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Friday, 29 November 2013

Ready for Suth Africa: Shikhar Dhawan

India v south Afriaca
मुंबई। जोरदार फॉर्म में चल रहे भारतीय सलामी बल्लेबाज शिखर धवन अगले महीने दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर नई ऊंचाइयां छूने को बेताब हैं। धवन न केवल वहां की उछालभरी पिचों पर खेलने को तैयार हैं बल्कि उन्हें लगता है कि परिस्थितियां उनकी आक्रामक बल्लेबाजी शैली के अनुरूप होंगी।
धवन ने कहा, 'मैं व्यक्तिगत रूप से महसूस करता हूं कि उछालभरी पिचें मेरे खेल के लिए मददगार होंगी। हम काफी लंबे समय से काफी अच्छा क्रिकेट खेल रहे हैं और आत्मविश्वास से भरे हैं। बतौर टीम हम बेहतर ढंग से एकजुट हो रहे हैं। सभी खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ा हुआ है, मैं भी आत्मविश्वास से भरा हूं। मैं अच्छा प्रदर्शन कर रहा हूं और इस बेहतरीन फॉर्म को लंबे समय तक ले जाने के लिए बेताब हूं।'
दिल्ली के बाएं हाथ के बल्लेबाज ने शुक्रवार को यहां एक कार्यक्रम के इतर बातचीत में भरोसा जताया कि टीम प्रोटियाज के खिलाफ उसकी सरजमीं पर सीरीज जीतेगी। धवन ने कहा, 'हमें भरोसा है कि हम दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अच्छा प्रदर्शन करेंगे। हमने इंग्लैंड में अच्छा किया था, वेस्टइंडीज में भी हमने अच्छा किया था। हमारा लक्ष्य दक्षिण अफ्रीका में बेहतर खेल दिखाकर सीरीज जीतना है।' कुछ महीने पहले धवन भारत 'ए' टीम के साथ दक्षिण अफ्रीका गए थे और उन्होंने लिस्ट 'ए' मैच में दक्षिण अफ्रीका 'ए' के खिलाफ 248 रन की शानदार पारी खेली थी। 27 वर्षीय धवन ने कहा कि आगामी दौरे पर उनके लिए यह अनुभव कारगर साबित होगा।
भारतीय टीम सचिन तेंदुलकर के संन्यास के बाद पहली टेस्ट सीरीज खेलेगी, धवन ने कहा कि टीम को ड्रेसिंग रूम में इस महान बल्लेबाज की कमी खलेगी। भारतीय टीम मेजबान दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पांच दिसंबर से बेस्ट ऑफ थ्री वनडे सीरीज से दौरे की शुरुआत करेगी, जिसके बाद 18 दिसंबर से दो मैचों की टेस्ट सीरीज खेली जाएगी।

Monday, 18 November 2013

Sachin gets salute by England parliament Also

Sachin Tendulkar

लंदन। सचिन तेंदुलकर को ब्रिटेन की संसद हाउस ऑफ कॉमंस ने भी उनकी क्रिकेट सेवाओं के लिए बधाई देते हुए सम्मान दिया है। सोमवार को जब हाउस ऑफ कॉमंस का सत्र शुरू हुआ तो सदस्यों ने सचिन तेंदुलकर को टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने के फैसले का सम्मान करते हुए उन्हें बधाई प्रस्ताव पारित किया।
ब्रिटेन की संसद द्वारा किसी दूसरे देश के खिलाड़ी के लिए बधाई प्रस्ताव पारित करना, यह अपने आप में बहुत बड़ा सम्मान है। हाउस ऑफ कॉमंस में यह प्रस्ताव पेश करने वाले भारतीय मूल के सांसद कीथ वाज ने कहा कि तेंदुलकर ने दुनिया भर में लाखों लोगों के लिए प्रेरणा के रूप में काम किया। कीथ ने खेल के प्रति उनके निस्वार्थ समर्पण की चर्चा की। उन्होंने कहा, 'यह प्रस्ताव एक उत्कृष्ट बल्लेबाज के सम्मान के लिए है। तेंदुलकर को जितना भारत में पसंद किया जाता है उतना ही ब्रिटेन में। अत: यह बिल्कुल सही है कि संसद उनके योगदान की चर्चा करे।'

Even After his last Wicket Sachin didnt Forget to Analyse it

Sachin Tendulkar
पुणे। मास्टर बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर यह जानते थे कि वेस्टइंडीज के खिलाफ दूसरे और अंतिम टेस्ट में यह उनकी आखिरी पारी थी, लेकिन वह खेल के प्रति इतने जुनूनी हैं कि वो इसके बावजूद अपने उस शॉट का आकलन करना नहीं भूले, जिस पर वह आउट हुए थे। उन्होंने इस विकेट पर अपनी राय अपने भाई के साथ साझा की थी।
सचिन के बड़ेभाई और उनके मेंटर अजित तेंदुलकर ने मराठी न्यूज चैनल में इस महान बल्लेबाज के हवाले से कहा कि मैंने जितनी उम्मीद की थी, गेंद उससे थोड़ा ज्यादा उछाल पर थी और मैं अतिरिक्त उछाल का आकलन नहीं कर पाया था। वेस्टइंडीज के खिलाफ हाल में समाप्त दूसरे और अंतिम टेस्ट में सचिन के आउट होने के बाद हमेशा की तरह होने वाली बातचीत की पुष्टि करते हुए अजित ने कहा कि मैंने उसे बताया कि वह शानदार खेला और वह अपनी स्टाइल में आराम से खेल रहा था। लेकिन बल्ले पर गेंद छुआकर स्लिप में (वेस्टइंडीज के कप्तान डेरेन सैमी द्वारा लपके गए कैच) कैच से बचा जा सकता था।'
दूसरे दिन के खेल के बाद अपने भाई के साथ फोन पर हुई बातचीत के दौरान सचिन ने कहा कि वह उछाल का ठीक तरह से अंदाज नहीं लगा पाने के कारण आउट हुए जिससे उनके लाखों प्रशंसक निराश हो गए, जो उनके चमकदार करियर का अंत 101वें शतक से देखना चाहते थे।

