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Tuesday, 2 September 2014

Sheetal who born in red light area, will go to america

मुंबई के रेडलाइट एरिया कमाठीपुरा की एक सेक्स वर्कर की बेटी शीतल जैन ने ना सिर्फ सपना देखा, बल्कि अब वह उस ओर कदम भी बढ़ा चुकी है। आगामी 16 सितंबर को शीतल संगीत सीखने के अपने सपने के साथ अमेरिका के लिए उड़ान भरेगी।

सेक्स वर्करों के बच्चों की जिम्मेदारी उठाने वाले एनजीओ क्रांति की देखरेख में पल रही शीतल ने कहा कि उसका सपना था कि वह खूब पढ़े, खेले और आम बच्चों की तरह जिंदगी जिए। लेकिन एक रेडलाइट एरिया में पलने बढ़ने के चलते उसे कभी अपने सपने पूरे होने की उम्मीद नहीं थी। शीतल ने कहा, 'मुझे कहा जाता था कि एक सेक्स वर्कर की बेटी सेक्स वर्कर ही बन सकती है।' 19 वर्षीय शीतल दो साल पहले क्रांति से जुड़ी। क्रांति के सह संस्थापक रोबिन चौरासी ने कहा कि इन दो सालों में शीतल एक शर्मीली और उत्साहहीन लड़की से साहसी और आत्मविश्वास से परिपूर्ण युवती बन गई है। वह अब 10वीं कक्षा की छात्र है। उसने बच्चों के यौन शोषण से लेकर सेक्स वर्कर के अधिकारों तक विभिन्न मुद्दों पर हजारों लोगों के सामने अपने विचार रखे हैं। शीतल ढोल बजाना सीखना चाहती है। उसका कहना है कि संगीत में बहुत ताकत है। वह इसके जरिए अपने जैसी लड़कियों की आवाज को बुलंद करेगी। इस सपने को पूरा करने के लिए वह अमेरिका जा रही है।

एनजीओ से जुड़े लोग फेसबुक तथा अन्य माध्यमों से शीतल के इस सपने को पूरा करने के लिए फंड जुटा रहे हैं। यूएस ड्रम स्कूल की फीस, रहने और खाने समेत एक साल का कुल खर्च करीब 20,000 अमेरिकी डॉलर आएगा। क्रांति एनजीओ से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता हरीश अय्यर ने फेसबुक पर 'शीतल फॉर ए डे' अभियान भी चलाया है।

Friday, 29 August 2014

Narendra modi leaves for japan

भूटान, ब्राजील और नेपाल का दिल जीतने का बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज सुबह जापान का दिल जीतने के लिए रवाना हो गए। मोदी के इस दौरे से दोनों देशों को काफी उम्मीदें हैं। उम्मीद है कि मोदी जापान यात्रा में रिश्तों की एक नई इबारत लिखेंगे। प्रधानमंत्री सीधे जापान की अध्यात्मिक नगरी कहे जाने वाले क्योटो शहर पहुंचेंगे। यहां जापानी प्रधानमंत्री शिंजो अबे खुद मोदी का स्वागत करेंगे। यहां मोदी रिश्तों की एक नई परिभाषा लिखेंगे, विकास का नया पैमाना गढ़ेंगे।

पांच दिन की इस यात्रा में मोदी पुरानी दोस्ती का रंग और गाढ़ा करेंगे। जापान से एफडीआइ दोगुना करने की कोशिश करेंगे। भारत के पास जमीन है और जापान के पास तकनीक। मोदी इसे जोड़कर मेड इन इंडिया का सपना पूरा करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ेंगे।

प्रधानमंत्री मोदी ने जापान की जो उड़ान भरी है। ये उड़ान सिर्फ नरेंद्र मोदी की ही नहीं, उनके साथ देश की तमाम उम्मीदों और संभावनाओं की भी उड़ान है। मोदी की जापान यात्रा दोनों देशों के लिए लिए काफी अहमियत रखती है। नेपाल और भूटान की तरह मोदी जापान का दिल भी जीतना चाहेंगे। जापान के प्रधानमंत्री शिंजो अबे को जापानी भाषा में ट्वीट करके उन्होंने इसकी शुरुआत कर दी है।

भारत के प्रधानमंत्री और साथ ही एक दर्जन से ज्यादा भारतीय इस्पात, उर्जा और आईटी क्षेत्र के उद्योगपतियों की आज से क्योटो में शुरू हो रही यात्रा से जापान और भारत दोनों को ही काफी कुछ हासिल करना है। दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे की पूरक हैं, जहां जापान में संपन्नता और तकनीकी साम‌र्थ्य है। वहीं भारत में प्राकृतिक संसाधन और अपनी अर्थव्यवस्था को आधुनिक बनाने की क्षमता है।

अभी तक दोनों आपसी हित के मुद्दों पर ज्यादा कुछ सफलता अर्जित नहीं कर सकें हैं। इसकी थोड़ी वजह तो विदेशी निवेश के प्रति भारत की प्रतिबंधात्मक नीतियां और थोड़ी वजह यह है कि जापानी कंपनियों ने अब तक चीन पर ध्यान केंद्रित कर रखा है। विश्लेषक मोदी की प्रधानमंत्री शिंजो अबे से मुलाकात को कुछ महत्वपूर्ण समझौतों के नजरिये से देखते हैं और परमाणु ऊर्जा उत्पादन प्रौद्योगिकी में सहयोग के क्षेत्र में लंबे समय से प्रतीक्षित करार की संभावना जताते हैं।

Tuesday, 5 August 2014

Amar Singh Shares same munch with Mulayam Singh Yadav

समाजवादी पार्टी के प्रमुख मुलायम सिंह यादव और राज्यसभा सदस्य अमर सिंह चार साल बाद फिर करीब होते नजर आ रहे हैं। उधर सूबे के कद्दावर मंत्री आजम खां ही सरकार से रूठ गये हैं।

कभी समाजवादी पार्टी को पानी पी-पीकर कोसने वाले अमर सिंह आज छोटे लोहिया कहे जाने वाले जनेश्वर मिश्र की याद में लखनऊ में होने वाले समारोह में समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो मुलायम सिंह के साथ एक मंच पर होंगे। इस कार्यक्रम के लिए खुद मुलायम सिंह यादव ने पुराने साथी रहे अमर को बुलाया है। इस मुलाकात को समाजवादी पार्टी की राजनीति में नई करवट के रूप में देखा जा रहा है।

एक समय समाजवादी पार्टी में 'की-मैन' रहे अमर सिंह को 2010 में पार्टी से बाहर कर दिया गया था, लेकिन अमर सिंह कभी भी मुलायम के खिलाफ तल्ख नहीं हुए। अलबत्ता, लोकसभा चुनाव के समय मुलायम के आजमगढ़ से चुनाव लड़ने का ऐलान करते ही अमर सिंह ने समर्थन देने का ऐलान कर सपा के साथ रिश्ते ठीक करने की राह खोली थी। अब सपा मुखिया ने जनेश्वर की जयंती पर लखनऊ में आयोजित समारोह में उन्हें आमंत्रित कर एक कदम और आगे बढ़ा दिया है।

