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Monday, 13 January 2014

Today only Cricket got its first sixer

(शिवम् अवस्थी), नई दिल्ली। जेंटेलमैन गेम यानी क्रिकेट यूं तो सदियों से खेल प्रेमियों को लुभाता आया है, लेकिन इस खेल की एक सबसे दिलचस्प चीज है जिसने इसे नया रूप, रंग और रोमांच दिया..और वो है, 'छक्का'। कोई सिक्सर कहता है, कोई सिक्स कहता है, कोई छक्का कहता है तो कोई सिर्फ छह रन..लेकिन बल्ले से जब भी ये लगता है तो मैदान गूंज उठता है। आज 14 जनवरी का ही वो दिन था जब क्रिकेट को उसका पहला सिक्सर मिला था, क्या था पूरा किस्सा, आइए जानते हैं।

1897-98 की एशेज सीरीज के दौरान इंग्लैंड ने ऑस्ट्रेलिया का दौरा किया था और इसी दौरे के तीसरे टेस्ट में हमको मिला था टेस्ट क्रिकेट का पहला सिक्सर। आपको बता दें कि इससे पहले भी एक गेंद पर कई बार छह रन तो दिए गए थे लेकिन वो हमेशा ओवरथ्रो के जरिए होते थे, यानी कभी मात्र एक शॉट के दम पर किसी को छह रन नहीं मिला थे। इसका कारण यह था कि उस दौरान नियमों के मुताबिक ऐसा सिर्फ तब मुमकिन था जब आप गेंद को मैदान से बाहर पहुंचा दें।

एडिलेड में खेले गए इस मैच में ऑस्ट्रेलिया के सलामी बल्लेबाज जो डार्लिग ने ये कारनामा कर दिखाया। उन्होंने इस मैच में 94 के स्कोर पर जॉनी ब्रिग्स की गेंद पर आगे बढ़कर ऐसा शॉट जड़ा कि गेंद मैदान के बाहर दूसरे पार्क में जाकर गिरी, इसके साथ ही उन्होंने इतिहास का पहला सिक्सर अपने नाम किया और साथ ही एशेज टेस्ट सीरीज इतिहास में पहली बार कोई बल्लेबाज छक्के के दम पर अपने शतक तक पहुंचा। इस मैच में डार्लिग ने 2 और छक्के भी लगाए और 178 रनों का स्कोर बनाया। कंगारू यह मैच पारी और 13 रन से जीते थे।

उसके बाद अगली सीरीज में इंग्लैंड जाकर भी वो इंग्लैंड में सिक्सर जड़ने वाले पहले खिलाड़ी बने। डार्लिग ही वो खिलाड़ी थे जो 91 मिनट में पहला सबसे तेज शतक जड़ने वाले खिलाड़ी बने। वो ही पहले बल्लेबाज थे जिन्होंने एक सीरीज में सबसे पहले 500 रन पूरे किए थे और एक ही सीरीज में तीन शतक जड़ने वाले भी पहले क्रिकेटर वही थे। आज बेशक वनडे और टी20 जैसे प्रारूपों के बढ़ते खेल में सिक्सर की मांग ओवर दर ओवर बढ़ती जा रही है, जिस वजह से ये बेहद आम चीज हो गई है, लेकिन भविष्य में जब भी इस दिलचस्प शॉट के इतिहास को याद किया जाएगा तो डार्लिग और 14 जनवरी हमेशा सुनहरे अक्षरों में मौजूद रहेंगे।

Thursday, 2 January 2014

Is saddest cricket retirement on the way

 
(शिवम् अवस्थी), नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट ने कई खिलाड़ियों को अर्श से फर्श पर आते देखा, कुछ तो उतार-चढ़ाव भरे रास्तों को संघर्ष करके पार कर गए तो कुछ कहीं खराब फॉर्म की धुंध में कहीं खो से गए। देश ने कई क्रिकेटरों को हाल में संन्यास लेते देखा लेकिन एक खिलाड़ी ऐसा भी है जिसका संन्यास शायद अब तक का सबसे बड़ा दुखद संन्यास हो सकता है, क्योंकि मौजूदा हालातों को देखें तो मुमकिन है कि ये खिलाड़ी अब मैदान पर बिना उतरे ही क्रिकेट को अलविदा कह दे।

