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Tuesday, 5 November 2013

ISRO Family Divide on Mars Mission

Mission Mars

नई दिल्ली,जागरण ब्यूरो। मंगलयान की सफल लांचिंग पर पूरा देश इसरो के वैज्ञानिकों को बधाई दे रहा है। लेकिन, कामयाबी की खुशियों के बीच ही इसरो कुनबे में इस मिशन के औचित्य को लेकर मतभेद की दरारें भी नजर आई।
इसरो के पूर्व प्रमुख जी माधवन नायर ने मंगल अभियान के नतीजों पर फिर संशय के सवाल उठाए हैं। मंगल अभियान की लांचिंग के बाद दी प्रतिक्रिया में नायर ने तकनीकी उपलब्धि पर अपने साथी रहे वैज्ञानिकों को बधाई दी, साथ ही इस अभियान से बहुत अधिक अपेक्षा नहीं करने की बात भी कही।
नायर का कहना है, 'मंगलयान लंबी दूरी की रॉकेट यात्रा तकनीक के अतिरिक्त खोज की कोई नई तकनीकी उपलब्धि हासिल करेगा, ऐसी उम्मीद बेमानी होगी। नायर के अनुसार इस अभियान से मंगल ग्रह पर जीवन की मौजूदगी का पता लगाने की उम्मीद बेमानी होगी। वहीं, यदि इससे ग्रह पर मीथेन गैस की मौजूदगी के आंकड़े जमा किए जाएंगे तो यह काम नासा पहले ही कर चुका है और जानकारियां इंटरनेट पर उपलब्ध हैं। डॉ के कस्तूरीरंगन और यूआर आर राव जैसे पूर्व इसरो प्रमुखों ने हालांकि मंगलयान की आलोचना को खारिज करते हुए अभियान की लांचिंग को बड़ी कामयाबी करार दिया है।
यह बात और है कि इसरो प्रमुख रहे नायर के कार्यकाल में ही मंगल अभियान की शुरुआती तैयारियां हुई थीं। लेकिन, निजी कंपनी देवास और इसरो के अधीन एंटिक्स के बीच विवादास्पद वाणिज्यिक करार के कारण उनकी काफी किरकिरी हुई थी।

Source- News in Hindi

India Launches Maiden Mars Missionm, Placed into Earth Orbit


Mission Mars

श्रीहरिकोटा। मंगलवार का दिन भारत के लिए बेहद मंगलकारी रहा। इस दिन दोपहर बाद दो बजकर अड़तीस मिनट पर देश की तकनीकी क्षमता का डंका बजाने वाला मंगल यान सौर मंडल के सबसे खूबसूरत लाल ग्रह यानी मंगल से मिलन के ऐतिहासिक सफर पर रवाना हो गया। बतौर सारथी प्रक्षेपण रॉकेट पीएसएलवी-सी25 ने धरती छोड़ने के लगभग 44 मिनट में पहली चुनौती पार करते हुए यान को सफलतापूर्वक पृथ्वी की कक्षा में पहुंचा दिया।
अब इस कक्षा में रहते हुए छोटी कार की आकार वाला सुनहरे रंग का यह यान लगातार 25 दिनों तक धरती की परिक्रमा करता रहेगा। फिर पहली दिसंबर आधी रात के बाद 12.42 बजे मार्स ऑर्बिटर मिशन (एमओएम) नाम से मशहूर यह यान पृथ्वी की कक्षा को छोड़ आगे की अग्नि परीक्षा के लिए खुद निकल जाएगा। इस दौरान एमओएम करीब तीन सौ दिनों यानी तकरीबन दस महीने तक गहरे अंतरिक्ष में गोता लगाता हुआ लाल ग्रह की तरफ अग्रसर रहेगा। अगले साल 24 सितंबर को इसके मंगल की कक्षा में स्थापित होने की संभावना है।
वैसे तो 1350 किलोग्राम वजनी मंगल यान के प्रक्षेपण को लेकर आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र पर सुबह से ही गहमागहमी थी। 2.38 बजे अपनी पीठ पर यान को लिए प्रक्षेपण रॉकेट पीएसएलवी-सी25 ने जैसे ही आग और धुएं के भारी गुबार को नीचे छोड़ते हुए कर्णभेदी दहाड़ के साथ आसमान चीरते हुए पृथ्वी की कक्षा की ओर रुख किया।
इसरो के वैज्ञानिकों और अन्य विशेषज्ञों ने ताली बजाकर सफल उड़ान शुरू होने का स्वागत किया। लेकिन यान को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित होने की चुनौती से अभी गुजरना था, लिहाजा चेहरों पर चिंता की लकीरें भी साफ देखी जा सकती थी। प्रक्षेपण के करीब 44 मिनट बाद यानी 3.22 बजे जब रॉकेट द्वारा यान को दक्षिणी अमेरिका के ऊपर सफलतापूर्वक पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करने की इसरो प्रमुख के राधाकृष्णन ने घोषणा की तो सभी के चेहरे खुशी से खिल उठे।
राधाकृष्णन ने कहा कि 450 करोड़ रुपये की लागत वाले मंगल अभियान का पहला चरण सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।' इसरो के इस अभियान के दौरान खास जोर लाल ग्रह के वातावरण में मीथेन गैस की मौजूदगी का पता लगाना होगा। मीथेन जीवन की संभावना के लिए एक जरूरी रसायन है। इस गैस की खोज के लिए यान के साथ भेजे गए पांच पेलोड (उपकरण) में एक मीथेन सेंसर भी शामिल है। 