अमर सिंह ने फोन पर 'दैनिक जागरण' से कहा 'वह मुलायमवादी रहे हैं। जनेश्वरजी के साथ काम किया है। उनके विचारों को जिया है। सिद्धांत अपनाने का प्रयास किया। अब मुलायम सिंह यादव ने जनेश्वर मिश्र पार्क के उद्घाटन के मौके पर मुझे आमंत्रित किया है। मैं इस कार्यक्रम में आऊंगा। उन्होंने फिर से सपा में शामिल होने की संभावना पर इन्कार किया। उन्होंने कहा कि लखनऊ में यह एक गैर राजनीतिक कार्यक्रम है। मैं, मुलायम के निमंत्रण पर इसमें शामिल हो रहा हूं। इसका कोई सियासी अर्थ नहीं है।' इससे इतर सूत्रों का कहना है कि बदलती सियासी परिस्थितियों में समाजवादी पार्टी को अमर सिंह के 'प्रबंधन' की जरूरत महसूस हो रही है।

गौरतलब है कि समाजवादी पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव अमर सिंह ने रालोद के टिकट पर इस बार आगरा के फतेहपुर सीकरी से लोकसभा का चुनाव लड़ा था, लेकिन जिसमें उनकी हार हुई थी। राज्यसभा सदस्य के रूप में उनका कार्यकाल इसी साल खत्म होने वाला है। माना जा रहा है कि अमर सिंह की फिर से राज्यसभा में जाने की उमंग हिलोर मार रही है। इसी कारण कुछ दिन से उन्होंने 'मुलायम चालीसा' का जाप शुरू कर दिया है। अमर सिंह ने कहा कि व्यक्ति मुलायम सिंह से मैं हमेशा से ही प्रभावित रहा हूं। व्यक्ति मुलायम सिंह से मैं कभी भी बात कर सकता हू, लेकिन हो सकता है कि राजनेता मुलायम सिंह से बात करने में मुझे दिक्कत हो।

उधर सूबे के कद्दावर मंत्री आजम खां के सरकार के प्रति मिजाज ठीक नहीं हैं। शिया धर्म गुरू मौलाना कल्बे जवाद के खिलाफ उन्होंने जंग का ऐलान कर रखा है। ऐसे में रविवार को सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव की मौलाना कल्बे जवाद से मुलाकात से वो खफा हैं। कल लखनऊ में उर्दू अकादमी के एक कार्यक्रम में उन्होंने लखनऊ में रहने के बाद भी आना पसंद नहीं किया। कार्यक्रम के आयोजक भी आजम खां ही थे और यह कार्यक्रम मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के सरकारी आवास, कालीदास मार्ग में आयोजित किया गया था।

रूठते रहे हैं आजम

अखिलेश यादव सरकार के गठन के कुछ अरसे बाद ही आजम खां न सिर्फ विवादों में रहे बल्कि उनका रूठना सार्वजनिक होने लगा था। पहले मेरठ के प्रभारी मंत्री पद से हटाए जाने पर नाराजगी सार्वजनिक की, फिर सपा आगरा कार्यकारिणी में हिस्सा न लेकर पार्टी को असहज किया। आखिर मुख्यमंत्री ने उनके घर जाकर मान-मनौव्वल की। मुजफ्फरनगर के दंगों के बाद भी उन्होंने नाराजगी जाहिर की। शाही इमाम के दामाद को एमएलसी बनाये जाने पर भी वह खफा-खफा नजर आए। जाहिर नहीं हो सके कुछ मुद्दों को लेकर लंबे समय तक उन्होंने कैबिनेट की बैठकों में हिस्सा भी नहीं लिया।

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NRHM Scam: CBI engaged in knowing the truth

ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) घोटाले के आरोपी महेन्द्र नाथ पाण्डेय से सीबीआइ सीएमओ के तबादलों का सच जानने में जुट गई है। सीबीआइ ने दो पहले से ही मंत्रियों की कारगुजारियों के बारे में भी पूछताछ शुरू कर दी है। इन दोनों पूर्व मंत्रियों का नाम घोटाले से जुड़ा है। महेन्द्र नाथ के इन दोनों पूर्व मंत्रियों से करीबी रिश्ते रहे हैं।

सूत्रों के मुताबिक सीबीआइ जानना चाह रही है कि किन जूनियर डाक्टरों को सीएमओ बनाया गया और उनसे कितनी रकम उगाही गई। इसके अलावा दवा आपूर्ति में किस तरह गोरखधंधा किया गया। इस धंधे में संबंधित पूर्व मंत्रियों को कितनी रकम दी गई। ऐसे कई सवालों का जवाब सीबीआइ महेन्द्र नाथ पाण्डेय से जानने में जुटी है। लखनऊ के सीबीआइ कार्यालय में पाण्डेय से पूछताछ चल रही है।

आरोप यह भी है कि बसपा सरकार में एनआरएचएम की धनराशि की बंदरबांट के लिए मनचाहे सीएमओ की तैनाती कराई गई। इसमें जूनियर डाक्टरों को भी सीएमओ बनाया गया और उनसे मनमानी रकम वसूली गई। सूत्रों के मुताबिक इस कार्य में पाण्डेय की अहम भूमिका रही। एक ऐसा भी दौर रहा जब सूबे के सभी सीएमओ पाण्डेय के इशारों पर काम करने लगे थे। पाण्डेय ने न केवल खुद दवा सप्लाई का काम दूसरी फमरें के नाम पर किया बल्कि अपने चहेतों को भी खूब काम दिलाया। शासन सत्ता में ऊंची पहुंच का लाभ लेकर सीएमओ के तबादलों और ठेका दिलवाने का काम करने वाले इस शख्स को घोटाले के और भी कई राज मालूम हैं।

सूत्रों की माने तो महेन्द्र ने लगातार सफाई ही दी है और कहा कि दवाओं के बिल गायब होने की वजह से उसे दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। पाण्डेय ने सीएमओ की तैनाती की बात स्वीकार की, लेकिन अपनी भूमिका से इन्कार किया है। सीबीआइ की दूसरी टीम भी पाण्डेय से पूछताछ करेगी।

Source: Newspaper

New massage service introduced in Indian Railway

भारतीय रेलवे तेजी के साथ यात्रियों से सीधे जुड़ रहा है। अब वह यात्रियों को यह बताएगी कि कौन सी ट्रेन कितनी लेट है और कितने बजे से जाएगी। यही नहीं यात्रियों के मोबाइल पर खानपान संबंधी जानकारी भी मिलती रहेगी। पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन ने तो इस नई पहल पर कार्य करना भी शुरू कर दिया है।

नई पहल के जरिए रेल प्रशासन फिलहाल ओरिजिनेट यानी बनकर चलने वाली गाडियों की ही जानकारी देगा। यानी, अगर गोरखपुर से कोचीन एक्सप्रेस चलती है और किन्ही कारणों से वह लेट हो जाती है तो यात्रियों को इसकी जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा यात्रियों को खानपान संबंधी जानकारी भी दी जाएगी। यानी, ट्रेन में पेंट्रीकार की व्यवस्था है या साइडिंग वेंडिंग है।

खाने में मीनू का रेट और उनकी उपलब्धता के बारे में भी बताया जाएगा। इसके अलावा यात्रियों को यह भी बताया जाएगा कि अगर आपको खानपान और सफाई व्यवस्था को लेकर कोई परेशानी है तो फला नंबर पर शिकायत कर सकते हैं। तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। शिकायत के लिए नंबर भी मैसेज किया जाएगा। टिकट लेते समय यात्री मांग पत्र में पूरा विवरण के साथ अपना मोबाइल नंबर भी अनिवार्य रूप से भरते हैं।

