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Wednesday, 8 January 2014

Ex-players march to PMO, demand Bharat Ratna for Dhyan Chand

अभिषेक त्रिपाठी, नई दिल्ली। मेजर ध्यानचंद की हॉकी की कमाई खा रहे हॉकी इंडिया और वर्तमान हॉकी टीम के खिलाड़ियों ने इस खेल के पुरोधा को ही धोखा दे दिया। केंद्र सरकार की अनदेखी के बाद ध्यानचंद को देश का सबसे बड़ा सम्मान भारत रत्न दिलाने के लिए हॉकी सिटीजन ग्रुप के नेतृत्व में बुधवार को मार्च निकाला गया। मार्च निकला भी और अपने गंतव्य तक भी पहुंचा। 300 से ज्यादा बच्चों संग पूर्व ओलंपियनों ने सड़क पर उतरकर इस मांग को और पुख्ता किया। ध्यानचंद के बेटे और पूर्व ओलंपियन अशोक कुमार, जफर इकबाल, दिनेश चोपड़ा, राजेश चौहान, एचएस चिमनी और हरेंद्र सिंह सहित कई दिग्गजों ने बाराखंबा से लेकर जंतर मंतर तक प्रदर्शन किया और बाद में प्रधानमंत्री कार्यालय में ज्ञापन सौंपा लेकिन बाराखंभा से कुछ मीटर की दूरी पर स्थिति एक पांच सितारा होटल में मौजूद हॉकी इंडिया के पदाधिकारी, हॉकी टीम के कप्तान सरदार सिंह और अन्य खिलाड़ियों ने चंद कदम चलने की जहमत नहीं उठाई। हॉकी इंडिया के अध्यक्ष नरेंद्र बत्रा को अशोक कुमार ने एक दिन पहले ही फोन करके इस कार्यक्रम में आने का निमंत्रण भेजा था। इसके अलावा पूरी भारतीय टीम को भी निमंत्रण भेजा गया था लेकिन प्रबंधन और खिलाड़ी पांच सितारा होटल में चल रहे व‌र्ल्ड हॉकी लीग की ट्रॉफी के अनावरण कार्यक्रम में फोटो खिंचवाने में व्यस्त रहे। यह कार्यक्रम भी जरूरी था लेकिन ध्यानचंद के लिए हुए मार्च में इन लोगों के न आने पर दिग्गज नाराज नजर आए। मार्च में मौजूद जूनियर खिलाड़ियों ने कहा कि अगर हॉकी टीम के खिलाड़ी आते तो ध्यानचंद को भारत रत्न देने की मांग और बुलंद होती। जब इस बारे में सरदार सिंह से पूछा गया तो उन्होंने राजनीतिक जवाब देते हुए कहा कि ध्यानचंद को भारत रत्न मिलना चाहिए लेकिन वह यह जोड़ना नहीं भूले कि यह तो केंद्र सरकार का काम है। ध्यानचंद के लिए हुए मार्च पर न जाने के सवाल पर भी वह कुछ नहीं बोले। टीम और हॉकी इंडिया के प्रबंधन के नहीं आने पर अशोक कुमार ने कहा कि दद्दा की वजह से ही भारत ने हॉकी की ऊंचाइयां छुई। अब हॉकी इंडिया और उससे जुड़े लोगों को सोचना चाहिए कि वह क्या कर रहे हैं। हमने तो आशा की थी कि वह इस मार्च का हिस्सा बनेंगे। अब यह तो वही बता सकते हैं कि वो क्यों नहीं आए। 

ध्यानचंद ने भारतीय हॉकी टीम का हिस्सा रहते हुए ओलंपिक में तीन स्वर्ण पदक जीते। वह 1928 में एम्सटर्डम, 1932 में लॉस एंजिल्स और 1936 में बर्लिन ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम का हिस्सा थे। उनका 1979 में निधन हुआ। सरकार ने 2011 में संसद के 82 सदस्यों की मांग ठुकरा दी थी जिन्होंने भारत रत्न के लिए ध्यानचंद के नाम की सिफारिश की थी। जब खिलाड़ियों को भारत रत्न देने की मंजूरी गृह मंत्रालय ने दी तो इस कड़ी में सबसे आगे ध्यानचंद का ही नाम था लेकिन केंद्र सरकार ने सचिन को रिटायरमेंट का तोहफा देने के लिए दद्दा को दरकिनार कर दिया। 

