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Tuesday, 7 January 2014

AAP Alone Cannot Improve Delhi: Arvind Kejriwal

नई दिल्ली, राज्य ब्यूरो। उपराज्यपाल नजीब जंग के अभिभाषण पर आरोपों से घिरे मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने विपक्ष का सिलसिलेवार जवाब नहीं दिया और खुद को नया बताते हुए आसानी से बच निकले। उन्होंने कहा कि अकेले आम आदमी पार्टी के 28 विधायक दिल्ली नहीं सुधार सकते। कांग्रेस-भाजपा के सभी 70 विधायकों को मिल कर दिल्ली की हालत सुधारनी होगी।

मंगलवार को पांचवीं विधानसभा के पहले सत्र के अंतिम दिन उपराच्यपाल के अभिभाषण पर सत्ता पक्ष की ओर से धन्यवाद प्रस्ताव रखा गया, लेकिन अभिभाषण को भाजपा ने दिशाविहीन बताया तो कांग्रेस ने भी कसर नहीं छोड़ी। लगभग पांच घंटे तक विपक्ष के आरोपों को झेलने के बाद केजरीवाल ने अंतिम वक्ता के रूप में अपना भाषण दिया। उम्मीद थी कि वह विपक्ष का सिलसिलेवार जवाब देंगे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। केजरीवाल ने मात्र चार मिनट का भाषण दिया और कहा कि वह और उनके विधायक नए हैं, 100 कमियां हैं। समझ की कमी है। विजन भी नहीं है, लेकिन नीयत और इरादों में खोट नहीं है। उन्होंने विपक्षी सदस्यों से कहा कि हमें लगातार डांटते रहें, डपटते रहें, ताकि हम कभी ढीले न पड़ें। हमें सोने न दें। हम दिल्ली को सुधारने आए हैं और इस काम में हर विधायक का सहयोग चाहते हैं। उनकी पार्टी स्वराज लाना चाहती है और संवाद के बिना स्वराज नहीं आ सकता। हम कोशिश करेंगे कि सभी विधायकों के बीच संवाद स्थापित हो।

उनके इस भाषण पर भाजपा ने भी मेजें थपथपा कर स्वागत किया, लेकिन भाजपा ने उनके संक्षिप्त भाषण पर आपत्ति जताई और उम्मीद जताई कि सदस्यों के सुझावों को मुख्यमंत्री और सरकार गंभीरता से लेगी। भाजपा के जगदीश मुखी ने कहा कि उपराच्यपाल का अभिभाषण सरकार का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है। जिसमें सरकार अपनी योजना व प्रारूप की जानकारी देती है। यह अभिभाषण भावनात्मक भाषण जैसा ही था, जैसा केजरीवाल बाजारों में भाषण देते हैं। कांग्रेस विधायक दल के नेता हारुन युसुफ ने कहा कि इसमें महंगाई रोकने के उपायों का कोई जिक्र तक नहीं किया गया है। इसमें सार्वजनिक वितरण प्रणाली व खाद्य सुरक्षा कानून को लागू करने के लिए गरीबों के राशन कार्ड बनाने का भी कोई संकेत नहीं दिया है।

मुख्यमंत्री ने टेका मत्था
नई दिल्ली। सिखों के दसवें गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रकाशोत्सव पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने गुरुद्वारा बंगला साहिब में पहुंचकर मत्था टेका। उन्हें दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से सिरोपा देकर सम्मानित किया गया। विधानसभा के अध्यक्ष मनधीर सिंह धीर तथा कानून मंत्री सोमनाथ भारती ने गुरुपर्व के अवसर पर गुरुद्वारा बंगला साहिब पहुंचकर मत्था टेका और आपसी भाईचारे व खुशहाली की कामना की।

Source: News in Hindi

Thursday, 2 January 2014

Kejriwal is taking 'right steps': Anna Hazare

रालेगणसिद्धी। दिल्ली विधानसभा में विश्वास मत हासिल करने पर अन्ना हजारे ने अपने पुराने सहयोगी अरविंद को बधाई दी है। अन्ना ने कहा कि केजरीवाल सही राह पर हैं, लेकिन उनकी आम आदमी पार्टी (आप) को अभी लंबा सफर तय करना है।