Sachin's temple will be made in Bihartue

Sachin Tendulkar

पटना। बिहार में क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर मंदिर में पूजे जाएंगे। मंदिर का निर्माण कैमूर जिले के अतरवलिया गांव में होगा। यह मंदिर भोजपुरी गायक व इस गांव के निवासी मनोज तिवारी बनवा रहे हैं। इसका शिलान्यास 19 नवंबर को होगा। इसी दिन तेंदुलकर की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा भी होगी। यहां प्रतिष्ठापित होने वाली मूर्ति का पहला लुक जारी कर दिया गया है। मंदिर को चार माह में तैयार कराने का लक्ष्य है। मनोज तिवारी का मानना है कि यह मंदिर सचिन को सम्मान देने के साथ नए खिलाड़ियों को भी उनके जैसा बनने की प्रेरणा देगा। मंदिर में भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी और युवराज सिंह की मूर्तियां भी होंगी। यह मंदिर करीब छह हजार वर्ग फीट के परिसर में बनेगा। लेआउट के मुताबिक सचिन की मूर्ति गर्भगृह में होगी। जबकि साथी खिलाड़ी मंदिर के अगले हिस्से में होंगे। 

आदमकद मूर्ति में सचिन इंडियन क्रिकेट टीम की आफिशियल ब्लू जर्सी में होंगे। उनके हाथ में व‌र्ल्ड कप नजर आएगा। मूर्ति बनकर तैयार हो गई है। पांच फुट पांच इंच की सचिन की मूर्ति संगमरमर की है। इसे श्रीनाथ (राजस्थान) जिले के मूर्तिकार खेमराम ने बनाया है। यह मनोज तिवारी के घर में रखी गई है। धोनी और युवराज की मूर्ति मंदिर के पूरी तरह तैयार हो जाने के बाद लायी जाएगी। मंदिर में अन्य पत्थरों के साथ संगमरमर का भी भरपूर उपयोग किया जाएगा। 

तिवारी ने बताया कि मंदिर को वर्ष 2014 में बनाने की योजना थी। सचिन के सन्यास लेने की घोषणा के बाद इसे 2013 में ही बनाने का निर्णय लिया गया। इसे बनाने में लगभग 70 लाख रुपये की लागत आएगी। शिलान्यास के दिन ही सचिन की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। मूर्ति को 15 फीट ऊंचे चबूतरे पर स्थापित किया जाना है। उसी दिन से पूजा भी शुरू हो जाएगी। 

मूर्ति पर मौसम का प्रभाव न पड़े इसकी व्यवस्था भी की जा रही है। मंदिर के बाद तिवारी अपने गांव में अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित एक स्टेडिटम भी बनवाना चाहते हैं। तिवारी ने कहा कि मेरी कोशिश है कि सचिन मंदिर के शिलान्यास के मौके पर उपस्थित रहें।

Celebs line up in Sachin party in Mumbai

Sachin Tendulkar
जेएनएन, मुंबई। क्रिकेट को अलविदा कहने के बाद मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर की ओर से सोमवार रात दी गई पार्टी में राजनीति, सिनेमा और खेल जगत की कई मशहूर हस्तियां शामिल हुईं। पार्टी में पूरी टीम इंडिया भी मौजूद थी।
शनिवार को तेंदुलकर ने मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में वेस्टइंडीज के खिलाफ अपने टेस्ट करियर का 200वां और अंतिम टेस्ट मैच खेला था। इसी के साथ उन्होंने आंसुओं के साथ क्रिकेट को अलविदा कह दिया। रविवार के दिन वह इंटरव्यू देते रहे, जबकि सोमवार की शाम सचिन के लिए बेहद खास थी। सचिन ने सभी मित्रों और परिचितों का शुक्रिया अदा करने के लिए डिनर पार्टी रखी, जिसमें शामिल होने के लिए कई हस्तियां आईं। इस पार्टी में अमिताभ बच्चन, अभिषेक बच्चन, ऐश्वर्या राय बच्चन, आमिर खान, किरण राव, राहुल बोस और मधुर भंडारकर जैसी फिल्मी हस्तियां पहुंचीं। राजनीति के क्षेत्र से शरद पवार, राज ठाकरे सहित अन्य हस्तियों ने शिरकत की। पार्टी में उनके दोस्त ब्रायन लारा भी आए थे। इनके अलावा क्रिकेट जगत से सुनील गावस्कर, श्रीनाथ सहित अन्य हस्तियां मौजूद थीं।

Sunday, 17 November 2013

Sachin is the 'greatest' of my era: Muralitharan

Muralitharan
नई दिल्ली। श्रीलंका के दिग्गज स्पिनर मुथैया मुरलीधरन ने भारतीय क्रिकेट स्टार सचिन तेंदुलकर को अपनी पीढ़ी का महानतम क्रिकेटर करार देते हुए कहा कि उनका विकेट हमेशा हमारे लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण रहा।

