Sunday, 5 January 2014

Go and do suicide, here it will be like this

जागरण संवाददाता,नई दिल्ली। 'जा तू भी आत्महत्या कर ले', यहां तो ऐसे ही चलेगा। यह बात वरिष्ठ अधिकारी कनिष्ठ से कह दे तो उसके दिल पर क्या गुजरेगी? नगर निगम उत्तरी में ऐसा होता है। नगर निगम उत्तरी के सफाई निरीक्षक नरेश कुमार गुप्ता को सफाई अधीक्षकों से यही सुनने को मिला है। गुप्ता को पिछले छह माह से वेतन नहीं मिल रहा है। 

गुप्ता का परिवार तंगी से जूझ रहा है। गुप्ता की कैंसर पीड़ित बेटी भी पिता के वेतन के लिए निगम कार्यालयों व दिल्ली सरकार के अधिकारियों के कार्यालय के चक्कर लगा रही है। लेकिन नगर निगम उत्तरी के सफाई विभाग के कुछ भ्रष्ट अधिकारी न ही सफाई निरीक्षक गुप्ता का वेतन बनने दे रहे हैं और न ही उन्हें काम दिया जा रहा है। इससे पूरा परिवार भारी तनाव में है। यहां बता दें कि वेतन न मिलने से परेशान नगर निगम के बाबू अमित जोशी ने कुछ दिन पहले ही आत्महत्या कर ली थी। उन्हें दस माह से वेतन नहीं मिल रहा था। गुप्ता ने जब अमित जोशी का जिक्र सफाई विभाग के अधीक्षकों से किया तो उनका जवाब था कि जा तू भी आत्महत्या कर ले, यहां ऐसे ही चलेगा। 

नरेश कुमार गुप्ता सिविल लाइल जोन में सफाई निरीक्षक के पद पर कार्यरत हैं। बीमार होने पर पिछले साल उन्होंने अपनी किडनी ट्रांसप्लांट कराई थी। जिस पर प्रति माह लगभग 12 हजार रुपये का खर्च आ रहा है। उनकी 19 वर्षीय बेटी भी कैंसर से पीड़ित है। गुप्ता को दस जून से वेतन नहीं मिला है। नरेश गुप्ता का कहना है कि वह 23 अगस्त से नियमित रूप से सिविल लाइन जोन में नौकरी पर जा रहे हैं। मगर उन्हें न कार्यालय में बैठाया जा रहा है और न काम दिया जा रहा है। इस संबंध में निगम आयुक्त को शिकायत दी जा चुकी है लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है। 

यहां विदित है कि नगर निगम में सत्तासीन भाजपा नेता जो आम लोगों के हितैषी होने का दावा करते हैं, उन्हें भी निरीक्षक की परेशानी नजर नहीं आ रही। इस संबंध में नगर निगम उत्तरी के आयुक्त पीके गुप्ता कहते हैं कि उन्हें मामले की जानकारी नहीं है। वह मामले को गंभीरतापूर्वक देखेंगे।

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