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Tuesday, 17 June 2014

177 terrorists killed in North Waziristan: Pakistan Army

Pakistan military on Monday said that 177 "terrorists have been killed" in major military operation against the local and foreign militant groups in North Waziristan tribal region over the past two days.

"Operation in North Wazirastan Agency is progressing as per plan. No operation in civil populated areas has been started so far," the army said, adding North Wazirastan Agency has been isolated by deploying troops along its border with neighboring agencies and other tribal regions to block any movement of terrorists in and out of the Agency.

Releasing update about the casualties and other losses of the militants, the military said six hardcore terrorist hideouts were destroyed by jet aircraft early Monday in Shawal area of North Wazirastan Agency, bordering Afghanistan.

"In these precise strikes, 27 terrorists were killed. There is no civil population in the area," a military spokesman said in a statement...


From mid-day News

Monday, 13 January 2014

Shinde shielded businessman close to Dawood

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। पिछले महीने भाजपा में शामिल होने वाले पूर्व गृह सचिव आरके सिंह ने गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे पर सनसनीखेज आरोप लगाया है। सिंह के मुताबिक शिंदे ने दिल्ली पुलिस को अंडरव‌र्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के करीबी माने जाने वाले मुंबई के उद्योगपति से पूछताछ करने से रोक दिया था। दिल्ली पुलिस आइपीएल स्पॉट फिक्सिंग मामले में इस उद्योगपति से पूछताछ करना चाहती थी। यही नहीं, उन्होंने शिंदे के करीबियों पर पैसे लेकर दिल्ली पुलिस में नियुक्तियों की सिफारिश करने का भी आरोप लगाया है। गृह सचिव रहते हुए सिंह ने हालांकि ऐसी कोई शिकायत नहीं की थी। 

कुछ चैनलों को दिए साक्षात्कार में आरके सिंह ने कहा कि दिल्ली पुलिस आइपीएल स्पॉट फिक्िसग मामले में मुंबई के एक उद्योगपति के दाऊद से संबंधों के बारे में पूछताछ करना चाहती थी। लेकिन, शिंदे ने दिल्ली पुलिस को ऐसा करने से रोक दिया। यह उद्योगपति पहले से 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले का आरोपी है और सीबीआइ उसे गिरफ्तार भी कर चुकी है। दिल्ली पुलिस ने अपनी चार्जशीट में स्पॉट फिक्सिंग के लिए दाऊद को भी आरोपी बनाया है और इस सिलसिले में उसने सटोरियों से दाऊद की बातचीत के टेप भी पेश किए हैं।

पूर्व गृह सचिव ने इसके अलावा शिंदे के करीबियों पर दिल्ली पुलिस के थाने स्तर की पोस्टिंग में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया है। उनके अनुसार शिंदे के कार्यालय से दिल्ली पुलिस को थानेदारों की नियुक्ति के लिए लगातार चिट भेजी जाती थीं। उनके लिए इसके एवज में पैसे लिए जाने की चर्चा भी सुनी गई थी। 

सिंह ने शिंदे के दाऊद को भारत लाने के दावे की भी हवा निकाल दी है। शिंदे पिछले छह महीने में चार बार दाऊद के पाकिस्तान में छिपे होने और अमेरिका की मदद से जल्द भारत लाने का बयान दे चुके हैं। सिंह के अनुसार गृह मंत्री के साथ अमेरिका गए प्रतिनिधिमंडल में वे खुद भी शामिल थे, जिसमें एफबीआइ के साथ दाऊद के बारे में बातचीत हुई थी। उन्होंने कहा कि अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआइ ने दाऊद को भारत लाने में मदद का कोई भरोसा नहीं दिया था। 

पिछले महीने भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने के बाद सिंह गृह मंत्री के साथ अपने मतभेदों पर कई बार बोल चुके हैं। बीते शुक्रवार को मासिक प्रेसवार्ता के दौरान शिंदे ने भी सिंह के साथ मतभेदों को स्वीकार किया था। लेकिन, सिंह ने पहली बार शिंदे पर इतने गंभीर आरोप लगाए हैं।

