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Sunday, 29 December 2013

Sheila - Virbhadra lecherous eye of the CBI



नई दिल्ली [नीलू रंजन]। पिछले दस साल से कांग्रेस ब्यूरो ऑफ इंवेस्टीगेशन के नाम से बदनाम सीबीआइ के तेवर बदलने लगे हैं। भाजपा महासचिव व नरेंद्र मोदी के नायब कहे जाने वाले अमित शाह के खिलाफ नरम रवैया अपनाने वाली सीबीआइ ने दिल्ली की पूर्व सीएम शीला दीक्षित और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के खिलाफ नजर टेढ़ी कर ली है। शीला सरकार के दौरान दिल्ली जल बोर्ड में हुए घोटाले के आरोपों में सीबीआइ अब तक पांच प्रारंभिक जांच [पीई] के मामले दर्ज कर चुकी है। वहीं, इस्पात मंत्री रहते हुए रिश्वत लेने के आरोपों में घिरे वीरभद्र सिंह को कभी भी पूछताछ के लिए तलब किया जा सकता है।

दिल्ली जल बोर्ड में घोटाले को लेकर दर्ज पांच पीई में तीन नांगलोई, मालवीय नगर और महरौली-वसंत विहार में जलशोधन संयंत्र लगाने, एक एएमआर मीटरों की खरीद और एक भागीरथी जलशोधन संयंत्र लगाने में हुई धांधली से संबंधित है। ये सभी मामले दो-तीन साल पुराने हैं, लेकिन पीई के केस पिछले दो महीने में दर्ज किए गए हैं। 

सीबीआइ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि आरोपों के प्रथम दृष्टया सही पाए जाने की स्थिति में ही पीई का केस दर्ज किया गया है, लेकिन घोटाले के आरोपियों की पहचान जांच के बाद ही हो पाएगी। गौरतलब है कि दिल्ली जल बोर्ड शीला दीक्षित के ही मातहत काम करता था। वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, दो कारणों से इन मामलों की जांच आगे नहीं बढ़ पा रही थी। एक तो दिल्ली जल बोर्ड संबंधित फाइलें देने में आनाकानी कर रहा था और दूसरे खुद सीबीआइ के सभी अधिकारी साल के अंतिम महीने में टारगेट पूरा करने में व्यस्त थे। उन्होंने उम्मीद जताई कि आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद दिल्ली जल बोर्ड से इन ठेकों की फाइलें मिलने में देर नहीं लगेगी। 

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल खुद लंबे समय से बिजली और पानी वितरण में बड़े घोटाले के आरोप लगाते रहे हैं। उन्होंने यह विभाग भी अपने पास रखा है। जाहिर है नए साल में सीबीआइ प्रारंभिक जांच पूरी कर एफआइआर दर्ज कर सकती है। 

वहीं, पिछले 15 महीने से वीरभद्र सिंह के खिलाफ पीई केस पर कुंडली मारे बैठी सीबीआइ अचानक हरकत में आ गई है। सीधे आरोपों में घिरे होने के बावजूद सीबीआइ ने अभी तक वीरभद्र सिंह से पूछताछ की जरूरत नहीं समझी थी। अब सीबीआइ इससे इन्कार नहीं कर रही है।

सीबीआइ निदेशक रंजीत सिन्हा ने कहा कि वह वीरभद्र सिंह से पूछताछ के मुद्दे पर जल्द फैसला लेंगे। सूत्रों की माने तो इस मामले में भी जल्द ही एफआइआर हो सकती है। वीरभद्र सिंह पर केंद्र में इस्पात मंत्री रहते हुए करोड़ों रुपये रिश्वत लेने का आरोप है। इनमें दो साल में छह करोड़ रुपये की एलआइसी पॉलिसी खरीदने के सबूत भी मिल गए हैं। वैसे वीरभद्र सिंह अचानक बढ़ी कृषि आय से इन पॉलिसियों की खरीद की सफाई दे रहे हैं, लेकिन सीबीआइ के जांच अधिकारी इससे संतुष्ट नहीं हैं और एफआइआर दर्ज कर गहन जांच की मांग कर रहे हैं। एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने भी सीबीआइ से वीरभद्र सिंह के मामले में अब तक की कार्रवाई की रिपेार्ट 15 जनवरी तक देने को कहा है। 