अपने गांव रालेगणसिद्धी में पत्रकारों से बातचीत में अन्ना ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी आप को शुभकामना दी। अन्ना ने उम्मीद जताई कि भ्रष्टाचार से निपटने के लिए सभी राज्य लोकायुक्त कानून को अपनाएंगे। अरविंद भी इस पर ध्यान देंगे। आप नेता कुमार विश्वास के कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र अमेठी से चुनाव लड़ने की घोषणा पर अन्ना ने टिप्पणी से इन्कार कर दिया। अन्ना का मानना है कि लोकपाल कानून के बाद अब हमें राइट टु रिजेक्ट और राइट टु रिकॉल जैसे कानूनों के लिए भी संघर्ष करना होगा। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लोगों को जागरूक करने के लिए वह जल्द ही देशभर के दौरे पर निकलेंगे।

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Kejriwal was speaking, all assembly was hearing

नई दिल्ली [अजय पांडेय]। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल बोलने के लिए खड़े हुए और सदन में सन्नाटा छा गया। केजरीवाल बोल रहे थे और पूरा सदन चुपचाप उन्हें सुन रहा था। सबकी आंखें मुख्यमंत्री के चेहरे पर मानो चस्पां हो गई थीं। कुछ देर पहले तक उन्हें निर्लज्ज, बच्चों की कसम खाकर उसे तोड़ने वाले, राजनीतिक नौटंकी करने वाले आदि तरह-तरह के आरोप लगाने वालों की जुबान पर मानो ताला जड़ दिया गया था।

लोक निर्माण मंत्री मनीष सिसोदिया द्वारा पेश किए गए विश्वास प्रस्ताव पर चली साढ़े चार घंटे की चर्चा का जवाब देने के लिए जैसे ही मुख्यमंत्री खड़े हुए आम आदमी पार्टी के सदस्यों ने जोरदार तरीके से मेजें थपथपाकर उनका स्वागत किया। दर्शक दीर्घा में पहुंचे पार्टी के समर्थक कायदे-कानून भूल ताली पीटने लगे। उसके बाद चारों ओर सन्नाटा छा गया। बीच-बीच में सिर्फ कैमरों के शटर की आवाज भर सुनाई दे रही थी। केजरीवाल के पूरे भाषण को सुनकर लगा कि किसी भी राजनेता को उत् तेजित कर देने वाले तमाम आरोपों को मानो उन्होंने सुना तक नहीं था। उन्होंने न तो किसी आरोप का जवाब दिया और न ही अपनी ओर से किसी पर कोई आरोप ही लगाया। बस वे अपनी धुन में बोल रहे थे।

किसी भ्रष्टाचारी को बख्शा नहीं जाएगा
मुख्यंमत्री ने कहा कि मैं सदन को यह विश्वास दिलाना चाहता हूं कि चाहे पिछली सरकार हो, एमसीडी हो अथवा आम आदमी पार्टी की सरकार हो, किसी भी भ्रष्टाचार करने वाले को नहीं बख्शा जाएगा।

क्या है आम आदमी की परिभाषा
केजरीवाल ने आम आदमी की परिभाषा भी बताई। भाजपा के साहब सिंह चौहान द्वारा रेहड़ी, पटरी वालों, छोले बेचने वालों, चाय बेचने वाले लोगों को आम आदमी बताए जाने का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं इन लोगों के साथ-साथ मध्यम वर्ग के लोगों को भी आम आदमी मानता हूं। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति आम आदमी है जो भ्रष्टाचार के खिलाफ है। जो बेईमानी चाहता है, वही खास आदमी है।

सरकार बचाने नहीं आया
केजरीवाल ने कहा कि आम आदमी पार्टी की किसी भी पार्टी से कोई दुश्मनी नहीं है। उन्होंने कहा कि मैं यहां सरकार बचाने नहीं आया। हम लोग छोटे लोग हैं, मामूली आदमी हैं। हमने कभी चुनाव लड़ने, जीतने और सरकार बनाने की नहीं सोची। उन्होंने कहा कि आम आदमी को आजादी के 65 साल बाद भी दो जून की रोटी, शिक्षा, स्वास्थ्यच् अच्छी न्याय व्यवस्था नहीं मिली। आज हम सबको मिलकर यह सोचने की जरूरत है।