राधाकृष्णन ने बताया कि यह प्रक्षेपण वाहन पीएसएलवी की 25वीं सफल उड़ान थी। उन्होंने माना कि यह बेहद नया और जटिल मिशन है, जिसमें यह सुनिश्चित किया गया है कि बहुत कम ऊर्जा की खपत से हम यान को पृथ्वी की कक्षा से मंगल की कक्षा में स्थापित करने में कामयाब होंगे। गहरे अंतरिक्ष से मंगल की कक्षा तक का सफर वाकई बेहद चुनौतीपूर्ण है। बकौल इसरो प्रमुख, 'अगर सब कुछ ठीक रहा तो भारत मंगल की परिक्रमा करने वाला दुनिया का चौथा देश बन जाएगा।

अमेरिका, रूस और यूरोप के यान पहले से ही लाल ग्रह का चक्कर काट रहे हैं। इस मामले में चीन और जापान के अभियान को असफलता हाथ लगी है।' मंगल के लिए अभी तक 51 अभियान हुए हैं। इसमें केवल 21 को ही सफलता हाथ लगी है।

प्रशांत महासागर में तैनात पोत से उतारी गई तस्वीरें
मंगल यान के पृथ्वी की कक्षा में स्थापना की तस्वीरों को उतारने के लिए इसरो ने खास इंतजाम कर रखा था। इसके लिए दक्षिण प्रशांत महासागर में शिपिंग कारपोरेशन ऑफ इंडिया के दो पोत नालंदा और यमुना को खास तौर पर तैनात किया गया।

दोनों पोत पर इसरो ने अपना संचार टर्मिनल स्थापित कर रखा था। जैसे ही रॉकेट पीएसएलवी-सी25 दक्षिण अमेरिका के ऊपर मंगलयान को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित कर अलग हुआ, उस क्षण की तस्वीरों को टर्मिनल के शक्तिशाली कैमरों ने उतारकर मिशन कंट्रोल रूम भेज दिया। 

'हमने करोड़ों किमी तक जाने वाले एक रॉकेट पर 450 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इस पर क्यों शोर मचाया जा रहा है, जबकि दिवाली के दौरान पटाखेबाजी पर पांच हजार करोड़ खर्च किए जा चुके हैं।'
-प्रो. यूआर राव, पूर्व प्रमुख इसरो