इसके चलते रेलवे के पास आरक्षित टिकट पर चलने वाले सभी यात्रियों के मोबाइल नंबर मौजूद रहते हैं। यात्रियों के मोबाइल पर आसानी से जानकारी दी जा सकती है।

पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन ने पहले दिन ही शानदार शुरुआत की। गोरखपुर से एलटीटी जाने वाली 11016 कुशीनगर एक्सप्रेस के 474 यात्रियों को मैसेज किया। इस ट्रेन में सोमवार को पेंट्रीकार नहीं लगी थी। ऐसे में यात्रियों को इसकी जानकारी देने के लिए रेल प्रशासन ने ट्रेन छूटने से पहले ही मैसेज करना शुरू कर दिया। यात्रियों को बताया कि ट्रेन में पेंट्रीकार नहीं लगेगी, वे खानपान की व्यवस्था सुनिश्चित कर लें। 

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Monday, 4 August 2014

UPSC CSAT row: Ruckus in Rajya Sabha

सीसैट पर सरकार के फैसले से नाखुश विपक्ष ने मंगलवार को राज्यसभा में जमकर हंगामा किया। इस बीच, यूपीएससी परीक्षा के छात्रों से मिलने के बाद राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें मेरा नजरिया पता है।

जदयू के शरद यादव ने सीसैट विवाद पर चर्चा करते हुए कहा कि इसे खत्म किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हम अंग्रेजी के खिलाफ नहीं है, परंतु अनुवाद वाले हिस्से पर हमारा विरोध है।

वहीं, विपक्ष के हमलों का जवाब देते हुए मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि सीसैट के लिए कांग्रेस सरकार दोषी है।

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Express Investigation part-I: Over 600 ‘communal incidents’ in UP since LS results, 60% near bypoll seats

लोकसभा चुनाव के परिणाम घोषित होने के बाद से लेकर अब तक उत्तर प्रदेश में करीब छह सौ घटनाएं सामने आई हैं जिसमें सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने की कोशिश की गई। इसमें से करीब साठ फीसद मामले ऐसी विधानसभा क्षेत्रों के सामने आए हैं जहां पर अगले कुछ माह में उपचुनाव होने हैं।

गौरतलब है कि आने वाले समय में बारह विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव होना है। इसकी वजह यह है कि लोकसभा चुनाव में इन सीटों के प्रतिनिधि जीतकर संसद पहुंच चुके हैं। लिहाजा छह माह के अंदर इन सीटों पर चुनाव कराए जाने हैं। एक अंग्रेजी अखबार में छपी रिपोर्ट के मुताबिक इनमें से करीब दो तिहाई मामले ऐसे हैं जहां पर बवाल की वजह धर्म को बनाया गया। फिर चाहे वह मौजूदा सहारनपुर दंगा रहा हो या फिर अन्य कोई और। इन जगहों पर धर्म के नाम पर मुद्दा बनाकर सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने की कोशिश की गई।

जिन जगहों पर इस तरह के बवाल हुए हैं वहां पर एक ओर जहां भाजपा काफी उग्र रूप में दिखाई दी वहीं सपा का रवैया बेहद नकारात्मक दिखाई दिया। बसपा ने ऐसी जगहों पर अपनी वापसी को लेकर कोशिश करती हुई दिखाई दी।

आंकड़े बताते हैं कि इस तरह के मामलों में कहीं मस्जिद बनाने, दीवार ढहाने, कब्रिस्तान, मदरसा और लाउड स्पीकर जैसे विवादों के बाद उठे और बाद में उग्र हो गए। लोकसभा चुनाव के बाद अकेले पश्चिमी यूपी में इस तरह के 259 मामले सामने आए। वहीं बुंदेलखंड में छह, पूर्वी यूपी 16, अवध में 53 और तराई क्षेत्र में 29 मामले सामने आए हैं।

इस तरह के बवाल भड़काने में जिन विवादों ने काम किया उसमें छेड़छाड़ से लेकर आपसी मारपीट तक के मामले शामिल हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश के करीब 70, गाय वध करने के करीब 61, ऐसे छेड़छाड़ के मामले जिसमें दूसरे समुदाय के लोग शामिल थे के मामले 50, दुर्घटना के मामले 30 हैं, जिनपर विवाद बढ़ा और आपसी तनाव में इजाफा हुआ।

हाल ही में हुए सहारनपुर दंगे में भी उठा कब्रिस्तान-गुरुद्वारा विवाद इसका एक जीता-जागता उदाहरण है। इसके अलावा एक जुलाई को मस्जिद में लाउड स्पीकर को बंद करवाने की घटना को तूल दिया गया जिसके बाद दंगा हुआ। तीन अगस्त को ही मेरठ में युवती को अगवा कर धर्म परिवर्तन कराने के नाम पर एक बार फिर से आपसी सौहार्द को बिगाड़ने की कोशिश की गई थी। 

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Jyoti Murder Case: Family members interrogated

कानपुर के हाई-प्रोफाइल ज्योति हत्याकांड के आरोपी उसके पति पीयूष श्यामदासानी के पिता स्वाति बिस्कुट कंपनी के मालिक ओम प्रकाश श्यामदासानी, पीयूष की मां सहित अन्य दस रिश्तेदारों का सफीना कटा है। पुलिस आज इन सभी के इस हत्याकांड की बाबत पूछताछ करेगी। इसके साथ ही आज मनीषा मखीजा की रिमांड पर भी सुनवाई होगी।

पुलिस इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच में हर कदम फूंक-फूंककर रख रही है। ज्योति के ससुर ओम प्रकाश, उनकी पत्‍‌नी तथा परिवार के अन्य सदस्यों का पुलिस ने सफीना काटा है। आज ही से इन सभी से पुलिस इस मामले में पूछताछ करेगी।

ज्योति की हत्या के मुख्य आरोपी पति पीयूष और अन्य अभियुक्तों की 24 घंटे की पुलिस कस्टडी रिमांड कल अदालत ने स्वीकार कर ली थी। आज पुलिस बरामदगी और पूछताछ की पूरी वीडियोग्राफी कराएगी। पुलिस ने दस दिन का पुलिस कस्टडी रिमांड मांगा था। अब 24 घंटे की रिमांड के दौरान पुलिस हत्या में प्रयुक्त चाकू बरामद करने की कोशिश करेगी। सीएमएम (मुख्य मेट्रोपोलिटिन मजिस्ट्रेट) सत्यदेव गुप्ता ने कल कहा कि पीयूष की रिमांड पर सुनवाई के लिए एक दिन का समय नहीं दिया जा सकता। इससे अभियोजन को क्षति होगी।

जेल में मनीषा को मिल रही फाइव स्टार सुविधा

पत्‍‌नी ज्योति की हत्या के आरोपी पीयूष की प्रेमिका मनीषा मखीजा को जेल में भी फाइव स्टार की सुविधा मिल रही है। बड़े व्यवसायी की बेटी मनीषा के लिए उसके घरवालों ने खजाना खोल दिया है। जेल में मनीष को इंग्लिश कमोड का प्रयोग कर रही है। इसके साथ ही उसे समय-समय पर पिज्जा तथा बर्गर भी खाने को मिल रहा है।

मनीषा की रिमांड पर सुनवाई आज

पुलिस ने पूछताछ के लिए मनीषा मखीजा की कस्टडी रिमांड भी मांगी है। स्वरुपनगर थानाध्यक्ष शिवकुमार राठौर ने बताया कि मनीषा के रिमांड के लिए अर्जी दी है। उसकी कस्टडी रिमांड पर आज फैसला आ सकता है।