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Wednesday, 27 November 2013

Film based on aarushi-hemraj murder case gets completed

Aarushi-hemraj murder case
मुंबई। आरुषि-हेमराज हत्याकांड का फैसला आ चुका है। पूरी देश की जनता के साथ-साथ कई फिल्म निर्माताओं को इसका इंतजार था, निर्माताओं में इस घटना पर फिल्म बनाने की होड़ मची हुई थी, लेकिन निर्माता मनीष गुप्ता ने इसमें सफलता हासिल कर ली। उन्होंने लगभग ये फिल्म पूरी कर ली है।

सूत्रों ने बताया कि मनीष गुप्ता ने आरुषि पर बनी अपनी फिल्म 'रहस्य' की शूटिंग लगभग खत्म कर ली है। अभिनेत्री तिस्का चोपड़ा आरुषि की मां यानी नुपूर तलवार का किरदार निभा रहीं हैं। तिस्का ने कहा कि वे इस किरदार को जज नहीं करेंगी, बल्कि इसे पूरी शिद्दत के साथ निभाने की कोशिश करेंगी। उन्होंने कहा कि ये उनके लिए एक चुनौती है। जो भी उन्होंने खबरों से सुना या जाना है वे उसके आधार पर ही अपने रोल के साथ न्याय करेंगी।

उन्होंने कहा कि इस किरदार की तुलना किसी के साथ नहीं की जा सकती है। भले ही इस मामले में सच सामने आ गया है, लेकिन इस किरदार का अपना ही एक पहलू है। तिस्का उसको ही उबारने की कोशिश करेंगी। अभिनेता आशिष विद्यार्थी आरुषि के पिता यानी राजेश तलवार की भूमिका निभाएंगे। फिल्म अगले साल मार्च तक रिलीज हो सकती है।

Thursday, 14 November 2013

CBI Director Ranjit Sinha responds to NCW Notice

rape
नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। दुष्कर्म वाले अपने विवादित बयान पर सार्वजनिक रूप से खेद जता चुके सीबीआइ निदेशक रंजीत सिन्हा ने बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय महिला आयोग को जवाब भेज दिया है। जवाब में उन्होंने बयान पर खेद जताते हुए सफाई दी है।

सीबीआइ निदेशक ने कहा कि वे महिलाओं का सम्मान करते हैं और महिलाओं से जुड़े मुद्दों के प्रति प्रतिबद्ध हैं। लेकिन गलती से उन्होंने बहस के बीच एक कहावत से तुलना करते हुए 'रेप नहीं रोक पाने की स्थिति में उसका मजा लेना चाहिए' कह दिया। उनके कहने का मतलब ऐसा कतई नहीं था। देखना यह है कि राष्ट्रीय महिला आयोग रंजीत सिन्हा की सफाई से संतुष्ट होता है या नहीं।

सिन्हा ने बुधवार को भी अपने बयान पर सार्वजनिक रूप से खेद जताया था। लेकिन उनके खेद से असंतुष्ट राष्ट्रीय महिला आयोग ने नोटिस भेजकर 24 घंटे के भीतर जबाव-तलब कर लिया था। आयोग की निर्मला सामंत प्रभावलकर ने कहा कि 'यह उनकी बीमार मानसिकता को दर्शाता है और जबाव मिलने के बाद जरूरत पड़ने पर हम सरकार से उन्हें पद से हटाने की सिफारिश भी कर सकते हैं। लगातार तीन दिन छुंट्टी होने के कारण महिला आयोग अब सोमवार को सिन्हा की सफाई पर विचार करेगा।

Source- Hindi News

Wednesday, 13 November 2013

CBI Director Ranjit Sinha's U-Turn 'rape' Remark

CBI
नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। दुष्कर्म को लेकर विवादित बयान देकर फंसे सीबीआइ निदेशक रंजीत सिन्हा ने खेद जताया है, लेकिन उनके खिलाफ लोगों को गुस्सा बढ़ता ही जा रहा है। सीबीआइ निदेशक के खेद से असंतुष्ट राष्ट्रीय महिला आयोग ने उनसे जवाब-तलब किया है। वहीं भाजपा और माकपा ने इस बयान के बाद रंजीत सिन्हा के इस्तीफे की मांग की है।