हम बात कर रहे हैं एक समय भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे विस्फोटक बल्लेबाज की पहचान के साथ पिच पर उतरने वाले वीरेंद्र सहवाग की। सहवाग ने मार्च 2013 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपना आखिरी टेस्ट खेला था, जबकि जनवरी 2013 में उन्होंने अपना आखिरी वनडे खेला था। तकरीबन एक साल होने जा रहा है और वीरेंद्र सहवाग की टीम में वापसी नहीं हो सकी। उम्मीद जताई जा रही थी कि घरेलू क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन करके सहवाग टीम इंडिया में दोबारा अपनी दावेदारी पेश करेंगे, लेकिन मौजूदा रणजी सीजन खत्म हो गया और सहवाग यहां पूरी तरह से फ्लॉप साबित हुए। नतीजतन उनकी टीम रणजी ट्रॉफी के क्वॉर्टर फाइनल में लगातार चौथी बार जगह पाने में असफल रही। सहवाग ने मौजूदा रणजी सीजन में दिल्ली के बाहर होने से पहले 7 मैचों में महज 234 रन बनाए हैं। आपको बता दें कि भारत-दक्षिण अफ्रीका सीरीज में सहवाग को तरजीह नहीं दी गई थी, और अब न्यूजीलैंड दौरे से भी उनका नाम नदारद है। न्यूजीलैंड से लौटने के बाद भारत को इंग्लैंड दौरे के लिए जाना है और जब सहवाग को इस दौरान खेलने का मौका ही नहीं मिलेगा तो वो भला कैसे टीम में वापसी करेंगे, इस पहलू को अगर देखें तो मुमकिन है कि सहवाग अब शायद ही हाल में टीम इंडिया में वापसी करने में सफल रहें, ऐसे में काफी हद तक ये कयास लगाए जाने लगे हैं कि सहवाग का करियर अब खत्म होने की कगार पर है।

वीरेंद्र सहवाग अगर मैदान पर उतरे बिना ही संन्यास की घोषणा करते हैं तो जाहिर तौर पर ये अब तक का सबसे दुखद संन्यास होगा। ये वो खिलाड़ी है जिसने कुछ ऐसे कीर्तिमान हासिल किए हैं जो भारतीय क्रिकेट इतिहास में आज तक कोई नहीं कर सका। एक नजर उन कुछ खास रिकॉर्ड्स पर। 

1. वनडे इतिहास में सबसे बड़ी पारी (219 रन)।
2. भारतीय टेस्ट इतिहास में तिहरा शतक मारने वाला पहला और एकमात्र खिलाड़ी।
3. दो तिहरे शतक जड़ने वाला एकमात्र भारतीय क्रिकेटर (309, 319)।
4. वनडे इतिहास में दूसरा सबसे तेज शतक (60 गेंदों में 100 रन)।
5. भारत के सबसे बड़े टेस्ट स्कोर (726-9) में सहवाग का 293 रनों का महत्वपूर्ण योगदान।
6. भारत के सबसे बड़े वनडे स्कोर (418 रन) में सहवाग का 219 रनों का रिकॉर्ड योगदान।
7. वनडे में भारत की सबसे बड़ी जीत (257 रनों से जीत) में सहवाग का सर्वाधिक 114 रनों का योगदान।
8. भारत की तरफ से पहले विकेट के लिए सबसे बड़ी साझेदारी (410 रन) राहुल द्रविड़ के साथ 2006 में पाकिस्तान के खिलाफ लाहौर में। ये साझेदारी विश्व क्रिकेट में तीसरे नंबर पर आती है। 