सीओ का निलंबन आदेश जारी

पत्‍‌नी की बेरहमी से हत्या कराने वाले पीयूष का माथा चूमने वाले कानपुर नगर के स्वरूपनगर सर्किल के सीओ राकेश कुमार नायक का निलंबन आदेश जारी कर दिया गया। नायक के निलंबन की सहमति शनिवार को ही बन गयी थी। नायक को पुलिस महानिदेशक मुख्यालय से सम्बद्ध कर दिया गया है। उनके खिलाफ विभागीय जांच भी होगी। गृह सचिव कमल सक्सेना ने बताया कि नायक को कर्तव्य पालन में घोर लापरवाही और उदासीनता, शिथिलता के कारण निलम्बित किया गया है।

Source: Newspaper

New government may be formed in delhi

 दिल्ली में भाजपा अल्पमत की सरकार बना सकती है। हालांकि, इस पर पार्टी ने कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है, लेकिन इसे लेकर मंथन जारी है। दिल्ली प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष सतीश उपाध्याय का भी कहना है कि अल्पमत की सरकार बनाना कोई पाप नहीं है। इससे लगता है कि पर्दे के पीछे सरकार बनाने की संभावनाओं पर पार्टी में गंभीरता से विचार किया जा रहा है।

भाजपा दिल्ली की राजनीतिक अनिश्चितता को दूर करने के लिए सरकार बनाने की संभावना तलाशने में जुटी हुई है। इसमें एक संभावना अल्पमत से सरकार बनाने की भी है। इसके लिए भाजपा के कुछ विधायक चुनाव नहीं चाहने वाले विपक्षी दलों के विधायकों से संपर्क कर उन्हें अपने फॉर्मूले पर राजी करने की कोशिश में लगे हुए हैं। बताते हैं कि अब कांग्रेस या आम आदमी पार्टी के विधायकों को तोड़कर सरकार बनाने के बजाए अल्पमत की सरकार बनाने को तरजीह दी जा रही है। इससे पहले भी केंद्र सहित कई राज्यों में अल्पमत की सरकार बन चुकी है। इसे भाजपा असंवैधानिक भी नहीं मानती है। इसलिए इस विकल्प पर गंभीरता से मंथन चल रहा है।

देशभर में जाएगा गलत संदेश

दरअसल, भाजपा नेतृत्व दिल्ली में सरकार बनाने के लिए किसी अन्य पार्टी में तोड़फोड़ करने के पक्ष में नहीं है, क्योंकि इससे देशभर में गलत संदेश जाएगा। विरोधियों को भी हमला करने का एक मुद्दा मिल जाएगा। वहीं, पार्टी के नेता अपने विधायकों की राय को भी खारिज नहीं करना चाहते हैं।

तीन बार चुनाव थोपना ठीक नहीं

भाजपा के विधायक अभी चुनाव के पक्ष में नहीं हैं। उनका मानना है कि दिल्लीवासियों पर एक साल के अंदर तीन बार चुनाव थोपना उचित नहीं है। इससे दिल्ली में विकास कार्य बुरी तरह से प्रभावित होंगे। उनके अनुसार अन्य पार्टियों के विधायक भी चुनाव नहीं चाहते हैं। इसलिए उनकी सहायता से सरकार बनाने की संभावना तलाशने की जरूरत है। कुछ विधायकों ने कांग्रेस के छह विधायकों के समर्थन से सरकार बनाने की मुहिम भी शुरू की थी, लेकिन वह सिरे नहीं चढ़ सकी।

क्या है विश्वास मत का फॉर्मूला

वर्तमान में दिल्ली विधानसभा में विधायकों की कुल संख्या 67 है। इसमें भाजपा के सबसे अधिक 29 विधायक हैं। जबकि आप के 27, कांग्रेस के 8, आप का एक बागी विधायक, एक जद (यू) तथा एक निर्दलीय। यदि आप या कांग्रेस के 5 विधायक विश्वास मत के दौरान अनुपस्थित हो जाएं तो विधानसभा में अध्यक्ष के अतिरिक्त विधायकों की संख्या 61 रह जाएगी। इस स्थिति में विश्वास मत हासिल करने के लिए 31 विधायकों का समर्थन चाहिए जो कि भाजपा आप के बागी विधायक तथा एक निर्दलीय विधायक की बदौलत हासिल कर लेगी। एक बार विश्वास मत हासिल होने के बाद छह माह तक अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता है।

अब क्या करेंगे उपराज्यपाल नजीब जंग

दिल्ली में सियासी ऊंट किस करवट बैठेगा? उम्मीद और संकेत तो यही हैं कि देर-सबेर, सूबे में भाजपा की अगुवाई में सरकार बन जाएगी। लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में जिस प्रकार आम आदमी पाटी (आप) ने विधानसभा भंग कर चुनाव कराने का दबाव उपराज्यपाल नजीब जंग पर डालना शुरू किया है, उसे देखते हुए जंग पर समय रहते फैसला लेने का दबाव जरूर बढ़ गया है।

सूबे के सियासी गलियारों में चर्चा यह भी हो रही है कि पहले विधानसभा को भंग करने की मांग को लेकर अदालत तक जाने वाले केजरीवाल जब मई के अंत में उपराज्यपाल से मिलने गए थे, तब वह यह आग्रह करना नहीं भूले कि फिलहाल विधानसभा भंग नहीं की जाए क्योंकि सरकार बनने की संभावनाएं बची हुई हैं। हालांकि बाद में उन्होंने अपना रुख बदल लिया और अब वे लगातार विधानसभा को भंग कर चुनाव कराने की मांग कर रहे हैं।

केजरीवाल जब पिछली बार अपने तमाम विधायकों के साथ उपराज्यपाल से मिलने गए थे तो वहां से लौटने के बाद उन्होंने कहा था कि अब जंग भाजपा और कांग्रेस को विचार-विमर्श के लिए बुलाएंगे। यदि भाजपा ने सरकार बनाने का दावा पेश किया तो वह उससे बहुमत के आंकड़े के बारे में जरूर पूछताछ करेंगे। राजनिवास की ओर से भी कहा गया कि उपराज्यपाल बाकी संबंधित पक्षों से बातचीत करने के बाद राष्ट्रपति को अपनी रिपोर्ट भेजेंगे। लेकिन अच्छा-खासा समय बीतने के बावजूद जंग ने ऐसी कोई पहल नहीं की है।

जंतर-मंतर पर रविवार को हुई आम आदमी पार्टी की रैली में जिस प्रकार खुद केजरीवाल व उनकी पार्टी के नेताओं ने उपराज्यपाल पर हमला बोला, उसके मद्देनजर कयास लगाए जा रहे हैं कि पार्टी जंग पर दबाव बनाने का पूरा प्रयास कर रही है। यह अलग बात है कि उनके आरोपों को लेकर राजनिवास कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। बहरहाल, अब यह देखना है कि उपराज्यपाल राजनीतिक विचार-विमर्श के लिए भाजपा और कांग्रेस के नेताओं को कब आमंत्रित करते हैं।

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अल्पमत की सरकार बनाने में कोई बुराई नहीं है। राजनीति में कुछ भी हो सकता है। पहले भी देश में अल्पमत की सरकारें बन चुकी हैं। इसलिए यहां अल्पमत की सरकार क्यों नहीं बन सकती है। यदि दिल्ली को चुनाव से बचाने के लिए इस तरह की संभावना तलाशी जाती है तो इसमें कोई बुराई नहीं है।

