लखनऊ। सोलह मांगों को लेकर चल रही राज्य कर्मचारियों की हड़ताल का असर होते देख अब राजनीतिक दल भी उनके समर्थन में हैं। सरकार की कर्मचारियों को बांटने की कोशिशें उल्टी पड़ी हैं, जबकि राजनीतिक दलों के समर्थन से कर्मचारी हड़ताल का सियासी रंग अब चटख होने लगा है। भाजपा, कांग्रेस और रालोद के समर्थन ने कर्मचारियों का हौसला बढ़ा दिया है और अब कर्मचारी संगठनों ने हड़ताल का हफ्ते भर का कार्यक्रम भी तय कर दिया है। उधर सोमवार से यह हड़ताल अस्पतालों पर अपना व्यापक असर करेगी, जिससे मरीजों और सरकार की मुश्किलें बढ़नी तय है।
------------
राजनीतिक दलों का समर्थन
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेयी, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. निर्मल खत्री व रालोद के प्रदेश अध्यक्ष मुन्ना सिंह चौहान समेत कई दलों ने कर्मचारियों के पक्ष में खड़े होकर सरकार की नीतियों की आलोचना की है। इन दलों ने भी कर्मचारियों की मांग पूरी करने को सरकार पर दबाव बनाया है।
-----------
बढ़ेगा गतिरोध
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद और राज्य कर्मचारी महासंघ के साझा संगठन राज्य कर्मचारी अधिकार मंच के अध्यक्ष मंडल हरि किशोर तिवारी व अजय सिंह ने कर्मचारी संगठनों के साथ बैठक के बाद कहा कि वार्ता के लिए अभी तक जो भी लोग आए, वह सक्षम लोग नहीं थे। जब तक फैसला लेने वाले सक्षम लोग वार्ता नहीं करेंगे, तब तक कोई समाधान नहीं निकल सकता।
-------------
स्वास्थ्य सेवाएं होंगी ठप
स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन और कई विभागों के प्रमुख सचिवों की पहल के बावजूद कर्मचारियों की जिद नहीं टूटी। मुहर्रम के अवकाश की वजह से कल सरकारी कार्यालय बंद थे, लेकिन कर्मचारियों ने हड़ताल को प्रभावी बनाने की रणनीति तैयार की है। राज्य कर्मचारी अधिकार मंच ने 18 नवंबर से विभिन्न विभागों के मुख्यालयों पर हफ्ते भर प्रदर्शन के साथ ही स्वास्थ्य सेवा ठप करने का फैसला किया है। 18 नवंबर से आप्टोमेटिक्स, 19 को मरीजों का पर्चा बनाने वाला समूह, स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी और 20 नवंबर को इसीजी, टेक्नीशियन, फिजियोथेरेपिस्ट, लैब टेक्नीशियन की आपात सेवा के कर्मी हड़ताल पर चले जायेंगे। 20 नवंबर को नर्सेज एक शिफ्ट में ही काम करेंगी। 24 नवंबर को सरकार के महाअभियान पल्स पोलियों में भी राज्य कर्मचारी शामिल नहीं होंगे।
Source- News in Hindi
No comments:
Post a Comment