Monday, 6 January 2014

Backward preparation of the Magh Mela

इलाहाबाद। पिछले चौबीस घंटे में रुक-रुक कर हो रही बारिश से मेला की सड़कें बालू में दफन हो गईं। मकर संक्रांति स्नान पर्व के लिए श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला शुरू हो गया है लेकिन मेला प्रशासन की ओर से दी जाने वाली सुविधाएं अभी नदारद हैं। 

दिसंबर के अंतिम सप्ताह से मेले का स्वरूप निखरने लगता है लेकिन इस बार जनवरी माह तक मेला नहीं बस पाया। पांच सेक्टरों में बंटे मेला क्षेत्र का सेक्टर पांच क्षेत्रफल के लिहाज से काफी बड़ा है। मगर यहां पर अंधेरा छाया हुआ है। यहां पर जिन्हें भूमि का आवंटन हो गया है, उन्हें रात के अंधेरे में काम करना पड़ रहा है। मेला क्षेत्र में प्रशासनिक शिविरों में तो बिजली के कनेक्शन उपलब्ध करा दिए गए, मगर संतों के शिविरों में अभी कनेक्शन नहीं दिए गए। 

यही नहीं अभी शाम छह से रात्रि आठ बजे तक ही बिजली आपूर्ति हो रही है। श्रद्धालुओं का कहना है कि बिजली आपूर्ति निर्बाध होनी चाहिए। फैलने लगा कूड़ा- मेला क्षेत्र में शिविरों के लगने के साथ जगह-जगह कूड़े के ढेर भी लगने शुरू हो गए हैं। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से सफाई का कोई इंतजाम नहीं किया गया है और न ही कूड़ेदान की व्यवस्था है। समतलीकरण में बाधा- समतलीकरण में लगे ट्रैक्टरों के पहिए मिट्टी में धंस रहे हैं। जरा सी बारिश ने समतलीकरण में बाधा खड़ी कर दी है। 

माघ मेले में आने वाला हर शख्स 'तीसरी नजर' के कड़े पहरे में रहेगा। मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा और गैरकानूनी काम करने वालों पर पैनी नजर रखने के लिए मेला क्षेत्र में 21 सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। पुलिस विभाग ने कैमरे लगाने के लिए जरूरी स्थानों का चयन करके खाका तैयार कर लिया है। सभी कैमरों को पुलिस कंट्रोल रूम से जोड़ा जाएगा। जहां से पुलिस टीम, मेले की हर गतिविधियों पर निगाह रखेगी। रविवार को मेला क्षेत्र में पुलिस की तैयारियों का जायजा लेने एसएसपी उमेश श्रीवास्तव और नोडल अफसर राजकमल यादव पहुंचे। यहां उन्होंने थानों, चौकियों और दूसरे कायरे की धीमी प्रगति पर असंतोष व्यक्त करते हुए तेजी लाने के निर्देश दिए। 

मेला पुलिस लाइन सभागार में क्षेत्रधिकारी और थानेदारों की बैठक लेते हुए उन्हें निर्देशित किया कि सभी लोग स्टॉफ की समस्याओं को तत्काल दूर कर लें। उसके बाद क्षेत्र का भ्रमण कर हर मार्ग और स्थानों से परिचित हो जाएं। ताकि योजनाओं के क्त्रियान्वयन में दिक्कत न हो। यह कार्य पूरा होते ही सभी सीओ और थानेदार अपनी टीम के साथ मेला क्षेत्र में गश्त कर माहौल को समझेंगे। एसएसपी ने बताया कि मेला क्षेत्र को दो जोन, पांच सेक्टरों में बांटा गया है। पांच थानों में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है, बाकी तैयारी 10 जनवरी तक हर हाल में पूरी हो जाएंगी। 

यहां होगी कैमरों की 'तैनाती'-मेला क्षेत्र के सभी पुलिस थानों के अलावा अक्षयवट, महावीर, काली, त्रिवेणी मार्ग, जीटी जवाहर चौराहा, परेड में वाहन पार्किंग पर और अरैल में बनने वाले वॉच टावरों पर कैमरे लगेंगे। संगम नोज पर दो सीसीटीवी कैमरे लगेंगे। 