Monday, 6 January 2014

Fans to rally for Bharat Ratan for Dhyan chand

अभिषेक त्रिपाठी, नई दिल्ली। हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद को भी उम्मीद नहीं होगी कि उनको सम्मान दिलाने के लिए खेल प्रेमियों को उनके ही देश में सड़क पर उतरना होगा। ध्यानचंद को भारत रत्न नहीं मिलने की कसक ने हॉकी खिलाड़ियों सहित सभी खेल प्रेमियों को मर्माहत कर दिया है। खेल मंत्रालय से मिले आश्वासन के बाद भी भारत के सबसे हुनरमंद खिलाड़ी को देश का सबसे बड़ा सम्मान नहीं मिला और इसके कारण उनके बेटे अशोक कुमार समेत सभी हॉकी प्रेमी खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। अभी तक सरकार से उम्मीद लगाए बैठे खेल प्रेमियों ने अब ध्यानचंद को सम्मान दिलाने के लिए सड़क पर उतरने का मन बना लिया है।

हॉकी सिटीजन ग्रुप की इस रैली में भारत के सबसे सफल हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद के बेटे अशोक कुमार सहित देश के वर्तमान और पूर्व हॉकी खिलाड़ियों के साथ प्रशिक्षकों और प्रबंधकों के भी शामिल होने की संभावना है। हॉकी इंडिया के अधिकारियों को भी इस रैली में बुलाया गया है। 14 घंटे तक चलने वाली यह रैली नई दिल्ली के बाराखंबा रोड से शुरू होकर टॉलस्टॉय मार्ग होते हुए जंतर-मंतर जाएगी। जंतर-मंतर में प्रदर्शन के बाद हॉकी खिलाड़ी प्रधानमंत्री कार्यालय में ज्ञापन सौंपेंगे।

इससे पहले पिछले साल 12 जुलाई को क्रिकेटर बिशन सिंह बेदी की अगुआई में एक दल ने खेल मंत्री जितेंद्र सिंह से मुलाकात की थी और सात दिन के अंदर ही खेल मंत्रालय ने उनके नाम की सिफारिश प्रधानमंत्री को कर दी। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भेजी गई इस सिफारिश का आगे अध्ययन किया गया लेकिन इस बीच सचिन तेंदुलकर को खेल रत्न दे दिया गया जबकि ध्यानचंद को भुला दिया गया। उस समय खेल मंत्री ने आश्वासन दिया था कि वह निजी तौर पर इस मामले पर नजर रखेंगे लेकिन इस महान खिलाड़ी को धोखा दिया गया। ध्यानचंद कहते थे कि उनका काम मैदान पर खेलना है। बाकी चीजें दूसरों को हवाले। आज उनके सम्मान के लिए बाकी लोग लड़ाई लड़ रहे हैं। अशोक कुमार ने कहा कि ध्यानचंद इस सम्मान के सबसे बड़े हकदार हैं और उन्हें ठगा जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर इसके बाद भी सरकार नहीं जागी तो हम आगे नई योजना बनाएंगे।

सर्वश्रेष्ठ हैं ध्यानचंद
नई दिल्ली । ध्यानचंद ने भारतीय हॉकी टीम का हिस्सा रहते हुए ओलंपिक में तीन स्वर्ण पदक जीते। वह 1928 में एम्सटर्डम, 1932 में लॉस एंजिल्स और 1936 में बर्लिन ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम का हिस्सा थे। उनका 1979 में निधन हुआ। सरकार ने 2011 में संसद के 82 सदस्यों की मांग ठुकरा दी थी जिन्होंने भारत रत्न के लिए ध्यानचंद के नाम की सिफारिश की थी। पहले खिलाड़ियों को भारत रत्न नहीं मिलता था। इस नियम में गृह मंत्रालय ने बदलाव किया। खेल मंत्रालय ने जनवरी 2012 में स्वयं ध्यानचंद के अलावा ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता निशानेबाज अभिनव बिंद्रा और पर्वतारोही तेनजिंग नोर्गे के नाम की सिफारिश की थी। इसके बाद मास्टर-ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर को भारत रत्न दे दिया गया।