मंगलवार को खेलों में भ्रष्टाचार रोकने के लिए कानून बनाने की जरूरत विषय पर चर्चा के दौरान रंजीत सिन्हा ने कह दिया था कि यदि दुष्कर्म नहीं रोक सकते, तो उसका मजा लेना चाहिए। इस बयान पर चौतरफा आलोचनाओं से घिरे रंजीत सिन्हा ने पहले तो स्पष्टीकरण जारी कर विवाद शांत करने की कोशिश की। उनके अनुसार चर्चा के दौरान उन्होंने खेलों में संट्टेबाजी को इजाजत देने के कानून बनाने का समर्थन यह कहते हुए किया था कि कानून लागू करने में कठिनाई का मतलब यह नहीं है कि उसे बनाया ही नहीं जाना चाहिए। 'ऐसा करना उसी तरह भ्रामक होगा, जैसा कि यह कहना कि रेप नहीं रोक पाने की स्थिति में किसी को उसका मजा लेना चाहिए।' लेकिन चौतरफा इस पर तीखी प्रतिक्रिया से घबराए रंजीत सिन्हा ने सामने आकर बयान पर खेद जताया।

रंजीत सिन्हा की सफाई से असंतुष्ट राष्ट्रीय महिला आयोग ने नोटिस भेजकर 24 घंटे के भीतर सफाई मांगी है। आयोग की सदस्य निर्मला सामंत प्रभावलकर ने सख्त नाराजगी जताते हुए कहा कि हम इस मामले में पूरी कार्रवाई करेंगे। लेकिन रंजीत सिन्हा की सफाई के बाद सरकार मामले को ज्यादा तूल देने के मूड में नहीं है। सूचना व प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने कहा कि सिन्हा के खेद व्यक्त करने के बाद किसी कार्रवाई की जरूरत नहीं रह गई है। पर विपक्षी दल रंजीत सिन्हा के इस्तीफे की मांग पर अड़े हैं। भाजपा के पूर्व अध्यक्ष नितिन गडकरी ने कहा कि वह सीबीआइ के निदेशक पद पर रहने के लायक नहीं हैं। भाजपा की तरह माकपा नेता वृंदा करात ने भी रंजीत सिन्हा के इस्तीफे की मांग की है।
::मंगलवार को दिया बयान::
'दुष्कर्म नहीं रोक पाने की स्थिति में, उसका मजा लेना चाहिए।'
::बुधवार को दी सफाई:::
'मैं महिलाओं के सम्मान के प्रति प्रतिबद्ध हूं, अनजाने में मेरे बयान से किसी को ठेस पहुंची हो तो मैं खेद जताता हूं।'
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'यह उनकी बीमार मानसिकता को दर्शाता है और जवाब मिलने के बाद जरूरत पड़ने पर हम सरकार से उन्हें पद से हटाने की सिफारिश भी कर सकते हैं।'
निर्मला सामंत प्रभावलकर, सदस्य राष्ट्रीय महिला आयोग

Source- News in Hindi

Tuesday, 12 November 2013

CBI Director Ranjit Sinha's 'Rape' Remark Sparks Outrage

CBI

नई दिल्ली। देश में सीबीआई को लेकर लगातार बयानबाजी चल रही है। अब तक सीबीआई पर लोग बयान दे रहे थे और अब सीबीआई प्रमुख खुद विवादित बयान देने लगे हैं। सीबीआई के निदेशक रंजीत सिन्हा एक बयान देकर मुश्किल में फंस गए हैं। खेल में सट्टेबाजी को कानूनी मान्यता देने की वकालत करते वक्त सीबीआई के निदेशक ने एक विवादास्पद बयान दे दिया। उन्होंने उदाहरण देते हुए यहां तक कह डाला, 'अगर आप सट्टेबाजी पर प्रतिबंध नहीं लगा सकते तो इसका मतलब यही हुआ जैसे आप बलात्कार को रोक नहीं सकते तो उसे आनंद करते हैं।'
सिन्हा ने यह बयान दिल्ली में जारी सीबीआई सम्मेलन के दूसरे दिन के कार्यक्रम के दौरान दिया। सिन्हा ने सट्टेबाजी की तुलना रेप से की और कहा कि रेप पर रोक नहीं लगा सकते तो इसे 'इंज्वॉय' करते हैं। अगर सट्टेबाजी नहीं रोकी सकती तो उसे कानूनी रूप दे देना चाहिए। सिन्हा के इस बयान की जबर्दस्त आलोचना हो रही है। पूर्व आईपीएस अधिकारी किरन बेदी ने कहा कि रंजीत सिन्हा का यह बयान किसी भी तरह मंजूर करने लायक नहीं है। उन्होंने हैरानी जताई कि इतने बड़े पद पर बैठा व्यक्ति इस तरह का बयान कैसे दे सकता है। बीजेपी की स्मृति ईरानी ने भी रंजीत सिन्हा के इस बयान की आलोचना की।