उन्होंने कहा कि वर्षो तक की गई अपनी कड़ी मेहनत और समर्पण ने तेंदुलकर को लीजेंड बनाया। उन्होंने पूरे उत्साह, जोश और गरिमा के साथ क्रिकेट खेली। 800 टेस्ट विकेट और 500 से अधिक वनडे विकेट लेने वाले इस 41 वर्षीय ऑफ स्पिनर ने कहा कि औसत के मामले में भले ही सर डॉन ब्रेडमैन का जवाब नहीं लेकिन रनों और लंबे समय तक क्रिकेट में बने रहने के मामले में तेंदुलकर को अपने युग का महानतम क्रिकेटर माना जाएगा।

मुरलीधरन ने कहा कि सचिन मेरे युग का महानतम क्रिकेटर है। वह आधुनिक युग का महान क्रिकेटर है। उनका जुनून, समर्पण, प्रत्येक मैच से पहले कड़ी मेहनत और क्रिकेट के प्रति उनके प्यार को मैं सलाम करता हूं और इससे वह महानतम खिलाड़ी बने। उन्होंने कहा कि मैंने अन्य को नहीं देखा। मैंने ब्रेडमैन को बल्लेबाजी करते हुए नहीं देखा लेकिन यदि आप सचिन के आंकड़े, उन्होंने जितने अधिक रन बनाए, उनका लंबे समय तक क्रिकेट में बने रहना जो उन्हें मेरे समय का महानतम क्रिकेटर बनाते हैं। उनकी तरह कोई भी इतने लंबे समय तक नहीं खेल पाया। मुझे यह कहते हुए किसी तरह का संदेह नहीं कि वह वह महानतम हैं।
मुरलीधरन ने कहा कि खेल के प्रति उनका प्यार, उनका रवैया, प्रत्येक मैच से पहले कड़ा अभ्यास करना, मैच की तैयारी में घंटों पसीना बहाना, इससे ही महान खिलाड़ी बनते हें। सचिन अदभुत है और मैं 24 साल पहले जिस इंसान से मिला था वह आज भी वैसे ही हैं। मुरलीधरन का तेंदुलकर से पहली बार 1993 में वनडे सीरीज के दौरान आमना-सामना हुआ। उन्होंने कहा कि वह कई वजहों से तेंदुलकर से प्रेरित हैं। मुझे अपने खेल के प्रति अपने जुनून और समर्पण से प्रेरित किया। उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा। वह सच्चे भद्रजन की तरह खेले। उन्होंने बेहद सम्मानजनित तरीके से खुद को आगे बढ़ाया। वह हमेशा विनम्र और शांतचित व्यक्ति रहे। वह बेजोड़ थे।

कई का मानना है कि भारतीय बल्लेबाजी की नई सनसनी और उप कप्तान विराट कोहली सचिन के संभावित उत्तराधिकारी हैं लेकिन मुरलीधरन ने कहा कि तुलना का कोई मतलब नहीं बनता है। उन्होंने कहा कि दो चीजें एक समान नहीं हो सकती हैं। विराट कोहली युवा प्रतिभाओं में शानदार हैं। मेरे लिए यह कहना सही नहीं होगा कि भारत ने कोहली के रूप में दूसरा सचिन ढूंढ़ लिया है। समय ही बताएगा। सचिन को महान बनने में 24 साल लगे और कोहली ने अभी शुरुआत की है। मुरलीधरन ने कहा कि यदि कोहली अपनी प्रतिभा को सही इस्तेमाल करते रहे। जैसा वह अभी खेल रहे हैं वैसे ही खेलते रहें। यदि वह अनुशासन और समर्पण दिखाते हैं तो फिर महानतम खिलाड़ियों में से एक बन सकते हैं लेकिन अभी सचिन महानतम हैं।

उन्होंने कहा कि मुझे कोहली का रवैया और रनों की भूख पसंद है। आइपीएल में (आरसीबी की तरफ से) वह मेरा कप्तान थे। मैंने उनकी हमेशा जीत और बड़े स्कोर बनाने की भूख देखी है। वह प्रतिभाशाली क्रिकेटर हैं। सचिन निश्चित तौर पर सर्वकालिक महान खिलाड़ी हैं। सचिन अपने करियर में पहले ही सब कुछ हासिल कर चुका है और कोहली उसे हासिल करने की प्रक्रिया में है। मुरलीधरन ने कहा कि सचिन सभी तरह की परिस्थितियों और गेंदबाजी के सामने सर्वश्रेष्ठ थे और विरोधी टीमों को उनके लिए खास रणनीति बनानी पड़ती थी। उन्हें रोक पाना, आउट करना हमेशा मुश्किल रहा। उनका विकेट हमारे लिए हमेशा बेहद महत्वपूर्ण रहा। हमने उनके विकेट के लिए हमेशा खास रणनीति बनाई। मुरलीधरन ने कहा कि मैं उनकी खुशहाल जिंदगी की कामना करता हूं। उन्हें भविष्य के लिये शुभकामनाएं। मैं उन्हें मेंटर के रूप में युवा खिलाड़ियों की मदद करते हुए देखना चाहता हूं।

Sachin's temple will be made in Bihartue

Sachin Tendulkar

पटना। बिहार में क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर मंदिर में पूजे जाएंगे। मंदिर का निर्माण कैमूर जिले के अतरवलिया गांव में होगा। यह मंदिर भोजपुरी गायक व इस गांव के निवासी मनोज तिवारी बनवा रहे हैं। इसका शिलान्यास 19 नवंबर को होगा। इसी दिन तेंदुलकर की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा भी होगी। यहां प्रतिष्ठापित होने वाली मूर्ति का पहला लुक जारी कर दिया गया है। मंदिर को चार माह में तैयार कराने का लक्ष्य है। मनोज तिवारी का मानना है कि यह मंदिर सचिन को सम्मान देने के साथ नए खिलाड़ियों को भी उनके जैसा बनने की प्रेरणा देगा। मंदिर में भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी और युवराज सिंह की मूर्तियां भी होंगी। यह मंदिर करीब छह हजार वर्ग फीट के परिसर में बनेगा। लेआउट के मुताबिक सचिन की मूर्ति गर्भगृह में होगी। जबकि साथी खिलाड़ी मंदिर के अगले हिस्से में होंगे।