ऐसे ही ना जाने कितने रिकॉर्ड वीरेंद्र सहवाग ने अपने नाम किए और ज्यादातर उनकी पारियों में भारत को जीत ही मिली। पहले नंबर पर भारत को टेस्ट और वनडे में इतना विस्फोटक खिलाड़ी आज तक नहीं मिला। एक नजर सहवाग के अब तक के आंकड़ों पर: 

- 104 टेस्ट मैचों में 49.34 की औसत से 8586 रन (23 शतक)
- 251 वनडे मैचों में 35.04 की औसत और 104.33 के शानदार स्ट्राइक रेट से 8273 रन (15 शतक)
- टेस्ट में गेंदबाजी करते हुए 40 विकेट
- वनडे में गेंदबाजी करते हुए 96 विकेट

Story about new player Ishwar Pandey

नई दिल्ली। कुछ लोगों के लिए जिंदगी की ट्रेन उस पटरी पर चलती है जहां कई स्टेशन होते हैं जबकि कुछ जब उसी ट्रेन पर सवार होते हैं तो वह एक्सप्रेस का रुख अख्तियार कर सीधे मंजिल पर जाकर ही रुकती है. मध्यप्रदेश के युवा क्रिकेटर इश्वर पांडे भी उन्हीं में से एक हैं। जहां एक तरफ बाकी युवा खिलाड़ी बचपन से ही मैदान में जुट जाते हैं ताकि एक दिन देश के लिए खेल सकें, वहीं दूसरी तरफ इश्वर जैसे खिलाड़ी भी होते हैं जिन्हें 12वीं की परीक्षा तक क्रिकेट से कोई लेना-देना तक नहीं था और आज न्यूजीलैंड की कठिन पिचों पर हुंकार भरने के लिए टेस्ट और वनडे, दोनों ही भारतीय टीमों में उनका चयन हो गया है। शायद इसे ही कहते हैं हुनर और किस्मत का जलवा।

नाम- इश्वर पांडे, उम्र-24, जन्म स्थान- रीवा (मध्यप्रदेश).भारत के सबसे बड़े राज्यों में से एक के, छोटे से शहर से आने वाले इश्वर पांडे हाल में दक्षिण अफ्रीका में दक्षिण अफ्रीका-ए के खिलाफ भारत-ए से खेलते हुए अपने डेब्यू पर हीरो बनकर उभरे थे। इश्वर ने इस मैच की पहली पारी में 19 ओवरो में महज 46 रन देकर चार अहम विकेट लिए जबकि दूसरी पारी में 9.5 ओवर में उन्होंने 25 रन देकर तीन और विकेट हासिल किए थे। इश्वर पर छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक आज से पांच साल पहले इस क्रिकेटर का इस खेल से कोई लेना-देना भी नहीं था। स्कूल के आखिरी दिनों में गर्मियों की छुंिट्टयों में उन्होंने अपने दोस्तों के साथ सिर्फ मस्ती के लिहाज से एक क्रिकेट ट्राइल में मौका आजमाने का मन बनाया और फॉर्म भर डाला। दरअसल, वह क्रिकेट ट्राइल मध्यप्रदेश डीविजनल क्रिकेट की रीवा टीम के लिए था। यहां पर उनकी लंबी चौड़ी कद काठी और गेंद फेंकने की अद्भुत क्षमता से सब इतना प्रभावित हुए कि वह जल्द ही रीवा से खेलने भी लगे और कुछ ही दिनों में रणजी सीजन के एक खिलाड़ी ने इश्वर की गेंदों को देखा तो वह हैरत में रह गए और उन्होंने लोकल क्लब में इस खिलाड़ी की चर्चा शुरू की।

