Monday, 28 October 2013

Inflation's New Dose Will Rise

Inflation


नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। चुनावों से पहले आम आदमी को सस्ती दरों पर कर्ज दिलाने की कोशिश में जुटे वित्त मंत्री पी चिदंबरम की कोशिशों को एक और झटका लग सकता है। थोक मूल्य आधारित महंगाई दर के तेवर को देखते हुए इस बात की पूरी संभावना है कि 29 अक्टूबर को रिजर्व बैंक एक बार फिर ब्याज दरों को बढ़ाने के कदम उठाएगा। इससे हाल के दिनों में होम, ऑटो लोन की दरों में जो कमी हुई है उनमें फिर से वृद्धि का नया दौर शुरू हो सकता है। जाहिर है जनता को देर सबेर महंगाई का एक और डोज मिलेगा।

जानकारों का कहना है कि वित्त मंत्री पी चिदंबरम की ख्वाहिश है कि चुनावों से पहले कर्ज की ब्याज दरों में आधा से एक फीसद तक की कमी हो। वहीं, आरबीआइ गवर्नर रघुराम राजन ने पिछले महीने मौद्रिक नीति की मध्य तिमाही समीक्षा में ही यह स्पष्ट कर दिया था कि ब्याज दरों को लेकर वह कोई रियायत नहीं दिखाने वाले। महंगाई उनकी प्राथमिकता में है। यही कारण है कि सरकार की उम्मीदों को धता बताते हुए उन्होंने 20 सितंबर को रेपो रेट (ब्याज को तय करने वाली दर) में एक चौथाई फीसद की बढ़ोतरी कर दी थी। उसके बाद से महंगाई की स्थिति और बिगड़ी है। ऐसे में राजन एक बार फिर ब्याज दरों को बढ़ाने का एलान कर सकते हैं।

पिछले महीने जब आरबीआइ ने कर्ज सस्ता नहीं किया तो चिदंबरम ने खुद सरकारी बैंकों से बात की और उन्हें कर्ज सस्ता करने के लिए मनाया। कर्ज सस्ता करने वाले बैंकों को सरकार की तरफ से फंड देने का वादा किया गया। कई बैंकों ने कर्ज सस्ते तो किए हैं, लेकिन वित्त मंत्रालय इसमें और कटौती चाहता है। यह तभी संभव होगा जब आरबीआइ की तरफ से ब्याज दरों को घटाने का एलान किया जाए। उद्योग जगत भी आर्थिक सुस्ती से निकलने के लिए ब्याज दरों को घटाने की मांग कर रहा है।

बहरहाल, चिदंबरम की यह मंशा पूरी होते नहीं दिख रही। अक्टूबर में प्याज, दूध, मांस, मछली व कुछ अन्य खाद्य उत्पादों की कीमतों में वृद्धि की वजह से थोक मूल्य आधारित महंगाई दर में और वृद्धि होने के आसार हैं। शेयर ब्रोकिंग फर्म एजेंल ब्रोकिंग, क्रेडिट रेटिंग एजेंसी क्रिसिल और प्रसिद्ध उद्योग चैंबर एसोचैम ने आशंका जताई है कि ब्याज दरों में 0.25 फीसद की वृद्धि और होगी।

Source- News in Hindi

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