Friday, 29 November 2013

Plea in HC to stop conferment of Bharat Ratna on Tendulkar

High Court
चेन्नई। क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर और प्रधानमंत्री की वैज्ञानिक सलाहकार परिषद के प्रमुख सीएन राव को भारत रत्न प्रदान करने से रोकने के लिए मद्रास हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि इस मामले में राष्ट्रपति की अधिसूचना का पालन नहीं किया गया है। राष्ट्रपति आगामी 26 जनवरी को राव और सचिन को भारत रत्न प्रदान करेंगे। खास बात यह है कि याचिका में वरिष्ठ वैज्ञानिक राव को भारत रत्न देने से रोकने की मांग तो की गई है लेकिन याचिकाकर्ता ने खुद स्वीकार किया है कि वह सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पाने के हकदार हैं।
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस आरके अग्रवाल और जस्टिस एम. सत्यनारायन की पीठ ने एक वकील की ओर से दायर इस याचिका पर सुनवाई 2 दिसंबर तक के लिए टाल दी है। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) पी विल्सन ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि भारत रत्न के बारे में केंद्र सरकार ने नियमों में बदलाव किए हैं। इनके तहत अब खिलाड़ी भी देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान पाने के हकदार है। इस पर पीठ ने एएसजी को सोमवार तक राष्ट्रपति की संशोधित अधिसूचना की प्रति पेश करने का निर्देश देते हुए सुनवाई स्थगित कर दी।

Wednesday, 20 November 2013

Sachin is Bharat Ratna but what about Dhyan Chand

Dhyan Chand

भुवनेश्वर। हॉकी इंडिया लीग (एचआइएल) ने भी ध्यानचंद को भारत रत्न देने की मांग में खुद को शामिल करते हुए मंगलवार को कहा कि सरकार को हॉकी के जादूगर को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित करना चाहिए। वहीं, पूर्व हॉकी खिलाड़ियों ने भी कहा है कि यह सम्मान उन्हें नहीं दिया जाना उस महान खिलाड़ी का अपमान है जिसने देश को गुलामी के दौर में खेल के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई थी।

एचआइएल के अध्यक्ष और हॉकी इंडिया के महासचिव नरेद्र बत्रा ने कहा, 'हम सचिन तेंदुलकर को भारत रत्न देने का स्वागत करते है। हमें खुशी होगी यदि भारत सरकार ध्यानचंद के नाम की घोषणा भी इस सर्वोच्च नागरिक सम्मान के लिए करे। एचआइएल का अध्यक्ष होने के नाते मैं जल्द ही खेल मंत्रालय के सामने यह मसला रखूंगा।' एचआइएल के उपाध्यक्ष प्रताप सत्पथी ने कहा, 'हम तेंदुलकर को भारत रत्न देने का विरोध नहीं कर रहे हैं, लेकिन यदि ध्यानचंद को यह सम्मान नहीं मिलता है तो यह अन्याय होगा।'

भारत रत्न पर मचे घमासान के बीच पूर्व ओलंपियनों ने कहा है कि चाहे सचिन को भारत रत्न के साथ 'खेल मंत्री' बना दो, लेकिन पहले यह पुरस्कार ध्यानचंद को दिया जाना चाहिए था जिन्होंने मुल्क के खाते में कई स्वर्ण पदक दिलाए हैं। पूर्व हॉकी कप्तान परगट सिंह ने कहा, 'ध्यानचंद का खेल के क्षेत्र में बड़ा योगदान है। इस महान खिलाड़ी ने उस वक्त मुल्क को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल के क्षेत्र में पहचान दिलायी थी, जब हमारा देश गुलाम था। इसलिए इस सम्मान पर पहला हक उनका बनता है।'