Source- News in Hindi

Monday, 4 November 2013

Mars Orbiter Mission Launch Today at 2.38 pm

Mission Mars

चेन्नई। भारत का मंगल अभियान अपना लक्ष्य हासिल करने के लिए पूरी तरह तैयार हो चुका है। इसे हम भारतीय अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का मील का पत्थर भी कह सकते हैं।
भारतीय अंतरिक्ष संगठन (इसरो) के एक प्रवक्ता ने बताया, प्रक्षेपण के लिए रविवार को शुरू हुई उल्टी गिनती लगातार जारी है। यह काउंटडाउन मंगलवार दोपहर दो बजकर 38 मिनट पर खत्म होगा। इस वक्त पर भारत मंगलग्रह के लिए अपना अंतरिक्ष यान लॉन्च करेगा। चीजें सामान्य हैं। हम तैयारियों के काम में व्यस्त हैं। रॉकेट की लंबाई 44.4 मीटर है और इसे स्पेसपोर्ट के फ‌र्स्ट लॉन्च पैड पर लगाया गया है। यहां 76 मीटर लंबा एक मोबाइल सर्विस टावर लगा है, जो 230 किलोमीटर प्रति घंटा की गति वाली हवा में भी टिका रह सकता है। इस तरह यह चक्रवात की स्थिति से निपटने में सक्षम है। लॉन्च से पहले इसे हटा लिया जाएगा।
पीएसएलवी 25 मंगलवार को यहां से 100 किलोमीटर दूर स्पेसपोर्ट से दोपहर 2 बजकर 38 मिनट पर प्रक्षेपित किया जाएगा। इसरो सूत्रों ने कहा कि इस व्हीकल की स्थिति का लगातार निगरानी रखने वाले पोर्ट ब्लेयर, बेंगलूर के पास बाएलालू और ब्रूनेई के ट्रैकिंग स्टेशनों को अलर्ट पर रखा गया है। वहीं समुद्री टर्मिनलों (भारतीय जहाजरानी निगम के जहाजों) एससीआई नालंदा और एससीआई यमुना ने दक्षिणी प्रशांत महासागर में अपनी जगह ले ली है। ऐसा माना जा रहा है कि उड़ान के बाद रॉकेट को पृथ्वी की कक्षा में उपग्रह छोड़ने में 40 मिनट से ज्यादा समय लगेगा।
मंगलग्रह पर जाने वाला यान 1 दिसंबर को ग्रह के लिए अपनी यात्रा शुरू करने से पहले 20 से 25 दिन तक पृथ्वी के चारों ओर घूमेगा और 24 सितंबर 2014 को मंगल की कक्षा में पहुंच जाएगा। यदि 450 करोड़ की लागत वाला यह मंगल अभियान सफल रहता है तो मंगल पर अभियान भेजने वाली इसरो विश्व की चौथी अंतरिक्ष स्पेस एजेंसी होगी।

Source- News in Hindi

ISRO Chief Seeks Divine Blessings for MARS Mission


ISRO chief

तिरुपति। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष के राधाकृष्णन ने बहुप्रतीक्षित मंगल अभियान की सफलता के लिए सोमवार सुबह मशहूर तिरुपति मंदिर में मत्था टेका। 

पत्नी के साथ मंदिर पहुंचे राधाकृष्णन ने पीएसएलवी-सी25 रॉकेट की सफल लांचिंग के लिए दुआ मांगी। इसरो प्रमुख हर अभियान से पहले प्रक्षेपित किए जाने वाले सेटेलाइट की प्रतिकृति को कुछ देर के लिए तिरुपति मंदिर में भगवान वेंकटेश्वर के चरणों में रखकर पूजा-अर्चना करते हैं। अभियान की सफलता के बाद भी वह मंदिर जाते हैं।

Source- News in Hindi

Success of Mars Mission Give India to Access other Planets

Mars Mission

बेंगलूर, एजेंसियां। देश की महत्वाकांक्षी मंगल मिशन परियोजना को लेकर अंतरिक्ष विज्ञानी बेहद आशान्वित हैं। इसरो के पूर्व प्रमुख के कस्तूरीरंगन का तो यहां तक मानना है कि इस अभियान की सफलता से न केवल मंगल के बारे में हमारी समझदारी और विकसित होगी बल्कि सौर मंडल के अन्य ग्रहों तक हमारी खोज का दायरा भी बढ़ेगा। 

उनके अनुसार इससे अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में देश की नई वैश्रि्वक पहचान बनेगी। दुनिया हमारा लोहा मानेगी। वहीं इसरो के स्पेस अप्लीकेशन सेंटर के निदेशक एएस किरण कुमार कहते हैं, 'मार्स ऑर्बिटर को हमने जिस तकनीक से तैयार किया है। उसका इस्तेमाल कर भविष्य में हम कम लागत में उन्नत किस्म के उपग्रहों का निर्माण करने में सक्षम होंगे।'

मंगल मिशन के प्रक्षेपण की पूर्व संध्या पर कस्तूरीरंगन बेंगलूर में और किरण कुमार चेन्नई में पत्रकारों से बात कर रहे थे। कस्तूरीरंगन का कहना था, 'अभियान का मकसद भारत की तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन करना है। दुनिया को यह दिखाना है कि हम भी लाल ग्रह पर यान भेज सकते हैं और वहां पर जीवन की संभावना तलाशने की दिशा में उपयोगी परीक्षण कर सकते हैं।' 

