Monday, 4 November 2013

Success of Mars Mission Give India to Access other Planets

Mars Mission

बेंगलूर, एजेंसियां। देश की महत्वाकांक्षी मंगल मिशन परियोजना को लेकर अंतरिक्ष विज्ञानी बेहद आशान्वित हैं। इसरो के पूर्व प्रमुख के कस्तूरीरंगन का तो यहां तक मानना है कि इस अभियान की सफलता से न केवल मंगल के बारे में हमारी समझदारी और विकसित होगी बल्कि सौर मंडल के अन्य ग्रहों तक हमारी खोज का दायरा भी बढ़ेगा। 

उनके अनुसार इससे अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में देश की नई वैश्रि्वक पहचान बनेगी। दुनिया हमारा लोहा मानेगी। वहीं इसरो के स्पेस अप्लीकेशन सेंटर के निदेशक एएस किरण कुमार कहते हैं, 'मार्स ऑर्बिटर को हमने जिस तकनीक से तैयार किया है। उसका इस्तेमाल कर भविष्य में हम कम लागत में उन्नत किस्म के उपग्रहों का निर्माण करने में सक्षम होंगे।'

मंगल मिशन के प्रक्षेपण की पूर्व संध्या पर कस्तूरीरंगन बेंगलूर में और किरण कुमार चेन्नई में पत्रकारों से बात कर रहे थे। कस्तूरीरंगन का कहना था, 'अभियान का मकसद भारत की तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन करना है। दुनिया को यह दिखाना है कि हम भी लाल ग्रह पर यान भेज सकते हैं और वहां पर जीवन की संभावना तलाशने की दिशा में उपयोगी परीक्षण कर सकते हैं।' 

ध्यान रहे कि मार्स रोवर के आंकलन के आधार पर अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा की ओर से यह बयान जारी किया जा चुका है कि मंगल ग्रह पर जीवन की कोई भी संभावना नहीं है। उन्होंने यान के साथ भेजे जा रहे पांच उपकरणों में से एक मीथेन सेंसर के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उनका कहना था कि इस सेंसर की मदद से लाल ग्रह के विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों की स्कैनिंग करने में तो आसानी होगी ही साथ ही जीवन की संभावना के लिए जरूरी मीथेन गैस की मौजूदगी का पता भी चल सकता है। जबकि किरण कुमार ने बताया कि मार्स ऑर्बिटर बेहद उम्दा तकनीक से निर्मित किया गया है। यह किसी भी गड़बड़ी से खुद निपटने वाली तकनीक से लैस है। यह खराबी का खुद पता लगाएगा और जमीन से किसी भी निर्देश के मिले बगैर उसे दुरुस्त करने में सक्षम होगा। 

उनके अनुसार मिशन के दौरान बहुत लंबे समय तक सूर्य पृथ्वी और मंगल के बीच में होगा। इस अवधि में वहां पर गहरा अंधेरा छाया रहेगा। ऐसे में यान पूर्व अर्जित ऊर्जा के प्रसंस्करण के जरिये संचालित रहेगा। 

Source- News in Hindi

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