- सतीश उपाध्याय, दिल्ली प्रदेश भाजपा अध्यक्ष

Source: Newspaper

Mulayam and amar to meet in lucknow today

 चार साल बाद सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह और अमर सिंह आज फिर एक साथ दिखेंगे। लखनऊ में सपा के दिवंगत नेता जनेश्वर मिश्र के नाम पर बने पार्क के उदघाटन समारोह में दोनों नेता मंच साझा करेंगे।

मुलायम ने भेजा न्योता

अमर सिंह के मुताबिक उन्हें खुद समाजवादी पार्टी अध्यक्ष मुलायम सिंह ने फोन करके इस कार्यक्रम के लिए बुलाया है। कार्यक्रम में यूपी के सीएम अखिलेश यादव समेत एसपी के सभी विधायक और मंत्री मौजूद रहेंगे।

मिल सकता है राज्यसभा का टिकट

खबर है कि बहुत जल्द अमर सिंह की समाजवादी पार्टी में वापसी भी हो सकती है। पार्टी उन्हे राज्यसभा का टिकट दे सकती है। इसी साल नवंबर में अमर सिंह के राज्यसभा का कार्य काल खत्म हो रहा है।

2010 में समाजवादी पार्टी से निकाले जाने के बाद अमर सिंह राजनीतिक गलियारों में भटकते रहे हैं। इस साल अजित सिंह की पार्टी से गठबंधन करके चुनाव भी लड़े लेकिन उसमें उन्हें कामयाबी नहीं मिली।

शाही इमाम ने कहा, यूपी की जनता बेवकूफ नहीं

यूपी के मुरादाबाद में शाही इमाम अहमद बुखारी ने कहा मुलायम सिंह और अमर सिंह का मिलना जनता के साथ धोखा बताते हुए कहा, क्या यूपी की जनता को बेवकूफ समझ रहे हैं मुलायम सिंह?

कभी दोनों भाई हुआ करते थे

मुलायम सिंह बड़े और अमर सिंह अपने को उनका छोटा भाई कहते थे। लेकिन फिर दूरियां ऐसी बढ़ीं कि दोनों एक दुसरे के दुश्मन बन गए. वैसे मुलायम सिंह ने अमर के लिए शायद ही कभी बुरा कहा हो. लेकिन अमर सिंह ने तो मुलायम के खिलाफ सारी हदें पार कर दी थीं।

समाजवादी पार्टी के नेताओं की नजर जनेश्वर मिश्रा पार्क में बने मंच पर होगी। जहां अमर और मुलायम का मिलन होगा। मायावती के आंबेडकर पार्क के मुकाबले में अखिलेश सरकार ने ये पार्क बनवाया है।

Source: Newspaper

Csat issue: committee will be formed for permanent solution

यूपीएससी परीक्षा के सीसैट विवाद में गैर-अंग्रेजी भाषी छात्रों को तात्कालिक राहत देने के बाद मोदी सरकार समस्या के स्थायी समाधान की कोशिश में जुट गई है। इसके लिए जल्द ही विशेषज्ञों की नई समिति का गठन किया जाएगा, जो अगले साल होने वाली परीक्षा के लिए सीसैट में किए जाने वाले बदलावों के बारे में सुझाव देगी। बहुत संभव है अगले साल नए प्रारूप के साथ यूपीएससी की परीक्षा हो। लेकिन इससे आंदोलन कर रहे छात्र नाखुश हैं और आशंका जताई जा रही है कि प्रदर्शनकारी आज फिर सड़क से संसद तक इस मुद्दे पर हंगामा कर सकते हैं।

गृहमंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अंग्रेजी भाषा के सवालों के अंकों को नहीं जोड़कर सिर्फ 377.5 अंकों पर योग्यता सूची तैयार करना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। उन्होंने कहा कि अगले साल पूरे 400 अंकों की परीक्षा होगी, लेकिन उसमें अंग्रेजी भाषा के बजाय शायद दूसरे प्रकार के सवाल होंगे। उन्होंने कहा कि यूपीएससी में योग्य छात्रों के चयन सुनिश्चित करने के लिए प्रश्नपत्र का स्वरूप तय करना एक जटिल काम है। यह विशेषज्ञों की टीम ही कर सकती है।

दरअसल सीसैट प्रणाली लागू होने के बाद से ही छात्र इसमें हिंदी व अन्य भारतीय भाषाओं के छात्रों के साथ भेदभाव का आरोप लगाते रहे थे। पिछले साल दिल्ली हाईकोर्ट ने भी इस पर मुहर लगाते हुए सरकार को शिकायतों पर विचार करने का आदेश दिया था। लेकिन मार्च में गठित वर्मा कमेटी सीसैट के समर्थन में खड़ी हो गई। नए फार्मूले में मोदी सरकार ने वर्मा कमेटी की सिफारिश को खारिज करने का साफ संकेत दे दिया है। इस बीच यूपीएससी के आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि प्रारंभिक परीक्षा को टालने का सवाल ही नहीं पैदा होता है। यह परीक्षा अपने पूर्व निर्धारित तिथि 24 अगस्त को ही होगी।

सीसैट समाप्त करने से कम पर राजी नहीं हैं छात्र

सीसैट प्रणाली को खत्म करने की मांग को लेकर लगातार दो माह से प्रदर्शन करने वाले छात्रों का कहना है कि उन्होंने जो मांगा था वह नहीं मिला। छात्र ऐसा महसूस कर रहे हैं- जैसे जंजीर बदली और उन्हें लगा कि रिहाई हो गई। छात्रों का कहना है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो उन्हें फिर से सड़कों पर उतरना पड़ेगा।

गौरतलब है कि सोमवार को संसद में कार्मिक मामलों के मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि अंग्रेजी के अंकों के आधार पर मेरिट नहीं होगी। ज्यादातर छात्रों का कहना है कि हमने सीसैट प्रणाली को खत्म करने की मांग की थी, जिसकी अनदेखी की गई। मुखर्जी नगर में रह रहे सुमित ने कहा कि सीसैट प्रणाली के विरोध का एक हिस्सा यह था कि अंग्रेजी को वरीयता न दी जाए। इसका लाभ कुछ विशेष छात्रों को मिलता है।

इसमें इंजीनियरिंग व आइआइटी के छात्र शामिल हैं। क्षेत्रीय भाषाओं के छात्रों को इससे कठिनाई होती है। सरकार ने इस बात पर चर्चा करना जरूरी भी नहीं समझा। इस मसले को लेकर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के नेता राममाधव और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव जेपी नड्डा से मुलाकात भी की गई थी। उन्होंने सीसैट को क्वालीफाइंग करने को लेकर बात की थी।

प्रदर्शन, मुलाकात और बातचीत का कोई निष्कर्ष नहीं निकला। हमने उन्हें समय दिया और कमेटी बनाने की बात भी मानी, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। विवेक का कहना है कि प्रारंभिक परीक्षा की तिथि में बदलाव नहीं किया गया है। ऐसे में महीनों से प्रदर्शन में जुटे छात्र उत्तीर्ण कैसे होंगे। केवल वर्ष-2011 में पहली बार सीसैट के तहत परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों को वर्ष-2015 में मौका देने की बात है, जबकि ऐसे छात्रों की संख्या कम है।