भारतीय टीम के पूर्व कोच राजिंदर सिंह ने कहा, 'मैं अन्य की बात नहीं जानता लेकिन मेजर (ध्यानचंद) को यह पुरस्कार अवश्य मिलना चाहिए था।' सुरेंद्र सोढी ने कहा, 'मेजर ध्यानचंद इस पुरस्कार के असली हकदार हैं और उन्हें भी यह पुरस्कार मिलना चाहिए।

Source- Cricket News in Hindi

Monday, 18 November 2013

Sachin dedicates Bharat Ratna to all mothers in the country

Sachin Tendulkar

मुंबई। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले चुके रिकाडरें के बादशाह सचिन तेंदुलकर ने एक बार फिर सबका दिल जीत लिया। मास्टर बल्लेबाज ने रविवार को अपना भारत रत्न देश की सभी मांओं को समर्पित किया। सचिन ने वानखेड़े स्टेडियम में अपना 200वां टेस्ट खेलकर भावुक विदाई लेने के 24 घंटे बाद अपने पहले संवाददाता सम्मेलन में कहा, 'मैंने शनिवार को कहा था कि भारत रत्न मेरी मां के लिए है क्योंकि उन्होंने मेरे लिए कई बलिदान किए हैं। बचपन में आप जीवन को समझ नहीं पाते, लेकिन बड़े होने पर इसका एहसास होता है। भारत रत्न सिर्फ मेरी मां के लिए नहीं है, बल्कि भारत की लाखों माताओं के लिए हैं जो अपने बच्चों के लिए कई कुर्बानियां देती हैं। इसीलिए मैं यह देश की उन तमाम माओं को समर्पित करना चाहूंगा।'
उन्होंने कहा, 'मैं काफी गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं। क्रिकेट में 24 साल तक मेरे योगदान के लिए यह पुरस्कार दिया गया है। मैंने हर बार बेहतर प्रदर्शन की कोशिश की और लोगों की सराहना से मुझे अगली बार और बेहतर करने की प्रेरणा मिली। यह पुरस्कार वास्तव में समूचे देश का है। मैं पूरे खेल जगत की ओर से यह सम्मान ले रहा हूं और मुझे उम्मीद है कि मेरे बाद बाकी खिलाड़ियों के लिए भी दरवाजे खुलेंगे।' उन्होंने भारत रत्न पाने वाले वैज्ञानिक प्रोफेसर सीएनआर राव को भी बधाई दी। 

सचिन ने कहा कि मेरे लिए सबसे अहम 24 साल खेलना रहा। इस दौरान अलग-अलग चुनौतियां आईं लेकिन परिवार, दोस्तों, खिलाड़ियों और कोचों का साथ हमेशा बना रहा। यह एक स्वप्निल सफर था। कल रात बैठकर जब मैं सोच रहा था तो विश्वास नहीं हुआ कि अब कभी क्रिकेट नहीं खेलना है। लेकिन फिर भी मुझे लगता है कि कहीं न कहीं खेल सकता हूं। अपने करियर को विराम देने का यह सबसे सही समय था। मुझे अपने करियर में कहीं कोई अफसोस नहीं है। मैंने सही वक्तपर क्रिकेट को अलविदा कहने का फैसला किया। मेरे लिए यह बहुत ही मजेदार रहा। क्रिकेट हमेशा मेरे लिए ऑक्सीजन की तरह रही। उन्होंने यह भी कहा कि वह टीम का हिस्सा हों या न हों, देश उनके लिए हमेशा सबसे पहले रहा है और आगे भी रहेगा। उन्होंने कहा कि वह देश की जीत के लिए कोशिश और दुआ करते रहेंगे।