आदमकद मूर्ति में सचिन इंडियन क्रिकेट टीम की आफिशियल ब्लू जर्सी में होंगे। उनके हाथ में व‌र्ल्ड कप नजर आएगा। मूर्ति बनकर तैयार हो गई है। पांच फुट पांच इंच की सचिन की मूर्ति संगमरमर की है। इसे श्रीनाथ (राजस्थान) जिले के मूर्तिकार खेमराम ने बनाया है। यह मनोज तिवारी के घर में रखी गई है। धोनी और युवराज की मूर्ति मंदिर के पूरी तरह तैयार हो जाने के बाद लायी जाएगी। मंदिर में अन्य पत्थरों के साथ संगमरमर का भी भरपूर उपयोग किया जाएगा। 

तिवारी ने बताया कि मंदिर को वर्ष 2014 में बनाने की योजना थी। सचिन के सन्यास लेने की घोषणा के बाद इसे 2013 में ही बनाने का निर्णय लिया गया। इसे बनाने में लगभग 70 लाख रुपये की लागत आएगी। शिलान्यास के दिन ही सचिन की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। मूर्ति को 15 फीट ऊंचे चबूतरे पर स्थापित किया जाना है। उसी दिन से पूजा भी शुरू हो जाएगी। 

मूर्ति पर मौसम का प्रभाव न पड़े इसकी व्यवस्था भी की जा रही है। मंदिर के बाद तिवारी अपने गांव में अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित एक स्टेडिटम भी बनवाना चाहते हैं। तिवारी ने कहा कि मेरी कोशिश है कि सचिन मंदिर के शिलान्यास के मौके पर उपस्थित रहें।

Sachin Retires Out of Ground for last Time with Tears

Sachin Tendulkar
मुंबई। मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर यूं तो काफी मजबूत इंसान माने जाते रहे हैं, एक ऐसा खिलाड़ी जो बड़े से बड़े हालातों में नहीं टूटा.. चोट, हार, निजी समस्याएं, खराब दौर.कुछ इस इंसान को नहीं तोड़ पाया लेकिन जब वानखेड़े में टीम इंडिया की जीत के बाद सचिन आज पवेलियन की ओर लौटे तो पूरा मैदान बस सचिन-सचिन चिल्ला रहा था और 'क्रिकेट के भगवान' के आंसूं छलक पड़े।

अपने 200वें टेस्ट के साथ सचिन तेंदुलकर ने जब मैदान से विदाई ली तब वह बेशक बल्लेबाजी नहीं कर रहे थे लेकिन उनके हाथों में धौनी ने जीत का विकेट थमाया, पिच पर जाकर उन्होंने पूरे स्टेडियम के सामने 24 साल के समर्थन के लिए सिर झुकाकर धन्यवाद दिया और फिर सभी खिलाड़ियों ने बाउंड्री तक उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया। यह सब कुछ चल रहा था, सचिन पवेलियन की ओर लौट रहे थे और उनकी हैट के नीचे उनका लाल चेहरा था, आंसुओं को वो छुपा रहे थे लेकिन फिर भी उनकी भावनाएं सामने आ गईं। सभी खिलाड़ी भी भावुक थे, उनकी पत्नी, बेटा, बेटी सब भावुक थे और तमाम आंसुओं के बीच मास्टर आखिरी बार पवेलियन लौट गए।

Friday, 15 November 2013

Sachin Tendulkar 24th Career Anniversary

Sachin Tendulkar
(शिवम् अवस्थी), नई दिल्ली। 'यह सच है कि एक लकड़ी के टुकड़े के दम पर कोई भगवान नहीं बनता, लेकिन यह भी कोई आम इंसान नहीं है..' यह लाइनें आजकल एक टीवी एड का हिस्सा हैं, इन्हें सुनकर कुछ नहीं तो यह अहसास जरूर हो जाता है कि एक पीढ़ी ने एक खिलाड़ी के साथ कैसे अपनी जिंदगी के कुछ रोचक पल जी लिए, फिर चाहे वो स्टेडियम में बैठकर हों, या फिर टीवी के सामने। वो आज का ही दिन था (15 नवंबर, 1989) जब सचिन ने कराची में पाकिस्तान के खिलाफ टेस्ट के जरिए अपने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का आगाज किया था, शायद ही किसी ने सोचा हो कि इसी दिन के करीब उनकी आखिरी विदाई भी होगी। जो भी हो, मैदान की 22 गज की सूखी पंट्टी पर 24 साल का यह विशाल करियर, खेल जगत के हर खिलाड़ी, हर एथलीट के लिए एक मिसाल बना।