ध्यान रहे कि मार्स रोवर के आंकलन के आधार पर अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा की ओर से यह बयान जारी किया जा चुका है कि मंगल ग्रह पर जीवन की कोई भी संभावना नहीं है। उन्होंने यान के साथ भेजे जा रहे पांच उपकरणों में से एक मीथेन सेंसर के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उनका कहना था कि इस सेंसर की मदद से लाल ग्रह के विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों की स्कैनिंग करने में तो आसानी होगी ही साथ ही जीवन की संभावना के लिए जरूरी मीथेन गैस की मौजूदगी का पता भी चल सकता है। जबकि किरण कुमार ने बताया कि मार्स ऑर्बिटर बेहद उम्दा तकनीक से निर्मित किया गया है। यह किसी भी गड़बड़ी से खुद निपटने वाली तकनीक से लैस है। यह खराबी का खुद पता लगाएगा और जमीन से किसी भी निर्देश के मिले बगैर उसे दुरुस्त करने में सक्षम होगा। 

उनके अनुसार मिशन के दौरान बहुत लंबे समय तक सूर्य पृथ्वी और मंगल के बीच में होगा। इस अवधि में वहां पर गहरा अंधेरा छाया रहेगा। ऐसे में यान पूर्व अर्जित ऊर्जा के प्रसंस्करण के जरिये संचालित रहेगा। 

Source- News in Hindi

This is India Mars Mission


Mars Mission

लाल ग्रह यानी मंगल पर भारतीय अभियान का काउंटडाउन शुरू हो चुका है। इंतजार की घड़ियां खत्म होने को हैं। सब कुछ ठीक रहा तो मंगलवार को मंगल ही मंगल होगा। 121 करोड़ भारतीयों की उम्मीदों वाला मंगलयान आज दोपहर दो बजकर 38 मिनट पर छोड़ा जाएगा। अभियान पर पूरी दुनिया की टकटकी लगी है। अगर यह अभियान सफल रहा तो मंगल फतह की होड़ में हम चीन को पीछे छोड़ देंगे। भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो यह विजयगाथा लिखने वाली दुनिया की चौथी अंतरिक्ष एजेंसी हो जाएगी। अभियान

पृथ्वी से सर्वाधिक समानता वाले ग्रह मंगल पर पहला भारतीय आर्बिटर मिशन। पीएसएलवी-सी25 रॉकेट द्वारा मंगल की कक्षा में उपग्रह स्थापित किया जाएगा

प्रक्षेपण
मंगलवार को दोपहर दो बजकर 38 मिनट पर श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से

प्रसारण
लोगों को इस ऐतिहासिक उपलब्धि का साक्षी बनाने के लिए दूरदर्शन पर दो बजे से लाइव प्रसारण

उपलब्धि
अभियान की सफलता के बाद मंगल फतह करने वाली इसरो दुनिया की चौथी अंतरिक्ष एजेंसी हो जाएगी। इससे पहले यूरोपियन कांसोर्टियम की यूरोपियन स्पेस एजेंसी, अमेरिका की नासा और रूस की रोस्कॉस्मॉस ही लाल ग्रह पर अभियान भेजने में कामयाब रही हैं।

उद्देश्य
इस उपग्रह के साथ पांच स्वदेशी उपकरण भेजे जा रहे हैं। ये यंत्र मंगल पर मीथेन, ड्यूटीरियम, जीवन की संभावना और पानी की उपलब्धता के साथ अन्य कई अहम चीजों की पड़ताल करेंगे।

निरीक्षण
प्रक्षेपण के बाद उपग्रह पर नजर रखने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। पोर्टब्लेयर, बेंगलूर के नजदीक बाईलालू और ब्रूनेई में स्थापित ट्रैकिंग केंद्र अलर्ट मोड पर हैं। इसके अलावा समुद्र से इस पर निगाह रखने के लिए शिपिंग कारपोरेशन ऑफ इंडिया की दो जलपोत एससीआइ नालंदा और एससीआइ यमुना दक्षिण प्रशांत महासागर में फिजी तट के निकट तैनात हैं।

खास बातें:
25 दिन:
प्रक्षेपण के 40 मिनट बाद पीएसएलवी-सी 25 रॉकेट उपग्रह को धरती की कक्षा में स्थापित कर देगा। यहां पर उपग्रह अगले 25 दिनों यानी एक दिसंबर तक पृथ्वी की कक्षा में परिक्त्रमा करता रहेगा।

300 दिन: इसके बाद उपग्रह मंगल के लिए रवाना होगा। अनुमान है कि अगले नौ महीने या 300 दिन बाद 24 सितंबर, 2014 को यह मंगल ग्रह पर पहुंचेगा।

51 विभिन्न देशों द्वारा अब तक भेजे गए कुल मंगल अभियान
40 करोड़ किमी: मंगल ग्रह की कक्षा तक पहुंचने में उपग्रह द्वारा तय की गई दूरी
21 दुनिया के सभी देशों के सफल मंगल अभियान

Source- News in Hindi