Monday, 6 January 2014

Some Muzaffarnagar riot victims depose: Lashkar men came to recruit us

नई दिल्ली। आतंकी गुट लश्कर-ए-तैयबा मुजफ्फरनगर में हुए दंगों का फायदा अपने खतरनाक मंसूबों को अंजाम देने के लिए उठाना चाहता था और उसमें उसको आंशिक सफलता भी मिलने लगी थी, जब दंगा पीड़ित दो लड़के आतंकवाद की राह पर चलने को तैयार हो गए थे।
हरियाणा के मेवात से पकड़े गए लश्कर से संबंध रखने वाले दो लोगों से पुलिस पूछताछ के दौरान कई अन्य अहम जानकारियां भी सामने आई हैं। एक अंग्रेजी समाचार में दिल्ली पुलिस के सूत्रों के हवाले से प्रकाशित समाचार के अनुसार, आतंकी गुट लश्कर की नजर मुजफ्फरनगर के दंगा पीड़ितों पर थी। पकड़े गए लोगों ने अपने पाकिस्तान स्थित अपने आकाओं के कहने पर मुजफ्फरनगर और शामली के राहत शिविरों का दौरा कर दंगा पीड़ित कुछ युवकों से संपर्क साध, लश्कर में शामिल करने के लिए उनका ब्रेनवॉश करने की कोशिश की थी। उनकी साजिश भरी बातों के झांसे में आकर दो लड़के आतंकी गुट लश्कर में शामिल होने के लिए तैयार हो गए थे। स्पेशल सेल ने इन दोनों लड़कों की पहचान कर उन्हें ढूंढ निकाला। पुलिस ने इन दोनों लड़कों की गिरफ्तारी नहीं की है, क्योंकि वह इन्हें सरकारी गवाह बना अदालत में पेश कर सकती है।

सूत्रों के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने पिछले महीने दिसंबर में हरियाणा के मेवात क्षेत्र में आतंकियों के छिपे हुए होने की सूचना मिलने पर वहां छापेमारी की थी, हालांकि आतंकी वहां से भाग निकलने में सफल रहे थे। इन आतंकियों की तलाश के दौरान पुलिस ने इनसे संबंध रखने वाले दो लोगों को मेवात से गिरफ्तार किया था। पुलिस इस साजिश के मुख्य साजिशकर्ताओं की तलाश कर रही है।

पुलिस पूछताछ में दोनों ने लश्कर के लिए काम करने की बात कबूली थी। उन्होंने 4 दिसंबर को विधानसभा के लिए हो रहे मतदान के दौरान दिल्ली में आतंकी हमले की साजिश का भी खुलासा किया था।

दोनों ने पूछताछ के दौरान बताया कि वह अपने आकाओं के कहने पर राहत शिविरों में रह रहे मुजफ्फरनगर दंगा पीड़ितों के सपंर्क में थे। उनका प्रयास था कि ज्यादा से ज्यादा पीड़ित लश्कर से जुड़े, जिससे देश में इस आतंकी गुट की जड़ों को मजबूत किया जा सके।

