जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। भाजपा के पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने भले ही उद्योग जगत के हितों को ध्यान में रखते हुए आयकर के झमेले को ही खत्म करने का प्रस्ताव किया है, लेकिन इंडिया इंक इसे लेकर ज्यादा उत्साहित नहीं है। देश के उद्यमी समाज का कहना है कि भाजपा जिस तरह का प्रस्ताव कर रही है वैसा दुनिया के किसी देश में नहीं है। इंडिया इंक मोदी और भाजपा से इन कर प्रस्तावों को विस्तार से पेश करने की मांग कर रही है।
उद्योगपति वाईके मोदी ने दैनिक जागरण को बताया कि भाजपा के प्रधानमंत्री उम्मीदवार ने आयकर सहित कई तरह के करों को खत्म करने के साथ ही हर तरह के बैंकिंग लेनदेन पर टैक्स लगाने का समर्थन किया है। यह किसी भी कारोबारी को काफी भारी पड़ सकता है, क्योंकि उसके तो रोजाना कई तरह के लेनदेन बैंकों के जरिये होते हैं। हर तरह के बैंकिंग लेनदेन पर कर लगाने का प्रस्ताव हाल ही में फ्रांस में किया गया था, लेकिन उस पर सहमति नहीं बन पाई। कुछ अन्य देशों में भी इस बारे में असफल कोशिश की गई है। फिक्की के अध्यक्ष सिद्धार्थ बिड़ला का कहना है, 'पहले भाजपा या नरेंद्र मोदी को इस बारे में विस्तृत नीति की घोषणा करने दीजिए। उसके बाद ही हम अपनी राय देंगे। वैसे मोदी ने कर ढांचे को सरल बनाने की बात कही है जिसका हम पूरा समर्थन करते हैं।'
अर्थशास्त्री व वित्त मंत्रालय के पूर्व आर्थिक सलाहकार राजीव कुमार इस प्रस्ताव को क्रांतिकारी मानते हैं। उनका आकलन है कि इसे लागू करने से पहले साल ही 22 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का राजस्व हासिल होगा। अभी आयकर, बिक्री कर सहित तमाम तरह के करों से इतनी ही राशि प्राप्त होती है। लेकिन यह फार्मूला तभी सफल होगा, जब देश में काला धन पूरी तरह से खत्म हो जाए। साथ ही यह सुनिश्चत करना होगा कि किसी और माध्यम से मौद्रिक लेन-देन न हो।
नरेंद्र मोदी ने बीते रविवार को दिल्ली में एक सभा को संबोधित करते हुए मौजूदा कर व्यवस्था में आमूल-चूल बदलाव की बात कही थी। इस सभा में सभी करों व शुल्कों को खत्म कर सिर्फ बैंकिंग लेनदेन पर दो फीसद का कर लगाने का प्रस्ताव आया था। सभा में मौजूद भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह व वरिष्ठ भाजपा नेता अरुण जेटली ने भी इसका समर्थन किया। भाजपा के पूर्व अध्यक्ष नितिन गडकरी पहले ही इसका समर्थन कर चुके हैं।
Source: News in Hindi
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