गौरतलब है कि काफी लंबे समय से प्रियंका को कांग्रेस में लाने की मांग उठ रही है। इस मांग को लोकसभा चुनाव में हुई करारी हार के बाद और हवा दी जा रही है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की मानें तो इस बार इसका असर भी दिखाई देने लगा है। हालांकि उन्हें यह जिम्मेदारी इस वर्ष होने वाले राज्यों के विधानसभा चुनाव के बाद दिए जाने की चर्चा है। लेकिन कांग्रेस को अभी इसमें कुछ दिक्कतें दिखाई दे रही हैं।
माना जा रहा है कि राष्ट्रीय संगठन और प्रदेश की इकाई में अहम पदों पर काबिज नेता इस फैसले पर नाराजगी जाहिर कर सकते हैं। हालांकि इस बाबत पार्टी की मुहर लगने के बाद भी इस पर अंतिम फैसला खुद प्रियंका को ही लेना है। लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी की विफलता के चलते प्रियंका को संगठन में लाने की मांग जिस तेजी से जोर पकड़ती जा रही है उससे कहीं न कहीं राहुल गांधी और सोनिया गांधी के नेतृत्व पर सवालिया निशान लग गया है।
कुछ नेता यह जरूर मानते हैं कि यदि प्रियंका संगठन में आ भी जाती हैं तो भी इससे राहुल के पद पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है। यहां पर एक और बात ध्यान देने वाली यह है कि लोकसभा चुनाव से पूर्व भी इस तरह की मांग पर संगठन में विचार विमर्श किया गया था कि प्रियंका को यूपी की कमान सौंप देनी चाहिए। लेकिन उस समय इस पर सहमति नहीं बन सकी थी जिस वजह से इसे लागू नहीं किया गया था।
Source : Newspaper
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