इश्वर के पिता (एक पूर्व सैनिक) चाहते थे कि इश्वर अपनी पढ़ाई पर ध्यान दें और उनका खेल से जुड़ना काफी मुश्किल नजर आ रहा था, हालांकि उनके यूनिवर्सिटी कोच ने इश्वर के पिता को मनाया और जल्द ही इश्वर मध्यप्रदेश की अंडर-19 टीम के लिए भी खेलने लगे। शुरुआती दौर खराब रहा लेकिन इश्वर को अब आगे बढ़ने का चस्का लग चुका था। पिताजी का दबाव जारी थी लेकिन अपने क्रिकेट के जोश की खातिर इश्वर ने पढ़ाई की स्ट्रीम ही बदल डाली और कॉलेज में विज्ञान से आर्ट्स स्ट्रीम में नाम दर्ज करा दिया ताकि क्रिकेट को ज्यादा समय दे सकें।

इसी बीच पूर्व भारतीय क्त्रिकेटर व मध्यप्रदेश के खिलाड़ी अमय खुरसिया ने इश्वर की प्रतिभा देखी और उन्हें चेन्नई की एमआरएफ पेस अकादमी भेजने का फैसला लिया। इसके बाद जो बदलाव इश्वर में आए उसने सभी की आंखें खोल दीं। स्कूल के बाद पांच साल के अंदर आज इश्वर घरेलू क्त्रिकेट से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक हर जगह चर्चा में हैं। पिछले रणजी सीजन में वह टूर्नामेंट के सर्वाधिक विकेट लेने वाले खिलाड़ी भी रहे थे। उन्होंने मध्यप्रदेश की तरफ से खेलते हुए 48 विकेट चटकाए थे और उस दौरान उन्होंने कुछ मैचों में बल्ले से भी अपना जलवा दिखाया। आइपीएल-6 में वह पुणे वॉरियर्स से खेले लेकिन ज्यादा कुछ कर नहीं पाए लेकिन कभी हार ना मानने वाले इस क्रिकेटर को दक्षिण अफ्रीका के भारत-ए दौरे पर चयनकर्ताओं ने मौका दिया और अपने इस डेब्यू में ही उन्होंने 7 अहम विकेट लेकर भविष्य का उभरता हुआ गेंदबाज बनने की दस्तक दे डाली। छह फुट दो इंच लंबे चौड़े इस गेंदबाज की रफ्तार और स्विंग उसका सबसे बड़ा हथियार है और जिस रफ्तार में पिछले पांच साल उनकी जिंदगी में अलग मोड़ लेकर आए हैं, ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि अब शायद टीम इंडिया को वो तेज गेंदबाज मिल जाए जिसकी दरकार कई सालों से थी।

Thursday, 26 December 2013

It seems as if Team India is playing at home says Shastri




भारत पहले दिन पूरी तरह हावी रहा। यह ऐसा था जैसे टीम इंडिया घर में मैच खेल रही हो। बल्लेबाजों का रवैया सकारात्मक रहा और अब उनका ध्यान सिर्फ एक बार ही बल्लेबाजी करने का होगा। 

गर्म मौसम और पहले दिन की धीमी विकेट पर भारत ने महत्वपूर्ण टॉस जीता। प्रभावशाली लग रहे शिखर धवन के पहले सत्र में आउट होने के बावजूद भारतीय ओपनरों ने च्च्छी शुरुआत की। धवन के आउट होने के बाद मुरली विजय और चेतेश्वर पुजारा ने जिम्मेदारी संभाली। चायकाल तक दक्षिण अफ्रीकी टीम पूरी तरह बैकफुट पर थी। ऐसा नहीं है कि दक्षिण अफ्रीकी गेंदबाजों ने च्च्छी गेंदबाजी नहीं की। खासतौर पर स्टेन और मोर्केल ने तो सुबह लाजवाब स्पेल फेंका। ऐसा लग रहा था जैसे उन्होंने वांडरर्स पर की गई अपनी गलतियों से सबक सीखा है। यही वजह रही कि उन्होंने स्टंप पर अधिक गेंदें फेंकी। बीच के ओवरों में उन्हें रिवर्स स्विंग भी हासिल हुई। मगर बावजूद इसके युवा भारतीय बल्लेबाज चट्टान की तरह अडिग रहे। मेजबान टीम धीरे-धीरे गेंद और बल्ले की इस जंग में पिछड़ती चली गई। 

