Sunday, 5 January 2014

DOCTORS world by wearing warm clothes

वाराणसी। जाहिर है कि यह सब कुछ प्रतीकात्मक ही है मगर जब भगवान को गर्म कपड़े पहना दिए जाएं तो समाज के लिए संदेश साफ है-संभल जाओ, जाड़ा पड़ रहा है। 

लोहटिया स्थित बड़ा गणेश मंदिर के पास ही स्थित है सीताराम मंदिर। स्थापित हैं सभी भाइयों, माता जानकी व बजरंग बली के साथ प्रभु श्रीराम की मूर्तियां। थरथरा देने वाले जाड़ा को ध्यान में रखते हुए अब जगत के पालनहार को भी गर्म कपड़े पहना दिए गए हैं। माता सीता को जहां ऊनी स्कार्फ बांधा गया है वहीं प्रभु राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न व हनुमान जी को पहनाई गई हैं ऊनी टोपियां।

 इसके अलावा सभी प्रतीक प्रतिमाओं को जरी के मोटे कपड़े व स्वेटर पहनाए गए हैं। रंग बिरंगे स्वेटरों, टोपियों व स्कार्फ में सजे राम-सीता को देख भक्तों को भी जाड़े की ताकत का अहसास होने लगता है। रविवार की अलसाई सुबह में रह रहकर पानी की रिमझिम फुहार लोगों को बिस्तर न छोडऩे के लिए मजबूर कर रही थी। धूप और बदली के बीच भगवान भाष्कर का सदाबहार खेल जारी था। हल्की रिमझिम के बीच चल रही मंद वायु ने लोगों को चपंत जाड़े का भरपूर मजा दिया हालांकि यह आम आदमी के लिए मुसीबत ही है। 

करीब एक सप्ताह से सात से आठ डिग्री के न्यूनतम तापमान के बीच थिरक रहे पारे ने अल सुबह उठकर काम करने को विवश गृहणियों को खासा परेशान किया है। छोटे बच्चों के स्कूल तो बंद हैं लिहाजा राहत की कुछ गुंजाइश है मगर बड़ों का क्या किया जाए जिन्हें दफ्तर, प्रतिष्ठान, कारोबार या कि फिर कालेज जाना ही जाना है। हालांकि रविवार होने से राहत जरूर रही। सामान्य चल रहे परिवहन सिस्टम की वजह साफ है। आसमान कदरन साफ रहने से ओस, हल्की धुंध व ग्रामीण इलाकों में कुछ कोहरा तो जरूर है मगर ऐसा कुछ नहीं कि जिससे बस अथवा रेल सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो जाएं। रेल सेवाएं फिलहाल सामान्य हैं और ट्रेनें अधिकतम एक से डेढ़ घंटे विलंब पर आ जा रही हैं। 

हालांकि रविवार के मौसम को देखते हुए अंदाजा लगाया जा रहा है कि एक दो दिनों में अब कोहरे का प्रकोप बढ़ेगा जिससे परिवहन व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

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