Tuesday, 5 November 2013

India Launches Maiden Mars Missionm, Placed into Earth Orbit


Mission Mars

श्रीहरिकोटा। मंगलवार का दिन भारत के लिए बेहद मंगलकारी रहा। इस दिन दोपहर बाद दो बजकर अड़तीस मिनट पर देश की तकनीकी क्षमता का डंका बजाने वाला मंगल यान सौर मंडल के सबसे खूबसूरत लाल ग्रह यानी मंगल से मिलन के ऐतिहासिक सफर पर रवाना हो गया। बतौर सारथी प्रक्षेपण रॉकेट पीएसएलवी-सी25 ने धरती छोड़ने के लगभग 44 मिनट में पहली चुनौती पार करते हुए यान को सफलतापूर्वक पृथ्वी की कक्षा में पहुंचा दिया।
अब इस कक्षा में रहते हुए छोटी कार की आकार वाला सुनहरे रंग का यह यान लगातार 25 दिनों तक धरती की परिक्रमा करता रहेगा। फिर पहली दिसंबर आधी रात के बाद 12.42 बजे मार्स ऑर्बिटर मिशन (एमओएम) नाम से मशहूर यह यान पृथ्वी की कक्षा को छोड़ आगे की अग्नि परीक्षा के लिए खुद निकल जाएगा। इस दौरान एमओएम करीब तीन सौ दिनों यानी तकरीबन दस महीने तक गहरे अंतरिक्ष में गोता लगाता हुआ लाल ग्रह की तरफ अग्रसर रहेगा। अगले साल 24 सितंबर को इसके मंगल की कक्षा में स्थापित होने की संभावना है।
वैसे तो 1350 किलोग्राम वजनी मंगल यान के प्रक्षेपण को लेकर आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र पर सुबह से ही गहमागहमी थी। 2.38 बजे अपनी पीठ पर यान को लिए प्रक्षेपण रॉकेट पीएसएलवी-सी25 ने जैसे ही आग और धुएं के भारी गुबार को नीचे छोड़ते हुए कर्णभेदी दहाड़ के साथ आसमान चीरते हुए पृथ्वी की कक्षा की ओर रुख किया।
इसरो के वैज्ञानिकों और अन्य विशेषज्ञों ने ताली बजाकर सफल उड़ान शुरू होने का स्वागत किया। लेकिन यान को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित होने की चुनौती से अभी गुजरना था, लिहाजा चेहरों पर चिंता की लकीरें भी साफ देखी जा सकती थी। प्रक्षेपण के करीब 44 मिनट बाद यानी 3.22 बजे जब रॉकेट द्वारा यान को दक्षिणी अमेरिका के ऊपर सफलतापूर्वक पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करने की इसरो प्रमुख के राधाकृष्णन ने घोषणा की तो सभी के चेहरे खुशी से खिल उठे।
राधाकृष्णन ने कहा कि 450 करोड़ रुपये की लागत वाले मंगल अभियान का पहला चरण सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।' इसरो के इस अभियान के दौरान खास जोर लाल ग्रह के वातावरण में मीथेन गैस की मौजूदगी का पता लगाना होगा। मीथेन जीवन की संभावना के लिए एक जरूरी रसायन है। इस गैस की खोज के लिए यान के साथ भेजे गए पांच पेलोड (उपकरण) में एक मीथेन सेंसर भी शामिल है। 

राधाकृष्णन ने बताया कि यह प्रक्षेपण वाहन पीएसएलवी की 25वीं सफल उड़ान थी। उन्होंने माना कि यह बेहद नया और जटिल मिशन है, जिसमें यह सुनिश्चित किया गया है कि बहुत कम ऊर्जा की खपत से हम यान को पृथ्वी की कक्षा से मंगल की कक्षा में स्थापित करने में कामयाब होंगे। गहरे अंतरिक्ष से मंगल की कक्षा तक का सफर वाकई बेहद चुनौतीपूर्ण है। बकौल इसरो प्रमुख, 'अगर सब कुछ ठीक रहा तो भारत मंगल की परिक्रमा करने वाला दुनिया का चौथा देश बन जाएगा।

अमेरिका, रूस और यूरोप के यान पहले से ही लाल ग्रह का चक्कर काट रहे हैं। इस मामले में चीन और जापान के अभियान को असफलता हाथ लगी है।' मंगल के लिए अभी तक 51 अभियान हुए हैं। इसमें केवल 21 को ही सफलता हाथ लगी है।

प्रशांत महासागर में तैनात पोत से उतारी गई तस्वीरें
मंगल यान के पृथ्वी की कक्षा में स्थापना की तस्वीरों को उतारने के लिए इसरो ने खास इंतजाम कर रखा था। इसके लिए दक्षिण प्रशांत महासागर में शिपिंग कारपोरेशन ऑफ इंडिया के दो पोत नालंदा और यमुना को खास तौर पर तैनात किया गया।

दोनों पोत पर इसरो ने अपना संचार टर्मिनल स्थापित कर रखा था। जैसे ही रॉकेट पीएसएलवी-सी25 दक्षिण अमेरिका के ऊपर मंगलयान को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित कर अलग हुआ, उस क्षण की तस्वीरों को टर्मिनल के शक्तिशाली कैमरों ने उतारकर मिशन कंट्रोल रूम भेज दिया। 

'हमने करोड़ों किमी तक जाने वाले एक रॉकेट पर 450 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इस पर क्यों शोर मचाया जा रहा है, जबकि दिवाली के दौरान पटाखेबाजी पर पांच हजार करोड़ खर्च किए जा चुके हैं।'
-प्रो. यूआर राव, पूर्व प्रमुख इसरो

Source- News in Hindi

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