यह टेस्ट एक की बजाय कई कारणों से बेहद महत्वपूर्ण है। यह मैच इस खेल के महान खिलाड़ियों में से एक जैक कैलिस का आखिरी टेस्ट है। वहीं भारत इसे जीतकर दक्षिण अफ्रीका में अपनी पहली सीरीज जीत पर निगाहें टिकाए है। किंग्समीड की पिच भारतीय गेंदबाजी आक्रमण के एकदम मुफीद है, जो रिवर्स स्विंग और स्पिन पर निर्भर है। पहली पारी में बड़ा स्कोर भारत को लक्ष्य हासिल करने में मदद कर सकता है। विजय पिछले एक हफ्ते के समय में अधिक परिपक्व हुए हैं। वांडरर्स में दूसरी पारी में उनकी बल्लेबाजी ने दिखाया कि वह लय में लौट रहे हैं। यहां भी उन्होंने अधिकतर शॉट सीधे बल्ले से खेले। उन्होंने विकेट के दोनों ओर सहजता से ड्राइव लगाए। कुछ शॉट तो वाकई कमाल के थे। ब्रेक के समय वह विदेश में अपने पहले शतक की ओर मजबूती से बढ़ रहे थे।
पुजारा अब वाकई भरोसेमंद हैं। उन्होंने एक और शानदार अर्धशतक लगाया और फिर बड़े स्कोर की ओर बढ़ रहे हैं। घरेलू टीम के लिए यह स्थिति बिल्कुल भी ठीक नहीं है। विशेषकर यह देखते हुए कि रनों के लिए भूखे कई बल्लेबाज अभी भारतीय ड्रेसिंग रूम में अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं।
(टीसीएम)

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7 players who left Cricket in 2013


(शिवम् अवस्थी), नई दिल्ली। क्रिकेट इतिहास में शायद साल 2013 एक ऐसे साल के रूप में याद किया जाएगा जहां मैदान पर कई बार भावनाओं का तूफान आया, करोड़ों आंखें नम हुईं और ना जाने कितने क्रिकेट से या उसके कुछ प्रारूपों से सदा के लिए अलविदा कहकर चल दिए। यकीन नहीं होता कि एक साल में तकरीबन 25 क्रिकेट सितारों ने अपने फैंस की आंखें नम छोड़ दीं। हम आपको रूबरू कराते हैं उन 7 लम्हों से, यानी उन 7 खिलाड़ियों के संन्यास से, जो शायद क्रिकेट फैंस कभी नहीं भूल पाएंगे, इनमें आपका फेवरेट कौन रहा?... 

1. सचिन तेंदुलकर (भारत):
साल 2013 के अंत में वो हुआ जिसकी कल्पना शायद ही कभी किसी ने की थी। 1989 से 2013 तक तकरीबन 24 साल क्रिकेट की पिच पर राज करने वाला इस खेल के सबसे जगमगाते कोहिनूर सचिन रमेश तेंदुलकर ने मैदान को अलविदा कह दिया। पहले वनडे से, फिर टी20 से और आखिर में वानखेड़े स्टेडियम पर वेस्टइंडीज के खिलाफ 200वां टेस्ट खेलकर एक भावुक भाषण के जरिए सचिन ने करोड़ों आंखें नम कर दीं और इस खेल को अलविदा कहा। टेस्ट वनडे और टी20 मिलाकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में तकरीबन 34,357 रन और कुल 100 शतक जड़ने वाले इस खिलाड़ी का संन्यास क्रिकेट इतिहास का सबसे दिलचस्प संन्यास कहा जा सकता है। 