यह भी भ्रम फैला है कि यह सिर्फ हिंदी भाषा के छात्रों की मांग है, जो गलत है। यह आंदोलन दक्षिण भारत में भी जोरशोर से जारी है। मुखर्जी नगर में धारा-144 लगाने पर छात्र सुदिल और ओमश्री ने कहा कि हम यह मानते हैं कि छात्रों का प्रदर्शन शांतिपूर्ण होना चाहिए, लेकिन सरकार का यह फैसला छलावा है।

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After Ishant now Bhuvneshwar injury scare in front of team India and Dhoni

टीम इंडिया ने तीसरा टेस्ट मैच 266 रनों से गंवाया और मेजबान इंग्लैंड की टीम ने जोरदार वापसी के साथ सीरीज में बराबरी कर ली। जाहिर है कि पहले और दूसरे टेस्ट में भारतीय गेंदबाजों के शानदार प्रदर्शन के दम पर ही टीम इंडिया विरोधी टीम के बल्लेबाजों को बैकफुट पर ढकेलने में सफल रही थी। लॉ‌र्ड्स टेस्ट में इशांत शर्मा के ऐतिहासिक प्रदर्शन के दम पर ही भारत ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी लेकिन अब सब कुछ भारत के खिलाफ जाता नजर आ रहा है। पहले इशांत शर्मा चोटिल होकर टीम से बाहर बैठ गए और अब मैनचेस्टर टेस्ट से पहले भी एक झटका देने वाली खबर सामने आ रही है।

खबरों की मानें तो अब भारतीय गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार खुद को चोटिल कर बैठे हैं। इशांत की गैरमौजूदगी में भुवनेश्वर पर ही उम्मीदें टिकी हुई थीं और अब अगर वो भी बाहर बैठे तो कप्तान धौनी के लिए अगले दो मैचों में चुनौती बहुत मुश्किल हो जाएगी। खबरों की मानें तो मैनचेस्टर टेस्ट के लिए अभ्यास के दौरान कल जब भारतीय खिलाड़ी फुटबॉल खेल रहे थे तब भुवनेश्वर ने गोलकीपर बनना ही बेहतर समझा क्योंकि उनका टखना सूजा हुआ था। इशांत के चोटिल होने के बाद अब टीम मैनेजमेंट भुवनेश्वर की फिटनेस को करीब से देख रहा है और उन पर पूरा ध्यान दिया जा रहा है ताकि चौथे टेस्ट से पहले वो पूरी तरह फिट हो जाएं।

- इनको मिल सकता है मौका:

बताया जा रहा है कि अगर भुवनेश्वर फिट नहीं हुए तो वरुण एरोन को उनकी जगह टीम में शामिल किया जा सकता है लेकिन फॉर्म व अनुभव की कमी के कारण शायद इंग्लैंड में एरोन भुवनेश्वर की कमी को पूरा ना कर पाएं, ऐसे में कप्तान धौनी के सामने एक बड़ी चुनौती होगी। इसके अलावा शिखर धवन के फॉर्म को देखते हुए गौतम गंभीर को खिलाने का दबाव भी धौनी पर बढ़ता जा रहा है। अभी रविचंद्रन अश्विन को भी आजमाना बाकी है। ऐसे में अगले टेस्ट के लिए टीम चयन से पहले कप्तान और कोच को शायद काफी दिमागी कसरत करने पड़ेगी।

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Model's ex lawyer claims, Model tried to malign DIG's image and gain publicity

मुंबई की मॉडल रेप केस मामले में सोमवार को एक नया मोड़ आ गया है। डीआइजी सुनील पारसकर पर रेप का आरोप लगाने वाली मॉडल के पूर्व वकील ने उन्‍हीं पर झूठी पब्लिसिटी का आरोप लगाया है। रिजवान सिद्दिकी नाम के इस वकील का दावा है कि जब उन्‍हें पता चला कि ये मॉडल पब्लिसिटी के लिए ये सब कर ही है तो उन्‍होंने यह केस लड़ने से इंकार कर दिया।

मॉडल के पूर्व वकील रिजवान सिद्दिकी ने सोमवार को कहा, 'पीडि़ता ने कभी भी ये केस डिस्कस करते हुए उन्हें रेप के बारे में नहीं बताया।' सिद्दिकी ने अपने और पीडि़ता के बीच हुई बातचीत का वीडियो फुटेज पुलिस को सौंपा है।

वकील ने साफ कहा कि मॉडल प्रचार के लिए डीआइजी को बदनाम कर एक रियलिटी टीवी शो का हिस्सा बनना चाहती हैं। इस बीच, स्थानीय सत्र न्यायालय पारसकर की गिरफ्तारी पर लगी रोक को पांच अगस्त तक बढ़ा चुका है।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र पुलिस मुख्यालय में बतौर डीआइजी [नागरिक अधिकार संरक्षण इकाई] नियुक्त पारसकर के खिलाफ 27 वर्षीय मॉडल की शिकायत पर मालवानी थाने में गत बुधवार को दुष्कर्म समेत अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। मुंबई क्राइम ब्रांच की महिला शाखा को इस मामले की जांच सौंपी गई है।

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Varun is capable for UP CM: Menka Gandhi

पीलीभीत से भाजपा की सांसद और केंद्र में महिला और बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने सुल्तानपुर के सांसद और अपने पुत्र वरुण गांधी को उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने के काबिल बताया है। उन्होंने यह बात पीलीभीत में एक सभा को संबोधित करते हुए कही। उनके इस बयान को यूपी की भाजपा इकाई के अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने निजी बयान बताया है।

मेनका ने कहा है कि यदि वरुण गांधी मुख्यमंत्री बने तो पीलीभीत का और विकास होगा। सभा में उन्होंने कहा कि केंद्र में भाजपा की सरकार है और उत्तर प्रदेश में सपा की सरकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकसभा चुनाव में यूपी में मिली करारी हार के बाद सपा सरकार ने यहां के सभी विकास कार्यो को रोक दिया है। केबिनेट मंत्री ने कहा कि केंद्र के साथ-साथ यदि उत्तर प्रदेश में भी भाजपा की सरकार होती तो हम यहां विकास कायरें शुरू कर पाते। यह तब और भी बेहतर होता, अगर वरुण राज्य में बीजेपी की सरकार चला रहे होते। यह पीलीभीत के लिए भी अच्छा होता।

उनके इस बयान को कांग्रेस से जोड़कर भी देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि उन्होंने यह बयान उस खबर के चलते दिया है जिसमें कांग्रेस में प्रियंका गांधी को उत्तर प्रदेश की कमान सौंपे जाने या फिर राष्ट्रीय महासचिव बनाने की बात कही गई थी। फिलहाल वरुण भाजपा में राष्ट्रीय महासचिव की भूमिका में हैं। मेनका ने अपने इस बयान के जरिए एक ओर जहां यूपी सरकार पर निशाना साधने की कोशिश की है वहीं दूसरी ओर कांग्रेस को जवाब देने की भी कोशिश की है। 

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High profile sex racket busted in lucknow

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सेक्स रैकेट तेजी से फैल रहा है। राजधानी के पॉश इलाके गोमतीनगर में बीते माह ही एक रैकेट पकड़ा गया था। आज गोमतीनगर के ही यमुना अपार्टमेंट में पांच लड़कों तथा चार लड़कियों को इस रैकेट में पकड़ा गया है। रैकेट के संचालक अंकित दास नाम के युवक को गिरफ्तार कर पुलिस पूछताछ में जुटी है। अंकित ने एक कद्दावर नेता का नाम लेकर पुलिस पर दबाव बनाने का भी प्रयास किया।