Friday, 1 November 2013

आतंकी ताबिश रिमांड पर, घायल तारिक की मौत



पटना : राजधानी पुलिस ने आतंकी ताबिश उर्फ अरशद को सात दिन की रिमांड पर लिया है। जंक्शन पर विस्फोट में घायल हुए दहशतगर्द तारिक की इलाज के दौरान गुरुवार की आधी रात के बाद मौत हो गई। डाक्टरों की टीम ने पीएमसीएच में उसका पोस्टमार्टम किया। परिजनों के न आने के कारण शव को 72 घंटे तक रखा जाएगा। इधर, एनआइए की टीम ने मुजफ्फरपुर से गिरफ्तार मो. मोनू जाहिर के बिहटा स्थित मचहलपुर लई गांव में छापेमारी की। घर से ऐसे कागजात मिले हैं, जिनसे साबित होता है कि मो. मोनू इंडियन मुजाहिदीन से काफी लंबे अर्से से जुड़ा है।
गांधीमैदान में 27 अक्टूबर को हुंकार रैली के दौरान हुई सीरियल ब्लास्ट मामले में न्यायिक दंडाधिकारी प्रवाल दत्ता की अदालत ने अप्राथमिकी अभियुक्त ताबिश अंसारी उर्फ अरशद को 7 दिनों के लिये पुलिस रिमांड पर बेउर केन्द्रीय कारा अधीक्षक को गांधी मैदान पुलिस को सौंप देने का आदेश दिया। अंसारी 30 अक्टूबर से जेल में है। पुलिस ने अदालत से 15 दिनों के लिये पुलिस रिमांड की मांग की थी। गांधी मैदान पुलिस की ओर से आज अदालत को बताया कि अंसारी से गहन पूछताछ की आवश्यकता है। उससे देश में कोने-कोने में फैले आतंकवादियों की सुराग मिलने की संभावना है। अदालत को बताया गया कि अंसारी को अन्य राज्यों में भी ले जाने की आवश्यकता पड़ सकती है। सूत्रों के अनुसार अब गांधी मैदान पुलिस इस मामले से जुड़े जेल में बंद अन्य आरोपियों को प्रोडक्शन के लिये अदालत से प्रोडक्शन वारंट जारी करवाने की तैयारी में लगी है।

उधर, पटना जंक्शन पर रविवार को हुए बम ब्लास्ट में घायल आतंकी तारिक उर्फ ऐनुल ने इलाज के दौरान गुरुवार की देर रात इलाज के दौरान आइजीआइएमएस में दम तोड़ दिया। शुक्रवार दोपहर कड़ी सुरक्षा के बीच पीएमसीएच में तारिक के शव का पोस्टमार्टम किया गया। कार्रवाई की वीडियोग्राफी भी कराई गई। मौत की खबर मिलने के बावजूद उसके पिता अताउल्लाह शव लेने नहीं पहुंचे। पोस्टमार्टम के बाद उसका शव जंक्शन स्थित शीत शव गृह में रखा गया है। यदि, इस बीच उसके परिजन नहीं आए तो मुस्लिम कमेटी को बुलाकर अंतिम संस्कार कर दिया जाएगा। 

बताते चलें कि रांची के धुर्वा थाना क्षेत्र का रहने वाला तारिक उर्फ ऐनुल रविवार की सुबह साथी इम्तियाज के साथ प्रियांशु ट्रेवल्स की बस से तीन बम लेकर पटना आया था। पटना जंक्शन के प्लेटफार्म नंबर दस के बाहर शौचालय में टाइमर सेट करने के दौरान सुबह करीब 9.30 में बम फटने से वह गंभीर रूप से घायल हो गया था। उसके दाहिने घुटने के नीचे व सिर के पीछे गंभीर चोटें आई थी। साथ ही उसका चेहरा भी बुरी तरह जल गया था। मौके पर मौजूद पुलिस बल की मदद से उसे आटो द्वारा पीएमसीएच ले जाया गया। जंक्शन पर हुए विस्फोट के घंटाभर बाद गांधी मैदान में सीरियल बम ब्लास्ट हो गया। जिसके बाद पीएमसीएच में घायलों का तांता लग गया। जीआरपी के एसआइ गौतम कुमार ने बताया कि भीड़ का फायदा उठाकर तारिक को इंडियन मुजाहिदीन के सदस्य भगाकर ले ना जाएं, इसलिए उसे दोपहर 1 बजे एम्बुलेंस द्वारा आइजीआइएमएस में भेजा गया। घटना के बाद से वह कोमा में था। गुरुवार की देर रात करीब 1.30 बजे उसने अंतिम सांस ली। वह रांची के एक कालेज से स्नातक की पढ़ाई कर रहा था। राजधानी में हुए सीरियल बम ब्लास्ट का मास्टर माइंड तहसीन उर्फ मोनू उसकी पुरानी जान-पहचान थी। उसी के माध्यम से तारिक की दोस्ती इम्तियाज, तौफिक और नूमान से हुई। 

Source- News in Hindi