2. रिकी पोंटिंग (ऑस्ट्रेलिया):
ऑस्ट्रेलिया के सफलतम कप्तान रिकी पोंटिंग ने 2013 में ही क्रिकेट के सभी प्रारूपों व प्रथम श्रेणी क्रिकेट को भी अलविदा कहा। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के सभी प्रारूपों में 27483 रन बनाए जिसमें 71 शतक शामिल रहे। ऑस्ट्रेलिया को दो विश्व कप हासिल कराने वाले इस कप्तान व दिग्गज खिलाड़ी ने करोड़ों क्रिकेट फैंस की आंखें नम करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। 

3. राहुल द्रविड़ (भारत):
टीम इंडिया की वो दीवार जो शायद कभी किसी के सामने झुकी। एक ऐसा खिलाड़ी जिसकी तकनीक की पूरी दुनिया कायल हुई और ना जाने भारत ने कितने मैच उनकी वजह से ही जीते। द्रविड़ ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को तो 2012 में ही ऑस्ट्रेलिया दौरे के साथ अलविदा कह दिया था, लेकिन मैदान से विदाई उन्होंने आइपीएल से ली और अपने करोड़ों फैंस की आंखें नम कर दीं, क्योंकि आइपीएल-6 के फाइनल के बाद फैंस ने उन्हें दोबारा मैदान पर कभी नहीं देखा। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में तकरीबन 25 हजार रन और 48 जड़ने वाले इस दिग्गज का मैदान से अलविदा कहना भी भावुक लम्हों में से रहा। 

4. माइक हसी (ऑस्ट्रेलिया):
ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी व मिस्टर क्रिकेट के नाम से मशहूर इस खिलाड़ी ने इसी साल अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहा। जनवरी में उन्होंने अचानक अपने संन्यास की घोषणा की और सिडनी में श्रीलंका के खिलाफ आखिरी टेस्ट खेलकर फैंस को भावुक छोड़ दिया। सबने कहा कि उनमें काफी क्रिकेट बाकी था लेकिन वो टीम को बीच में छोड़कर चले गए। फिलहाल वो अब भी दुनिया की तमाम टी20 लीग खेल रहे हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उनका संन्यास सबसे भावुक लम्हों में से रहा। हसी ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 14,398 रन बनाए जिसमें 68 शतक शामिल रहे।

5. ग्रीम स्वान (इंग्लैंड):
इंग्लैंड के दिग्गज स्पिनर व उनके इतिहास के छठे सबसे सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज ग्रीम स्वान ने साल खत्म होते-होते अचानक एशेज सीरीज के बीच क्रिकेट को अलविदा कहने का मन बना लिया। सब हैरान थे, लेकिन एक खिलाड़ी मैदान छोड़ने का मन बना चुका था। कारण साफ नहीं था लेकिन विदाई अचानक हो चुकी थी। स्वान ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में सभी प्रारूप मिलाकर 410 विकेट हासिल किए और उन्हें इंग्लैंड के पिछले कुछ सालों में टेस्ट व वनडे में सर्वश्रेष्ठ टीमों में शुमार करने के बेहतरीन योगदान के लिए हमेशा जाना जाएगा।

6. शेन वॉर्न (ऑस्ट्रेलिया):
टेस्ट क्रिकेट में 708 विकेट, वनडे में 293 विकेट साफ करते हैं कि इस क्रिकेटर ने क्रिकेट इतिहास और कंगारू टीम में क्या भूमिका निभाई। वॉर्न ने यूं तो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को 2007 में ही अलविदा कह दिया था लेकिन मैदान से उनकी आखिरी विदाई जनवरी 2013 में हुई जब उन्होंने अपने बिग बैश टी20 टूर्नामेंट मैच में आखिरी बार शिरकत की। मैदान पर मौजूद हजारों दर्शकों ने लेग स्पिन के इस बादशाह को आखिरी बार जलवा बिखेरते देखा और उन्हें सदा के लिए भावुक होते हुए मैदान से अलविदा कहा। 