मास्टर बल्लेबाज ने कहा कि मैंने अपने जीवन के 40 साल में से 30 साल केवल क्रिकेट खेली। यानि मेरे जीवन का 75 फीसदी हिस्सा क्रिकेट से ही जुड़ा रहा। मेरा क्रिकेट के साथ जुड़ाव कहीं न कहीं बना रहेगा। आगे मैं क्या करना चाहूंगा इसके लिए मुझे अभी समय लगेगा। रिटायर हुए अभी 24 घंटे ही हुए है। आराम करने के लिए 24 दिन तो मिलने ही चाहिए। उन्होंने कहा कि आज मैं रोजाना की तरह सुबह सवा छह बजे उठा और अपने काम शुरू किए। लेकिन तभी मुझे लगा कि मुझे मैच तो खेलने जाना ही नहीं है। आराम से अपने लिए चाय बनाई और अंजलि के साथ शानदार नाश्ता किया। यह एक रिलेक्स सुबह थी। मैंने अपने सभी शुभचिंतकों के एसएमएस के जवाब दिए।

उन्होंने कहा कि मेरे लिए 2011 में विश्व कप जीतने और कल का पल सबसे खास रहा। मुझे विश्व कप जीतने के लिए 22 साल तक लंबा इंतजार करना पड़ा। विश्व कप जीतना मेरे लिए खास पल रहे। कल का दिन भी बहुत विशेष था। मैं नहीं जानता कि मैं इसके लिए क्या कहूं। मैं इसके लिए सिर्फ बड़ा थैंक्यू कहना चाहता हूं।'

Thursday, 29 August 2013

1936 Berlin Final of Dhyan Chand Traced


Dhyan Chand

नई दिल्ली। ध्यानचंद, यह वह नाम है जिसे क्रिकेट की दीवानगी के बीच आज का युवा शायद ही पहचाने लेकिन अगर कोई ऐसा वीडियो मिल जाए जिससे देश भर के लोगों को यह दिखाया जा सके कि आखिर ध्यानचंद (Major Dhyan Chand) में क्या खूबी थी और क्यों दुनिया भर की हॉकी टीमें इस वन मैन आर्मी से कांपती थीं, तब शायद यह लोगों के जहन में बिठाया जा सके कि सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) से आगे भी एक दुनिया है। अब यह सपना सच हो सकता है क्योंकि खबरों के मुताबिक जर्मनी में मौजूद एक ऐसा दुर्लभ वीडियो मिल गया जिसमें 1936 बर्लिन ओलंपिक में दद्दा (ध्यानचंद) के वह कारनामे शामिल हैं इस पीढ़ी ने कभी देखा तक नहीं।

एक खबर के मुताबिक ध्यानचंद के पुत्र अशोक ध्यानचंद को ध्यानचंद पर रिसर्च करने वाले हेमंत दुबे ने एक ऐसे वीडियो की खोज कर ली है जिसमें बर्लिन ओलंपिक फाइनल में भारत की ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। उस फाइनल मैच में उस समय 31 वर्षीय ध्यानचंद ने गोल की हैट्रिक लगाई थी, जिसने जर्मनी की हार तय कर दी थी। उनके इस शानदार प्रदर्शन से मैदान पर मौजूद मेजबान देश के तानाशाह एडॉल्फ हिटलरभी सन्न रह गए थे और उन्होंने भी ध्यानचंद की जमकर तारीफ की थी। खबरों के मुताबिक उसी मैच के दौरान बर्लिन के मशहूर नाजी फिल्म निर्माता लेनी राइफेंसटाल ने इस मैच के ज्यादातर अंश अपने कैमरे में कैद कर लिए थे। एक अंग्रेजी अखबार को दिए गए इंटरव्यू में ध्यानचंद के पुत्र अशोक ध्यानचंद ने बताया है कि उन्होंने और हेमंत दुबे ने इस मामले में जर्मन कंसलेट के जरिए सीधे जर्मनी में राइफेंसटाल के परिवार से संपर्क साधा है और उन्हें उम्मीद है कि अगर सरकार ने साथ दिया तो वह उन टेप को भारत लाने में सफल रहेंगे।

Original Found Here.. http://www.jagran.com/news/sports-1936-berlin-final-of-dhyan-chand-traced-10681759.html