Tuesday, 5 November 2013

Sachin Continue to Shine like a Comet

Sachin Tendulkar

शांतचित, मासूम चेहरा। सभी के साथ घुलमिल कर बात करना। सभी के साथ एक जैसा व्यवहार। चाहे वह क्रिकेटर हो या दूसरे खेलों के खिलाड़ी। कुछ ऐसा ही व्यक्तित्व है रिकॉर्डो के बादशाह सचिन तेंदुलकर का। उनमें इस बात का जरा भी गुमान नहीं है कि वह विश्व क्रिकेट के असाधारण बल्लेबाज हैं। मैं खुद को खुश किस्मत मानता हूं कि मुक्केबाज होने के वाबजूद मुझे उनसे मिलने का मौका मिला।

हाथ मिलाते ही दूर हो गई घबराहट
2009 में मुंबई में एक पुरस्कार समारोह में मैं पहली बार सचिन भाई से मिला। उनसे मिलने को लेकर मन में खुशी के साथ घबराहट भी थी। लेकिन उनसे हाथ मिलाते ही वह घबराहट दूर हो गई। ऐसा लगा मानो पूरी कायनात मुझे मिल गई हो। बचपन में टीवी पर उन्हें देखकर बड़ा हुआ था आज उनके साथ एक मंच पर बैठा था। इसकी कल्पना मात्र से ही मन रोमांचित हो रहा था। मैं खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहा था। वह मेरे आदर्श थे। अपने हीरो के हाथों पुरस्कार लेकर मैं खुद को गद्गद महसूस कर रहा था। वह पुरस्कार मेरी जिंदगी की धरोहर बन गया।

जब बढ़ाया उत्साह
थोड़ी देर बाद वह मेरे पास आए और मुझसे कहा, विजेंद्र तुम बहुत अच्छा कर रहे हो, अपना यह प्रदर्शन जारी रखना। तुमने भारतीय मुक्केबाजी को नई दिशा दी है। इसके लिए तुम्हें बधाई हो। उनके इन शब्दों ने न केवल मेरा उत्साह बढ़ाया, बल्कि मेरे लिए यह प्रेरणास्रोत भी बन गए।

साधारण इंसान
सचिन भाई जितने बड़े क्रिकेटर उतने ही महान इंसान भी हैं। तभी तो वह क्रिकेटरों के ही नहीं दूसरे खिलाड़ियों के भी हीरो हैं। मैं उनके साधारण व्यक्तित्व का कायल हूं। उनके जैसा खिलाड़ी सदियों में पैदा होता है। उन्होंने क्रिकेट में जो रिकॉर्ड बनाए हैं दूसरे क्रिकेटरों के लिए उन्हें छूना नामुमकिन है। तेंदुलकर धूमकेतु की तरह हमेशा भारतीय खेलों में चमकते रहेंगे।

पाक-साफ छवि
क्रिकेट में आए दिन विवाद होते हैं, लेकिन सचिन भाई हमेशा इससे दूर रहे। 24 साल का उनका बेदाग करियर उन्हें सबसे अलग और खास बनाता है। क्रिकेट को उनकी कमी हमेशा खलती रहेगी पर यह भी सच है कि उन्होंने क्रिकेट को जो लोकप्रियता दिलाई है वह अनवरत जारी रहेगी।
200वें टेस्ट का बनूंगा गवाह

मैं भले ही रोहतक में उनका अंतिम रणजी मैच नहीं देख सका, लेकिन मुंबई में उनके 200वें टेस्ट का गवाह जरूर बनूंगा। मैं चाहूंगा टीम उन्हें विजयी विदाई दे और वह अपने अंतिम मैच में दोहरा शतक लगाएं।
[मुक्केबाज विजेंद्र सिंह की राजीव शर्मा से बातचीत पर आधारित]

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