7. जैक्स कैलिस (दक्षिण अफ्रीका):
साल के खत्म होते-होते क्रिकेट फैंस को कई भावुक लम्हों से दो-चार होना पड़ा और साल अंत होते-होते भी एक दिग्गज ने टेस्ट क्रिकेट के जरिए अपने संन्यास की राह बनाने का फैसला ले लिया। दक्षिण अफ्रीका व दुनिया के सबसे महान व सफल ऑलराउंडर जैक्स कैलिस ने भारत के खिलाफ डरबन में अपने करियर का आखिरी टेस्ट खेलने का फैसला किया और अब 2013 के बाद इस महानतम खिलाड़ी को हम कभी सफेद कपड़ों में नहीं देख सकेंगे। टेस्ट में 13,174 रन और 292 विकेट उनकी महानता को बयां करते हैं। 

2013 में संन्यास लेने वाले क्रिकेट खिलाड़ी (किसी भी प्रारूप से):
1. मैथ्यू होगार्ड (इंग्लैंड)
2. डेरेन मैडी (इंग्लैंड)
3. संजय बांगर (भारत)
4. थिलन समरवीरा (श्रीलंका)
5. ग्रीम स्वान (इंग्लैंड)
6. सइराज बहतुले (भारत)
7. माइक हसी (ऑस्ट्रेलिया)
8. पॉल हैरिस (दक्षिण अफ्रीका)
9. बेथ मॉर्गन (महिला क्रिकेटर, इंग्लैंड)
10. शेन वॉर्न (ऑस्ट्रेलिया)
11. लू विंसेंट (न्यूजीलैंड)
12. लीसा स्थालेकर (महिला क्रिकेटर, ऑस्ट्रेलिया)
13. रिकी पोंटिंग (ऑस्ट्रेलिया)
14. एंथोनी मैकग्रा (इंग्लैंड)
15. इयन ब्लैकवेल (इंग्लैंड)
16. जेम्स मार्शल (न्यूजीलैंड)
17. क्रिस मार्टिन (न्यूजीलैंड)
18. मैथ्यू सिंक्लेयर (न्यूजीलैंड)
19. रे प्राइज (जिंबॉब्वे)
20. काइल जार्विस (जिंबॉब्वे)
21. राहुल द्रविड़ (भारत)
22. स्टीव हार्मिसन (इंग्लैंड)
23. अजित अगरकर (भारत)
24. सचिन तेंदुलकर (भारत)
25. जैक्स कैलिस (दक्षिण अफ्रीका)

Source : Cricket News

MCG creates world record for most spectators in a test match


मेलबर्न। ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच मौजूदा एशेज सीरीज के चौथे टेस्ट मैच की शुरुआत में ही एक विश्व रिकॉर्ड बन गया, दिलचस्प चीज यह है कि ये रिकॉर्ड खेल या किसी खिलाड़ी के जरिए नहीं बना बल्कि इसका श्रेय जाता है मैदान पर आने वाले दर्शकों को। मैच के पहले दिन मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर 90,831 लोग मैच देखने पहुंचे जो टेस्ट इतिहास में किसी भी दिन में अब तक का सर्वाधिक दर्शकों का रिकॉर्ड है।

गौरतलब है कि मौजूदा एशेज सीरीज में कंगारू टीम 3-0 से अजय बढ़त हासिल कर चुकी है और अब उसका लक्ष्य 5-0 से क्लीन स्वीप करना होगा, ऐसे में घरेलू दर्शकों की दिलचस्पी इस सीरीज में और बढ़ चुकी है। वैसे ये दिलचस्प पहलु है कि इससे पहले जब टेस्ट क्रिकेट में सर्वाधिक दर्शकों का रिकॉर्ड दर्ज हुआ था तो वो भी इसी मैदान (एमसीजी) पर था। एक लाख दर्शकों की क्षमता वाले इस स्टेडियम में पिछली बार 11 फरवरी, 1961 को ऑस्ट्रेलिया-वेस्टइंडीज मैच में 90,800 लोगों ने एंट्री लेकर रिकॉर्ड बनाया था, लेकिन इस बार संख्या 31 दर्शकों के रूप में बढ़ी और एक नया विश्व रिकॉर्ड दर्ज हो गया। जिस समय दर्शकों की संख्या का मैदान पर ऐलान किया गया उस समय इंग्लैंड 159 रन पर अपनी 3 विकेट गंवा चुका था। 

