि दो चोर अरघे का कुछ हिस्सा बेचने के लिए उत्तरी ककरमत्ता में आने वाले हैं। जानकारी मिलते ही पुलिस ने घेराबंदी कर मुखबिर के इशारे पर दो चोरों को धर दबोचा। उनके पास से अरघे का टुकड़ा बरामद किया गया। 

अरघे का कुछ हिस्सा चोरों ने गला कर बेच भी दिया है। पकड़े गए रोहित उर्फ शेरू व शंभू पूर्व में भी जेल जा चुके हैं।

एक सप्ताह तक की थी रेकी- चोरों ने अरघा काटने के लिए एक सप्ताह तक कर्दमेश्वर मंदिर की रेकी भी की थी। पुलिस के मुताबिक पूरी तरह आश्वस्त होने के बाद चोरों ने अरघा काटा था। वहीं ग्रामीणों के मुताबिक अरघा बरामद करने के मामले में पुलिस की कहानी में छेद है। फिलहाल पुलिस इस चोरी में और भी लोगों का हाथ होने की छानबीन कर रही है।

Sunday, 5 January 2014

DOCTORS world by wearing warm clothes

वाराणसी। जाहिर है कि यह सब कुछ प्रतीकात्मक ही है मगर जब भगवान को गर्म कपड़े पहना दिए जाएं तो समाज के लिए संदेश साफ है-संभल जाओ, जाड़ा पड़ रहा है। 

लोहटिया स्थित बड़ा गणेश मंदिर के पास ही स्थित है सीताराम मंदिर। स्थापित हैं सभी भाइयों, माता जानकी व बजरंग बली के साथ प्रभु श्रीराम की मूर्तियां। थरथरा देने वाले जाड़ा को ध्यान में रखते हुए अब जगत के पालनहार को भी गर्म कपड़े पहना दिए गए हैं। माता सीता को जहां ऊनी स्कार्फ बांधा गया है वहीं प्रभु राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न व हनुमान जी को पहनाई गई हैं ऊनी टोपियां।

 इसके अलावा सभी प्रतीक प्रतिमाओं को जरी के मोटे कपड़े व स्वेटर पहनाए गए हैं। रंग बिरंगे स्वेटरों, टोपियों व स्कार्फ में सजे राम-सीता को देख भक्तों को भी जाड़े की ताकत का अहसास होने लगता है। रविवार की अलसाई सुबह में रह रहकर पानी की रिमझिम फुहार लोगों को बिस्तर न छोडऩे के लिए मजबूर कर रही थी। धूप और बदली के बीच भगवान भाष्कर का सदाबहार खेल जारी था। हल्की रिमझिम के बीच चल रही मंद वायु ने लोगों को चपंत जाड़े का भरपूर मजा दिया हालांकि यह आम आदमी के लिए मुसीबत ही है। 

करीब एक सप्ताह से सात से आठ डिग्री के न्यूनतम तापमान के बीच थिरक रहे पारे ने अल सुबह उठकर काम करने को विवश गृहणियों को खासा परेशान किया है। छोटे बच्चों के स्कूल तो बंद हैं लिहाजा राहत की कुछ गुंजाइश है मगर बड़ों का क्या किया जाए जिन्हें दफ्तर, प्रतिष्ठान, कारोबार या कि फिर कालेज जाना ही जाना है। हालांकि रविवार होने से राहत जरूर रही। सामान्य चल रहे परिवहन सिस्टम की वजह साफ है। आसमान कदरन साफ रहने से ओस, हल्की धुंध व ग्रामीण इलाकों में कुछ कोहरा तो जरूर है मगर ऐसा कुछ नहीं कि जिससे बस अथवा रेल सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो जाएं। रेल सेवाएं फिलहाल सामान्य हैं और ट्रेनें अधिकतम एक से डेढ़ घंटे विलंब पर आ जा रही हैं। 

हालांकि रविवार के मौसम को देखते हुए अंदाजा लगाया जा रहा है कि एक दो दिनों में अब कोहरे का प्रकोप बढ़ेगा जिससे परिवहन व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।