गोमतीनगर के यमुना अपार्टमेंट में सोमवार को करीब दस बजे एक सेक्स रैकेट को पकड़ा गया। यमुना अपार्टमेंट में पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर के फ्लैट में यह रैकेट लंबे समय से चल रहा था। अपार्टमेंट के लोगों ने इसका कई बार विरोध भी किया था। लखीमपुर में तैनात पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर सुनील शंखवार के फ्लैट पर आज यमुना अपार्टमेंट के अन्य निवासियों ने इस रैकेट की जानकारी मिलने पर पुलिस को जानकारी दी।

पुलिस ने जब छापा मारा तो वहां पर पांच लड़के तथा चार लड़कियां मिली। सभी आपत्तिजनक अवस्था में थे। पुलिस इनको पकड़कर गोमतीनगर थाना ले आई है। इस रैकेट के संचालक अंकित दास को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। अपार्टमेंट के निवासियों में इस रैकेट के पकड़े जाने को लेकर काफी आक्रोश है। इनका कहना है कि यहां लंबे समय से यह काम हो रहा था, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। पानी सर के ऊपर निकलने के बाद आज सभी ने मिलकर अपने स्तर से अभियान चलाकर इनको पकड़ा।

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Pm Narendra Modi visits Pasupatinath temple in nepal

शिव की नगरी काशी से जीत हासिल कर नरेंद्र मोदी अब बाबा पशुपतिनाथ के दर पर पहुंचे हैं। यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाबा पशुपतिनाथ के दर्शन कर रुद्राभिषेक किया। मंदिर में प्रधानमंत्री ने करीब एक घंटे तक पूजा-अर्चना की।

ये अजीब संयोग है कि आज श्रावण के आखिरी सोमवार के दिन काशी के विश्वनाथ मंदिर से लेकर काठमांडू के पशुपति नाथ मंदिर तक हर-हर भोले की आवाज गूंज उठी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस पावन अवसर पर बाबा पशुपति नाथ का रुद्राभिषेक कर उनकी पूजा की और 2500 किलोग्राम श्रीखंड चंदन भी चढ़ाया।

पशुपतिनाथ मंदिर में प्रधानमंत्री की पूजा के लिए खास इंतजाम किये गए थे। उनकी पूजा के दौरान सुरक्षा कारणों से मंदिर को एक घंटे के लिए बंद कर दिया गया था। हालांकि अब प्रधानमंत्री के वहां से निकले के बाद मंदिर को आम लोगों के लिए भी खोल दिया गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब काठमांडू के बाहरी इलाके में बागमती नदी के तट पर स्थित इस मुख्य मंदिर में जाएंगे और वहां भी शिवलिंग का पंचामृत स्नान कराकर पूजा अर्जना करेंगे। उन्हें मुख्य पुरोहित गणेश भट्टा से प्रसाद मिलेगा जो दक्षिण भारत के रहने वाले हैं। मंदिर में सदियों से दक्षिण भारत के ब्राह्मणों में से चार पुरोहित और एक मुख्य पुरोहित रखने की परंपरा है।

मोदी मुख्य मंदिर के दक्षिण में बासुकी मंदिर में भी प्रार्थना करेंगे। उनके यहां पहुंचने पर मंदिर के समीप के वेदविद्याश्रम के 108 युवा ब्राह्मण विद्यार्थी वैदिक मंत्रोच्चार कर उनका स्वागत करेंगे। गणमान्य अतिथियों के स्वागत में पारंपरिक नेवारी ड्रम धिमे और बांसुरी भी बजायी जाएगी।

पशुपतिनाथ मंदिर प्रशासन के अनुसार हिंदू कैलेंडर के मुताबिक श्रावण में सोमवार पावन समझा जाता है। भारत एवं नेपाल से करीब तीन लाख श्रद्धालु इस मंदिर में पहुंचते हैं। यह मंदिर दुनियाभर में शिव के अति महत्वपूर्ण मंदिरों में एक है और उसे यूनेस्को के धरोहर सूची में स्थान प्राप्त है।

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Priyanka Gandhi set to formally assume big role in Congress, Rahul’s leadership under question

कांग्रेस में लगातार प्रियंका गांधी को लाने की आवाजों के बीच अब यह बात सामने निकल कर आई है कि उन्हें उत्तर प्रदेश इकाई का अध्यक्ष या फिर राष्ट्रीय संगठन में महासचिव बनाया जा सकता है। मीडिया में आई खबरों की मानें तो कांग्रेस के तीन वरिष्ठ नेताओं के मुताबिक उन्हें राष्ट्रीय महासचिव या फिर यूपी में पार्टी अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी जा सकती है।

गौरतलब है कि काफी लंबे समय से प्रियंका को कांग्रेस में लाने की मांग उठ रही है। इस मांग को लोकसभा चुनाव में हुई करारी हार के बाद और हवा दी जा रही है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की मानें तो इस बार इसका असर भी दिखाई देने लगा है। हालांकि उन्हें यह जिम्मेदारी इस वर्ष होने वाले राज्यों के विधानसभा चुनाव के बाद दिए जाने की चर्चा है। लेकिन कांग्रेस को अभी इसमें कुछ दिक्कतें दिखाई दे रही हैं।

माना जा रहा है कि राष्ट्रीय संगठन और प्रदेश की इकाई में अहम पदों पर काबिज नेता इस फैसले पर नाराजगी जाहिर कर सकते हैं। हालांकि इस बाबत पार्टी की मुहर लगने के बाद भी इस पर अंतिम फैसला खुद प्रियंका को ही लेना है। लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी की विफलता के चलते प्रियंका को संगठन में लाने की मांग जिस तेजी से जोर पकड़ती जा रही है उससे कहीं न कहीं राहुल गांधी और सोनिया गांधी के नेतृत्व पर सवालिया निशान लग गया है।

कुछ नेता यह जरूर मानते हैं कि यदि प्रियंका संगठन में आ भी जाती हैं तो भी इससे राहुल के पद पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है। यहां पर एक और बात ध्यान देने वाली यह है कि लोकसभा चुनाव से पूर्व भी इस तरह की मांग पर संगठन में विचार विमर्श किया गया था कि प्रियंका को यूपी की कमान सौंप देनी चाहिए। लेकिन उस समय इस पर सहमति नहीं बन सकी थी जिस वजह से इसे लागू नहीं किया गया था।

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Gwalior additional judge says she was sexually harassed by HC judge, quits

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में पदस्थ महिला अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने प्रदेश के ही एक हाईकोर्ट जज पर यौनशोषण का आरोप लगाया है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के साथ ही सुप्रीम कोर्ट के जजों और मप्र हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को लिखे अपने पत्र में महिला जज ने कई सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। अपनी लाज बचाने के लिए उक्त महिला जज को अपना पद भी छोड़ना पड़ा है।

महिला जज ने अपनी शिकायत में लिखा है कि आरोपी जज ने एक बार जिला रजिस्ट्रार के साथ संदेश भिजवाया कि उनके (आरोपी) बंगले पर होने वाले एक कार्यक्रम में आपको आइटम सांग पर डांस करना होगा। तब महिला ने अपनी बेटी का जन्मदिन होने का बहाना बनाकर पीछा छुड़ाया था।