Source : News Headlines

jacques kallis to retire from test


डरबन। दक्षिण अफ्रीका के सर्वकालिक महान हरफनमौला खिलाड़ी जैक कैलिस ने भारत के साथ 26 दिसंबर से किंग्समीड मैदान पर होने वाले दूसरे टेस्ट मैच के बाद टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कहने का फैसला किया है। कैलिस ने कहा है कि वह 2015 विश्व कप में हिस्सा लेना चाहते हैं।

कैलिस ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि डरबन टेस्ट उनका अंतिम टेस्ट मैच होगा। कैलिस के मुताबिक वह वनडे और टी-20 क्रिकेट में सक्रिय रहेंगे। कैलिस ने कहा कि वह 2015 में ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की संयुक्त मेजबानी में होने वाले विश्व कप में खेलने की इच्छा रखते हैं।

38 साल के कैलिस ने अपने फैसले को लेकर कहा, '18 साल पहले पर्दापण के बाद से लगातार दक्षिण अफ्रीकी टीम के ड्रेसिंग रूम का सदस्य बने रहना मेरे लिए गर्व और सम्मान की बात है। मैंने मैदान में बिताए गए हर पल का आनंद लिया और अब मेरे लिए टेस्ट मैचों से संन्यास लेने का वक्त आ गया है। मेरे लिए यह फैसला आसान नहीं था, खासतौर पर ऐसे में जब ऑस्ट्रेलिया के साथ मैच होने वाले हैं और टीम सफलता का जमकर लुत्फ ले रही है। लेकिन मेरा मानना है कि मैंने टेस्ट मैचो में अपने हिस्से का योगदान अपनी टीम को दे दिया है।'

कैलिस ने दक्षिण अफ्रीका के लिए अब तक 165 टेस्ट मैचों में 13174 रन बनाए हैं। उनके नाम 44 शतक और 58 अर्धशतक हैं। कैलिस ने 32.53 के औसत से 292 विकेट भी लिए हैं। वह टेस्ट और वनडे मैचों में 10 हजार रन पूरे करने वाले पहले दक्षिण अफ्रीकी खिलाड़ी हैं।

कैलिस ने 20 साल की उम्र में पहला टेस्ट मैच खेला था। कैलिस मानते हैं कि कोलकाता नाइटराइर्डस (केकेआर) टीम के साथ इंडियन प्रीमियर लीग (आइपीएल) खिताब जीतना उनके करियर के अहम मुकामों में से एक है। क्रिकेट दक्षिण अफ्रीका (सीएसए) ने भी कैलिस के योगदान को याद किया। बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हारून लोर्गट ने कहा कि कैलिस का संन्यास लेना तय था और वह इसे लेकर हैरान नहीं हैं। कैलिस का दक्षिण अफ्रीकी क्रिकेट में योगदान अतुलनीय रहेगा। हमारे लिए यह दुख की बात है कि हमारे देश का महानतम खिलाड़ी 2013 के अंतिम हफ्ते में अपने करियर का अंतिम टेस्ट मैच खेलेगा।

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जैक कैलिस (टेस्ट करियर) :::
टेस्ट मैच, रन, नाबाद, उच्चतम, औसत, स्ट्राइक रेट, 100/50, कैच, विकेट, सर्वश्रेष्ठ
165, 13174, 40, 224, 55.12, 46.08, 44/58, 199, 292, 6/54

Source : Cricket Ranking