15 नवंबर 1989 को वो बुधवार का दिन था जब एक 16 साल का लड़का मैदान पर दिग्गज पाकिस्तान टीम के खिलाफ अपने करियर का आगाज करने उतरा था। उस मैच में पाकिस्तान की तरफ से भी दो खिलाड़ियों का आगाज हुआ, वकार यूनिस और इंजमाम-उल-हक, यह दोनों भी दिग्गज क्रिकेटर बने, बस फर्क इतना रहा कि यह दोनों पाक खिलाड़ी, आए, खेले, गए, कुछ के बाल सफेद हुए तो कुछ कोच से लेकर कमेंटेटर तक बन गए, लेकिन 'क्रिकेट का भगवान' 22 गज की पिच पर अटल रहा..24 साल तक।
सचिन तेंदुलकर ने अपने पूरे करियर में तकरीबन 600 खिलाड़ियों के साथ व उनके विरुद्ध खेला। कपिल की पीढ़ी से लेकर अजहरुद्दीन तक और गांगुली के दौर से लेकर धौनी के स्वर्णिम दौर तक इस खिलाड़ी ने हर उस युग को देखा जिसकी आस कोई भी खिलाड़ी रखता है। उतार-चढ़ाव भरे अपने करियर में तेंदुलकर कई बार लड़खड़ाए, चोटिल हुए, आउट ऑफ फॉर्म हुए लेकिन फिर भी खेल के प्रति उनका समर्पण व 24 साल का अविवादित करियर उनकी एक अलग छाप छोड़ता चला गया। जिंबॉब्वे के पूर्व मशहूर खिलाड़ी व इंग्लैंड टीम के मौजूदा कोच एंडी फ्लावर ने अपने एक बयान में सचिन की हस्ती को बखूबी बयान किया था, एंडी फ्लावर ने कहा था कि, 'दुनिया में दो तरह के क्रिकेटर हैं, एक सचिन..और दूसरा बाकी सब।' एक नजर डालते हैं सचिन के अद्भुत करियर के कुछ खास आंकड़ों पर।
(15 नवंबर 1989-15 नवंबर 2013):
वनडे क्रिकेट:
मैच- 463
रन- 18426
औसत- 44.83
शतक- 49
अर्धशतक- 96
बेस्ट- नाबाद 200
------------
टेस्ट क्रिकेट:
मैच- 200
रन- 15921
औसत- 53.71
शतक- 51
अर्धशतक- 67
बेस्ट- नाबाद 248
--------------
अंतरराष्ट्रीय टी20 क्रिकेट:
मैच- 1
रन- 10
-------------
प्रथम श्रेणी क्रिकेट:
मैच- 309
रन- 25322
औसत- 57.81
शतक- 81
अर्धशतक- 115
बेस्ट- नाबाद 248
--------------
ट्वंटी-ट्वंटी क्रिकेट:
मैच- 96
रन- 2797
औसत- 32.90
शतक- 1
अर्धशतक- 16
बेस्ट- नाबाद 100
--------------

Wednesday, 13 November 2013

Sachin to Have a Tricolor Frip on His Bat in his last Test

Sachin Tendulkar
मुंबई। मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम पर जब आज सुबह जब अपने आखिरी टेस्ट से ठीक पहले अभ्यास करने उतरे तो उनके बल्ले में कुछ अलग नजर आया। आमतौर पर उनके बल्ले की जो ग्रिप रहती थी वह बाकी के खिलाड़ियों के बल्ले से मेल खाती थी लेकिन आज वो बल्ले के हैंडल पर एक खास 'तिरंगे' वाली ग्रिप के साथ उतरे।

गौरतलब है कि सचिन तेंदुलकर को स्पॉन्सर करने वाली कंपनी ने उनके नाम का ही एक ब्रान्ड लॉन्च किया था (एसटी) जिस ब्रान्ड के लोगो के साथ आज पूरी दुनिया भर के कई बल्लेबाज मैदान पर उतरते हैं। अब सचिन तेंदुलकर ने अपने आखिरी मैच के लिए भारत के झंडे वाली ग्रिप को लगाने की तैयारी की है। जाहिर है कि हेल्मेट पर तिरंगे को लगाने की परंपरा भी सचिन ने ही शुरू की थी, जिसके बाद कई खिलाड़ियों ने ऐसा ही किया।

Monday, 11 November 2013

Indian turbanator Harbhajan Singh Also Salutes Sachin

Sachin Tendulkar

जागरण संवाददाता, जालंधर। एक समय मंकीगेट विवाद में भज्जी का साथ देने वाले सचिन तेंदुलकर के एहसान को आज भी टर्बनेटर हरभजन सिंह नहीं भूले होंगे। भज्जी ने हमेशा सचिन को अपना आइडल माना है, उन्होंने सोमवार को कहा कि सचिन तेंदुलकर देश का गौरव हैं। राष्ट्रीय टीम में जगह बनाने के लिए प्रयासरत भज्जी ने कहा कि सचिन केसाथ खेलना मेरे लिए गर्व की बात है। हर कोई इस महान क्रिकेटर के साथ समय बिताना चाहता है और परमात्मा ने मुझे यह सौभाग्य भी दिया।
उन्होंने कहा कि दो दिन बाद सचिन अपना 200वां और विदाई टेस्ट मैच खेलने जा रहे है। अफसोस है कि ग्राउंड में मैं उनके साथ नहीं रहूंगा, लेकिन सचिन के इस टेस्ट मैच को मैं मिस नहीं कर सकता। मैं इस महान क्रिकेटर को जरूर खेलते देखूंगा और सचिन को अपने कंधे पर उठाकर उनकी 200वें टेस्ट मैच की खुशी में उनके साथ शरीक होऊंगा।