अगले दिन जब कोर्ट में दोनों का सामना हुआ तो आरोपी जज ने टिप्पणी की कि डांस फ्लोर पर उन्हें नाचते देखने का मौका चला गया, लेकिन वे इंतजार करेंगे। महिला का आरोप है कि इस तरह कई बार उन्हें परेशान किया गया। आरोपी जज इस ताक में बैठा रहता कि महिला से कोर्ट की प्रक्रियाओं में कहीं कोई गलती हो, और वो उसका फायदा उठाने की कोशिश करें। जब कोई मौका नहीं मिलता, तो वे झल्ला जाते थे।

महिला के मुताबिक, मैं सुबह साढ़े दस के बजाए 11 बजे कोर्ट चली जाती थी। शाम को एक घंटा देरी तक रूककर काम करती थी, ताकि सामने वाले को कोई मौका न मिले, लेकिन छींटाकशी जारी रही।

तंग आकर 22 जून को महिला जज अपने पति के साथ आरोपी जज से मिलने पहु्ंच गईं। यह भी जज को आस नहीं आया। उन्होंने बात करने के बजाए दोनों को 15 दिन बाद बात करने को कहा। 15 दिन बाद महिला जज को ट्रांसफर आदेश थमा दिए गए।

पीड़िता का आरोप है कि मप्र हाईकोर्ट की ट्रांसफर नीति का उल्लंघन करते हुए उन्हें सिधी भेज दिया गया। तब उनकी बेटी 12वीं में पढ़ रही थी। बीच सत्र में ट्रांसफर होने से उसे भी परेशान होना पड़ा। आखिरकार तंग आकर महिला ने 15 जुलाई को इस्तीफा दे दिया।

यौनशोषण कमेटी की प्रमुख भी थीं

दिल्ली की अदालतों में 15 वर्ष तक कानूनी की प्रैक्टिस करने के बाद महिला ने मप्र हायर ज्यूडिशल सर्विस परीक्षा उत्तीर्ण की थी। इसके बाद 1 अगस्त 2011 को उनकी पोस्टिंग ग्वालियर में हुई थी।

जस्टिस डीके पालिवाल के मार्गदर्शन में ट्रैनिंग पूरी करने के बाद अक्टूबर 2012 में उनकी पदस्थापना ग्वालियर में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश के रूप में कर दी गई। अप्रैल 2013 में उन्हें महिला यौनशोषण के खिलाफ बनी जिले की विशाखा कमेटी की प्रमुख भी बनाया गया था।

जनवरी 2014 में तैयार की गई सालाना गोपनीय रिपोर्ट में उनके काम की खूब तारीफ की गई। महिला जज का आरोप है कि उसी समय ग्वालियर बैंच के एक प्रशासनिक जज ने उन्हें अपने बंगले पर अकेले मिलने का दबाव बनाना शुरू कर दिया।

इन्हें भेजा है शिकायती पत्र

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया आरएम लोढ़ा, सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस एचएल दत्तु, जस्टिस टीएस ठाकुर, जस्टिस अनिल दवे, जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस अरुणा मिश्रा के साथ ही मप्र हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश।

यह दुर्भाग्यपूर्ण है

यही एक मात्र प्रोफेशन है जहां हम अपने साथियों के साथ भाई-बहन जैसा व्यवहार करते हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है। शिकायत मेरे पास आती है तो मैं उचित कदम उठाऊंगा। - आरएम लोढ़ा, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया

साभार - नई दुनिया

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Jhalak Dikhhla Jaa’ and The Anupam Kher Show to end early due to bad TRP ratings?

लगता है टीआरपी की जंग में कलर्स चैनल पिछड़ता जा रहा है, तभी तो वह अपने ऐसे दो शो को बंद करने की योजना बना रहा है जिनके साथ नामी-गिरामी स्टार्स का नाम जुड़ा है। खबर है कि ‘झलक दिखला जा’ और ‘द अनुपम खेर शो’ की गिरती टीआरपी के चलते कलर्स इन दोनों ही कार्यक्रमों को तय समय से पहले ही बंद करने जा रहा है।

न्यूज थोड़ी हैरान करने वाली है क्योंकि जिस डांस रियलिटी शो के साथ माधुरी दीक्षित और रेमो डिसूजा जैसे सेलेब्रिटीज का नाम जुड़ा हो और जिस टॉक शो में अनुपम खेर बड़े-बड़े सेलेब्स को बुलाते हों, उसे अचानक बंद करने का निर्णय लेना गंभीर बात है।

आपको बता दें कि चैनल इससे पहले ‘मधुबाला’ सीरियल की लीड एक्ट्रेस ‘दृष्टि धामी’ को झलक दिखला जा से बाहर का रास्ता दिखा चुका है क्योंकि उनकी एंकरिंग दर्शकों को प्रभावित नहीं कर पा रही थी। दृष्टि को निकालने के बाद मनीष पॉल को एंट्री दी गई लेकिन उनके आने का भी झलक को कुछ फायदा नहीं मिला।

अनुपम खेर के टॉक शो से भी चैनल को बहुत उम्मीदें थीं लेकिन इतने हफ्तों बाद भी इस कार्यक्रम को अपेक्षित दर्शक नहीं मिल पा रहे हैं। वैसे एक दौर वो भी था जब कलर्स चैनल के टीआरपी के मामले में अन्य सभी चैनल्स के नाक में दम कर रखा था लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। चैनल पर आने वाले सबसे बड़े बजट के शो जब ऐसे बुरे दौर से गुजर रहे हैं तो आप अंदाजा लगा सकते हैं अन्य कार्यक्रमों का क्या होगा।

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381 killed, about 2,000 injured in strong quake in China

चीन का दक्षिण पश्चिम हिस्सा रविवार को आए 6.5 की तीव्रता वाले शक्तिशाली भूकंप से थर्रा उठा। इसके चलते युन्नान प्रांत के दूरस्थ पहाड़ी इलाके में 381 लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा। दो हजार से ज्यादा लोग घायल हैं। भूकंप से 12 हजार घर ध्वस्त हो गए। करीब 30 हजार इमारतों को नुकसान पहुंचा है।

भूकंप स्थानीय समयानुसार शाम साढ़े चार बजे आया। इसका केंद्र युन्नान में लूडियान काउंटी से 23 किमी दूर जमीन से 12 किमी गहराई में था। काउंटी परिवहन, बिजली और संचार व्यवस्था से कट गया है। सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने बताया कि भूकंप के चलते झाओतोंग काउंटी के कियाओजिया में भी 50 लोगों की मौत हुई है।

लांगतुशान में बचाव कार्य में जुटे एक कॉलेज के छात्र मा हाओ ने बताया कि उसने मलबों में शवों को दबे देखा और घायलों की मदद की। उसने बताया कि हमारी पहली प्राथमिकता घायलों को बचाने और लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने की है। तेज झटकों के चलते डरे हुए लोग सड़कों पर हैं।

सरकारी टेलीविजन ने अपनी खबर में झाओतोंग शहर में कई धराशाई इमारतों को दिखाया। भूकंप के तेज झटके युन्नान के साथ पड़ोसी प्रांत ग्यूझाउ और सिचुआन में भी महसूस किए गए। चीन के इस भाग में निरंतर भूकंप आते रहते हैं। वर्ष 2008 में सिचुआन में आए भूकंप में लगभग 70 हजार लोगों की मौत हो गई थी।

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