आम आदमी को मत ललकारना
उन्होंने कहा कि गरीबों के कल्याण के लिए बहुत पैसा खर्च हुआ लेकिन वह कहां गया? उन्होंने कहा कि इस देश की राजनीति भ्रष्ट हो गई है। उन्होंने कहा कि यदि चारों ओर खराबी नजर आ रही है तो इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि इस देश की राजनीति भ्रष्ट हो गई है। उन्होंने कहा कि दो साल पहले देश के आम आदमी ने सड़क पर उतर कर नेताओं से भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सख्त कानून बनाने की मांग की थी। लेकिन नेताओं ने हमें ललकारा। कहा कि खुद चुनाव लड़कर दिखाओ। उन्हें शायद यह मुगालता था कि आम आदमी भला कहां से चुनाव लड़ेगा लेकिन उन्होंने ऐसा कह कर जिंदगी की सबसे बड़ी भूल कर दी।

केजरीवाल के 17 मुद्दे :
अरविंद केजरीवाल ने बृहस्पतिवार को विधानसभा में 17 मुद्दों की चर्चा कर तमाम विधायकों से दलगत राजनीति से ऊपर उठकर उनका समर्थन करने की अपील की।
1. वीआइपी कल्चर खत्म करना : नेता के लिए ट्रैफिक न रुके, सुरक्षा का तामझाम न हो।
2. जनलोकपाल बिल : ऐसा सख्त कानून पास हो कि भ्रष्टाचारियों की रूह कांप उठे।
3. स्वराज की कल्पना साकार हो : जनता का पैसा कहां खर्च हो यह जनता तय करे।
4. न्याय व्यवस्था अच्छी हो : अदालतों की संख्या बढ़े, जजों की संख्या बढ़ाई जाए।
5. दिल्ली को पूर्ण राच्य का दर्जा मिले।
6. बिजली कंपनियों के खातों की जांच कराई जाए।
7. बिजली के मीटरों की जांच कराई जाए।
8. शुद्ध पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
9. अनधिकृत कॉलोनियों की हालत सुधरे।
10. झुग्गी-झोंपड़ी बस्तियों की समस्याओं का समाधान हो।
11. ठेका पर कर्मचारी का चलन बंद हो, जो कर्मचारी ठेके पर हैं उन्हें नियमित किया जाए।
12. व्यापार उद्योग की हालत सुधरे। व्यापारियों को आराम से धंधा करने दिया जाए।
13. खुदरा बाजार में एफडीआइ का विरोध।
14. राजधानी के गांव-देहातों की हालत सुधरे।
15. शिक्षा की अच्छी व्यवस्था हो। सरकारी स्कूलों की हालत सुधरे, निजी स्कूलों के डोनेशन पर रोक लगे।
16. बेहर स्वास्थ्य सुविधाएं मिले।
17. महिलाओं की सुरक्षा के लिए महिला सुरक्षा दल बने।

Wednesday, 1 January 2014

Congress has no other way to continue the support to Delhi government




[अजय पांडेय], नई दिल्ली। दिल्ली की सियासत का यह बेहद यादगार लम्हा है। बृहस्पतिवार का दिन सूबे में अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली आम आदमी पार्टी सरकार की किस्मत तय कर देगा। विपक्षी भाजपा चाहती है कि यह सरकार गिर जाए। खुद सत्ताधारी दल के हुक्मरानों को भी (आप के नेता बार-बार कांग्रेस पर आंखें तरेर रहे हैं) सरकार के गिर जाने की परवाह नहीं है। और कांग्रेस की बेबसी देखिए कि वह न चाहते हुए भी इस सरकार को एक प्रकार से अपने कंधों पर ढोने को विवश है। वह बिलकुल नहीं चाहती कि यह सरकार कम से कम इस वक्त गिरे। इस सरकार की जिंदगी वह अपने हिसाब से तय करना चाहती है।

मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली वालों को रोजाना 666 लीटर मुफ्त पानी देने का फैसला कर दिया। उन्होंने बिजली की कीमत को आधा करने का वादा भी निभा दिया। निजी बिजली कंपनियों की नाक में नकेल डालने का काम करते हुए उन्होंने इनके खातों की कैग से जांच कराने का आदेश भी जारी कर दिया। राजनीतिक फायदे नुकसान की बात करें तो उन्होंने अपना काम पूरा कर लिया है। उनका यह अनुमान बिलकुल सही लगता है कि यदि अगले कुछ महीनों में दिल्ली विधानसभा के फिर से चुनाव हुए तो उनकी पार्टी को पूर्ण बहुमत प्राप्त हो जाएगा।

दूसरी ओर सत्ता से चार कदम पीछे रह गई भाजपा भी चुनाव चाहती है। यदि यह सरकार गिर जाती है तो सियासी दृष्टि से भाजपा के रणनीतिकारों का खुश होना लाजिमी है। पार्टी की सोच यह है कि यदि सरकार गिर गई और चुनाव की नौबत आई तो थोड़े दिनों के राष्ट्रपति शासन के बाद लोकसभा चुनाव के साथ विधानसभा के भी चुनाव होंगे और पार्टी अपने प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता की लहर में दिल्ली का चुनाव भी जीत लेगी।

सियासी जानकारों की मानें तो एकमात्र कांग्रेस ही ऐसी पार्टी है जो कम से कम इस माहौल में चुनाव बिल्कुल नहीं चाहती। पार्टी के एक विधायक ने कहा कि इस वक्त हमने ऐसा क्या कर दिया है जिसे लेकर हम जनता के बीच जाएंगे। जाहिर है कि 15 साल की अपनी सत्ता गंवा चुकी पार्टी को फिलहाल चुनाव भारी घाटे का सौदा समझ में आ रहा है। शायद यही वजह है कि वह किसी भी कीमत पर अगले कुछ महीनों तक इस लंगड़ी सरकार की बैसाखी बने रहना चाहती है।

कांग्रेस के रणनीतिकारों का मानना है कि जून-जुलाई की गर्मियों में पानी-बिजली को लेकर मचने वाला हाहाकार केजरीवाल की लोकप्रियता की हवा निकाल देगा और तब हवा कांग्रेस के पक्ष में बहने लगेगी। उस समय न मोदी की लहर का खतरा होगा और न ही केजरीवाल का जादू काम करेगा। अब देखना यह है कि बृहस्पतिवार को सदन में किसकी किस्मत बुलंद होती है।

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Sunday, 29 December 2013

Home Ministry is not agree with Kejriwal for the vote of confidence out of the assembly





राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। अरविंद केजरीवाल ने रामलीला मैदान में पद व गोपनीयता की शपथ तो ली ही है, विधानसभा का सत्र भी यहीं आयोजित कराना चाहते थे। कम से कम विश्वास मत के दिन वे सदन की बैठक यहां कराने के पक्ष में थे, लेकिन गृह मंत्रलय ने उन्हें ऐसा करने की इजाजत नहीं दी।

सचिवालय में शनिवार को केजरीवाल की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में विधानसभा का नया सत्र बुलाने के मुद्दे पर विचार हुआ। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री रामलीला मैदान में ही विश्वास मत हासिल करना चाहते थे, लेकिन अधिकारियों ने जब इस मामले में गृह मंत्रालय के अधिकारियों से बात की तो उन्हें सख्त निर्देश मिला कि विधानसभा की बैठक हर हाल में सदन में ही होनी चाहिए और विश्वास मत भी वहीं हासिल किया जाना चाहिए।

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि विधानसभा का नया सत्र 1 जनवरी से 7 जनवरी तक का होगा। पहले दिन विधायकों को शपथ दिलाई जाएगी, जबकि 2 जनवरी को सरकार विश्वास मत हासिल करेगी। 3 जनवरी को विधानसभा अध्यक्ष व उपाध्यक्ष का चुनाव होगा। 4 व 5 जनवरी को अवकाश रहेगा, जबकि 6 जनवरी को उपराज्यपाल नजीब जंग विधानसभा को संबोधित करेंगे। 7 जनवरी को उपराज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के साथ ही सत्र समाप्त हो जाएगा।

अस्थायी अध्यक्ष की अध्यक्षता में सरकार के विश्वास मत हासिल करने को लेकर पूछे जाने पर विधानसभा के अधिकारियों ने कहा कि इस मामले में सोमवार को स्थिति और स्पष्ट होगी।

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