हरभजन ने याद किया, 'मैं 15-16 साल का था, तब पहली बार सचिन तेंदुलकर से मिला। सचिन चंडीगढ़ में टेस्ट मैच खेलने आए थे और जालंधर से मुझे वहां भेजा गया था। इस दौरान वहां कोच ने मेरा सचिन के साथ परिचय करवाते हुए कहा था कि यह लड़का बहुत अच्छी गेंद फेंकता है। मेरे लिए यह बहुत खुशी की बात थी कि विश्व के महान खिलाड़ी के सामने मेरा इस तरह परिचय हुआ। सचिन से मिलने पर ऐसा लगा जैसे मेरी जिंदगी ही बन गई। मैं उन्हें टकटकी लगाकर देखता रहा। वह बात करते रहे, लेकिन मुझे सचिन से मिलने और उनसे हाथ मिलाने की इतनी खुशी थी कि मुझे समझ में ही नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं।'

Sunday, 10 November 2013

Sachin said Dhoni would make a good captain: Pawar

Sachin Tendulkar
मुंबई। मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर का दिल सिर्फ क्रिकेट के लिए धड़कता है। वह न सिर्फ भारतीय क्रिकेट की भलाई के लिए सोचते रहते हैं, बल्कि समय-समय पर जूनियर खिलाड़ियों की मदद के लिए भी जाने जाते हैं। वह जो कुछ करते या सोचते हैं उसमें क्रिकेट की भलाई छुपी होती है। यह बात आज एक बार फिर मुंबई क्रिकेट संघ (एमसीए) के अध्यक्ष शरद पवार के रहस्योदं्घाटन से साबित हो गई है। पवार ने बताया कि वह सचिन थे, जिन्होंने 2007 में राहुल द्रविड़ के कप्तानी छोड़ने की इच्छा जाहिर करने के बाद महेंद्र सिंह धौनी को यह जिम्मेदारी सौंपने के लिए कहा था।

पवार ने रविवार को अपने ब्लॉग में लिखा है, 'सचिन को अपने साथी खिलाड़ियों विशेषकर जूनियर क्रिकेटरों की मदद करना अच्छा लगता है और वह टीम भावना में विश्वास करते हैं। विनम्रता उनका बीच का नाम है। उन्होंने अपने खेल पर ध्यान देने के लिए कप्तानी छोड़ दी थी। अब एक ऐसी कहानी जिससे सचिन तेंदुलकर और महेंद्र सिंह धौनी के अनगिनत प्रशंसकों को खुशी होगी। यह कुछ साल पहले की बात है जब भारतीय टीम इंग्लैंड में खेल रही थी। मैं भी बीसीसीआइ प्रमुख होने के नाते लंदन में था। एक दिन राहुल द्रविड़ मेरे पास आए और उन्होंने अपने आग्रह से मुझे हैरत में डाल दिया। द्रविड़ ने कहा कि वह कप्तानी छोड़ना चाहते हैं क्योंकि इससे उनका खेल प्रभावित हो रहा है। मैंने सीधा जवाब दिया नहीं। ट्वेंटी-20 सीरीज जल्द शुरू होने वाली है और विश्व कप केवल एक साल बाद होना है।'

पवार ने कहा कि द्रविड़ ने कप्तान पद के लिए तेंदुलकर के नाम का सुझाव दिया, लेकिन यह सीनियर बल्लेबाज इच्छुक नहीं था। उन्होंने कहा, 'द्रविड़ ऐसे महत्वपूर्ण मोड़ पर कप्तानी छोड़ने के बारे में कैसे सोच सकता था। उनका उत्तराधिकारी कौन होगा। द्रविड़ अपने फैसले पर कायम थे। उन्होंने अगले कप्तान के लिए सचिन के नाम का सुझाव दिया। मैंने इस पर विषय पर सचिन से बात की। वह द्रविड़ की जगह कप्तान बनने के इच्छुक नहीं थे। उन्होंने धौनी का नाम सुझाया। इससे कहानी में नया मोड़ आ गया।'

केंद्रीय कृषि मंत्री ने याद किया, 'धौनी बेहतरीन विकेटकीपर हैं, लेकिन क्या वह अच्छा कप्तान साबित होगा। सचिन ने जवाब दिया, 'आप उसे आजमाओ। वह बहुत अच्छा कप्तान साबित होगा। मैं जिम्मेदारी के एहसास के साथ यह कह रहा हूं। इसके बाद बीसीसीआइ की चयन समिति ने धौनी को टीम का कप्तान चुन लिया और उन्होंने भारत को गौरवान्वित किया। हमने टी-20 विश्व कप जीता और बाद में मुंबई में 2011 में वनडे विश्व कप भी जीता। नए कप्तान की जमकर तारीफ की गयी जिसके वह हकदार थे। यह सचिन की दूरदृष्टिता के कारण संभव हो पाया।' 

'सचिन अब संन्यास लेने वाले हैं। लेकिन वह खुद को क्रिकेट से लंबे समय तक दूर नहीं रख सकते। मुझे पूरा विश्वास है कि संन्यास लेने के बाद युवा खिलाड़ियों को गुर सिखाना उनकी योजनाओं में शामिल होगा। मास्टर ब्लास्टर को शुभकामनाएं।'
-शरद पवार (अध्यक्ष, एमसीए)

Source: Cricket Hindi News

Sachin Said Dhoni Would Make a Good Captain: Pawar

Sachin Tendulkar
मुंबई। मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर का दिल सिर्फ क्रिकेट के लिए धड़कता है। वह न सिर्फ भारतीय क्रिकेट की भलाई के लिए सोचते रहते हैं, बल्कि समय-समय पर जूनियर खिलाड़ियों की मदद के लिए भी जाने जाते हैं। वह जो कुछ करते या सोचते हैं उसमें क्रिकेट की भलाई छुपी होती है। यह बात आज एक बार फिर मुंबई क्रिकेट संघ (एमसीए) के अध्यक्ष शरद पवार के रहस्योदं्घाटन से साबित हो गई है। पवार ने बताया कि वह सचिन थे, जिन्होंने 2007 में राहुल द्रविड़ के कप्तानी छोड़ने की इच्छा जाहिर करने के बाद महेंद्र सिंह धौनी को यह जिम्मेदारी सौंपने के लिए कहा था।