गंगा-यमुना में बनेगी ड्रम लाइन- मेले के दौरान नदियों में नावों के सही संचालन के लिए गंगा-यमुना में संगम तक वन वे ड्रम लाइन बनाई जाएगी। नदियों में जल पुलिस की 22 और पीएसी की तीन कंपनी नाव और दूसरे सामानों के साथ मुस्तैद रहेगी। सीओ नीति द्विवेदी के मुताबिक प्रत्येक नाव पर दो जल पुलिस पर्याप्त लाइव जैकेट के साथ मौजूद रहेगी। उन्होंने बताया कि इस दौरान प्राइवेट नाविकों की सुविधा के हिसाब से उनके लिए अलग-अलग मार्ग बनाया जाएगा। रोज तीन बार जांच करेगी एटीएस-माघ मेले में श्रद्धालुओं और संतो का आगमन होते ही एटीएस और बीडीएस के साथ ही एलआइयू की टीम सतर्क हो गई हैं। यह टीमें रोजाना तीन बार अलग-अलग स्थानों पर चेकिंग करते हुए अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगी। छह जनवरी से लेकर यह सिलसिला मेले की समाप्ति तक चलता रहेगा। इनसे मिली रिपोर्ट के आधार पर ही पुलिस प्रशासन अपनी सुरक्षा व्यवस्था और रणनीति को मजबूत करेगी। 

वह दिन अब दूर नहीं जब पर्यटकों और श्रद्धालुओं को संगम क्षेत्र में नगरीय सुविधाएं चाक-चौबंद मिलेंगी। छावनी क्षेत्र में आने वाले परेड मैदान में पानी, शौचालय, सीवरेज, यात्री शेल्टर होम, नियमित सफाई व्यवस्था आदि देने के लिए कैंटोनमेंट बोर्ड ने नगर विकास विभाग को आठ करोड़ रुपये का एक प्रस्ताव बनाकर भेजा है। शीघ्र बजट जारी होने की उम्मीद है। संगम क्षेत्र में देश के कोने-कोने से बड़ी संख्या में पर्यटक, श्रद्धालु एवं स्नानार्थी साल के बारहों महीने आते रहते हैं किंतु माघ मेले को छोड़कर अन्य महीनों में मूलभूत सुविधाओं के लिए तरसना पड़ता है। मसलन न उन्हें पानी आसानी से मिल पाता है, न ही रहने एवं शौच करने की कोई व्यवस्था रहती है। मार्ग प्रकाश की व्यवस्था न होने से रात में वह चोर-उचक्कों का शिकार हो जाते हैं। कैंटोनमेंट बोर्ड ने इसी के मद्देनजर परेड ग्राउंड में विकास कार्य कराने का निर्णय लिया। बोर्ड ने वहां आठ यात्री शेल्टर होम, हर्षवर्धन चौराहे के समीप नौ पार्को का सुंदरीकरण, एक वॉटर टैंक, जरूरत के अनुसार शौचालय, मार्ग प्रकाश व्यवस्था एवं नियमित सफाई के लिए ब्लीचिंग पाउडर, फिनायल, एंटी मलेरिया स्प्रे और कूड़ा रखने के लिए सात डस्टबिन एवं ग्रीनरी आदि के लिए आठ करोड़ रुपये का प्रस्ताव बनाकर नगर विकास विभाग को भेजा है। बजट जारी होते ही विकास का काम शुरू होगा।

बजट जल्द मिलने की उम्मीद है। इसके लिए छावनी परिषद के सदस्य भी प्रयासरत हैं। शौचालय बनेंगे तो सीवरेज की भी व्यवस्था करनी होगी। विकास होने से यहां पर आने वाले श्रद्धालुओं को बहुत सुविधा होगी। -पीएनबी शर्मा, सीईओ कैंटोनमेंट बोर्ड।

जिला प्रशासन की व्यवस्था सिर्फ तीन महीने की होती है। वह भी जब माघ मेला लगता है। नौ महीने छावनी परिषद की निगरानी रहती है। इसलिए विकास कार्य बहुत जरूरी हो गया था।-सुधा यादव, उपाध्यक्ष कैंटोनमेंट बोर्ड।

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