सट्टेबाजी को कानूनी रूप देने के बारे में उनके विचार पूछे जाने पर सिन्हा ने वरिष्ठ संपादक शेखर गुप्ता से कहा कि देश में सट्टेबाजी को कानूनी रूप देने में कोई नुकसान नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि राच्यों में लॉटरी चल सकती है, यदि हमारे होलीडे रिसार्ट में कसीनो हो सकते हैं यदि सरकार काला धन के स्वैच्छिक खुलासे की योजना की घोषणा कर सकती है तो सट्टेबाजी को कानूनी रूप देने में क्या नुकसान है। जबकि आपके पास इस पर नजर रखने के लिए प्रवर्तन एजेंसियां हैं। बाद में सीबीआई प्रवक्ता ने एक स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि सिन्हा ने जिस संदर्भ में बयान दिया है वह सट्टेबाजी को कानूनी रूप देने का विचार है।

Source- News in Hindi

Thursday, 7 November 2013

Gauhati HC quashes resolution through which CBI was set Up

Gauhati High Court

गुवाहाटी। गुवाहाटी हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में उस प्रशासनिक आदेश को खारिज कर दिया है, जिसके तहत सीबीआइ का गठन किया गया था। न्यायमूर्ति आइए अंसारी व इंदिरा शाह की डिवीजन बेंच ने यह अप्रत्याशित फैसला नवेंद्र कुमार की याचिका पर सुनाया। जिसमें 2007 में हाई कोर्ट के एकल जज के आदेशों को चुनौती दी गई थी। केंद्र सरकार इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगी।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि एक अप्रैल 1963 को सीबीआइ गठन के नियमों के अनुसार 'यह न तो दिल्ली स्पेशल पुलिस इस्टेबिलिशमेंट (डीएसपीई) का अंग है और न ही हिस्सा। इसके अलावा डीएसपीई एक्ट 1946 के तहत सीबीआइ पुलिस फोर्स की तरह व्यवहार नहीं कर सकती है।' अदालत ने कहा, जहां तक पूर्व में गृह मंत्रालय के प्रस्ताव की बात है तो यह संयुक्त कैबिनेट का फैसला नहीं था और न ही राष्ट्रपति द्वारा कोई निर्देश ही दिया गया था। लिहाजा यह विवादित प्रस्ताव महज प्रशासनिक निर्देश है, जिसे कानून के रूप में लागू नहीं किया जा सकता है। अदालत ने इसके साथ ही नवेंद्र कुमार के खिलाफ सीबीआइ द्वारा दाखिल आरोप-पत्र भी रद कर दिया। हाई कोर्ट ने कहा कि इन परिस्थितियों में सीबीआइ द्वारा किसी युवक के खिलाफ मामला दर्ज करना और उसे गिरफ्तार करना अपराध है। सीबीआइ आवश्यक परिस्थितियों में विशेष मामलों की जांच के लिए है। लिहाजा यह कहने में कोई संकोच नहीं कि यहां सीबीआइ का गठन असंवैधानिक है।

गुवाहाटी हाई कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ केंद्र सरकार अब सुप्रीम कोर्ट में जाने की तैयारी में है। अतिरिक्त महाधिवक्ता पीपी मल्होत्रा ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने कई फैसलों में सीबीआइ गठन को सही ठहराया है। लिहाजा यह फैसला पूरी तरह से गलत है। उन्होंने कहा कि सोमवार को इस बाबत सुप्रीम कोर्ट में अपील की जाएगी।

 Source- News in Hindi