पवार ने रविवार को अपने ब्लॉग में लिखा है, 'सचिन को अपने साथी खिलाड़ियों विशेषकर जूनियर क्रिकेटरों की मदद करना अच्छा लगता है और वह टीम भावना में विश्वास करते हैं। विनम्रता उनका बीच का नाम है। उन्होंने अपने खेल पर ध्यान देने के लिए कप्तानी छोड़ दी थी। अब एक ऐसी कहानी जिससे सचिन तेंदुलकर और महेंद्र सिंह धौनी के अनगिनत प्रशंसकों को खुशी होगी। यह कुछ साल पहले की बात है जब भारतीय टीम इंग्लैंड में खेल रही थी। मैं भी बीसीसीआइ प्रमुख होने के नाते लंदन में था। एक दिन राहुल द्रविड़ मेरे पास आए और उन्होंने अपने आग्रह से मुझे हैरत में डाल दिया। द्रविड़ ने कहा कि वह कप्तानी छोड़ना चाहते हैं क्योंकि इससे उनका खेल प्रभावित हो रहा है। मैंने सीधा जवाब दिया नहीं। ट्वेंटी-20 सीरीज जल्द शुरू होने वाली है और विश्व कप केवल एक साल बाद होना है।'

पवार ने कहा कि द्रविड़ ने कप्तान पद के लिए तेंदुलकर के नाम का सुझाव दिया, लेकिन यह सीनियर बल्लेबाज इच्छुक नहीं था। उन्होंने कहा, 'द्रविड़ ऐसे महत्वपूर्ण मोड़ पर कप्तानी छोड़ने के बारे में कैसे सोच सकता था। उनका उत्तराधिकारी कौन होगा। द्रविड़ अपने फैसले पर कायम थे। उन्होंने अगले कप्तान के लिए सचिन के नाम का सुझाव दिया। मैंने इस पर विषय पर सचिन से बात की। वह द्रविड़ की जगह कप्तान बनने के इच्छुक नहीं थे। उन्होंने धौनी का नाम सुझाया। इससे कहानी में नया मोड़ आ गया।'

केंद्रीय कृषि मंत्री ने याद किया, 'धौनी बेहतरीन विकेटकीपर हैं, लेकिन क्या वह अच्छा कप्तान साबित होगा। सचिन ने जवाब दिया, 'आप उसे आजमाओ। वह बहुत अच्छा कप्तान साबित होगा। मैं जिम्मेदारी के एहसास के साथ यह कह रहा हूं। इसके बाद बीसीसीआइ की चयन समिति ने धौनी को टीम का कप्तान चुन लिया और उन्होंने भारत को गौरवान्वित किया। हमने टी-20 विश्व कप जीता और बाद में मुंबई में 2011 में वनडे विश्व कप भी जीता। नए कप्तान की जमकर तारीफ की गयी जिसके वह हकदार थे। यह सचिन की दूरदृष्टिता के कारण संभव हो पाया।' 

'सचिन अब संन्यास लेने वाले हैं। लेकिन वह खुद को क्रिकेट से लंबे समय तक दूर नहीं रख सकते। मुझे पूरा विश्वास है कि संन्यास लेने के बाद युवा खिलाड़ियों को गुर सिखाना उनकी योजनाओं में शामिल होगा। मास्टर ब्लास्टर को शुभकामनाएं।'
-शरद पवार (अध्यक्ष, एमसीए)

Thursday, 7 November 2013

When Sachin stole bat of Kapil Dev

Sachin Tendulkar

जागरण संवाददाता, मेरठ । क्रिकेट की नई परिभाषा गढ़ने वाले सचिन बल्लों के चयन को लेकर हमेशा जुनूनी रहे। करियर के शुरुआती दिनों में सचिन एक साथ कई बल्लों को परखकर मैदान में उतरते थे। ऐसा भी मौका आया, जब मेरठ से कपिल देव के लिए भेजे गए बल्लों में से सचिन ने एक चुपचाप अपने पास रख लिया था, जिससे उन्होंने टेस्ट करियर का पहला शतक लगाया।
1989 में पाकिस्तान दौरे के साथ टेस्ट करियर का आगाज करने वाले सचिन बल्लों के चयन के मामले में बहुत सतर्क थे। 1990 में तीन टेस्टों के लिए न्यूजीलैंड दौरे पर गए सचिन नेपियर में 88 रन पर आउट होकर शतक बनाने से चूक गए। इसके बाद टीम इंडिया इंग्लैंड के दौरे पर गई। कपिल देव ने मेरठ से तीन बल्ले मंगवाए। उस समय एसएस कंपनी में कार्यरत रहे अनिल सरीन बताते हैं कि इसमें से एक बल्ला सचिन को इतना भा गया, कि उन्होंने अपने पास ही रख लिया और कहा कि कपिल सर को इसके बारे में मत बताना। ऐसे में कपिल को महज दो बल्ले दिए गए। कपिल का बल्ला सचिन के लिए लकी साबित हुआ, और उन्होंने ओल्ड ट्रैफर्ड में करियर का पहला शतक जमाया। 

Wednesday, 6 November 2013

That Memorable innings when Sachin Broke Gavaskar Ton Record

Sachin Tendulkar

नई दिल्ली। यूं तो मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने विश्व क्रिकेट के तमाम बड़े रिकॉर्ड अपने नाम किए हैं। उन्होंने अपने करियर में तमाम ऐसी पारियां खेलीं जिसने उन्हें सभी खिलाड़ियों से हमेशा ऊपर रखा, ऐसी ही एक पारी दिल्ली में साल 2005 में देखने को मिली, जो पारी सचिन के लिए भी बेहद खास थी क्योंकि श्रीलंका के खिलाफ 109 रनों की उस शतकीय पारी ने एक खास रिकॉर्ड तोड़ा था।
इस शतक के साथ सचिन ने अपने हीरो सुनील गावस्कर द्वारा बनाए 34 टेस्ट शतकों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। गावस्कर ने उस वक्त ही कहा था कि सचिन केवल 35 शतकों पर ही नहीं थमेगा और सचिन ने उनकी बात का मान रखा। सचिन ने 11 दिसंबर, 2004 को जब 34वां टेस्ट शतक लगाया था, तभी से उनके 35वें शतक का इंतजार शुरू हो गया था। लेकिन इस कीर्तिमान तक पहुंचने के लिए उन्हें करीब साल भर लग गया। 10 दिसंबर, 2005 को वह घड़ी आ गई। हालांकि इस बीच सचिन ने केवल पांच टेस्ट खेले थे। कोटला में श्रीलंका के खिलाफ दूसरे टेस्ट में उनके पहले 50 रन 112 गेंदों पर बने थे, लेकिन अगले 50 रन केवल 65 गेंदों पर बन गए। इस शतक के साथ ही वह टेस्ट मैचों में शतकों के शिखर पर पहुंच गए। गावस्कर का रिकॉर्ड 22 साल तक कायम रहा। सचिन ने इस शतक के लिए 13 चौके और एक छक्का लगाया।

Tuesday, 5 November 2013

Sachin Continue to Shine like a Comet

Sachin Tendulkar

शांतचित, मासूम चेहरा। सभी के साथ घुलमिल कर बात करना। सभी के साथ एक जैसा व्यवहार। चाहे वह क्रिकेटर हो या दूसरे खेलों के खिलाड़ी। कुछ ऐसा ही व्यक्तित्व है रिकॉर्डो के बादशाह सचिन तेंदुलकर का। उनमें इस बात का जरा भी गुमान नहीं है कि वह विश्व क्रिकेट के असाधारण बल्लेबाज हैं। मैं खुद को खुश किस्मत मानता हूं कि मुक्केबाज होने के वाबजूद मुझे उनसे मिलने का मौका मिला।

हाथ मिलाते ही दूर हो गई घबराहट
2009 में मुंबई में एक पुरस्कार समारोह में मैं पहली बार सचिन भाई से मिला। उनसे मिलने को लेकर मन में खुशी के साथ घबराहट भी थी। लेकिन उनसे हाथ मिलाते ही वह घबराहट दूर हो गई। ऐसा लगा मानो पूरी कायनात मुझे मिल गई हो। बचपन में टीवी पर उन्हें देखकर बड़ा हुआ था आज उनके साथ एक मंच पर बैठा था। इसकी कल्पना मात्र से ही मन रोमांचित हो रहा था। मैं खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहा था। वह मेरे आदर्श थे। अपने हीरो के हाथों पुरस्कार लेकर मैं खुद को गद्गद महसूस कर रहा था। वह पुरस्कार मेरी जिंदगी की धरोहर बन गया।

जब बढ़ाया उत्साह
थोड़ी देर बाद वह मेरे पास आए और मुझसे कहा, विजेंद्र तुम बहुत अच्छा कर रहे हो, अपना यह प्रदर्शन जारी रखना। तुमने भारतीय मुक्केबाजी को नई दिशा दी है। इसके लिए तुम्हें बधाई हो। उनके इन शब्दों ने न केवल मेरा उत्साह बढ़ाया, बल्कि मेरे लिए यह प्रेरणास्रोत भी बन गए।

साधारण इंसान
सचिन भाई जितने बड़े क्रिकेटर उतने ही महान इंसान भी हैं। तभी तो वह क्रिकेटरों के ही नहीं दूसरे खिलाड़ियों के भी हीरो हैं। मैं उनके साधारण व्यक्तित्व का कायल हूं। उनके जैसा खिलाड़ी सदियों में पैदा होता है। उन्होंने क्रिकेट में जो रिकॉर्ड बनाए हैं दूसरे क्रिकेटरों के लिए उन्हें छूना नामुमकिन है। तेंदुलकर धूमकेतु की तरह हमेशा भारतीय खेलों में चमकते रहेंगे।

पाक-साफ छवि
क्रिकेट में आए दिन विवाद होते हैं, लेकिन सचिन भाई हमेशा इससे दूर रहे। 24 साल का उनका बेदाग करियर उन्हें सबसे अलग और खास बनाता है। क्रिकेट को उनकी कमी हमेशा खलती रहेगी पर यह भी सच है कि उन्होंने क्रिकेट को जो लोकप्रियता दिलाई है वह अनवरत जारी रहेगी।
200वें टेस्ट का बनूंगा गवाह

मैं भले ही रोहतक में उनका अंतिम रणजी मैच नहीं देख सका, लेकिन मुंबई में उनके 200वें टेस्ट का गवाह जरूर बनूंगा। मैं चाहूंगा टीम उन्हें विजयी विदाई दे और वह अपने अंतिम मैच में दोहरा शतक लगाएं।
[मुक्केबाज विजेंद्र सिंह की राजीव शर्मा से बातचीत पर आधारित]